गीतामृत- 24/02/2016
- डॉ. प्रणव पंड्या जी(कुलाधिपति,दे.सं.वि.वि.)
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विषय- दूसरे अध्याय का 50वां श्लोक।
अपने कर्मों को कुशलतापूर्वक करना एक प्रकार से पूरी गीता का Essence (मूल) है
गीत -
आप हैं गुरुरुप भगवन आप ही दिनमान है....।
यह गीत गुरु को समर्पित है। योगेश्वर श्रीकृष्ण हमारे गुरुरुप हैं।
Dev sanskriti vishwavidyalaya
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05/06/2015
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15/05/2012
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स्वभाव तथा भावना का परिष्कार
परिवार की आत्मीयता की भावना जब बढ़ती है तो मनुष्य अपनों के लिए बहुत कुछ सोचता और करता है । हमारा मन इन दिनों अपने आत्मीयजनों को ऐसे बनाने के लिए मचल रहा है कि इस निर्माण को देखकर देखने वाले आश्चर्यचकित रह जायें और यह अनुभव करें कि युग-निर्माण योजना कोई शेखचिल्ली की कल्पना नहीं, वरन् एक अत्यंत सरल और पूर्ण व्यावहारिक पद्धति है जिसे अपनाया और व्यापक बनाया जा सकना न तो कठिन है और न असंभव ।
समझा यह जाता है कि लोगों का स्वभाव जन्म से ही बना आता है, उसे बदला और बनाया नहीं जाता । इस धारणा को भ्रान्त सिद्ध करने का हमारा विचार है । हम अपनों को बदलना चाहते हैं । अपनी प्रयोगशाला में हम बबूलों को चन्दन बनाने की तैयारी कर रहे हैं । विज्ञान के द्वारा भौतिक जगत में इतने आश्चर्यजनक परिवर्तन हो रहे हैं तो ज्ञान के द्वारा मनुष्य की अन्त:स्थिति में भी आशाजनक परिवर्तन की आशा की जा सकती है ।
-पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
युग निर्माण योजना - दर्शन, स्वरूप व कार्यक्रम-६६ (३.४६)
Refinement of human nature and feelings
A feeling of togetherness and a sense of being close and connected to each other (as if belonging to the same family) will make individuals think about and help each other in every possible way. These days, my mind (is in a similar mood and) is passionately yearning to shape the character of all my spiritual kith and kin in such a glorious way that anyone who happens to see that character makeover will really get amazed and also get convinced that the Yug Nirman Yojana (i.e. Gayatri Pariwar’s mega-plan of creating a new era of bright future for all) is not a flight of fancy but a very simple and totally workable method which is neither difficult nor impossible to adopt and apply far and wide.
There is a widespread popular belief that the nature of every individual is firmly established right from birth and cannot be changed or remodeled afterwards. I wish to prove this wrong. I wish to transform the nature of my kith and kin. I’m about to start that process of extraordinary transformation in my spiritual laboratory. Physical science is bringing about so many amazing transformations in the material world. Knowledge too can definitely be hoped to bring about promising transformation in man’s inner world, i.e. his nature!
the fragrance of flowers of noble virtues spreads in all directions
सुधा बीज बोने से पहिले, कालकूट पीना होगा |
पहिन मौत का मुकुट, विश्वहित, मानव को जीना होगा ||
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य (1st Akhand Jyoti issue, 1939-40)
.. उत्कृष्ट लक्ष्य के लिए साध्य और साधना की एक रूपता पर ही सिद्दी का भवन खड़ा होता है भगवन का नित्य स्मरण करे || अपने दोष , दुर्गुणों से नित्य संघर्ष करे और उन्हें हटावे || सद्गुणों और योग्यतावो को बदने के लिए नित्य पुरुशार्ट करे || निजी पारिवारिक एवं सामाजिक उत्तदयित्वों को पूरी पूरी ईमानदारी और तत्परतापूर्वक निबाहे || हमे इश्वर की उपासना और जीवन की साधना उत्कृष्ट भावनाओ के साथ करनी चाहिए || तभी जीवनोद्देश्य की प्राप्ति सम्भव हो सकेगी || वांग्मय २ पेज २.४४
ॐ
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(10.16) [ट] -> सभी को उस धारा से ` ` जुड़ने की जरूरत है
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Internet अगर आपके कंप्यूटर में है ` ` आपको उसके ` ` प्रसार केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं
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आप जहाँ बैठेंगे ` ` वहीँ से जुड़ जायेगा
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ऐसे ही जब ` ` युग निर्माण योजना को ` ` समझ लेंगे ` ` तो
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जो जहाँ है उसे ` ` अमुख संगठन छोड़ के अमुख में आने की ` ` जरूरत नहीं लेकिन
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वहीँ पर उस धारा को ` ` बड़ी समर्थता से करने की जरूरत है ` ` इसी के लिए प्रयास करना है
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{ क्रांतिधर्मी-स्वाध्याय } =!!= { परिवर्तन के महान क्षण }
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ॐ
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(10.16) [ठ] -> जो युग-निर्माण-योजना से ` ` जुड़ें है
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उनको युगऋषि ने ` `ये जिम्मेदारी दी है कि ` ` हमने तुम्हे बता दिया ` ` अब तुम इसको
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सभी तक पहुँचाओ ` ` ये मत कहो कि ` ` केवल हमें श्रेय लेना है
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जो इसको करेगा ` ` उसे श्रेय मिल जायेगा
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ये केवल हमारे माध्यम से शक्ति नहीं मिलेगी ` ` जो जुड़ेगा उसे ` ` सीधे प्रवाह मिल जायेगा
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क्योंकि युग-निर्माण का काम है ` ` युग में तो सभी आते हैं ` ` इसलिये
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हर संगठन को ` ` हर प्रतिभा को ` ` कहीं न कहीं ` ` इसमें सक्रिय होना पड़ेगा
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{ क्रांतिधर्मी-स्वाध्याय } =!!= { परिवर्तन के महान क्षण }
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वही सबसे तेज चलता है, जो अकेला चलता है।
प्रत्येक अच्छा कार्य पहले असम्भव नजर आता है।
ऊद्यम ही सफलता की कुंजी है।
एकाग्रता से ही विजय मिलती है।
कीर्ति वीरोचित कार्यो की सुगन्ध है।
भाग्य साहसी का साथ देता है।
सफलता अत्यधिक परिश्रम चाहती है।
विवेक बहादुरी का उत्तम अंश है।
कार्य उद्यम से सिद्ध होते है, मनोरथो से नही।
संकल्प ही मनुष्य का बल है।
प्रचंड वायु मे भी पहाड विचलित नही होते।
कर्म करने मे ही अधिकार है, फल मे नही।
मेहनत, हिम्मत और लगन से कल्पना साकार होती है।
अपने शक्तियो पर भरोसा करने वाला कभी असफल नही होता।
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