29/08/2022
#गीत
#निश्छल
#बचपन
#बच्चे
#जीवटता
कोरे कागज से बच्चे हैं,जो लिख दोगे लिख जाएगा।
मन के सादे-सच्चे हैं,जो लिख डोगे लिख जाएगा।।
चाँद-सितारे,सूरज,बादल,ख़्वाब में परियाँ आती हैं।
जादू के किस्से सारे हैं,फ्रोजन,मुअना आती हैं।
डोरा,ओबोचामा,जैरी,टॉम-सी नटखट मस्ती भी।
तरुवर जैसे पर-उपकारी,और हिमालय-सी हस्ती भी।
मिश्री के गुलबट्टे हैं,जो लिख दोगे लिख जाएगा।।
बागों की कलियों के जैसे,निश्छल इनके तन-मन हैं।
रंगबिरंगी तितली जैसे,पावन इनके तन-मन हैं।
कच्ची माटी से कोमल हैं,ढलकर दीपकदान बनें।
करके अच्छे कर्मों से फिर,नेक-हृदयी इंसान बनें।
मन के इतने अच्छे हैं,जो लिख दोगे लिख जाएगा।।
तर्क विवेक विचार करें,ख़्वाब पतंगों के जैसे।
हँसमुख रहते रहें सदा,संत-मलंगों के जैसे।
शैतान बड़े हैं लेकिन फिर भी,मन भावों से भरा हुआ।
पल में रोते पल में हँसते, मन घावों से हरा हुआ।
सूतफेनियों के लच्छे,जो लिख दोगे लिख जाएगा।।
कितना प्यारा बचपन होता,राग द्वेष का भाव नहीं।
चंचलता के उदगम से हैं,और कोई अभाव नहीं।
जीवन जीवटता से जीते,होठों पे मुस्कान रहे बस।
कभी तो ज्ञानी बन जाते हैं,जानबूझ अज्ञान रहे बस।
फूलों के गुलदस्ते हैं,जो लिख दोगे लिख जाएगा।।
अनिल कुमार निश्छल
Newws Gaaon