08/02/2023
ज्ञान गंगा, कक्षा 4
In Sanskrit “sishu” means children and “mandir” means temple. Prior to this, Gita school was established at Kurukshetra in the year 1946 by Shri Guruji, M.S.
Saraswati Sishu Mandir are a group of schools run by the Rashtriya Swayamsevak Sangh[1]. “Saraswati” is the Hindu goddess of knowledge, music and other creative arts. The birth place of Saraswati Shishu Mandir is in Pakkibagh, Gorakhpur - a district of Uttar Pradesh in India. In 1952, late Nanaji Deshmukh and a group of RSS activists planned to educate children about Hindutva (the nationalistic Hi
08/02/2023
ज्ञान गंगा, कक्षा 4
17/07/2022
10/08/2017
"यही है वह पवित्र स्कूल जहा कक्षाओं के नाम भी महापुरुषों के नाम से होते थे ।"
"इन पुरानी दीवारों में कितनी यादें जिंदा हैं।"
28/10/2011
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायनी, अम्ब विमल मति दे - 2 ।
जग सिरमौर बनाएँ भारत, वह बल विक्रम दे - 2।
हे हंसवाहिनी...
..
साहस शील हृदय में भर दे, जीवन त्याग-तपोमय कर दे, संयम सत्य स्नेह का वर दे, स्वाभिमान भर दे - 2।
हे हंसवाहिनी...
लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम, मानवता का त्रास हरें हम, सीता, सावित्री, दुर्गा माँ, फिर घर-घर भर दे - 2 ।
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी..
या कुन्देन्दु- तुषारहार- धवला या शुभ्र- वस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमन्डितकरा या श्वेतपद्मासना |
या ब्रह्माच्युत- शंकर- प्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता
..सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ||
शुक्लांब्रह्मविचारसारपरमा- माद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् |
हस्ते स्पाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ||
12/06/2011
या कुन्देन्दु- तुषारहार- धवला या शुभ्र- वस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमन्डितकरा या श्वेतपद्मासना |
या ब्रह्माच्युत- शंकर- प्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता
..सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ||
शुक्लांब्रह्मविचारसारपरमा- माद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् |
हस्ते स्पाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ||
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायनी, अम्ब विमल मति दे - 2 ।
जग सिरमौर बनाएँ भारत, वह बल विक्रम दे - 2।
हे हंसवाहिनी...
..
साहस शील हृदय में भर दे, जीवन त्याग-तपोमय कर दे, संयम सत्य स्नेह का वर दे, स्वाभिमान भर दे - 2।
हे हंसवाहिनी...
लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम, मानवता का त्रास हरें हम, सीता, सावित्री, दुर्गा माँ, फिर घर-घर भर दे - 2 ।
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी..