26/12/2025
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26/12/2025
क्या देवता, ईश्वर, भगवान सब एक है ?
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देवता ईश्वर और भगवान
अखिल ब्रह्माण्ड के रचयिता परमात्मा के लिए मुख्यत: तीन शब्दों का प्रचलन आम जनता में प्रचुर मात्रा में दिखाई देता है । यह तीन शब्द हैं ईश्वर, देवता और भगवान । धर्मभीरु, भोली व सत्यशास्त्रों के प्रति अबोध जनमानस में इन तीनों शब्दों को प्रायः समानार्थक ही माना जाता है !
जिस कर्मकांडी ब्राह्मण वर्ग से सामान्य जन सही विवेचना करते हैं, उनमें ही इन तीन शब्दों के विषय में घोर अज्ञान पाया जाता है, वे तीनों को एक ही मानते हें ! !
इन तीनों शब्दों में से देवता शब्द के विषय में सबसे अधिक भ्रम है जो सारे देश में फैला हुआ है ! इस शब्द के, हमारे पूर्वज ऋषियों के द्वारा किये गए वास्तविक अर्थ को हम समझ लें तो इस देश में व्याप्त एक बहुत बड़े भ्रम का निराकरण हो सकेगा व सत्य देवताओं की पूजा कर हम अपने कल्याण के साथ ही विश्व का भी कल्याण कर सकेंगे !
आइये हम निम्न पंक्तियों मे प्रथम देवता शब्द पर विचार करें...
देवता
शास्त्रकारोंने देवता दो प्रकार के बताए हे:
१)जड, २)चेतन ।
पहले हम चेतन देवता पर संक्षेप में विचार करें ।
देव परमात्मा को भी कहा है, क्योंकि उसने ही पावन वेद वाणी का दान, एवम् सूर्यादि देवताओं की रचना कर जीवात्मा का परम उपकार किया है । अतः वह देवों का देव 'महादेव' है ।
चेतन देवता
चेतन देवता- मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः, आचार्य देवो भवः, अतिथि देवोभवः...
-तैंत्तिरीयोपनिषद्
माता, पिता, साक्षात देवता हैं । जिस गृह में माता-पिता और वृद्ध अपने पुत्र व पुत्रवधुओं से, उनकी सेवा से प्रसन्न रहते हैं वहां सौभाग्य की वृद्धि होती है ।
ऐसे घर में प्रतिदिन संध्या एवं हवन भी होता हो तो वह घर मंदिर से कम नहीं, इसी को स्वधा कहते हैं ।
सर्व तीर्थमयी माता सर्व देवमयः पिता |
मातरं पितरं तस्मात् सर्वलयेंन पूजयेत ||
अर्थ- माता सर्वतीर्थमयी है और पिता सर्व देवताओं का स्वरुप है, इसलिए सब प्रकार से माता पिता की सेवा सत्कार करना चाहिए ।
यज्ञोपवीत के तीन तार होते हैं उनमें एक तार संतान को पितृ ऋण का स्मरण रखने और उसको उतारने हेतु संकल्पबद्ध होने की याद दिलाता है ।
माता पिता के उपकारों का वर्णन विश्व का कोई पुत्र पुत्री वाणी के द्वारा नहीं कर सकता ।
[00:03, 6/25/2014] भारत वरयानी...: महाभारत में यक्ष और युधिष्ठिर का बड़ा ही प्रेरक संवाद है । एक प्रश्न में यक्ष ने पूछा था,
प्रश्न- "किं स्विद गुरुतरं भूमेह् ?"
धर्मराज ने उत्तर दिया- "माता गुरुतरा भूमेह् ।
माता का गौरव पृथ्वी से अधिक है । माता के उपकारों का भार इतना अधिक होता है कि पृथ्वी का वजन भी न्यून प्रतीत होता है ।"
यक्ष ने पुनः अगला प्रश्न पूछा- "किं स्विदुच्चतरम च खात ?"
धर्मराज युधिष्ठिर ने उत्तर दिया "खात पितोच्चतरस्तथा"
प्रश्न- "आकाश से भी ऊंचा क्या है ?"
उत्तर- "पिता आकाश से भी ऊंचा होता है ।
माता पिता अपने संतानों के लिए चंदन की तरह अपने शरीर को जीर्ण कर देते हैं, और उनका जीवन सुखमय बनाने हेतु पूरा जीवन लगा देते हैं ।"
आचार्य आध्यात्मिक व भौतिक विद्याओंका ज्ञान-दान करनेवाले विद्वान व गुरु भी देवता हैं । शतपथ ब्रह्मण में आया है- 'विद्वांसो हि देवा' ।
राष्ट्र के तीन शत्रु कहे गए हैं-
१)अज्ञान,
२)अभाव,
३)अन्याय ।
इनमें अज्ञान ही मूलतः दो अभाव और अन्याय का जनक है । आज समाज की व देश की अनेक समस्याएं आध्यात्मिक सत्य ज्ञान के अभाव के कारण ही है ।
अतिथि
अतिथि भी चेतन देवता है । जो विद्वान धार्मिक, सत्योपदेशक, मानव मात्र के कल्याणार्थ भ्रमण करते हुए अचानक गृहस्थ के दरवाजे पर उपस्थित हो जाते हैं । उन्हें 'अतिथि' कहते हैं । ऐसे सन्यासी, उपदेशक, महात्मा की सेवा शुश्रुषा कर अन्नादि से तृप्त करना अतिथि यज्ञ कहाता है । अथर्ववेद के कां. १५ सू. १०-१४, ९ के ६ सूक्त में अतिथि यज्ञ की महिमा का उत्तम वर्णन है ।
स्वर्गलोकं गमयन्ति यदतिथयः । अथर्व सूक्ति ९/६/२३
अर्थ- अतिथि मनुष्य को स्वर्गलोक में ले जाते हैं ।
[00:05, 6/25/2014] भारत वरयानी...: जड़ देवता
जड़ देवता- वेद मन्त्रों का विषय भी देवता कहाता है । उसपर विचार नहीं होगा, अतः अन्य देवताओं पर विस्तार से मनन करें जो इस विषय का मुख्य प्रयोजन है ।
वर्तमान समय में भारत में दो प्रकार के देवतओं का पूजन प्रचलित है,
१)मनुष्य कृत,
२) ईश्वर कृत ।
मनुष्य कृत देवता- जिन देवताओं को बनाने में मनुष्य का हाथ किसी न किसी रूप में लगा हो वे सभी देवता मनुष्य के बनाए हुए माने जाने चाहिए ।
ईश्वर कृत देवता- इन देवताओं की रचना ईश्वर ने संसार के प्रारंभ में सृष्टि की उत्पत्ति के समय की थी, उनसे सारे दृश्य-अदृश्य, जड़-चेतन जगत का कार्य संचालन व पालन हो रहा है । इन देवताओं में जोजो गुण प्रभु ने निश्चित किये हैं उनका धारण परमात्मा इस ब्रह्माण्ड में सर्वत्र ओत-प्रोत, व्यापक होकर स्वयं कर रहा है, अतः यह सब देव ईश्वरीय नियमानुसार सृष्टि के आदि से प्रलय पर्यंत विश्व के कल्याणार्थ अपने गुणों का प्रकाश करते हैं । जीव के निवास इस मानव शरीर एवं सूक्ष्म जीव-जन्तुओं से लेकर हाथी पर्यंत के शरीर के व्यापार भी इश्वर की कर्मफल व्यवस्था के अनुसार यह जड़ देवता ही ईश्वर आज्ञा से करते हैं ।
[00:07, 6/25/2014] भारत वरयानी...: देवता पहचानने की कसौटी-
वर्तमान समय में उपलब्ध निरुक्त में महर्षि यास्क ने लिखा है- देवो दानाद्वा, दीपनाद्वा, द्योतनाद्वा, द्युस्थानो भवतीतिवा |
निरुक्त अ. ७/खंड १५ एवं ऋग्वेदादिभाष्य भूमिका
सच्चे देवता कितने हैं ?
शतपथ ब्राह्मण कार याज्ञवल्क्य ऋषी ने लिखा है-
त्र्यरिअन्शत्वेव देवा इति | शतपथ कांड १४/अ. ६ गया
ये देवता तैंतीस हैं प्रायः जन मानस में देवता कितने हैं ? इस पर चर्चा के समय तैंतीस कोटी देवता हैं ऐसीबात प्रचलित हैं । जिससे ऐसा प्रतीत होता हैं कि देवता तैंतीस करोड हैं, किंतु कोटी शब्द के दो अर्थ स्पष्ठ हैं-
१)करोड,
२)प्रकार, श्रेणी ।
वस्तुतः देवता तैंतीस प्रकार के हैं । व्यवहार में ये ही देवता माने गये हैं । लेखक का नम्र निवेदन है कि पुर्वाग्रह से मुक्त होकार अगर सर्वहितकारी प्राचीन महान वैज्ञानिकों के विचारो पर मनन कर सत्य का हृदयंगम करें तो संसार का कल्याण हो जाय ।
अष्टौ वसवः, एकादश रुद्राः, द्वादशादित्यास्तएक त्रिंश द्विद्र श्चैव
प्रजापति श्च भय रिन्न शाविति | शतपथ ब्रा.,ऋ.भा. भू.
ईश्वर रचित तैंतीस जड देवता हैं- आठ वसु, ग्यारह रुद्र, बारह आदित्य, एक इंद्र एवं एक प्रजापति (यज्ञ) । कुल तेंतीस प्रकार के देवता हैं ।
इन तैंतीस देवताओं का वेद में पुनः वर्णन देखें-
यस्य त्रय रिअंश द्देवा ओ सर्वे समाहिताः |
स्क म्भं तं ब्रूहि कतेमः स्वि देवः सः || अथर्व वेद कां. १० सु. ७ मंत्र १३.
अर्थ- सब तैंतीस देव जिसके शरीर में स्थिर हुये हैं उस सर्वधर के विषय में बतावो कि वह कौन हैं ?
[00:09, 6/25/2014] भारत वरयानी...: ईश्वर
अब ईश्वर विषय पर कुछ चिंतन करेंगे । 'ईश्वर ' पर सब कुछ अर्थात पूर्ण रूप से लिखना अल्पज्ञ और अल्प शक्तिमान जीवात्मा की शक्ति से परे है ।
एक संस्कृत के कवि ने लिखा है- असित गिरी समं स्यात कज्जलं सिन्धु पात्रे |
सुरतरुवर शाखा लेखनी पत्र मूर्वी |
लिखति यदि गृहीत्वा शारदा सर्वकालं
तदपि तव गुणानामीश पारं न याति ||
अर्थ- यदि समुद्र की दवात बने,कृष्ण पर्वत की स्याही बना कर उस दावत मै डाली जाय, कल्प तरु की शाखा की लेखनी बने, समस्त पृथ्वी कागज के रूप में प्रयुक्त हो और साक्षात् सरस्वती अनंत काल तक लिखती चली जाय तब भी हे ईश्वर ! तुम्हारे गुणों का पर नहीं पाया जा सकता । फिर भी विषय प्रवाह बनाये रखने हेतु श्रेष्ठ व उत्तम साहित्य के रहते भी कुछ चिंतन प्रस्तुत करते है ।
वेद का प्रत्येक मंत्र ईश्वर का वर्णन कर रहा है । वेद का मुख्य विषय,'ईश्वर' ही है । मनुष्य जाति जब से वेद से अलग हुई है तब से द्रश्य को मानने और अद्रश्य को न मानने की आदी हो गयी है ।
ईश्वर सच्चिदानंद स्वरुप, निराकार, सर्व शक्तिमान, न्यायकारी, दयालू, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर सर्व व्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टि कर्ता है । उसी की उपासना करनी योग्य है ।
किन्तु स्वाध्याय, सत्संग और मनन के अभाव में किसी साधारण मनुष्य द्वारा छल कपट का सहारा लेकर दिखाए गए चमत्कारों से आज बड़े-बड़े बुद्धिजीवी भी धोखा खा जातें हैं । यह देख आश्चर्य भी होता है तो तरस भी आता है, क्योंकि वे ईश्वरों को आँखें खोल कर देखना नहीं चाहते ।
संसार में ईश्वर रचित हर वस्तु परमात्मा के अस्तित्व की साक्षी दे रही है । परन्तु भौतिक आँखों से वह कैसे दिखाई देगी ।
एक पवित्र ऋचा में कैसे सुन्दर भाव हैं-
अयम स्मि जरितः पश्य मेह विश्वा जतान्य भ्य स्मि मन्हा |
ऋतस्य माँ प्रदिशो वर्ध यन्त्या दर्दिरो भुवना दर्दरीभि ||
ऋग्वेद ८/१००/४
[00:11, 6/25/2014] भारत वरयानी...: ईश्वर कहता है-
जस्तिः - हे स्तुति करने वाले भक्त क्यों संदेह करता है । मैं तो यह रहा, तेरे ही पास ।
पश्य मा इह- मुझे तू अपने अति निकट ही देख ले ।
प्रभु दर्शन हेतु ज्ञान-चक्षु की आवश्यकता होती है ।
किसी वस्तु के अस्तित्व में होने पर भी उसके दिखाई न देने के आठ वेदोक्त कारन विद्वानों ने बताये हें ।
१)किसी वस्तु का अति दूर होना, जैसे आकाश में अति दूर उडाता उपग्रह या रोकेट ।
२)अति समीप होना, यथा, आँखों में काजल अपने आपको दिखाई नहीं देता ।
३)आवरण युक्त होना, जैसे, भूमि के अन्दर जल स्रोत, खनिज पदार्थ ।
४)इन्द्रियाँ दुर्बल होना (द्रष्टि शक्ति अति न्यून हो तो वस्तु दिखाई नहीं देती) ।
५)मन का एकाग्र न होना, मन और आंख का संयोग न होना ।
६)अपने से तीव्र वस्तु से अभिभूत होना, अति तीव्र प्रकाश या अति अन्धकार से प्रभावित होना ।
७)समान आकर की वस्तुएं मिल जाना, जैसे वायु में, दूध में जल मिला दें तो जल अद्रश्य हो जायेगा ।
८)अति सूक्ष्म होना ।
उपरोक्त आठ बिन्दुओं पर गहराइ से चिंतन करने पर यह बात स्पष्ट हो जाती है कि संसार में अनेक पदार्थ ऐसे हें जिनका अस्तित्व है किन्तु नेत्रों से हम उन्हें देख नहीं सकते । क्या परिवार भूख या प्यास लगने पर माता या पत्नी के समक्ष भूख, प्यास को बाहर निकालकर दिखा सकते हैं ? इसी प्रकार मरीज अपने दर्द को डॉक्टर या वैद्य को नहीं दिखा सकता ।
[00:13, 6/25/2014] भारत वरयानी...: आइये देखें वह इश्वर कैसा है-
ईशा वास्यमि दं सर्वं यत्किंच जगत्यां जगत | हे मनुष्यों ! ये सब चराचर, स्थावर-जंगम, द्रश्य-अद्रश्य पदार्थ ब्रह्माण्ड में है, वह सब इश्वर से ओत-प्रोत है ।
अणो रणी यान्महतो महीयानू- कठोपनिषद बली-२
वह परमात्मा सूक्ष्म से सूक्ष्म और महँ से महँ है ।
स हि सर्व वित् सर्व कर्ता- संख्य दर्शन ३/५६
वह परात्मा सर्वान्तार्यामी और सब जगत का कर्ता है ।
तदेजति तन्ने जति तददूरिके तद्वन्ति के |
तदन्त रस्य सर्व स्य तदू सर्व स्यास्य बाह्यतः || यजुर्वेद अ. ४०
वह परात्मा सरे संसार को गति देता है किन्तु स्वयं गति शून्य है, अचल है । वह दूर भी है और समीप भी है । वही सारे संसार में अणु-परमाणु के अन्दर भी है और बाहर भी है ।
महान्तं विभु मात्मा नमू मत्वा धीरो न शोचति || कठोपनिषद/वल्ली-२
वह इश्वर सब शरीरों में बिना शारीर के मौजूद है और चलायमान चीजों में स्थिर है । ऐसे महान सर्व व्यापक परमात्मा को जानकर धीर जन शोक रहित हो जाते है ।
परमात्मा के इसी स्वरुप का वर्णन श्री गोस्वामी तुलसीदास ने भी निम्न शब्दों में किया है-
बिनु पग चलहिं, सुने बिनु काना |
बिन कर कर्म करे विधि नाना ||
वाणी उस परमब्रह्म का स्वरुप वर्णन करने में असमर्थ है । तभी उपनिषद्कार ऋषि नेति-नेति कह कर अपनी असमर्थता प्रकट करते हैं ।
ईश्वर अणु से भी सूक्ष्म और महान से भी महान है । इसीलिए वह नित्य है, अमर है, अजर है, अभय है, और निर्अवयव है, अकाय है ।
भगवान अब हम भगवान विषय पर कुछ विचार करेंगे ।
वर्त्तमान स्थिति में भारत के हर प्रान्त में अनेक भगवान पैदा हो चुके हैं । जिधर देखिये उधर भगवान ही भगवान नज़र आते हैं । पुराणों में इस कलयुग की २८ वीं
चतुर्यगी में भगवान (ईश्वर) के दशावतार की चर्चा सुनते आये हैं ।
यथा हम धन वाले को धनवान, विद्या वाले को विद्यावान कहते हैं उसी प्रकार भग वाले को भगवान कहा जाता है ।
प्रथम भग शब्द पर विचार करें !
भग संस्कृत का शब्द है-
एश्वर्यस्य समग्रस्य धर्मस्य यश स श्रियः |
ज्ञान वैराग्य यो श्चैव श ण णो भग इतिरणा ||
अर्थात- सम्पूर्ण एश्वर्य, धर्म, यश,श्री, ज्ञान और वैराग्य इन छः का नाम भग है ।
इन सब लक्षणों से भी अनंत गुण जिसमें हैं वह ईश्वर (परम भगवान) है, किन्तु जिन महा मानवों में भग के उपरोक्त गुण पाए जाते हैं, या वे संसार भर के लिए इन गुणों के चरम उत्कर्ष को अपने जीवन में धारण करते हुए आदर्श प्रस्तुत करते हैं उन्हें भी हम भगवान कह के संबोधित करते हैं । उपरोक्त गुणों से युक्त हो कर मानव जाति को अज्ञान, अत्याचार, भय, शोषण से मुक्ति दिलाने वालों को भी भगवान माना गया है । जैसे भगवान राम, भगवान कृष्ण ।
इलेक्ट्रॉन की खोज :- जे०जे०थॉमसन
प्रोटॉन की खोज :- गोल्डस्टीन
न्यूट्रॉन की खोज :- जेम्स चैडविक
नाभिक की खोज :- रदरफोर्ड
डायनेमो :- माइकेल फैराडे
परमाणु सिद्धांत :- जॉन डाल्टन
रेडियो सक्रियता :- हेनरी बेक्वेरेल
रेडियम की खोज :- मैडम क्यूरी
डायनामाइट :- अल्फ्रेड नोबेल
PH स्केल :- एस०पी०सोरेन्सन
हाइड्रोजन :- हैनरी केवेन्डिश
नाइट्रोजन :- रदरफोर्ड
ऑक्सीजन :- शीले और प्रीस्टले
अक्रिय गैस,आर्गन :- रैमजे और रैले
थोरियम :- बर्जीलियस
टेलीविजन :- जे०एल०बेयर्ड
बैरोमीटर :- टोरिसेली
रेल इंजन :- जॉर्ज स्टीफेंसन
ग्रामोफोन :- एडिसन
दूरबीन :- गैलेलियो
भाप इंजन :- जेम्स वाट
वैधुत चुम्बकीय प्रेरण :- फैराडे
एक्स किरण :- रोन्टेजन
लघुगणक :- जॉन नेपियर
*$$ मानव-शरीर $$*
छोटी आंत्र की लम्बाई
Ans : 6.25 मीटर
यकृत का भार (पुरूष)
Ans : 1.4-1.8 किग्रा.
यकृत का भार (महिला5 में)
Ans : 1.2-1.4 किग्रा.
सबसे बड़ी ग्रंथि
Ans : यकृत
सर्वाधिक पुर्नरूदभवन कि क्षमता
Ans : यकृत में
सबसे कम पुर्नरूदभवन कि क्षमता
Ans : मस्तिष्क में
शरीर का सबसे कठोर भाग
Ans : दाँत का इनेमल
सबसे बड़ी लार ग्रंथि
Ans : पैरोटिड ग्रंथि
शरीर का सामान्य तापमान
Ans : 98.4 फ(37 c)
शरीर में रूधिर की मात्रा
Ans : 5.5 लीटर
हीमोग्लोबिन की औसत मात्रा (पुरूष)
Ans : 13-16 g/dl
हीमोग्लोबिन की औसत मात्रा (महिला में)
Ans : 11.5-14 g/dl
WBCs की कुल मात्रा
Ans : 5000-10000/cu mm.
सबसे छोटी WBC
Ans : लिम्फ्रोसाइट
सबसे बड़ी WBC
Ans : मोनोसाइड़
RBCs का जीवन काल
Ans : 120 दिन
WBC का जीवन काल
Ans : 2-5 दिन
रूधिर का थक्का बनने का समय
Ans : 3-6 मिनिट
सर्वग्राही रूधिर वर्ग
Ans : AB
सर्वदाता रूधिर वर्ग
Ans : O
सामान्य रूधिर दाव
Ans : 120/80 Hg
सामान्य नब्ज गति जन्म के समय
Ans : 140 बार- मिनिट
सामान्य नब्ज गति 1 वर्ष की उम्र में
Ans : 120 बार- मिनिट
सामान्य नब्ज गति 10 वर्ष की उम्र मे
Ans : 90 बार- मिनिट
सामान्य नब्ज गति वयस्क
Ans : 70 बार- मिनिट
हृदय गति
Ans : 72 बार- मिनिट
सबसे बड़ी शिरा
Ans : इंफिरीयर वेनाकेवा
सबसे बडी धमनी
Ans : एब्सोमिनल एरोटा
वृक्क का भार
Ans : 150 ग्राम
मस्तिक का भार
Ans : 1220-1400 ग्राम
मेरूदण्ड की लम्बाई
Ans : 42-45 cm
क्रेनियल तंत्रिकाओं की संख्या
Ans : 12 जोडे
स्पाइनल तंत्रिकाओं की संख्या
Ans : 31 जोडे
सबसे लम्बी तंत्रिका
Ans : सिएटिक
सबसे पतली एवं छोटी तंत्रिका
Ans : ट्रोक्लियर
सबसे बडी तंत्रिका
Ans : ट्राइजिमिनल
सबसे बड़ी कोशिका
Ans : तंत्रिका कोशिका
सबसे बडी अंत: स्त्रावी ग्रंथि
Ans : थॉयराइड
आकस्मिक ग्रंथि
Ans : एड्रिनल
सबसे छोटी अंत: स्त्रावी ग्रंथि
Ans : पिट्यूटरी ग्रंथि
गर्भावस्था की अवधि
Ans : 266-270 दिन
अस्थियों की कुल संख्या
Ans : 206
सबसे छोटी अस्थि
Ans : स्टेपिज (म्ध्य कर्ण में )
सबसे लम्बी अस्थि
Ans : फीमर (जंघा में )
कसेरूकाओं की कुल संख्या
Ans : 33
मांसपेशियों की कुल संख्या
Ans : 639
सबसे लम्बी पेशी
Ans : सारटोरियस
बड़ी आंत्र की लम्बाई
Ans : 1.5 मीटर
टीईटी व् अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सभी प्रतियोगियों के लिए ......
भाषा-1 हिन्दी
# महत्वपूर्ण तथ्य
👉हिन्दी को 14 सितम्बर 1949 ई. में राष्टीय भाषा का दर्जा मिला और इस की याद में हिन्दी दिवस इसी दिन मनाया जाता है
👉उसी दिन अन्य 11 भाषा भी सविधान सभा में स्वीकार की गई थी I
👉हिन्दी की मूल भाषा संस्कृत को माना गया है I
👉हिन्दी देवनागरी लिपि में
लिखी जाती है I
👉हिन्दी का पहला उपन्यास "निवासदास"
"भाषा वह साधन है जिसके माध्यम से हम सोचते है और अपने भावों/विचारो को व्यक्त करते है"
👉वर्ण-विचार 👈
👉 किसी भाषा के व्याकरण ग्रन्थ में इन तीन तत्वों की विशेष एंव आवश्यक रूप से चर्चा/ विवेचना की जाती है I
(1) वर्ण
(2) शब्द
(3) वाक्य
हिन्दी में 52 वर्ण होते है जिन्हें दो भागो में बाटा गया है
स्वर और व्यंजन
👉स्वर- ऐसी ध्वनियाँ जिनका उच्चारण करने में अन्य किसी ध्वनि की सहायता की आवश्यकता नही होती, उन्हें स्वर कहते है I स्वर 11 होते है
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, ऋ
अं एक अनुस्वार है
अः एक विसर्ग है
👉स्वर को दो भागो में बाटा जा सकता है I
हस्व् एंव दीर्घ I
👉जिन स्वरो के उच्चारण में अपेक्षाकृत कम समय लगे, उन्हें हस्व स्वर एंव जिन स्वरो को बोलने में अधिक समय लगे उन्हें दीर्घ स्वर कहते है I इन्हे मात्रा द्वारा दर्शाया जाता है I ये दो स्वरो को मिला कर बनते है अतः इन्हें सयुक्त स्वर कहते है I
आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ दीर्घ स्वर है I
👉 व्यंजन- जो ध्वनियाँ स्वरो की सहायता से बोली जाती है, उन्हें व्यंजन कहते हे I जब हम क बोलते है तब उसमे क् + अ मिला होता है I इस प्रकार हर व्यंजन स्वर की सहायता से ही बोला जाता है I इन्हें पाँच वर्गो तथा स्पर्श, अन्तस्थ एंव ऊष्ण व्यजनो में बाँटा जा सकता है
स्पर्श :
क वर्ग__ क्, ख्, ग्, घ्, (ङ्)
च वर्ग__ च्, छ्, ज्, झ् (ञ)
ट वर्ग__ ट्, ठ, ड्, ढ़् (ण्)
त वर्ग__ त्, थ, द् , ध् (न्)
प वर्ग__ प्, फ्, ब्, भ् (म्)
अन्तस्थ__ य, र, ल, व,
उष्म__ श्, ष, स्, ह्
संयुक्ताक्षर__
क्ष___ क् + ष्
त्र___ त् + र्
ज्ञ___ ज् + ञ
और तीन नए अक्षर
श्र___ श् + र्
(जैसे श्रमिक में प्रयुक्त होता है)
ड़- जैसे सड़क में प्रयुक्त होता है
ढ़ -जैसे पढ़ाई में प्रयुक्त होता है
हिन्दी वर्णमाला में कुल 52 अक्षर जिनमे 11 स्वर, 1 अनुस्वार, 1 विसर्ग और 33 व्यंजन है तथा तीन संयुक्ताक्षर है व् तीन नए अक्षर हैं I
👉व्यंजनो का उच्चारण 👈
क वर्ग__ क्, ख्, ग्, घ्, (ङ्)
👆🏻
कण्ठ से उच्चारित वर्ण
च वर्ग__ च्, छ्, ज्, झ् (ञ)
👆🏻
तालु से उच्चारित वर्ण
ट वर्ग__ ट्, ठ, ड्, ढ़् (ण्)
👆🏻
मूर्द्धI से उच्चारित वर्ण
त वर्ग__ त्, थ, द् , ध् (न्)
👆🏻
दंत्य से उच्चारित वर्ण
प वर्ग__ प्, फ्, ब्, भ् (म्)
👆🏻
ओष्ठ से उच्चारित वर्ण
इन्हें आठ भागों में बाटा गया है 🥀
👉 1- स्पर्श __ क, ख, ग, घ, ट, ठ, ड, ढ, त, थ, द, ध, प, फ, ब, भ
👉2- स्पर्श संघर्षि- च, छ, ज, झ
👉3- संघर्षि- फ, श, ह, ज, ष
👉 4- अनुनासिक- ङ, ञ, ण, न, म
👉 5- पार्शिवक- ल
👉6- प्रकम्पित- र
👉 7- उत्िक्षप्त- ङ, ढ़
👉8- अर्द्धस्वर- य, व
👉 बाह्य प्रयत्न के आधार पर सम्पूर्ण व्यंजनो को दो भागों में विभाजित किया जाता है
☝अल्पप्राण
☝ महाप्राण
👉जिन वर्णों का उच्चारण करते समय मुख से निकलने वाले श्वास की मात्रा अल्प रहती है वह अल्पप्राण कहलाता है
👉 प्रत्येक वर्ण समूह का पहला, तीसरा,पाँचवा वर्ण "अल्पप्राण" होता है
👉 जिन वर्णों का उच्चारण करते समय मुख से निकलने वाले श्वास की मात्रा अधिक रहती है वह "महाप्राण" कहलाता है
👉प्रत्येक वर्ण समूह का दुसरा, चौथा, तथा सभी उष्ण वर्ण "महाप्राण" है
👉 स्वर तन्त्रियो के आधार पर👈
👉घोष/सघोष- नाद या गूंज, जिन वर्णों का उच्चारण करते समय गूंज (स्वर तंत्र में कंपन) होती है I
👉 सभी स्वर घोष होते है और इन की संख्या कुल 30 होती है
क वर्ग, च वर्ग, आदि वर्गो के अन्तिम तीन वर्ण* *ग्,घ्,ङ,ज्,झ्,ज्,ञ आदि तथा य्,र्,ल्,व्,ह् घोष वर्ण है
👉 अघोष- इन वर्णों के उच्चारण में प्राणवायु में कम्पन नही होती हे अतः कोई गुंज न होने से ये अघोष वर्ण होते है I
👉कुल संख्या- 13
सभी वर्गो के पहले और दूसरे वर्ण क्,ख्,च्,छ्,श,ष्,स् आदि सभी वर्ण अघोष है
👉 अनुनासिक- नाक का सहयोग रहता है जैसे- अँ, ऑ, ई, ऊँ आदि
👉 कुछ महत्व्पूर्ण बाते 👈
स्वराघात तथा बलाघात का सम्बन्ध शब्दों के उच्चारण के समय वर्ण पर पड़ता है I इसके द्वारा शब्दों को समझने की चेतना सामने आती है I शब्दों का उच्चारण करते हुए किसी वर्ण पर अधिक बल दिया जाता है, उसे "स्वराघात" कहते है I यह बल स्वर पर अधिक होने के कारण "स्वराघात" कहलाता है I "बलाघात" का प्रभाव वर्णों के बदले शब्दों पर पड़ता है I बलाघात विशेषण के समान अर्थ का निवारण तथा परिवर्तन में सहायता प्रदान करता है I
"अनुतान" उच्चारण के आरोह-अवरोह को "अनुतान" कहते है I यह आरोह-अवरोह शब्द तथा वाक्य का सही अर्थ प्रदान करता है।
प्रश्नोत्तर विधि से हिन्दी व्याकरण सीखो :-
Q: भाषा क्या है ? या भाषा किसे कहते हैं ?
A: भाषा भावनाओ और विचारो का आदानप्रदान( communicate)
करने का माध्यम ( medium) है।
Q: भाषा की सबसे छोटी इकाई क्या है ?
A: अक्षर या वर्ण।
Q: अक्षर या वर्ण किसे कहते हैं ?
A: भाषा की सबसे छोटी इकाई को अक्षर या वर्ण कहते हैं।
Q: मात्रा किसे कहते हैं ?
A: प्रत्येक व्यंजन के लिए एक विशेष चिन्ह (symbol) बना है जिसे मात्रा कहते हैं।
Q: शब्द किसे कहते हैं ?
A: अनेक प्रकार के स्वर , व्यंजन और मात्राओं के अर्थपूर्ण( meaningful)
समूह(group ) को शब्द कहते हैं। इसे अर्थपूर्ण ध्वनि समूह(group of sounds) भी कहते हैं।
Q: वाक्य किसे कहते हैं ?
A: शब्दों के अर्थपूर्ण समूह को वाक्य कहते हैं।
Q: व्याकरण किसे कहते हैं ?
A: भाषा को शुद्धरूप से बोलने लिखने और पढ़ने के नियमों को व्याकरण कहते हैं। या भाषा को एक प्रणाली( system) मैं बाँधने(tie)
वाली कड़ी( joint) को व्याकरण कहते हैं।
Q: मात्रा किसे कहते हैं ?
A: प्रत्येक व्यंजन के लिए एक विशेष चिन्ह (symbol) बना है जिसे मात्रा कहते हैं।
Q: हिंदी वर्णमाला किसे कहते हैं ?
A: हिंदी भाषा के वर्ण या अक्षरो का विशेष क्रम (special sequence)
वर्णमाला कहलाता है।
Q: वाक्य किसे कहते हैं ?
A: शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं।
भाषा
Q: भाषा शब्द किस भाषा से लिया गया है ? (origin of word
भाषा)
A: संस्कृत।
Q: संस्कृत के किस शब्द से भाषा शब्द लिया गया है ?
A: भाष।
Q: भारत की राष्ट्र भाषा क्या है ?
A: हिंदी।
अक्षर या वर्ण
Q: हिंदी वर्णमाला में कुल ( total)
कितने वर्ण हैं ?
A: ५२ / 52
Q: हिंदी वर्णमाला में कितने स्वर हैं
?
A: १३ / 13
वैसे मूलतः स्वर 11 ही हैं कहीं कहीं 13 का उल्लेख है पर
अं एक अनुस्वार है और
अः एक विसर्ग है
अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः ऋ
Q: हिंदी वर्णमाला में कितने व्यंजन हैं?
A: 33 / ३३ --
क ख ग घ ङ
च छ ज झ ञ
ट ठ ड ढ ण (ड़, ढ़)
त थ द ध न
प फ ब भ म
य र ल व
श ष स ह
Q: हिंदी वर्णमाला में कितने संयुक्त व्यंजन हैं ?
A: ३ / 3
Q: कौन से व्यंजन , संयुक्त व्यंजन कहलाते हैं।
A: जहाँ भी दो अथवा दो से अधिक व्यंजन मिल जाते हैं वे संयुक्त व्यंजन कहलाते हैं। ये दो-दो व्यंजनों से मिलकर
बने हैं। जैसे-
क्ष=क्+ष अक्षर ,
ज्ञ=ज्+ञ ज्ञान ,
त्र=त्+र
Q: हिंदी वर्णमाला में कितने अन्य स्वर हैं ?
A: 3 /३ - ॠ ऌ ॡ लेकिन इनका प्रयोग अधिकतर नहीं होता है।
Q-हिन्दी वर्णमाला में तीन नए वर्ण और जोड़ दिए गए हैं
Ans-ड़,ढ़ ,श्र
हिंदी लिपि
Q: हिंदी लिपि को क्या कहते हैं ?
A: हिंदी लिपि को देवनागरी लिपि कहते हैं।
Q: हिंदी लिपि को देवनागरी लिपि क्यों कहते हैं ?
A: भारत को देवों की भूमि कहा जाता है इसलिए हिंदी की लिपि को देवनागरी लिपि कहते हैं।
शब्द
Q: शब्द कितने प्रकार के होते हैं ?
A: शब्द 2 प्रकार के होते हैं।
Q: इनके प्रकार बताओ ?
A: विकारी (declinable) और अविकारी शब्द (indeclinable)।
Q: विकारी और अविकारी शब्द क्या हैं ?
A: जिन शब्दों का रूप बदल जाता है वो विकारी शब्द (declinable)
कहलाते हैं। जिनका रूप नहीं बदलता वो अविकारी शब्द (indeclinable)
कहलाते हैं।
Q: विकारी शब्द (declinable)
कौन से हैं ?
A: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण,
क्रिया आदि।
Q: अविकारी शब्द (indeclinable)कौन से हैं ?
A: क्रियाविशेषण (adverb),
सम्बन्धबोधक (preposition or post preposition ), समुच्चयबोधक (conjunction) व विस्मयादिबोधक (interjection)
Q: वाक्य कितने प्रकार के शब्दों से बनता है ?
A: वाक्य ऊपर लिखे सभी आठ
प्रकार के विकारी (declinable)
और अविकारी शब्दो(indeclinable)
से बनता है।
प्र.1- वेद किसे कहते है ?
उत्तर- ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है।
प्र.2- वेद-ज्ञान किसने दिया ?
उत्तर- ईश्वर ने दिया।
प्र.3- ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ?
उत्तर- ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया।
प्र.4- ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?
उत्तर- मनुष्य-मात्र के कल्याण के लिए।
प्र.5- वेद कितने है ?
उत्तर- चार प्रकार के ।
1-ऋग्वेद
2 - यजुर्वेद
3- सामवेद
4 - अथर्ववेद
प्र.6- वेदों के ब्राह्मण ।
वेद ब्राह्मण
1 - ऋग्वेद - ऐतरेय
2 - यजुर्वेद - शतपथ
3 - सामवेद - तांड्य
4 - अथर्ववेद - गोपथ
प्र.7- वेदों के उपवेद कितने है।
उत्तर - वेदों के चार उप वेद है ।
वेद उपवेद
1- ऋग्वेद - आयुर्वेद
2- यजुर्वेद - धनुर्वेद
3 -सामवेद - गंधर्ववेद
4- अथर्ववेद - अर्थवेद
प्र 8- वेदों के अंग हैं कितने होते है ।
उत्तर - वेदों के छः अंग होते है ।
1 - शिक्षा
2 - कल्प
3 - निरूक्त
4 - व्याकरण
5 - छंद
6 - ज्योतिष
प्र.9- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन किन ऋषियो को दिया ?
उत्तर- वेदों का ज्ञान चार ऋषियों को दिया ।
वेद ऋषि
1- ऋग्वेद - अग्नि
2 - यजुर्वेद - वायु
3 - सामवेद - आदित्य
4 - अथर्ववेद - अंगिरा
प्र.10- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ?
उत्तर- वेदों का ज्ञान ऋषियों को समाधि की अवस्था में दिया ।
प्र.11- वेदों में कैसे ज्ञान है ?
उत्तर- वेदों मै सब सत्य विद्याओं का ज्ञान-विज्ञान है ।
प्र.12- वेदो के विषय कौन-कौन से हैं ?
उत्तर- वेदों के चार विषय है।
ऋषि विषय
1- ऋग्वेद - ज्ञान
2- यजुर्वेद - कर्म
3- सामवेद - उपासना
4- अथर्ववेद - विज्ञान
प्र.13- किस वेद में क्या है।
ऋग्वेद में।
1- मंडल - 10
2 - अष्टक - 08
3 - सूक्त - 1028
4 - अनुवाक - 85
5 - ऋचाएं - 10589
यजुर्वेद में।
1- अध्याय - 40
2- मंत्र - 1975
सामवेद में।
1- आरचिक - 06
2 - अध्याय - 06
3- ऋचाएं - 1875
अथर्ववेद में।
1- कांड - 20
2- सूक्त - 731
3 - मंत्र - 5977
प्र.14- वेद पढ़ने का अधिकार किसको है ?
उत्तर- मनुष्य-मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है।
प्र.15- क्या वेदों में मूर्तिपूजा का विधान है ?
उत्तर- वेदों में मूर्ति पूजा का विधान बिलकुल भी नहीं।
प्र.16- क्या वेदों में अवतारवाद का प्रमाण है ?
उत्तर- वेदों मै अवतारवाद का प्रमाण नहीं है।
प्र.17- सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?
उत्तर- सबसे बड़ा वेद ऋग्वेद है।
प्र.18- वेदों की उत्पत्ति कब हुई ?
उत्तर- वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई । अर्थात 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 43 हजार वर्ष पूर्व ।
प्र.19- वेद-ज्ञान के सहायक दर्शन-शास्त्र ( उपअंग ) कितने हैं और उनके लेखकों का क्या नाम है ?
उत्तर-
1- न्याय दर्शन - गौतम मुनि।
2- वैशेषिक दर्शन - कणाद मुनि।
3- योगदर्शन - पतंजलि मुनि।
4- मीमांसा दर्शन - जैमिनी मुनि।
5- सांख्य दर्शन - कपिल मुनि।
6- वेदांत दर्शन - व्यास मुनि।
प्र.20- शास्त्रों के विषय क्या है ?
उत्तर- आत्मा, परमात्मा, प्रकृति, जगत की उत्पत्ति, मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक ज्ञान-विज्ञान आदि।
प्र.21- प्रामाणिक उपनिषदे कितनी है ?
उत्तर- प्रामाणिक उपनिषदे केवल ग्यारह है।
प्र.22- उपनिषदों के नाम बतावे ?
उत्तर-
1-ईश ( ईशावास्य ) 2- केन 3-कठ 4-प्रश्न 5-मुंडक 6-मांडू 7-ऐतरेय 8-तैत्तिरीय 9- छांदोग्य
10-वृहदारण्यक 11- श्वेताश्वतर ।
प्र.23- उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए है ?
उत्तर- उपनिषदों के विषय वेदों से लिए गए है !
प्र.24- चार वर्ण कोन कोन से होते हैं।
उत्तर-
1- ब्राह्मण
2- क्षत्रिय
3- वैश्य
4- शूद्र
प्र.25- चार युग कोन -कोन से होते है और कितने वर्षों के ।
उत्तर-
1- सतयुग - 17,28000 वर्षों का नाम ( सतयुग ) रखा है।
2- त्रेतायुग- 12,96000 वर्षों का नाम ( त्रेतायुग ) रखा है।
3- द्वापरयुग- 8,64000 वर्षों का नाम है।
4- कलयुग- 4,32000 वर्षों का नाम है।
कलयुग के 4,976 वर्षों का भोग हो चुका है अभी तक।
4,27024 वर्षों का भोग होना बाकी है।
प्र. पंच महायज्ञ कोन -कोन से होते है !
उत्तर-
1- ब्रह्मयज्ञ
2- देवयज्ञ
3- पितृयज्ञ
4- बलिवैश्वदेवयज्ञ
5- अतिथियज्ञ
25/02/2018
यदि किसानो ने खेती करना छोड़ दिया तो....
शहरों के उपनाम
_01. भारत का निवास स्थान - प्रयाग_
_02. पांच नदियों की भूमि -पंजाब_
_03. सात टापुओं का नगर- मुंबई_
_04. बुनकरों का शहर- पानीपत_
_05. अंतरिक्ष का शहर बेंगलुरू_
_06. डायमंड हार्बर -कोलकाता_
_07. इलेक्ट्रॉनिक नगर -बेंगलुरू_
_08. त्योहारों का नगर -मदुरै_
_09. स्वर्ण मंदिर का शहर -अमृतसर_
_10. महलों का शहर कोलकाता_
_11. नवाबों का शहर- लखनऊ_
_12. इस्पात नगरी -जमशेदपुर_
_13. पर्वतों की रानी -मसूरी_
_14. रैलियों का नगर -नई दिल्ली_
_15. भारत का प्रवेश द्वार मुंबई_
_16. पूर्व का वेनिस- कोच्चि_
_17. भारत का पिट्सबर्ग -जमशेदपुर_
_18. भारत का मैनचेस्टर- अहमदाबाद_
_19. मसालों का बगीचा -केरल_
_20. गुलाबी नगर- जयपुर_
_21. क्वीन ऑफ डेकन- पुणे_
_22. भारत का हॉलीवुड -मुंबई_
_23. झीलों का नगर -श्रीनगर_
_24. फलोद्यानों का स्वर्ग -सिक्किम_
_25. पहाड़ी की मल्लिका -नेतरहाट_
_26. भारत का डेट्राइट -पीथमपुर_
_27. पूर्व का पेरिस- जयपुर_
_28. सॉल्ट सिटी- गुजरात_
_29. सोया प्रदेश -मध्य प्रदेश_
_30. मलय का देश- कर्नाटक_
_31. दक्षिण भारत की गंगा- कावेरी_
_32. काली नदी- शारदा_
_33. ब्लू माउंटेन - नीलगिरी पहाड़ियां_
_34. एशिया के अंडों की टोकरी - आंध्र प्रदेश_
_35. राजस्थान का हृदय - अजमेर_
_36. सुरमा नगरी - बरेली_
_37. खुशबुओं का शहर -कन्नौज_
_38. काशी की बहन -गाजीपुर_
_39. लीची नगर - देहरादून_
_40. राजस्थान का शिमला -माउंट आबू_
_41. कर्नाटक का रत्न -मैसूर_
_42. अरब सागर की रानी -कोच्चि_
_43. भारत का स्विट्जरलैंड -कश्मीर_
_44. पूर्व का स्कॉटलैंड- मेघालय_
_45. उत्तर भारत का मैनचेस्टर - कानपुर_
_46. मंदिरों और घाटों का नगर - वाराणसी_
_47. धान का डलिया- छत्तीसगढ़_
_48. भारत का पेरिस -जयपुर_
_49. मेघों का घर -मेघालय_
_50. बगीचों का शहर- कपूरथला_
_51. पृथ्वी का स्वर्ग -श्रीनगर_
_52. पहाड़ों की नगरी- डुंगरपुर_
_53. भारत का उद्यान -बेंगलुरू_
_54. भारत का बोस्टन -अहमदाबाद_
_55. गोल्डन सिटी -अमृतसर_
_56. सूती वस्त्रों की राजधानी - मुंबई_
_57. पवित्र नदी -गंगा_
_58. बिहार का शोक -कोसी_
_59. वृद्ध गंगा- गोदावरी_
_60. फाउंटेन और माउंटेन शहर - उदयपुर_
_61. सिल्क सिटी -भागलपुर।_
भारत के उद्योगो
१. भारत में चीनी का रिसर्च सेंटर कहा पे स्थित है?
- कानपूर
२. भारत में कोनसा उद्योग सबसे बड़े पैमाने पर है?
- सूती वस्त्र उद्योग
३. सबसे बड़ा सहकारी उर्वरक कारखाना कोनसा है?
- हजीरा
४. भारत में कोनसे राज्य में अधिकांश हवाई अड्डे है?
- मध्यप्रदेश
५. भारत में पहेली स्टीमर खरीदने वाला गुजराती कौन था?
- नरोत्तम मोरारजी
६. भारत में इलेक्ट्रॉनिक उद्योग की राजधानी कोनसी है?
- बैंगलोर
७. भारतीय रेल के डिब्बे बनाने का कारखाना कहाँ पर स्थित है?
- पेरम्बूर(चेन्नई)
८. भारत का सबसे बड़ा जलविद्युत स्टेशन किस राज्य में स्थित है?
- तमिलनाडु
९. भारत का पहला इस्पात संयंत्र कहा पर स्थापित किया गया?
- जमशेदपुर
१०. गुजरात का कोनसा शहर झलाईगर उद्योग के लिए प्रशिद्ध है?
- संखेडा
११. भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक का नाम क्या है?
- स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया
१२. भारत में कोनसे क्षेत्र में सबसे अधिक तेल का उत्पादन होता है?
- बॉम्बे हाई
१३. भारत में अधिकांश अभ्रक(Mica) कोनसे राज्य में पाया जाता है?
- बिहार
१४. भारत के कोनसे राज्य में सबसे पहले कॉटन मिल शुरू की गई थी?
- महाराष्ट्र
१५. किसने भारत की पहेली आधुनिक डायस्टफ कंपनी की स्थापना की थी?
- कस्तूरभाई लालभाई
१६. भारत की राष्ट्रीय आय का कितना हिस्सा कृषि क्षेत्र में से प्राप्त होता है?
- 26%
१७. भारत की उच्च श्रेणी वाली मदर देरी गुजरात के कोनसे जिले में स्थित है?
- गांधीनगर
१८. भारत का सबसे बड़ा निजी नियोक्ता उपलब्ध कराने वाला उद्योग कोनसा है?
- कपड़ा उद्योग
१९. भारत में सबसे पहेले रासायनिक उर्वरक कारखाना कहा पर स्थापित किया गया?
- रानीपेट
२०. भारत में पहेले कार का उत्पादन करने की शुरुआत सौप्रथम कोनसी कंपनी ने की?
- हिंदुस्तान मोटर्स लिमेटेड
२१. भारत में सोडा एश का कुल उत्पादन में से गुजरात में कितने प्रतिशत उत्पादित होता है?
- 90%
२२. भारत में रासायनिक उर्वरक का कारखाना सौप्रथम कोनसे राज्य में स्थापित किया गया?
- तमिलनाडु
२३. भारत में दूध और डेयरी उत्पादों के लिए मांग को पूरा करनेवाली "अमूल डेयरी" गुजरात में कहाँ है?
- आणंद
२४. भारत का सबसे बड़ा बायोगैस संयंत्र गुजरात में सिद्धपुर निकट कहाँ पर स्थापित किया गया है?
- मेथाण
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