25/03/2016
Govt. School hanumangarh me manaya gya jn. Ki sabhi ekatrit hui..
"Rastriya Swaymsewak Sangh"
25/03/2016
Govt. School hanumangarh me manaya gya jn. Ki sabhi ekatrit hui..
28/02/2016
आज #माधव_पृभात_शाखा हनुमानगढ़ जंक्शन के राजकिय_उच्च_पृाथमिक_विधालय मे #वार्षिक_उत्सव का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें सभी स्वमं सेवको द्वारा #सुर्य_नमस्कार, #पद्_विन्यास व #दंड_पृहार का विशेष व अदभुत पृदर्शन किया गया. ।।
28/02/2016
पूजनीय #सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी द्वारा #पटना के विजय निकेतन परिसर में #वृक्षारोपण किया गया।
सभी भाइयों से निवेदन है कि 14 तारीख को लोहङी व मकर सक्रांति उत्सव बनाया जा रहा है तो सभी अवश्य पहुंचे
#स्थान- #दुर्गा_मन्दिर सायं 8 बजे ।
04/01/2016
#पुणे_में_संघ_का_सबसे_बड़ा_सम्मेलन, पठानकोट हमले पर रही चुप्पी
डेढ़ लाख से ज्यादा स्वयंसेवक, हाज़िरी लगाते केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और उनके कैबिनेट सहयोगी, लेकिन देश की सुरक्षा पर अक्सर हुंकारने वाले आरएसएस ने अपने सबसे बड़े जलसे में पठानकोट हमले पर कुछ नहीं कहा।
पुणे के मारुंजी में हुए इस कार्यक्रम को आरएसएस का अबतक का सबसे बड़ा आयोजन बताया गया। इस मौके पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, 'हिन्दुत्तव का मतलब है सबको साथ लेकर चलना। राष्ट्रीयता को कायम रखने के लिए सरसंघचालक ने इस्राइल का भी जिक्र किया, बापू और बाबासाहेब को भी उद्धृत किया।
नेताओं की भारीभरकम फौज के बावजूद कहा कि आयोजन का मकसद सियासी नहीं है, आरएसएस नेता डॉ. श्रीरंग गोडबोले ने कहा, 'यहां संदेश सियासी नहीं है, हम समाज में एकजुटता चाहते हैं जिसका सियासी प्रतिफल हो सकता है।' वैसे इंदौर में आरएसएस के संयुक्त सचिव दत्तात्रेय होसबोले लगातार हमलों के बावजूद पाकिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को जरूरी बता चुके हैं, और सदी के शायद सबसे बड़े कार्यकर्ता समागम में संघ प्रमुख की पठानकोट हमलों पर चुप्पी बताती है कि दल बदलने के साथ पड़ोसियों के प्रति उसके नजरिये में भी बदलाव हो जाता है।
18/11/2015
#नमन
23/10/2015
#हनुमानगड़_जंकशन के दुर्गा मंदिर पृांग्ण से #विजयदशमी के दिऩ ्वयं_सेवको दृारा पथसंचलन निकाला गया, #शस्तृ_पूजन भी किया गया...|||
18/10/2015
Padd sanchlan ka abhyaas...
कुछ आदमी धन के पीछे तब तक भागते हैं, जब तक उनका निधन नही हो जाता ।!! ⛺
« चाणकय नीती
जीवन में प्रत्येक व्यक्ति की कोई न कोई कमजोरी जरूर होती है जो उसकी सफलता में सबसे बड़ी बाधक बनती है लेकिन इससे उलट हर व्यक्ति की ताकत उसे विजय रथ की तरफ ले जाने में मुख्य भूमिका निभाती है. बहुत से लोग अपनी कमजोरी और ताकत को बखूबी जानते हैं लेकिन आचार्य चाणक्य के नीति शास्त्रों में कुछ विशेष लोगों की ताकत के जुड़े हुए पहलुओं को बताया गया है जिसे जानकार लोग उसके अनुसार आचरण करके सफलता के नित नए आयामों को छू सकते हैं. वैसे तो स्त्री हो या पुरुष, सभी के पास कुछ गुण और कुछ शक्तियां अवश्य होती हैं जिनसे वे अपने कार्य सिद्ध कर सकते हैं. आचार्य चाणक्य ने अपनी एक नीति में बताया है कि राजा, ब्राह्मण और स्त्री की सबसे बड़ी ताकत क्या होती है.
chanakya new
आचार्य चाणक्य कहते हैं राजा, ब्राह्मण और स्त्री को आदिकाल से ही विशेष दर्जा दिया जाता है किसी भी राष्ट्र या परिवार के विकास या पतन में इन तीनों के आचरण को खास नजरिए से देखा जाता है आज भी राजा यानि किसी भी देश के प्रधानमंत्री, ब्राह्मण (ज्ञानी) और महिलाओं को देश के विकास में प्रमुख स्तंभ के रूप में माना जाता है. बाहुबल है राजा की ताकत आचार्य चाणक्य कहते हैं कि किसी भी राजा की शक्ति उसका स्वयं का बाहुबल है. वैसे तो किसी भी राजा के अधीन उसकी सेना, मंत्री और अन्य राजा रहते हैं लेकिन उसका स्वयं का ताकतवर होना भी जरूरी है यदि कोई राजा स्वयं शक्तिहीन है तो वह किसी पर राज नहीं कर सकता. राजा जितना शक्तिशाली होगा उतना ही अच्छा शासक रहता है. इसीलिए यह जरूरी है कि राजा बाहुबल से भी शक्तिशाली हो. ज्ञान है ब्राह्मण की ताकत किसी भी ब्राह्मण की शक्ति उसका ज्ञान है. ब्राह्मण जितना ज्ञानी होगा वह उतना ही अधिक सम्मान प्राप्त करेगा. ईश्वर और जीवन से संबंधित ज्ञान ही किसी भी ब्राह्मण की सबसे बड़ी शक्ति हो सकता है. सौंदर्य और मीठी वाणी है स्त्रियों की ताकत है उनका आचार्य चाणक्य कहते हैं किसी भी स्त्री का सौंदर्य और यौवन ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है. यदि कोई स्त्री सुंदर नहीं है लेकिन मधुर व्यवहार वाली है तब भी वह जीवन में कभी भी परेशानियों का सामना नहीं करती है. मधुर व्यवहार से ही स्त्री मान-सम्मान प्राप्त करती हैं.
25/09/2015
clarifies that JI Have not made any comment on reservation system...