Satyendra Kumar Rathaur

Satyendra Kumar Rathaur हम गिर गए हैं , कभी न कभी उठ जाएंगे !
लेकिन जो नजरों से गिर गये है, वो कभी नहीं उठ पाएंगे

01/08/2026

संसद में न आना और रोज आधी रात को रील बनाना ये संदेश देता है कि या तो यह मूर्ख है या मूर्ख बना रहा है ।

आपने किसी पेपर लीक माफिया का ऐसा फोटो देखा? नहीं देखेंगे। क्योंकि वे सब मोदी की छत्रछाया में करोड़ों बच्चों का भविष्य नी...
21/07/2026

आपने किसी पेपर लीक माफिया का ऐसा फोटो देखा? नहीं देखेंगे। क्योंकि वे सब मोदी की छत्रछाया में करोड़ों बच्चों का भविष्य नीलाम करते हैं।

पेपर लीक माफिया को बचाने के लिए नेता विपक्ष को घसीटा गया।

08/06/2026
जय हिंद जय भारत 🇧🇴77वें गणतंत्र दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 💐💐सुप्रभात 🙏
26/01/2026

जय हिंद जय भारत 🇧🇴
77वें गणतंत्र दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
💐💐

सुप्रभात 🙏

गांव में
23/01/2026

गांव में

19/01/2026

बुढ़ापे की सच्ची बातें

जवानी में इंसान बहुत कुछ मान लेता है—कि सब साथ रहेंगे, पैसा सब ठीक कर देगा, और समय हमेशा मिलेगा। लेकिन बुढ़ापा धीरे-धीरे सच सामने रख देता है। यहाँ बातें कड़वी नहीं होतीं, बस सच्ची होती हैं।

इस उम्र में समझ आता है कि हर रिश्ता उम्र भर का नहीं होता। कुछ लोग रास्ते में छूट जाते हैं और कुछ यादों में ही रह जाते हैं। तब यह भी पता चलता है कि अकेलापन हमेशा बुरा नहीं होता। कभी-कभी वही खुद से मिलने का मौका देता है।

बुढ़ापे की सच्ची बात यह भी है कि दिखावा थका देता है। अब न किसी को खुश करने की ज़रूरत लगती है, न किसी से आगे निकलने की। जो है, वही ठीक है—यह सोच अपने आप आ जाती है। पहले जहाँ तारीफ़ चाहिए होती थी, अब शांति चाहिए होती है।

इस दौर में इंसान सीखता है कि हर बात का जवाब देना ज़रूरी नहीं। चुप रहना भी एक समझदारी है। छोटी-छोटी तकलीफ़ें आती हैं, पर उनके साथ धैर्य भी आता है।

सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि ज़िंदगी लंबी हो या छोटी, मायने यह रखता है कि मन कितना हल्का है। बुढ़ापा यही सिखाता है—कम में जीना, सच में जीना।

बांसुरी भगवान श्री कृष्ण को अति प्रिय है,क्योंकि बांसुरी में तीन गुण है।पहला बांसुरी मं गांठ नहीं है। जो संकेत देता हैकि...
10/01/2026

बांसुरी भगवान श्री कृष्ण को अति प्रिय है,
क्योंकि बांसुरी में तीन गुण है।
पहला बांसुरी मं गांठ नहीं है। जो संकेत देता है
कि अपने अंदर किसी भी प्रकार की गांठ मत
रखों। मन में बदले की भावना मत रखो।
दूसरा बिना बजाये ये बजती नहीं है।
मानो बता रही है कि जब तक ना कहा जाए
तब तक मत बोलो।
और तीसरा जब भी बजती है मधुर ही बजती है।
जिसका अर्थ हुआ जब भी बोलो,
मीठा ही बोलो। जब ऐसे गुण किसी में
भगवान देखते हैं, तो उसे उठाकर अपने होंठों से
लगा लेते है !

20/12/2025
मेरी बेटी अपेक्षा राठौर द्वारा बनाई गई पेंटिंग ।
20/12/2025

मेरी बेटी अपेक्षा राठौर द्वारा बनाई गई पेंटिंग ।

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