16/02/2019
तस्वीर तक देखी ना जा रही
चिथड़े जिस्मों के कैसे समेटे होंगे
कट के कलेजा है गिरा जा रहा
वो भी तो बाप किसी के बेटे होंगे
गुजरी होगी क्या उन माँओं-प्रियतमाओं पर
जब बेजान, 'जान' को बाहों में समेटे होंगे
काँपते होंगे जार-जार वो फौलादी सीने वाले भी
विक्षत शव दोस्तों के जिन्होंने तिरंगे में लपेटे होंगे
आज है व्याप्त आक्रोश और' कड़ी निंदा का दौर
कल हम सब एयर कंडीशंड कमरे में लेटे होंगे
तस्वीर तक देखी ना जा रही
चिथड़े जिस्मों के कैसे समेटे होंगे.
😢😢😢😡
😥😥😥😡
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