आरक्षण विरोधी वाहिनी

आरक्षण विरोधी वाहिनी the object of creating this page is to get knowledge about the problem of society and the country;and improve the people to face the problem

10/01/2026
ब्राह्मणों ने संसार को राक्षसों से सुरक्षित रखने का कर्तव्य सदियों से निभाता आ रहा है। तिलक लगाएं एवं अपने सभ्यता संस्कृ...
28/04/2024

ब्राह्मणों ने संसार को राक्षसों से सुरक्षित रखने का कर्तव्य सदियों से निभाता आ रहा है।
तिलक लगाएं एवं अपने सभ्यता संस्कृति सनातन को बनाए रखें

08/08/2022

दो महीने में अस्पताल में हुई जांच में 10 लड़के और दो लड़कियां एचआईवी संक्रमित (HIV Positive) पाई गई हैं. टैटू बनवाने से बड़ी स.....

उन्होंने नरसंहार किया ,नफरत नहीं फैली,हमने फिल्म क्या देख ली,तो नफरत फैलने लगी... ?
23/03/2022

उन्होंने नरसंहार किया ,नफरत नहीं फैली,
हमने फिल्म क्या देख ली,तो नफरत फैलने लगी... ?

अंग्रेजो के गुलाम तमाम (62) देशों के स्वतंत्रता की कहानी हम भारतीयों को कभी किताब में नहीं पढ़ाई गई ताकि हम इन रंगा और ब...
24/11/2021

अंग्रेजो के गुलाम तमाम (62) देशों के स्वतंत्रता की कहानी हम भारतीयों को कभी किताब में नहीं पढ़ाई गई ताकि हम इन रंगा और बिल्ला की जोड़ी को महान समझते रहे
अफगानिस्तान भी अंग्रेजों का गुलाम था और उसका नाम नार्दन परसिया था
अफगानिस्तान के लोगों ने अपनी आजादी के लिए अंग्रेजों से तीन बार सेना बनाकर भीषण लड़ाई लड़ी ठीक उसी तरह से जिस तरह की आजादी नेताजी सुभाष चंद्र बोस लेना चाहते थे
तीसरा एंग्लो अफगान युद्ध के बाद जो 1919 में हुआ उसके बाद अंग्रेज समझ गए कि अफगानिस्तान को गुलाम बनाने में उनका बहुत नुकसान है क्योंकि हजारों सैनिक मारे गए कई अंग्रेज अधिकारी भी मारे गए थे फिर 1919 में ट्रीटी आफ रावलपिंडी या फिर एंगलो अफगान ट्रीटी आफ 1919 समझौता हुआ और इस समझौते में अंग्रेजों ने यह स्वीकार कर लिया कि वह ब्रिटिश इंडिया को खैबर पास से आगे नहीं बढ़ाएंगे और फिर एक लाइन खींची गई जिसे डूरंड लाइन कहते हैं और वह डूरंड लाइन ब्रिटिश इंडिया और अफगानिस्तान की सीमा रेखा होगी और इस तरह से अफगानिस्तान ने लड़कर अंग्रेजों से 1919 में ही आजादी ले लिया
क्योंकि वहां गांधी और नेहरू नहीं थे इसीलिए अफगानिस्तान का विभाजन नहीं हुआ जबकि अफगानिस्तान में लाखों कबीले थे
सोचिए अगर अफगानी भी धरना प्रदर्शन असहयोग आंदोलन जेल भरो आंदोलन करते तो क्या वो 1919 में आजाद हो सकते थे ?
और इतना ही नहीं अंग्रेजों ने अफगानिस्तान को दो टुकड़ों में बांटने की हिम्मत भी नहीं किया
एक और देश के आजादी की कहानी बड़ी रोचक है और वह है इजिप्ट यानी मिश्र जितने भी अंग्रेजों से 1922 में ही आजादी ले लिया
लेकिन स्वेज कैनाल जिसे फ्रांस ब्रिटेन और कुछ यूरोपियन देशों ने मिलकर बनाया था उस पर 1956 तक अधिकार अंग्रेजों का ही रहा वहां पर ब्रिटिश सेना तैनात रहती थी जो इस बात का निर्णय करती थी कि कौन सा जहाज स्वेज कैनाल से होकर जाएगा और कौन सा जहाज नहीं जाएगा और स्वेज कैनाल से जो टोल वसूला जाता था वह ब्रिटिश सरकार ही टोल वसूलती थी
इजिप्ट ने कई बार स्वेज कैनाल पर अपना हक जताया लेकिन अंग्रेजों ने उन्हें नही दिया
फिर बाद में अंग्रेजों ने 1950 में इजिप्ट से एक समझौता किया कि 99 साल के पट्टे के बाद स्वेज कैनाल पर इजिप्ट का अधिकार हो जाएगा
फिर 1956 में सेना के कर्नल अब्दुल नासिर तख्ता पलटकर इजिप्ट के राष्ट्रपति बने और उन्होंने कहा कि हम 99 साल इंतजार नहीं कर सकते और उन्होंने स्वेज कैनाल का राष्ट्रीयकरण कर दिया और स्वेज कैनाल के पास जितनी भी अंग्रेजों की सेना थी उन पर हमला करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया और ब्रिटेन और फ्रांस इजिप्ट का कुछ नहीं बिगाड़ सकी और तब से आज तक स्वेज कैनाल इजिप्ट का है और इजिप्ट की रेवेन्यू में 30% हिस्सा स्वेज कैनाल से आता है
सोचिए अगर कर्नल नासिर अंग्रेजों की सेना के सामने धरना देते प्रदर्शन देते अनशन करते तो क्या स्वेज कैनाल पर इजिप्ट का कभी अधिकार हो सकता था ??
इराक भी अंग्रेजों का गुलाम था और इराक में भी भारत की तरह कई धर्मों के लोग रहते थे फिर भी इराक ने लड़कर 1932 में ही आजादी ले लिया हालांकि अंग्रेज चाहते थे कि इराक को दो भाग में तोड़कर एक कुर्दिस्तान बना दिया जाए लेकिन इराक में कोई नेहरू और गांधी नहीं था इसीलिए इराक का विभाजन नहीं हुआ
अफसोस भारत के इतिहास के सबसे बड़े विलेन को हमें भारत के इतिहास का महान व्यक्ति और स्वतंत्र भारत का निर्माता बताया जाता है!

क्या सामान्य जाति का होना ही गुनाह है❓❓आरक्षण समाज के लिए जहर है यदि इसे अब बन्द न किया गया तो यह समाज के सबसे प्रभावी स...
02/11/2021

क्या सामान्य जाति का होना ही गुनाह है❓❓
आरक्षण समाज के लिए जहर है यदि इसे अब बन्द न किया गया तो यह समाज के सबसे प्रभावी समाज को खत्म कर देगा...........

पिछले कुछ दिनों से टी वी चैनलों पर वीर  सावरकर को लेकर बहुत बहस चल रही है...कौन थे वीर सावरकर...? आइये जानते हैं।सिर्फ 2...
20/10/2021

पिछले कुछ दिनों से टी वी चैनलों पर वीर सावरकर को लेकर बहुत बहस चल रही है...कौन थे वीर सावरकर...? आइये जानते हैं।

सिर्फ 25 बातें पढ़कर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो उठेगा...इसको पढ़े बिना स्वतंत्रता संग्राम का ज्ञान अधूरा है।

आइए जानते हैं एक ऐसे महान क्रांतिकारी के बारे में जिनका नाम इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया। जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के द्वारा इतनी यातनाएं झेलीं कि वीर सावरकर के बारे में कल्पना करके ही कायरों में सिहरन पैदा हो जायेगी......

जिनका नाम लेने मात्र से आज भी हमारे देश के राजनेता भयभीत होते हैं क्योंकि उन्होंने माँ भारती की निस्वार्थ सेवा की थी।
वो थे हमारे परमवीर सावरकर....

1. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोकसभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें?
क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन पर ब्रिटेन में शोक सभा हुई...?

2. वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ!

3. विदेशी वस्त्रों की पहली होली पूना में 7 अक्तूबर 1905 को वीर सावरकर ने जलाई थी!

4. वीर सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों का दहन किया, तब बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी जबकि इस घटना की दक्षिण अफ्रीका के अपने पत्र ‘इन्डियन ओपीनियन’ में गाँधी ने निंदा की थी।

5. वीर सावरकर द्वारा विदेशी वस्त्र दहन की इस प्रथम घटना के 16 वर्ष बाद गाँधी उनके मार्ग पर चले और 11 जुलाई 1921 को मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया।

6. सावरकर पहले भारतीय थे जिनको 1905 में विदेशी वस्त्र दहन के कारण पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया और दस रूपये जुर्माना किया… इसके विरोध में हड़ताल हुई…
स्वयं तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर के पक्ष में सम्पादकीय लिखा।

7. वीर सावरकर ऐसे पहले बैरिस्टर थे जिन्होंने 1909 में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफ़ादार होने की शपथ नहीं ली… इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नहीं दिया गया।

8. वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा ग़दर कहे जाने वाले संघर्ष को ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ नामक ग्रन्थ लिखकर सिद्ध कर दिया।

10. ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विदेशों में छापा गया और भारत में भगत सिंह ने इसे छपवाया था जिसकी एक एक प्रति तीन-तीन सौ रूपये में बिकी थी।
भारतीय क्रांतिकारियों के लिए यह पवित्र गीता थी… पुलिस छापों में देशभक्तों के घरों में यही पुस्तक मिलती थी।

11. वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे।

12. सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जिनका मुकद्दमा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला, मगर ब्रिटेन और फ्रांस की मिलीभगत के कारण उनको न्याय नहीं मिला और बंदी बनाकर भारत लाया गया।

13. वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी और भारत के पहले राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने दो आजन्म कारावास की सजा सुनाई थी।

14. वीर सावरकर पहले ऐसे देशभक्त थे जो दो जन्म कारावास की सजा सुनते ही हंसकर बोले - “चलो, ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया”।

15. वीर सावरकर पहले राजनैतिक बंदी थे जिन्होंने काला पानी की सज़ा के समय 10 साल से भी अधिक समय तक आज़ादी के लिए कोल्हू चलाकर 30 पोंड तेल प्रतिदिन निकाला।

16. वीर सावरकर काला पानी में पहले ऐसे कैदी थे जिन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकर कोयले से कवितायें लिखीं और 6000 पंक्तियाँ याद रखी।

17. वीर सावरकर पहले देशभक्त लेखक थे, जिनकी लिखी हुई पुस्तकों पर आज़ादी के बाद कई वर्षों तक प्रतिबन्ध लगा रहा।

18. वीर सावरकर पहले विद्वान लेखक थे जिन्होंने हिन्दू को परिभाषित करते हुए लिखा कि :–

‘आसिन्धु सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारत भूमिका,
पितृभू: पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरितीस्मृतः।

अर्थात समुद्र से हिमालय तक भारत भूमि जिसकी पितृभूमि है,जिसके पूर्वज यहीं पैदा हुए हैं व यही पुण्य भूमि है,जिसके तीर्थ भारत भूमि में ही हैं,वही हिन्दू है।

19.वीर सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सत्ता ने 30 वर्षों तक जेलों में रखा तथा आजादी के बाद 1948 में नेहरु सरकार ने गाँधी वध की आड़ में लाल किले में बंद रखा पर न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा कर दिया। नेहरू उनके राष्ट्रवादी विचारों से डरता था।

20. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे जब उनका 26 फरवरी 1966 को उनका स्वर्गारोहण हुआ तब भारतीय संसद में कुछ सांसदों ने शोक प्रस्ताव रखा तो यह कहकर रोक दिया गया कि वे संसद सदस्य नहीं थे जबकि चर्चिल की मौत पर शोक मनाया गया था।

21. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त स्वातंत्र्य वीर थे जिनके मरणोपरांत 26 फरवरी 2003 को उसी संसद में मूर्ति लगी जिसमें कभी उनके निधन पर शोक प्रस्ताव भी रोका गया था।

22. वीर सावरकर ऐसे पहले राष्ट्रवादी विचारक थे जिनके चित्र को संसद भवन में लगाने से रोकने के लिए कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी उर्फ एंटोनिया माइनो ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा लेकिन राष्ट्रपति डॉ.अब्दुल कलाम ने सुझाव पत्र नकार दिया और वीर सावरकर के चित्र अनावरण राष्ट्रपति ने अपने कर-कमलों से किया।

23. वीर सावरकर पहले ऐसे राष्ट्रभक्त हुए जिनके शिलालेख को अंडमान द्वीप की सेल्युलर जेल के कीर्ति स्तम्भ से UPA सरकार के मंत्री मणिशंकर अय्यर ने हटवा दिया था और उसकी जगह गांधी का शिलालेख लगवा दिया था।

24. वीर सावरकर ने दस साल स्वतंत्रता के लिए काला पानी में कोल्हू चलाया था जबकि गाँधी ने काला पानी की उस जेल में कभी दस मिनट चरखा नहीं चलाया।

25. वीर सावरकर माँ भारती के पहले सपूत थे जिन्हें जीते जी और मरने के बाद भी आगे बढ़ने से रोका गया… पर आश्चर्य की बात यह है कि इन सभी विरोधों के घोर अंधेरे को चीरकर आज वीर सावरकर सूर्य के समान सभी में लोकप्रिय और युवाओं के आदर्श बन रहे हैं।

पूरा संसार बिजली के संकट से जूझ रहा है
14/10/2021

पूरा संसार बिजली के संकट से जूझ रहा है

सन् 1840 में काबुल में युद्ध में 8000 पठान मिलकर भी 1200 राजपूतो का मुकाबला 1 घंटे भी नही कर पाये।वही इतिहासकारो का कहना...
02/09/2021

सन् 1840 में काबुल में युद्ध में 8000 पठान मिलकर भी 1200 राजपूतो का मुकाबला 1 घंटे भी नही कर पाये।
वही इतिहासकारो का कहना था की चित्तोड की तीसरी लड़ाई जो 8000 राजपूतो और 60000 मुगलो के मध्य हुयी थी वहा अगर राजपूत 15000 राजपूत होते तो अकबर भी जिंदा बचकर नहीं जाता।
इस युद्ध में 48000 सैनिक मारे गए थे जिसमे 8000
राजपूत और 40000 मुग़ल थे वही 10000 के करीब
घायल थे।
और दूसरी तरफ गिररी सुमेल की लड़ाई में 15000
राजपूत 80000 तुर्को से लडे थे, इस पर घबराकर शेर
शाह सूरी ने कहा था "मुट्टी भर बाजरे (मारवाड़)
की खातिर हिन्दुस्तान की सल्लनत खो बैठता"
उस युद्ध से पहले जोधपुर महाराजा मालदेव जी नहीं गए
होते तो शेर शाह ये बोलने के लिए जीवित भी नही
रहता।
इस देश के इतिहासकारो ने और स्कूल कॉलेजो की
किताबो मे आजतक सिर्फ वो ही लडाई पढाई
जाती है जिसमे हम कमजोर रहे,
वरना बप्पा रावल और राणा सांगा जैसे योद्धाओ का नाम तक सुनकर मुगल की औरतो के गर्भ गिर जाया करते थे, रावत रत्न सिंह चुंडावत की रानी हाडा का त्यागपढाया नही गया जिसने अपना सिर काटकर दे दिया था।
पाली के आउवा के ठाकुर खुशहाल सिंह
को नही पढाया जाता, जिन्होंने एक अंग्रेज के अफसर का सिर काटकर किले पर लटका दिया था।
जिसकी याद मे आज भी वहां पर मेला लगता है। दिलीप सिंह जूदेव का नही पढ़ाया जाता जिन्होंने एक लाख आदिवासियों को फिर से हिन्दू बनाया था।
महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर
महाराणा प्रतापसिंह
महाराजा रामशाह सिंह तोमर
वीर राजे शिवाजी
राजा विक्रमाद्तिया
वीर पृथ्वीराजसिंह चौहान
हमीर देव चौहान
भंजिदल जडेजा
राव चंद्रसेन
वीरमदेव मेड़ता
बाप्पा रावल
नागभट प्रतिहार(पढियार)
मिहिरभोज प्रतिहार(पढियार)
राणा सांगा
राणा कुम्भा
रानी दुर्गावती
रानी पद्मनी
रानी कर्मावती
भक्तिमति मीरा मेड़तनी
वीर जयमल मेड़तिया
कुँवर शालिवाहन सिंह तोमर
वीर छत्रशाल बुंदेला
दुर्गादास राठौर
कुँवर बलभद्र सिंह तोमर
मालदेव राठौर
महाराणा राजसिंह
विरमदेव सोनिगरा
राजा भोज
राजा हर्षवर्धन बैस
बन्दा सिंह बहादुर
इन जैसे महान योद्धाओं को नही पढ़ाया/बताया जाता है, जिनके नाम के स्मरण मात्र से ही शत्रुओं के शरीर में आज भी कंपकंपी शुरू हो जाती 🚩

 #आरक्षण_पर_तीन_अलग_अलग_खबरें 1-: समान्य वर्ग की युवती ने 100% अंक हासिल किये फिर भी नही मिली नियुक्ति!2-: संस्कृत विषय ...
02/09/2021

#आरक्षण_पर_तीन_अलग_अलग_खबरें
1-: समान्य वर्ग की युवती ने 100% अंक हासिल किये फिर भी नही मिली नियुक्ति!

2-: संस्कृत विषय में 160 अंकों में 10 अंक हासिल करने वाले बनेंगे लेक्चरर,
इसमें समझने वाली बात ये है कि 160 में 10 अंक से ज्यादा तो एक भैंस चराने वाला तुक्का मारकर ला सकता है तो क्या वो उन छात्रों के पढ़ाने के योग्य हो गया जो भविष्य में हमारे राष्ट्र के निर्माता होंगे?

3-: MPPCS से हो रही भर्तियों में समान्य वर्ग का एक भी पद नही,

Address

Hamirpur

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when आरक्षण विरोधी वाहिनी posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share

Category