Ambika College of Ayush

Ambika College of Ayush

Share

Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Ambika College of Ayush, Educational consultant, Pallu, Hanumangarh.

Photos from Ambika College of Ayush's post 06/01/2026

#पंचकर्म

पंचकर्म (अर्थात पाँच कर्म) आयुर्वेद की उत्‍कृष्‍ट चिकित्‍सा विधि है। पंचकर्म को आयुर्वेद की विशिष्‍ट चिकित्‍सा पद्धति कहते है। इस विधि से शरीर में होंनें वाले रोगों और रोग के कारणों को दूर करनें के लिये और तीनों दोषों (अर्थात त्रिदोष) वात, पित्‍त, कफ के असम रूप को समरूप में पुनः स्‍थापित करनें के लिये विभिन्‍न प्रकार की प्रक्रियायें प्रयोग मे लाई जाती हैं। लेकिन इन कई प्रक्रियायों में पांच कर्म मुख्‍य हैं, इसीलिये ‘’पंचकर्म’’ कहते हैं। ये पांच कर्मों की प्रक्रियायें इस प्रकार हैं-

वमन
विरेचन
बस्ति – अनुवासन
बस्ति – आस्‍थापन
नस्‍य

आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान की पंचकर्म चिकित्सा पद्धति भारत की प्राचीनतम और चमत्कारिक चिकित्सा पद्धति है। भारत के विभिन्न आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालयों और चिकित्सालयों में रोगियों की चिकित्सा सुलभ और प्रभावी तरीके से किए जाने के कारण यह बहुत लोकप्रिय है और सामान्यतौर पर लोक जीवन में स्वीकार्य है। उत्तर भारत में यह पद्धति विशेष रूप से हाल ही में उपयोग में लाई जा रही है। इस पद्धति में शरीर के रोग उत्पादक कारणों को जो विष के समान होते हैं को बाहर निकालकर शरीर को शुद्ध किया जाता है। इसी से रोग निवारण भी हो जाता है। पंचकर्म, आयुर्वेद शास्त्र में वर्णित एक विशेष चमत्कारिक चिकित्सा पद्धति है, जो दोषों को शरीर से बाहर निकाल कर रोगों को जड़ से समाप्त कर पुन: उस रोग के होने को रोकती है यह शरीर के उचित शोधन की प्रक्रिया है, जो रोगी के साथ- साथ में स्वस्थ मनुष्य के लिए भी फायदेमंद है। इसमें पाँच कर्म होते हैं तथा इनके कर्मों के पहले पूर्व कर्म तथा बाद में पश्चात कर्म किया जाता है ।

प्रधान कर्म (काय चिकित्सानुसार)

1. वमन, 2. विरेचन, 3. आस्थापन वस्ति, 4. अनुवासन बस्ति, 5. नस्य

शल्य चिकित्सानुसार आस्थापन तथा अनुवासन वस्ति को वस्ति शीर्षक के अंतर्गत लेकर तीसरा प्रधान कर्म माना गया है तथा पाँचवाँ प्रधान कर्म 'रक्त मोक्षण' को माना गया है।

पूर्व कर्म

1. स्नेहन- स्नेह शब्द का तात्पर्य शरीर को स्निग्ध करने से है। यह स्नेह क्रिया शरीर पर बाह्य रूप से तेल आदि स्निग्ध पदार्थों का अभ्यंग (मालिश) करके भी की जाती है तथा इन पदार्थों का मुख द्वारा प्रयोग करके भी की जाती है। कुछ रोगों की चिकित्सा में स्नेहन को प्रधान कर्म के रूप में भी किया जाता है।

चार प्रमुख स्नेह

(1) घृत, (2) मज्जा, (3) वसा, (4) तेल
इनमें घृत (गोघृत) को उत्तम स्नेह माना गया है। ये चारों स्नेह मुख्य रूप से पित्तशामक होते हैं।

2. स्वेदन- स्वेदन का तात्पर्य उस प्रक्रिया से है, जिससे स्वेद अर्थात पसीना उत्पन्न हो। कृत्रिम उपायों द्वारा शरीर में स्वेद उत्पन्न करने की क्रिया स्वेदन कहलाती है।

स्वेदन के भेद-

(१) एकांग स्वेद- अंग विशेष का स्वेदन
(२) सर्वांग स्वेद- संपूर्ण शरीर का स्वेदन
(अ) अग्नि स्वेद- अग्नि के सीधे संपर्क द्वारा स्वेदन
(ब) निरग्नि स्वेद- बिना अग्नि के संपर्क द्वारा स्वेदन।

#वमन

उर्ध्व मार्ग से दोषों का निर्हरण वमन कहलाता है। अर्थात उल्टी करा कर मुख द्वारा दोषों का निकालना वमन कहलाता है। वमन को कफ दोष की प्रधान चिकित्सा कहा गया है।

वमन योग्य रोग- श्वास, कास, प्रमेह, पांडु रोग (एनीमिया), मुख रोग अर्बुद आदि।

वमन के अयोग्य रोगी- गर्भवती स्त्री, कोमल प्रकृति वाले व्यक्ति, अतिकृश भूख से पीड़ित आदि।

#विरेचन

मुख्य लेख: विरेचन

गुदामार्ग मलमार्ग से दोषों का निकालना विरेचन कहलाता है। विरेचन को पित्त दोष की प्रधान चिकित्सा कहा जाता है।

विरेचन योग्य रोग- शिरः शूल, अग्निदग्ध, अर्श, भगंदर, गुल्म, रक्त पित्त आदि।

विरेचन के अयोग्य रोगी- नव ज्वर, रात्रि जागरित, राजयक्ष्मा आदि।

#वस्ति

आस्थापन वस्ति,
अनुवासन वस्ति

वस्ति वह क्रिया है, जिसमें गुदमार्ग, मूत्रमार्ग, अपत्यमार्ग, व्रण मुख आदि से औषधि युक्त विभिन्ना द्रव पदार्थों को शरीर में प्रवेश कराया जाता है।

मूत्र मार्ग तथा अपत्य मार्ग से दी जाने वाली वस्ति उत्तर वस्ति कहलाती है तथा व्रण मुख (घाव के मुख) से दी जाने वाली वस्ति व्रण वस्ति कहलाती है। वस्ति को वात रोगों की प्रधान चिकित्सा कहा गया है। आस्थापन वस्ति में विभिन्न औषधि द्रव्यों के क्वाथ (काढ़े) का प्रयोग किया जाता है। अनुवासन वस्ति में विभिन्न औषधि द्रव्यों से सिद्ध स्नेह का प्रयोग किया जाता है।

वस्ति के योग्य रोग- अंग सुप्ति, जोड़ों के रोग, शुक्र क्षय, योनि शूल आदि।

वस्ति के अयोग्य रोगी- भोजन किए बिना अनुवासन वस्ति तथा भोजन के उपरांत आस्थापन वस्ति के प्रयोग का निषेध है। साथ ही अतिकृश, कास, श्वास, जिन्हें उल्टियाँ (वमन) हो रही हों, उन्हें वस्ति नहीं देना चाहिए।

#नस्य

नासिका द्वारा जो औषधि प्रयुक्त होती है, उसे नस्य कहते हैं। नस्य को गले तथा सिर के समस्त रोगों की उत्तम चिकित्सा कहा गया है।

मात्रा के अनुसार नस्य के दो प्रकार हैं-

1. मर्श नस्य- 6, 8 या 10 बूँद नस्य द्रव्य को नासापुट में डाला जाता है।

2. प्रतिमर्श नस्य- 1 बूँद या 2 बूँद औषध द्रव्य को नासापुट में डाला जाता है। इस नस्य की मात्रा कम होती है। अतः इसे प्रतिदिन भी लिया जा सकता है।

नस्य योग्य रोग- प्रतिश्याय, मुख की विरसता, स्वर भेद, सिर का भारीपन, दंत शूल, कर्ण शूल, कर्ण नाद आदि।

नस्य के अयोग्य रोगी- अत्यंत कृश व्यक्ति, सुकुमार रोगी, मनोविकार, अति निद्रा, सर्पदंश आदि।

शल्य चिकित्सानुसार पाँचवाँ कर्म 'रक्त मोक्षण' माना गया है। रक्त मोक्षण का अर्थ है शरीर से दूषित रक्त को बाहर निकालना।

रक्त मोक्षण की क्रिया शस्त्र द्वारा सिरा का वेधन करके भी की जाती है तथा बिना शस्त्र प्रयोग के भी की जाती है। बिना शस्त्र प्रयोग के रक्त मोक्षण के लिए सबसे अधिक प्रचलित विधि 'जलौका' अर्थात लीच द्वारा रक्त मोक्षण है। लीच को स्थान विशेष पर लगा दिया जाता है तथा दूषित रक्त के चूषण के बाद उसे हटा लिया जाता है। विभिन्न रोगों के लिए विभिन्न शिराओं से रक्त मोक्षण का निर्देश आयुर्वेद में दिया गया है।

आजकल मनुष्य का जीवन अधिकाधिक यांत्रिक होते जा रहा हैं। अत्यधिक गतिमान जीवन में मानव के आहार-विहार में अनियमितता आ गयी हैं। जिस तरह समय-समय पर कार या साइकिल जैसे यंत्रों के ठीक से चलने के लिए सर्विसिंग की जरुरत होती है उसी तरह हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शरीर की पंचकर्मों द्वारा शुद्धि भी जरुरी हैं।



25/11/2025

🌿✨ आयुर्वेद विभाग में सुनहरा अवसर ! ✨🌿
पहले आओ, पहले पाओ !
Admission Open: Session 2025–26
*Ambika College of Ayush, Pallu (Hanumangarh)*
📍 Arjansar Road, Pallu | ☎️ 9828695851
(Affiliated with Rajasthan Ayurved Nursing Council, Jaipur)
---
🎓 स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर बनाने का सुनहरा मौका!
✅ B.Sc. Ayurved Nursing (4 Years)

🌸 आयुर्वेद + मॉडर्न नर्सिंग का अद्भुत संगम
आयुर्वेदिक अस्पतालों, पंचकर्म सेंटर व मेडिकल संस्थानों में करियर के अवसर
उच्च शिक्षा व सरकारी/गैर-सरकारी सेवाओं में संभावनाएँ
सम्मानजनक, सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य की दिशा
✅ D.A.N & P (Diploma in Ayurved Nursing & Pharmacy)

🌿 नर्सिंग + फार्मेसी = एक ही कोर्स में दो लाभ!
पंचकर्म सेंटर, अस्पताल व आयुर्वेदिक औषधि कंपनियों में रोजगार के अवसर
फर्स्ट एड, डिस्पेंसिंग, ड्रग मैन्युफैक्चरिंग की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
हेल्थ सेक्टर में शुरुआती स्तर से प्रोफेशनल ग्रोथ
---
🌱 क्यों चुनें Ambika College of Ayush?
✔️ अनुभवी एवं प्रशिक्षित फैकल्टी
✔️ अत्याधुनिक प्रयोगशाला एवं प्रैक्टिकल सुविधाएँ
✔️ इंटर्नशिप व प्लेसमेंट सहायता
✔️ अनुशासित व प्रेरणादायक वातावरण
---
🌟 Ayurveda + Career Growth = Best Future!
🟢 सीटें सीमित हैं — अभी नामांकन कराएँ!
📞 अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें: 9828495060, 9001003387, 8387890003,9672082161

03/11/2025

*The hospital at College of Ayush*
is now fully established for .Sc. Ayurveda Nursing and &P courses.
Give your child a golden opportunity to build a bright future with excellent career prospects in various government and private healthcare sectors under the * of Ayurveda.*


&P





01/11/2025

🌿 *अम्बिका कॉलेज ऑफ आयुष, पल्लू (हनुमानगढ़)*
*राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त*
🎓 आयुर्वेद में करियर का सुनहरा अवसर!

आयुर्वेद के क्षेत्र में रुचि रखने वाले सभी संकाय (Arts / Science / Commerce) के 12वीं पास विद्यार्थियों के लिए
*D.A.N. & P. (Diploma in Ayurved Nursing & Pharmacy)*
कोर्स अम्बिका कॉलेज ऑफ आयुष, पल्लू में प्रारम्भ हो चुका है!
*🩺RANC काउंसलिंग की अंतिम तिथि: 08 नवम्बर 2025 तक*
👉 इच्छुक विद्यार्थी महाविद्यालय में उपस्थित होकर प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण करें।

💫 क्यों चुनें अम्बिका कॉलेज ऑफ आयुष?

आधुनिक सुविधाओं से युक्त विशाल कैंपस

हॉस्पिटल, पंचकर्म सेंटर, आयुर्वेद लैब, रसशाला, व लाइब्रेरी की समुचित व्यवस्था
अनुभवी आयुर्वेदाचार्यों द्वारा गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण
*राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही में स्थापित 1000 PHC/CHC सेंटरों में रोजगार के उत्कृष्ट अवसर*
🎯 निकट भविष्य में शानदार करियर स्कोप!
आयुर्वेद के क्षेत्र में सेवा और स्वावलंबन दोनों का उत्तम संगम।
📞 अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें:
📱 [9828495060, 9828695851, 9672082161, 9001003387, 8387890003]

23/10/2025

सत्र 2025-26 हेतु प्रवेश की अन्तिम तिथि :- 28 अक्टूबर 2025
फीस में विशेष छुट !

19/10/2025

सत्र 2025-26 के प्रवेश की अन्तिम तिथि :- 28 अक्टूबर
प्रवेश प्रारम्भ, फीस में विशेष रियायत

13/10/2025

समस्त विज्ञान वर्ग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सूचना है:- जिन विद्यार्थियों ने CUET 2025 प्रवेश परीक्षा नहीं दी है वो सभी छात्र 13 /10 /2025 से 16/10/2025 तक विश्वविद्यालय द्वारा डिप्लोमा इन फार्मेसी (D Pharmacy) प्रवेश पाठ्यक्रम हेतु निर्धारित नवीन पंजीकरण (New Registration) राशि ₹2000/- (एस.सी./एस.टी. हेतु ₹1000/-) जमा करवाकर प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।

साथ ही काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने हेतु निर्धारित काउंसलिंग शुल्क ₹550/- जमा करवाना आवश्यक होगा।

उपरांत ही College Choice Filling हेतु पात्र माना जायेगा। Choice Filling की तिथि 13/10/2025 से 16/10/2025 तक है

05/10/2025

अन्तिम तिथि 18 अक्टूबर तक अपना प्रवेश सुनिश्चित करें!

19/09/2025

Session 2025-26
Admission Start
Limited Seats

Want your school to be the top-listed School/college in Hanumangarh?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Website

Address


Pallu
Hanumangarh
335522