निधी गुप्ता - Social Activist, Highlighting Social Issues

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निधी गुप्ता - Social Activist, Highlighting Social Issues Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from निधी गुप्ता - Social Activist, Highlighting Social Issues, Tutor/Teacher, ग्राम: मुढ़ियाखेड़ा, माधोगंज, Hardoi.

भावी प्रत्याशी

जिला पंचायत सदस्य हेतु (माधोगंज तृतीय, हरदोई)

पुत्रवधू: श्री रामऔतार गुप्ता (सेवानिवृत्त शिक्षक)
पत्नी: उमा कांत गुप्ता (पिंटू) – सीनियर इंजीनियर (अमेरिका, यूके , Taiwanऔर सऊदी अरब जैसे देशों में कार्य अनुभव)
शैक्षणिक योग्यता:M.A., B.Ed.

18/09/2026
💸 डिजिटल सपना या महँगी हकीकत? 💸पहले कहा गया – “UPI करो, नकद छोड़ो, सब सेवाएँ मुफ्त हैं।”  अब वही UPI पर शुल्क! आज 0.4% व...
17/09/2026

💸 डिजिटल सपना या महँगी हकीकत? 💸

पहले कहा गया – “UPI करो, नकद छोड़ो, सब सेवाएँ मुफ्त हैं।”
अब वही UPI पर शुल्क! आज 0.4% विक्रेता से, कल 1% तक जनता की जेब से।

विक्रेता मजबूरन दाम बढ़ाएगा और हर वस्तु धीरे-धीरे महँगी होती जाएगी।

👉 असल में फायदा नकद में था, लेकिन नकद का रास्ता ही बंद कर दिया गया।
मुफ्त का झुनझुना दिखाकर जेब पर बोझ डालना बंद कीजिए। यह नीतियाँ आम आदमी की रोटी, कपड़ा और दवा तक महँगी कर देंगी। जनता को राहत चाहिए, बोझ नहीं।"

डिजिटल क्रांति का ऐसा मायाजाल बुना गया कि "कैशलेस बनो", "सब कुछ मुफ्त है" और "डिजिटल इंडिया अपनाओ" जैसे बड़े-बड़े नारों के शोर में हर आम नागरिक के हाथ में यूपीआई (UPI) थमा दिया गया। उस वक्त जनता को यह भरोसा दिलाया गया कि नकद लेन-देन खत्म होना ही देश और उपभोक्ता के हित में है। जब तक लोगों को डिजिटल भुगतान की आदत नहीं पड़ी, तब तक हर ट्रांजैक्शन बिल्कुल मुफ्त और सहज रखा गया। लेकिन जैसे ही देश ने अपनी जेब से हार्ड करेंसी का इस्तेमाल कम कर दिया और लोग पूरी तरह इस तंत्र पर निर्भर हो गए, वैसे ही असली खेल शुरू कर दिया गया।

अब चुपके से विक्रेताओं पर 0.4% का सर्विस चार्ज थोप दिया गया है। जब विक्रेता अपनी जेब से यह शुल्क भरेगा, तो वह अपनी लागत निकालने के लिए सामान और सेवाओं के दाम बढ़ाएगा ही। आज जो शुल्क 0.4% दिख रहा है, कल वही बढ़कर 1% और फिर 2% हो जाएगा, जिसका सीधा और अंतिम प्रहार उस सीधे-साधे उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा जो दिन-रात पसीना बहाकर अपने परिवार का पेट पालता है।

अगर आज भी हाथ में नकद (Hard Currency) का चलन होता, तो कम से कम एक आम नागरिक को बिना किसी छिपे हुए सर्विस चार्ज के अपनी मेहनत की कमाई खर्च करने की आज़ादी होती। लेकिन अफसोस कि नकद का विकल्प ही लगभग खत्म कर दिया गया। एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए पाई-पाई की कीमत होती है, पर सुविधा का लालच देकर पहले आदत बिगाड़ी गई, फिर नकद का रास्ता बंद किया गया और अब हर लेन-देन पर वसूली की जा रही है। डिजिटल इंडिया की इस आड़ में आखिर कब तक आम जनता और छोटे कारोबारियों की जेब पर यूं ही डाका डाला जाता रहेगा?

#डिजिटलभारतकीसच्चाई #जनताकीआवाज़ #महँगाईकाखेल

माननीय महोदय/महोदया,देश में पुरानी गलतियों को बार‑बार दोहराया जा रहा है। सरकार की नाकामी साफ दिखाई देती है—न कोई ठोस विज...
06/09/2026

माननीय महोदय/महोदया,

देश में पुरानी गलतियों को बार‑बार दोहराया जा रहा है। सरकार की नाकामी साफ दिखाई देती है—न कोई ठोस विज़न, न ही कोई एक्शन प्लान जनता की सुरक्षा को लेकर। आज दिल्ली में पाँच मंज़िला इमारत गिरने से तीन लोगों की मृत्यु हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का जीता‑जागता प्रमाण है।

नोएडा, दिल्ली‑एनसीआर और पूरे NCR क्षेत्र में हाई‑राइज़ इमारतों में सुरक्षा मानकों के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। बिल्डर पैसे देकर कागज़ी अप्रूवल ले लेते हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। किसी भी सोसाइटी में फायर प्रोटेक्शन सिस्टम कार्यरत नहीं है, केवल पैसे लेकर ऑडिट पास कर दिया जाता है। यह स्थिति नागरिकों की ज़िंदगी को मौत के मुहाने पर खड़ा कर रही है।

आज नोएडा और गुरुग्राम की ऊँची इमारतें मौत के साए में खड़ी हैं, क्योंकि निर्माण में सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। यदि सरकार ने कठोर कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में और भी भयावह हादसे होंगे और निर्दोष नागरिक अपनी जान गँवाते रहेंगे।

अतः आपसे निवेदन है कि इस गंभीर विषय पर तत्काल ध्यान दें। कठोर कानून बनाए जाएँ और उन्हें सख़्ती से लागू किया जाए। सुरक्षा पर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों और नागरिक सुरक्षित जीवन जी सकें।

जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं प्रकट होते हैं।"श्रीकृष्ण केवल देव नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। उन्होंने सि...
04/09/2026

जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं प्रकट होते हैं।"

श्रीकृष्ण केवल देव नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। उन्होंने सिखाया कि कठिन परिस्थितियों में भी मन की शांति और चेहरे की मुस्कान बनाए रखनी चाहिए।

इस जन्माष्टमी पर आइए हम केवल माखन-मिश्री का भोग ही न लगाएँ, बल्कि कान्हा के विचारों, उनके धैर्य और उनके निष्काम प्रेम को भी अपने जीवन में उतारें।

आप और आपके परिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌼✨

राधे-राधे! 🙏

रोटी हो या सत्ता, हमेशा पलटते रहना चाहिए।रोटी नहीं पलटने पर जल जाती है और सत्ता अहंकारी हो जाती है। इसलिए बदलाव बहुत ज़र...
03/09/2026

रोटी हो या सत्ता, हमेशा पलटते रहना चाहिए।
रोटी नहीं पलटने पर जल जाती है और सत्ता अहंकारी हो जाती है।
इसलिए बदलाव बहुत ज़रूरी है।
सुप्रभात🇮🇳🌹🌸🌺

02/09/2026

लोकतंत्र तभी जीवंत और स्वस्थ रह सकता है जब जनता बार‑बार वही चेहरे चुनने की बजाय बदलाव को अपनाए। बार‑बार चुने गए उम्मीदवार धीरे‑धीरे जनता की आवाज़ से दूर हो जाते हैं और सत्ता को अपनी विरासत समझने लगते हैं। लेकिन लोकतंत्र का सार यही है कि हर नागरिक को अवसर मिले, हर क्षेत्र में नई सोच और नई ऊर्जा प्रवेश करे।

राजनीतिक पार्टियों को भी अपनी नीतियों में सुधार करना होगा। बार‑बार एक ही परिवार के उम्मीदवारों को टिकट देना, या केवल बहुसंख्यक समुदाय को प्राथमिकता देना लोकतंत्र के लिए घातक है। इससे अल्पसंख्यक और नए चेहरे कभी सामने नहीं आ पाते, और देश में समानता की भावना कमजोर पड़ जाती है। जब तक पार्टियाँ इस प्रवृत्ति को नहीं बदलेंगी, तब तक देश आगे नहीं बढ़ पाएगा और लोकतंत्र अपनी असली आत्मा खो देगा।

जनता को चाहिए कि ऐसे दोहराए गए उम्मीदवारों को वोट न देकर NOTA का प्रयोग करे। यह केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि जनता की ताक़त का प्रतीक है — यह संदेश देता है कि हम बदलाव चाहते हैं, हम नई सोच चाहते हैं।

जब जनता यह संकल्प लेगी कि सत्ता में घुमाव और रोटेशन होगा, तभी जनप्रतिनिधि सचमुच काम करेंगे। तभी लोकतंत्र जीवंत रहेगा और हर वर्ग को अपनी आवाज़ उठाने का अवसर मिलेगा। यही व्यवस्था देश को आगे ले जाएगी और समानता की नींव को मजबूत करेगी।

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