Janpad Inter College, Harchandpur, Raebareli, Uttar Pradesh

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09/08/2021

जय हिंद

25/07/2014

जरुर पढ़िए -मरने के बाद क्या होता है , श्री गरुण पुराण
कि यह बात -.-
मृत्यु एक ऐसा सच है जिसे कोई भी झुठला नहीं सकता ।
मृत्यु के बाद जीवात्मा यमलोक तक किस प्रकार
जाती है, इसका विस्तृत वर्णन है। किस प्रकार मनुष्य के
प्राण निकलते हैं और किस तरह वह पिंडदान प्राप्त कर
प्रेत का रूप लेता है।
* जिस मनुष्य की मृत्यु होने वाली होती है, वह बोल
नहीं पाता है। अंत समय में उसमें दिव्य दृष्टि उत्पन्न
होती है और वह संपूर्ण संसार को एकरूप समझने लगता है ।
उसकी सभी इंद्रियां नष्ट हो जाती हैं। वह जड़
अवस्था में आ जाता है, यानी हिलने-डुलने में असमर्थ
हो जाता है। इसके बाद उसके मुंह से झाग निकलने लगता है
और लार टपकने लगती है । पापी पुरुष के प्राण नीचे के
मार्ग से निकलते हैं ।
* मृत्यु के समय दो यमदूत आते हैं । वे बड़े भयानक, क्रोधयुक्त
नेत्र वाले तथा पाशदंड धारण किए होते हैं । वे नग्न
अवस्था में रहते हैं और दांतों से कट-कट की ध्वनि करते हैं ।
यमदूतों के कौए जैसे काले बाल होते हैं । उनका मुंह टेढ़ा-
मेढ़ा होता है । नाखून ही उनके शस्त्र होते हैं। इन
दूतों को देखकर प्राणी भयभीत होकर मलमूत्र त्याग करने
लग जाता है। उस समय शरीर से अंगूष्ठमात्र (अंगूठे के
बराबर) जीव हा हा शब्द करता हुआ निकलता है।
* यमराज के दूत जीवात्मा के गले में पाश बांधकर यमलोक
ले जाते हैं। उस पापी जीवात्मा को रास्ते में थकने पर
भी दूत भयभीत करते हैं और उसे नरक में मिलने
वाली यातनाओं के बारे में बताते हैं । ऐसी भयानक बातें
सुनकर पापात्मा जोर-जोर से रोने लगती है, किंतु उस
पर बिल्कुल भी दया नहीं करते हैं ।
* इसके बाद वह अंगूठे के बराबर शरीर यमदूतों से डरता और
कांपता हुआ, कुत्तों के काटने से दु:खी अपने
पापकर्मों को याद करते हुए चलता है। आग की तरह गर्म
हवा तथा गर्म बालू पर वह जीव चल नहीं पाता है । वह
भूख-प्यास से भी व्याकुल हो उठता है । उसकी पीठ पर
चाबुक मारते हुए उसे आगे ले जाते हैं। वह जीव जगह-जगह
गिरता है और बेहोश हो जाता है। उसको अंधकारमय
मार्गसे ले जाते हैं।
* यमलोक . पापी जीव को दो- तीन मुहूर्त में ले जाते
हैं। इसके बाद उसे भयानक यातना देते हैं। यह भोगने के बाद
यमराज की आज्ञा से यमदूत आकाशमार्ग से पुन: उसे उसके
घर छोड़ आते हैं।
* घर में आकर वह जीवात्मा अपने शरीर में पुन: प्रवेश करने
की इच्छा रखती है, लेकिन यमदूत के पाश से वह मुक्त
नहीं हो पाती और भूख-प्यास के कारण रोती है। पुत्र
आदि जो पिंड और अंत समय में दान करते हैं, उससे
भी प्राणी की तृप्ति नहीं होती,
क्योंकि पापी पुरुषों को दान,
श्रद्धांजलि द्वारा तृप्ति नहीं मिलती। इस प्रकार
भूख-प्यास से बेचैन होकर वह जीव यमलोक जाता है।
* जिस पापात्मा के पुत्र आदि पिंडदान नहीं देते हैं
तो वे प्रेत रूप हो जाती हैं और लंबे समय तक निर्जन वन में
दु:खी होकर घूमती रहती है। काफी समय बीतने के बाद
भी कर्म को भोगना ही पड़ता है, क्योंकि प्राणी नरक
यातना भोगे बिना मनुष्य शरीर नहीं प्राप्त होता।
गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य की मृत्यु के बाद 10 दिन तक
पिंडदान अवश्य करना चाहिए। उस पिंडदान के
प्रतिदिन चार भाग हो जाते हैं। उसमें दो भाग
तो पंचमहाभूत देह को पुष्टि देने वाले होते हैं,
तीसरा भाग यमदूत का होता है तथा चौथा भाग प्रेत
खाता है। नवें दिन पिंडदान करने से प्रेत का शरीर
बनता है। दसवें दिन पिंडदान देने से उस शरीर को चलने
की शक्ति प्राप्त होती है।
• शव को जलाने के बाद पिंड से हाथ के बराबर का शरीर
उत्पन्न होता है । वही यमलोक के मार्ग में शुभ-अशुभ फल
भोगता है। पहले दिन पिंडदान से मूर्धा (सिर), दूसरे दिन
गर्दन और कंधे, तीसरे दिन से हृदय, चौथे दिन के पिंड से
पीठ, पांचवें दिन से नाभि, छठे और सातवें दिन से कमर
और नीचे का भाग, आठवें दिन से पैर, नवें और दसवें दिन से
भूख-प्यास उत्पन्न होती है । यह पिंड शरीर को धारण
कर भूख-प्यास से व्याकुल प्रेतरूप में ग्यारहवें और बारहवें
दिन का भोजन करता है ।
* यमदूतों द्वारा तेरहवें दिन प्रेत को बंदर की तरह पकड़
लिया जाता है । इसके बाद वह प्रेत भूख-प्यास से
तड़पता हुआ यमलोक अकेला ही जाता है। यमलोक तक
पहुंचने का रास्ता वैतरणी नदी को छोड़कर
छियासी हजार योजन है । उस मार्ग पर प्रेत प्रतिदिन
दो सौ योजन चलता है । इस प्रकार 47 दिन लगातार
चलकर वह यमलोक पहुंचता है । मार्ग में सोलह
पुरियों को पार कर यमराज के घर जाता है।
* इन सोलह पुरियों के नाम इस प्रकार है - सौम्य,
सौरिपुर, नगेंद्रभवन, गंधर्व, शैलागम, क्रौंच, क्रूरपुर,
विचित्रभवन, बह्वापाद, दु:खद, नानाक्रंदपुर, सुतप्तभवन,
रौद्र, पयोवर्षण, शीतढ्य, बहुभीति । इन सोलह
पुरियों को पार करने के बाद प्राणी यमपाश में
बंधा मार्ग में हाहाकार करते हुए यमराज पुरी जाता है ।

20/07/2014

A 6 year girl r***d at school in Bangalore!!
1. She was not wearing shorts, jeans, skirts.
2. She was not having cellphone
3. She was not showing off her cleavage
4. She was not hanging out with friends late
night
5. She was not under influence of alcohol or any
other drug.
6. She was not flirting.
Now I just want to know is she eligible for
getting r***d that's not my views but as per few
think tanks n intellectual political leader of this
nation if a girl do any thing written in those
points she is eligible for r**e.
She use to go school that was her only mistake in
this case.......is that new point which should be
added in eligibility criteria for getting r***d.
Waiting waiting waiting for some mind blowing
responses from so called think tanks or political
leaders.!!

14/01/2014

शूरवीर हिंदूओ के 11 महान सत्य! सभी शेयर करेँ!!
*************** **
1. जयमाल मेड़तिया ने एक ही झटके में हाथी का सिर
काट डाला था.
2. करौली के जादोन राजा अपने सिंहासन पर बैठते वक़्त
अपने दोनो हाथ जिन्दा शेरो पर रखते थे.
3. जोधपुर के यशवंत सिंह के 12 साल के पुत्र पृथ्वी सिंह
ने हाथो से औरंगजेब के खूंखार भूखे जंगली शेर का जबड़ा फाड़
डाला था.
4. राणा सांगा के शरीर पर छोटे-बड़े 80 घाव थे,
युद्धों में घायल होने के कारण उनके एक हाथ नही था एक
पैर नही था, एक आँख नहीं थी उन्होंने अपने जीवन-काल में
100 से भी अधिक युद्ध लड़े थे.
5. एक राजपूत वीर जुंझार जो मुगलो से लड़ते वक्त शीश
कटने के बाद भी घंटो लड़ते रहे आज उनका सिर बाड़मेर में
है, जहा छोटा मंदिर हैं और धड़ पाकिस्तान में है.
6. रायमलोत कल्ला का धड़ शीश कटने के बाद लड़ता-
लड़ता घोड़े पर पत्नी रानी के पास पहुंच गया था तब
रानी ने गंगाजल के छींटे डाले तब धड़ शांत हुआ उसके बाद
रानी पति कि चिता पर बैठकर सती हो गयी थी.
7. चित्तोड़ में अकबर से हुए युद्ध में जयमाल राठौड़ पैर
जख्मी होने कि वजह से कल्ला जी के कंधे पर बैठ कर युद्ध
लड़े थे, ये देखकर सभी युद्ध-रत साथियों को चतुर्भुज
भगवान की याद आयी थी, जंग में दोनों के सर काटने के
बाद भी धड़ लड़ते रहे और राजपूतो की फौज ने दुश्मन
को मार गिराया अंत में अकबर ने उनकी वीरता से
प्रभावित हो कर जैमल और
पत्ता जी की मुर्तिया आगरा के किलें में लगवायी थी.
8. राजस्थान पाली में आउवा के ठाकुर खुशाल सिंह 1877
में अजमेर जा कर अंग्रेज अफसर का सर
काट कर ले आये थे और उसका सर अपने किले के बाहर
लटकाया था तब से आज दिन तक उनकी याद में
मेला लगता है.
9. महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलो था और
कवच का वजन 80 किलो था और कवच, भाला, ढाल, और
हाथ मे तलवार का वजन मिलाये तो 207 किलो था.
10. सलूम्बर के नवविवाहित रावत रतन सिंह चुण्डावत
जी ने युद्ध जाते समय मोह-वश
अपनी पत्नी हाड़ा रानी की कोई
निशानी मांगी तो रानी ने सोचा ठाकुर युद्ध में मेरे
मोह के कारण नही लड़ेंगे तब रानी ने निशानी के तौर पर
अपना सर काट के दे दिया था,
अपनी पत्नी का कटा शीश गले में लटका औरंगजेब
की सेना के साथ भयंकर युद्ध किया और वीरता पूर्वक
लड़ते हुए अपनी मातृ भूमि के लिए शहीद हो गये थे.
11. हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे
और अकबर की ओर से 85000 सैनिक थे
फिर भी अकबर की मुगल सेना पर राजपूत भारी पड़े...
Important ==> यह
जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो लाईक और शेयर
करना ना भूले ।।

06/01/2014

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