17/11/2024
भारतीय गेंहू एवं जौ अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह छौक्कर ने बताया की किसान गेहू बिजाई के 3 दिन बाद पाईरोक्सा सल्फोन 60 ग्राम का प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी मिलाकर से छिड़काव करें। इससे मंसी, जंगली जेई व लोमड़ घास पर नियंत्रण हो जाएगा।
Kisan Gyan
27/10/2024
"गेंहुं की बिजाई का समय और बीज की मात्रा "
:- अगेती बिजाई - 25 अक्टूबर से 10 नवंबर तक अगेती वाली किस्में जो ज्यादा खाद पानी व उपजाऊ भूमि के लिए: WH 1270,DBW 187, DBW 303, DBW 327 ,PBW 872 की बिजाई कर सकते है क्योंकि ये किस्में बिजाई के समय थोड़ा उच्च तापमान को भी सहन कर जाती हैं जिससे इनके जमाव व फ़ुटाव पे कोई प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ता। बीज की मात्र 40 किलोग्राम ही प्रति एकड़ प्रयोग करें।
:- समय की बिजाई नवम्बर के पहले सप्ताह से तीसरे सप्ताह तक जो किस्में बिजी जा सकती हैं: WH 1105,WH 1184, HD 3086,DBW 222,DBWH 221,PBW 826,HD 3386.
नोट=यमुनानगर व अंबाला जिलों को छोड़ कर कम नमी वाले क्षेत्रों जैसे भिवानी व झज्जर में WH 711 की बिजाई भी की जा सकती हैं।
✍️ डॉ.ओमप्रकाश बिश्नोई , वरिष्ठ गेंहू वैज्ञानिक HAU HISAR
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25/06/2024
डीएपी से बेहतर है एनपीके खाद- कृषि विभाग
खरीफ सीजन-2024 के लिए किसानों द्वारा उर्वरकों का अग्रिम उठाव किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा किसानों से अपील की गई है कि डीएपी के स्थान पर एनपीके खाद बेहतर विकल्प है।
एनपीके 12ः32ः16 और 16ः16ः16 उर्वरकों से फसलों में मुख्य पोषक तत्व नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटाश तत्व की पूर्ति होती है। उसी प्रकार 20ः20ः0ः13 से नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं सल्फर की पूर्ति होती है। डीएपी से केवल दो तत्व नत्रजन एवं फास्फोरस ही मिलते हैं। डीएपी से पोटाश तत्व की पूर्ति नहीं होती है। इसके अलावा सिंगल सुपर फास्फेट जिसमें 16 प्रतिशत फास्फोरस, 12 प्रतिशत सल्फर एवं 21 प्रतिशत कैल्शियम पाया जाता है। इसके उपयोग से फसलों के उत्पादन में वृद्धि होती है। तिलहन फसलों में सल्फर से तेल की मात्रा बढ़ती है। जिले में खरीफ 2024 में मुख्य फसल धान, बाजरा, तिल, उड़द एवं सोयाबीन है। इसके लिए एनपीके उर्वरक का उपयोग किसान करे