01/06/2026
#दो_कौड़ी_का_शिक्षक...
जब एक प्रतिष्ठित मंच से पूरी शिक्षक बिरादरी के लिए ऐसे अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया जाता है, तो दिल को बहुत गहरी ठेस पहुँचती है। यह सिर्फ कुछ शब्दों की बात नहीं, बल्कि उस निस्वार्थ भाव का अपमान है जिससे एक शिक्षक अपना जीवन देश के भविष्य को संवारने में लगा देता है।
आज के इस आधुनिक दौर में जहाँ शिक्षा को हर घर तक पहुँचाना एक बड़ी चुनौती है, वहाँ ऑनलाइन और यूट्यूब के माध्यम से देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों और दूर-दराज के गाँवों में बैठे बच्चों तक शिक्षा पहुँच रही है। जो बच्चे बड़े शहरों में जाकर महँगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते, वे आज घर बैठे इन शिक्षकों के माध्यम से मेहनत कर रहे हैं और सफलता के शिखर को छू रहे हैं।
ऐसे मार्गदर्शकों के लिए ऐसी भाषा का उपयोग करना बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है। शायद बचपन में कक्षा की पढ़ाई को ठीक से आत्मसात न कर पाने या सही संस्कारों की कमी के कारण ही कोई व्यक्ति शिक्षकों के प्रति इतनी अमर्यादित भाषा का उपयोग कर सकता है। शिक्षा और शिक्षक का सम्मान करना हमारी संस्कृति का मूल आधार है।
शिक्षक चाहे सरकारी स्कूल का हो, चाहे निजी संस्थान का हो, या फिर डिजिटल माध्यम (यूट्यूब) पर पढ़ाता हो, शिक्षक तो शिक्षक ही होता है। किसी भी शिक्षक की मेहनत और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को चंद शब्दों में कमतर नहीं आंका जा सकता।
आइए ज्ञान के इन दीपकों का सम्मान करें क्योंकि एक सभ्य समाज की पहचान शिक्षकों के प्रति उसके आदर से ही होती है।
नोट : उन मोहतरमा की तारीफ में कसीदे पढ़ना मत भूलियेगा, समझ तो गए होंगे आप।