15/09/2026
चैन सिंह जी शेखावत—एक ऐसी शख्सियत, जिन्हें पद नहीं, उनका व्यवहार बड़ा बनाता है।
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, निरवाल में जब चैन सिंह जी शेखावत प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत थे, तब कभी ऐसा एहसास नहीं हुआ कि वे प्रधानाचार्य हैं और हम उनके अधीन कार्य करने वाले कार्मिक। उनका व्यवहार हमेशा अपनत्व, सम्मान और आत्मीयता से भरा रहता था। वे उम्र में बड़ों का दिल से सम्मान करते थे और छोटों के कंधे पर हाथ रखकर उनका हौसला बढ़ाते थे। उनके व्यक्तित्व में पद का अहंकार नहीं, बल्कि एक परिवार के मुखिया जैसा अपनापन दिखाई देता था।
जब वे शिक्षा अधिकारी के पद पर रावतसर ब्लॉक पहुँचे, तब भी उनकी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया। वे जिस भी विद्यालय में जाते, वहाँ केवल अधिकारी बनकर निरीक्षण करने नहीं जाते थे, बल्कि शिक्षकों को अच्छी बातें बताते, उनकी समस्याएँ समझते और काम को बेहतर तरीके से कैसे किया जाए, यह समझाकर आते थे। उनकी कोशिश हमेशा डर पैदा करने की नहीं, बल्कि शिक्षकों में आत्मविश्वास और कार्य के प्रति उत्साह पैदा करने की रहती थी।
आमतौर पर जब कोई अधिकारी विद्यालय में आता है तो शिक्षक कुछ हद तक तनाव में आ जाते हैं, लेकिन चैन सिंह जी शेखावत इसके बिल्कुल विपरीत थे। रावतसर ब्लॉक के शिक्षक उनके आने का इंतजार करते थे। कई बार तो शिक्षक स्वयं उन्हें फोन करके विद्यालय आने का आग्रह करते थे। यह किसी अधिकारी के पद की नहीं, बल्कि उनके व्यवहार, कार्यशैली और व्यक्तित्व से अर्जित सम्मान की मिसाल है।
रावतसर ब्लॉक के शिक्षकों के बीच उनकी लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि अच्छा अधिकारी वह नहीं जो अपने पद का भय पैदा करे, बल्कि वह है जिसके आने पर लोग सम्मान और खुशी महसूस करें।
चैन सिंह जी शेखावत ने अपने व्यवहार और कार्यशैली से यह साबित किया कि पद व्यक्ति को बड़ा नहीं बनाता, बल्कि व्यक्ति अपने व्यवहार, संवेदनशीलता और दूसरों का सम्मान करके पद की गरिमा बढ़ाता है।
उनका व्यक्तित्व आज भी अनेक शिक्षकों के लिए प्रेरणा है और उनकी कार्यशैली की चर्चा सम्मान और आत्मीयता के साथ की जाती है।
भगवान राधे कृष्णा की मेहर आप पर बनी रहे सर जी, आप स्वस्थ रहो, मस्त रहो,