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25/10/2025

सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने पर प्रकाशित किया गया
60 साल तक भारत में प्रतिबंधित रहा नाथूराम गोडसे
का अंतिम भाषण -
#मैंने_गांधी_को_क्यों_मारा !

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोड़से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी लेकिन नाथूराम गोड़से घटना स्थल से फरार नही हुए बल्कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया,

नाथूराम गोड़से समेत 17 देशभक्तों पर गांधी की हत्या का मुकदमा चलाया गया इस मुकदमे की सुनवाई के दरम्यान #न्यायमूर्ति #खोसला से #नाथूराम जी ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर जनता को सुनाने की अनुमति माँगी थी जिसे न्यायमूर्ति ने स्वीकार कर लिया था पर यह कोर्ट परिसर तक ही सिमित रह गयी क्योकि सरकार ने नाथूराम के इस वक्तव्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया था लेकिन नाथूराम के छोटे भाई और गांधी की हत्या के सह-अभियोगी गोपाल गोड़से ने 60 साल की लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विजय प्राप्त की और नाथूराम का वक्तव्य प्रकाशित किया गया l

#मैंने_गांधी_को_क्यों_मारा*

नाथूराम गोड़से ने गांधी हत्या के पक्ष में अपनी
150 दलीलें न्यायलय के समक्ष प्रस्तुति की
नाथूराम गोड़से के वक्तव्य के कुछ मुख्य अंश,

नाथूराम जी का विचार था कि गांधी की अहिंसा हिन्दुओं
को कायर बना देगी कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी को मुसलमानों ने निर्दयता से मार दिया था महात्मा गांधी सभी हिन्दुओं से गणेश शंकर विद्यार्थी की तरह अहिंसा के मार्ग पर चलकर बलिदान करने की बात करते थे नाथूराम गोड़से को भय था गांधी की ये अहिंसा वाली नीति हिन्दुओं को
कमजोर बना देगी और वो अपना अधिकार कभी
प्राप्त नहीं कर पायेंगे,

1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोलीकांड
के बाद से पुरे देश में ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ
आक्रोश उफ़ान पे था,

भारतीय जनता इस नरसंहार के #खलनायक_जनरल_डायर
पर अभियोग चलाने की मंशा लेकर गांधी के पास गयी
लेकिन गांधी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन
देने से साफ़ मना कर दिया,

महात्मा गांधी ने खिलाफ़त आन्दोलन का समर्थन करके भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का जहर घोल दिया महात्मा गांधी खुद को मुसलमानों का हितैषी की तरह पेश करते थे वो #केरल_के_मोपला_मुसलमानों द्वारा वहाँ के
1500 हिन्दूओं को मारने और 2000 से अधिक हिन्दुओं
को मुसलमान बनाये जाने की घटना का विरोध
तक नहीं कर सके,

कांग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में #नेताजी_सुभाष_चन्द्रबोस
को बहुमत से काँग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गांधी ने #अपने_प्रिय_सीतारमय्या का समर्थन कर रहे थे गांधी ने सुभाष चन्द्र बोस से जोर जबरदस्ती करके इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर कर दिया...
23 मार्च 1931 को भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गयी पूरा देश इन वीर बालकों की फांसी को
टालने के लिए महात्मा गांधी से प्रार्थना कर रहा था लेकिन गांधी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए देशवासियों की इस उचित माँग को अस्वीकार कर दिया,

गांधी #कश्मीर_के_हिन्दू_राजा_हरि_सिंह से कहा कि
#कश्मीर_मुस्लिम_बहुल_क्षेत्र_है_अत:वहां का शासक
कोई मुसलमान होना चाहिए अतएव राजा हरिसिंह को
शासन छोड़ कर काशी जाकर प्रायश्चित करने जबकि हैदराबाद के निज़ाम के शासन का गांधी जी ने समर्थन किया था जबकि हैदराबाद हिन्दू बहुल क्षेत्र था गांधी जी की नीतियाँ
धर्म के साथ बदलती रहती थी उनकी मृत्यु के पश्चात
सरदार पटेल ने सशक्त बलों के सहयोग से हैदराबाद को
भारत में मिलाने का कार्य किया गांधी के रहते ऐसा करना संभव नहीं होता
पाकिस्तान में हो रहे भीषण रक्तपात से किसी तरह से अपनी जान बचाकर भारत आने वाले विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली मुसलमानों ने मस्जिद में रहने वाले हिन्दुओं का विरोध किया जिसके आगे गांधी नतमस्तक हो गये और गांधी ने उन विस्थापित हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में सड़कों पर रात बिताने पर मजबूर किया गया,

महात्मा गांधी ने दिल्ली स्थित मंदिर में अपनी प्रार्थना सभा
के दौरान नमाज पढ़ी जिसका मंदिर के पुजारी से लेकर
तमाम हिन्दुओं ने विरोध किया लेकिन गांधी ने इस विरोध को दरकिनार कर दिया लेकिन महात्मा गांधी एक बार भी किसी मस्जिद में जाकर गीता का पाठ नहीं कर सके,

लाहौर कांग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से विजय
प्राप्त हुयी किन्तु गान्धी अपनी जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया गांधी अपनी मांग
को मनवाने के लिए अनशन-धरना-रूठना किसी से बात
न करने जैसी युक्तियों को अपनाकर अपना काम
निकलवाने में माहिर थे इसके लिए वो नीति-अनीति का लेशमात्र विचार भी नहीं करते थे,

14 जून 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था लेकिन गांधी ने वहाँ पहुँच कर
प्रस्ताव का समर्थन करवाया यह भी तब जबकि गांधी
ने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश
पर होगा न सिर्फ देश का विभाजन हुआ बल्कि लाखों
निर्दोष लोगों का कत्लेआम भी हुआ लेकिन गांधी
ने कुछ नहीं किया,

धर्म-निरपेक्षता के नाम पर मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के जन्मदाता महात्मा गाँधी ही थे जब मुसलमानों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाये जाने का विरोध किया तो महात्मा गांधी ने सहर्ष ही इसे स्वीकार कर लिया और हिंदी की जगह हिन्दुस्तानी (हिंदी+उर्दू की खिचड़ी) को बढ़ावा देने लगे बादशाह राम और बेगम सीता जैसे शब्दों का
चलन शुरू हुआ,
कुछ एक मुसलमान द्वारा वंदेमातरम् गाने का विरोध करने
पर महात्मा गांधी झुक गये और इस पावन गीत को भारत
का राष्ट्र गान नहीं बनने दिया,

गांधी ने अनेक अवसरों पर शिवाजी महाराणा प्रताप व
गुरू गोबिन्द सिंह को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा वही दूसरी
ओर गांधी मोहम्मद अली जिन्ना को क़ायदे-आजम
कहकर पुकारते था,

कांग्रेस ने 1931 में स्वतंत्र भारत के राष्ट्र ध्वज बनाने के
लिए एक समिति का गठन किया था इस समिति ने
सर्वसम्मति से #चरखा अंकित भगवा वस्त्र को भारत का
राष्ट्र ध्वज के डिजाइन को मान्यता दी किन्तु गांधी जी
की जिद के कारण उसे बदल कर तिरंगा कर दिया गया
जब #सरदार_वल्लभ_भाई_पटेल के नेतृत्व में सोमनाथ
मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया तब गांधी जी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य
भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव
को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला
भारत को स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान को एक समझौते के तहत 75 करोड़ रूपये देने थे भारत ने 20 करोड़ रूपये
दे भी दिए थे लेकिन इसी बीच 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने आक्रमण से क्षुब्ध होकर 55 करोड़ की राशि न देने का निर्णय लिया |
जिसका #महात्मा_गांधी ने
विरोध किया और शुरू कर दिया जिसके परिणामस्वरूप 55 करोड़ की राशि भारत ने पाकिस्तान
को दे दी महात्मा गांधी भारत के नहीं अपितु पाकिस्तान
के राष्ट्रपिता थे जो हर कदम पर पाकिस्तान के पक्ष में
खड़े रहे फिर चाहे पाकिस्तान की मांग जायज हो या
नाजायज गांधी ने कदाचित इसकी परवाह नहीं की
उपरोक्त घटनाओं को #देशविरोधी मानते हुए #नाथूराम
गोड़से जी ने महात्मा गांधी की हत्या को न्यायोचित
ठहराने का प्रयास किया,

#नाथूराम ने न्यायालय में स्वीकार किया कि माहात्मा गांधी बहुत बड़े देशभक्त थे उन्होंने निस्वार्थ भाव से देश सेवा की
मैं उनका बहुत आदर करता हूँ लेकिन किसी भी देशभक्त
को देश के टुकड़े करने के एक समप्रदाय के साथ पक्षपात करने की अनुमति नहीं दे सकता हूँ गांधी की हत्या के
सिवा मेरे पास कोई दूसरा उपाय नहीं था!!
#नाथूराम_गोड़सेजी द्वारा अदालत में
दिए बयान के मुख्य अंश,
मैने गांधी को नहीं मारा
मैने गांधी का वध किया है,
वो मेरे दुश्मन नहीं थे परन्तु उनके निर्णय राष्ट्र के
लिए घातक साबित हो रहे थे,
जब व्यक्ति के पास कोई रास्ता न बचे तब वह मज़बूरी
में सही कार्य के लिए गलत रास्ता अपनाता है,
मुस्लिम लीग और पाकिस्तान निर्माण की गलत निति
के प्रति #गांधी की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने ही मुझे
मजबूर किया,
पाकिस्तान को 55 करोड़ का भुगतान करने की
गैरवाजिब मांग को लेकर गांधी अनशन पर बैठे..
बटवारे में पाकिस्तान से आ रहे हिन्दुओ की आप बीती
और दुर्दशा ने मुझे हिला के रख दिया था,
अखंड हिन्दू राष्ट्र गांधी के कारण मुस्लिम लीग
के आगे घुटने टेक रहा था,
बेटो के सामने माँ का खंडित होकर टुकड़ो में बटना
विभाजित होना असहनीय था,
अपनी ही धरती पर हम परदेशी बन गए थे,
मुस्लिम लीग की सारी गलत मांगो को
गांधी मानते जा रहे थे,
मैने ये निर्णय किया कि भारत माँ को अब और
विखंडित और दयनीय स्थिति में नहीं होने देना है
तो मुझे गांधी को मारना ही होगा
और मैने इसलिए गांधी को मारा!!
मुझे पता है इसके लिए मुझे फाँसी ही होगी
और मैं इसके लिए भी तैयार हूं,
और हां यदि मातृभूमि की रक्षा करना अपराध हे
तो मै यह अपराध बार बार करूँगा हर बार करूँगा,
और जब तक सिन्ध नदी पुनः अखंड हिन्द में न बहने
लगे तब तक मेरी अस्थियो का विसर्जन नहीं करना!!
मुझे फाँसी देते वक्त मेरे एक हाथ में केसरिया ध्वज
और दूसरे हाथ में #अखंड_भारत का नक्शा हो,
मै फाँसी चढ़ते वक्त अखंड भारत की जय
जयकार बोलना चाहूँगा!!
हे भारत माँ मुझे दुःख है मै तेरी इतनी
ही सेवा कर पाया!!
#नाथूराम_गोडसे

🕉️🙏 वंदे मातरम 🚩🇮🇳
🇮🇳 जय हिंद - जय भारत 🙏

04/04/2025

The emotional story of Bhitoli 🥹

Long time ago, brothers and sisters named Debuli and Naria lived in a distant village of the mountain. Both of them spent their childhood very affectionately, my brother was very dear to Debuli, Nariya also believed his sister a lot.

Childhood passed, when both of them grew up, Debuli got married and her in-laws stayed far away from her mother-in-laws. Then it didn't happen like today that if you got married, then sometimes video call and sometimes WhatsApp message should be sent to sister. Then there were so many work of women in the mountain that going to mother-in-laws to her mother-in-laws was going to be disturbed.

So when Naria got a lot of naria's sister, her injury (mother) said that it has been many days, you remember Debuli's naria everyday. Do this, I will tie a fanch of goods for Debuli, you go to Debuli's in-laws and visit him and give him this goods too.

Naria found the injury right. Next day Ija made Halua, Puri, Pue etc for Debuli, put sari-bindi and some fruits. And put all the things in a crawl and put the naria to the in-laws of Chyeli (daughter).

There were neither roads nor anything in the mountain, the woman had to walk till her sister's in-laws. It took him two days to walk and when he reached his sister Debuli's house, he saw that Debuli has no one. When he went to the tasting (room) I saw Debuli is sleeping while sitting. Nariya kept her necklace there and started waiting for her sister to wake up.

He thought he was working all day, he must have had a chance to sit down so this poor girl woke up, now I pick her up so her momentary rest will be spoiled. He gave a little and sat down and did not pick up Debuli.

When Debuli didn't wake up, he went back home in time without talking back, he left home keeping the goods he brought for Debuli there.

When Debuli's eyes opened after Naria left, the goods kept in front of me, and after seeing the dishes made by Iza, she understood that her eyes were caught, brother Naria has returned home and went back to her mother.

Debuli was very sad about this, and started thinking that my brother would have come hungry and thirsty on foot but I couldn't even feed him a glass of water. Na fed him something. This made me so sad, she hurt me so bad thinking that I don't get sleep so Naria went back without waking me up. She started looking far and far in this sorrow, but brother had gone long ago.

After this, Debuli started crying saying "Bhai hungry-mai siti" means brother was hungry and I kept sleeping. After this, he got rid of this and lost his life with grief.

It is said that in next life Debuli became a bird named Ghughuti which sounds "Bhai Bhukhon-Main Siti" in Chaitra month.

Since then, Bhitoli's excuses have become such a tradition that a married woman is waiting eagerly for her mother's Bhitoli.

So friends, this was the story, now you must tell by commenting whether you give Bhitoli to your sister or not? Married girls also comment how much do you wait for Bhitoli...

Happy Bhitoli month to all Uttarakhand brothers and sisters from Gaon Wala.

19/05/2022

जब एक शख्स लगभग पैंतालीस वर्ष के थे तब उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया था। लोगों ने दूसरी शादी की सलाह दी परन्तु उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि पुत्र के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास हैं, इसी के साथ पूरी जिन्दगी अच्छे से कट जाएगी।

पुत्र जब वयस्क हुआ तो पूरा कारोबार पुत्र के हवाले कर दिया। स्वयं कभी अपने तो कभी दोस्तों के आॅफिस में बैठकर समय व्यतीत करने लगे।

पुत्र की शादी के बाद वह ओर अधिक निश्चित हो गये। पूरा घर बहू को सुपुर्द कर दिया।

पुत्र की शादी के लगभग एक वर्ष बाद दोहपर में खाना खा रहे थे, पुत्र भी लंच करने ऑफिस से आ गया था और हाथ–मुँह धोकर खाना खाने की तैयारी कर रहा था।

उसने सुना कि पिता जी ने बहू से खाने के साथ दही माँगा और बहू ने जवाब दिया कि आज घर में दही उपलब्ध नहीं है। खाना खाकर पिताजी ऑफिस चले गये।

थोडी देर बाद पुत्र अपनी पत्नी के साथ खाना खाने बैठा। खाने में प्याला भरा हुआ दही भी था। पुत्र ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और खाना खाकर स्वयं भी ऑफिस चला गया।

कुछ दिन बाद पुत्र ने अपने पिताजी से कहा- ‘‘पापा आज आपको कोर्ट चलना है, आज आपका विवाह होने जा रहा है।’’

पिता ने आश्चर्य से पुत्र की तरफ देखा और कहा-‘‘बेटा मुझे पत्नी की आवश्यकता नही है और मैं तुझे इतना स्नेह देता हूँ कि शायद तुझे भी माँ की जरूरत नहीं है, फिर दूसरा विवाह क्यों?’’

पुत्र ने कहा ‘‘ पिता जी, न तो मै अपने लिए माँ ला रहा हूँ न आपके लिए पत्नी,
*मैं तो केवल आपके लिये दही का इन्तजाम कर रहा हूँ।*

कल से मै किराए के मकान मे आपकी बहू के साथ रहूँगा तथा आपके ऑफिस मे एक कर्मचारी की तरह वेतन लूँगा ताकि *आपकी बहू को दही की कीमत का पता चले।’’*
*👌Best message👌*

*-माँ-बाप हमारे लिये*
*ATM कार्ड बन सकते है,*

*तो ,हम उनके लिए*
*Aadhar Card तो बन ही सकते है. 💕®💕💕💕

16/04/2022

काठगोदाम मुम्बई साप्ताहिक ट्रैन।

साथियों आप सभी को सूचित करते हुए बहुत ही हर्ष हो रहा है भारत सरकार का रेल मंत्रालय नई दिल्ली ने मुंबई सेंट्रल से काठगोदाम के लिए एक सप्ताहिक होलीडे स्पेशल गाड़ी दिनांक 20 अप्रैल 2022 से आरंभ कर रहा है जिस का विवरण प्रस्तुत है ।
गाड़ी क्रमांक 09075 Dn मुंबई सेंट्रल से प्रत्येक बुधवार को सुबह 11.00 am बजे छूटेगी और गुरुवार को 14.30 pm काठगोदाम पहुंचेगी।
गाड़ी क्रमांक 09076 Up
काठगोदाम से प्रत्येक गुरुवार को 15.30 pm बजे छूटेगी और शुक्रवार को रात्रि 20.55 pm बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी ।
गाड़ी वाया मथुरा कासगंज ,बरेली होते हुए अपने गंतव्य स्थान पर पहुचेगी ।

15/04/2022

"बौद्धिक पतन"

पेठा,बेसन के लड्डू,गाजर का हलवा,रसगुल्ला,गुलाब जामुन,जलेबी,कलाकंद ,खीर, 100 तरह के पेडे,काजू कतरी,रसमलाई,सोहन हलवा,बूंदी,बरफी,50 तरह के श्रीखंड,पूरण पोली,आम रस,दुधि हलवा,गोल पापड़ी,
मोहन थाल,सक्कर पारा तिलगुड़ के लड्डू,मुम्बई आइस हलवा,चीकू बर्फी,चूरमा लड्डू,घेबर,घुघरा, हलवा खजूर पाक,मगज पाक,रेवडी........
जैसी हज़ारो शुद्ध ताजी मिठाईया जिस देश के लोग बनाना और खाना जानते हो, उस देश में चॉकलेट देकर कुछ मीठा हो जाये कह के करोड़ों की चॉकलेट बेच के, विदेशी कम्पनियों का हमारा करोड़ो रूपया लूट लेना ये दर्शाता है कि हमारा कितना #बौद्धिक_पतन हो गया है ।

30/11/2021

हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे थक हार कर वापस उनकी ही राह पर वापस आना पड़ रहा है।

1. मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों तक और फिर कैंसर के खौफ से दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ जाना।

2. अंगूठाछाप से दस्तखतों (Signatures) पर और फिर अंगूठाछाप (Thumb Scanning) पर आ जाना।

3. फटे हुए सादा कपड़ों से साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़ों पर और फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ लेना।

4. सूती से टैरीलीन, टैरीकॉट और फिर वापस सूती पर आ जाना ।

5. ज्यादा मेहनत वाली ज़िंदगी से घबरा कर पढ़ना लिखना और फिर IIM MBA करके आर्गेनिक खेती पर पसीने बहाना।

6. क़ुदरती से प्रोसेसफ़ूड (Canned Food & packed juices) पर और फिर बीमारियों से बचने के लिए दोबारा क़ुदरती खानों पर आ जाना।

7. पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल ना करके ब्रांडेड (Branded) पर और फिर आखिरकार जी भर जाने पर पुरानी (Antiques) पर उतरना।

8. बच्चों को इंफेक्शन से डराकर मिट्टी में खेलने से रोकना और फिर घर में बंद करके फिसड्डी बनाना और होश आने पर दोबारा Immunity बढ़ाने के नाम पर मिट्टी से खिलाना....

9. गाँव, जंगल, से डिस्को पब और चकाचौंध की और भागती हुई दुनियाँ की और से फिर मन की शाँति एवं स्वास्थ के लिये शहर से जँगल गाँव की ओर आना।

इससे ये निष्कर्ष निकलता है कि टेक्नॉलॉजी ने जो दिया उससे बेहतर तो प्रकृति ने पहले से दे रखा था।
✍🙏

06/10/2021

डालडा वाले डालमिया सेठ..

डालडा हिन्दुस्तान लिवर का देश का पहला वनस्पति घी था, जिसके मालिक थे स्वतन्त्र भारत के उस समय के सबसे धनी सेठ रामकृष्ण डालमिया।

टाटा, बिड़ला और डालमिया ये तीन नाम बचपन से सुनते आए है। मगर डालमिया घराना अब न कही व्यापार में नजर आया और न ही कहीं इसका नाम सुनाई देता है। वास्तव में डालमिया जी ने स्वामी करपात्री जी महाराज के साथ मिलकर गौहत्या एवं हिंदू कोड बिल पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर नेहरू से कड़ी टक्कर ले ली थी।

जहां तक रामकृष्ण डालमिया का संबंध है, वे राजस्थान के एक कस्बा चिड़ावा में एक गरीब अग्रवाल घर में पैदा हुए थे और मामूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने मामा के पास कोलकाता चले गए थे।

वहां पर बुलियन मार्केट में एक Salesman के रूप में उन्होंने अपने व्यापारिक जीवन का शुरुआत किया था। भाग्य ने डटकर डालमिया का साथ दिया और कुछ ही वर्षों के बाद वे देश के सबसे बड़े उद्योगपति बन गए।
उनका औद्योगिक साम्राज्य देशभर में फैला हुआ था जिसमें समाचारपत्र, बैंक, बीमा कम्पनियां, विमान सेवाएं, सीमेंट, वस्त्र उद्योग, खाद्य पदार्थ आदि सैकड़ों उद्योग शामिल थे।

डालमिया सेठ के दोस्ताना रिश्ते देश के सभी बड़े-बड़े नेताओं से थी और वे उनकी खुले हाथ से आर्थिक सहायता किया करते थे। इसके बाद एक घटना ने नेहरू को डालमिया का जानी दुश्मन बना दिया।

कहा जाता है कि डालमिया एक कट्टर सनातनी हिन्दू थे और उनके विख्यात हिन्दू संत स्वामी करपात्री जी महाराज से घनिष्ट संबंध थे। करपात्री जी महाराज ने 1948 में एक राजनीतिक पार्टी 'राम राज्य परिषद' स्थापित की थी। 1952 के चुनाव में यह पार्टी लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी और उसने 18 सीटों पर विजय प्राप्त की।

हिन्दू कोड बिल और गोवध पर प्रतिबंध लगाने के प्रश्न पर डालमिया से नेहरू की ठन गई। नेहरू हिन्दू कोड बिल पारित करवाना चाहता था, जबकि स्वामी करपात्री जी महाराज और डालमिया सेठ इसके खिलाफ थे।

हिन्दू कोड बिल और गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए स्वामी करपात्रीजी महाराज ने देशव्यापी आंदोलन चलाया, जिसे डालमिया जी ने डटकर आर्थिक सहायता दी। नेहरू के दबाव पर लोकसभा में हिन्दू कोड बिल पारित हुआ, जिसमें हिन्दू महिलाओं के लिए तलाक की व्यवस्था की गई थी।

कहा जाता है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद हिन्दू कोड बिल के सख्त खिलाफ थे, इसलिए उन्होंने इसे स्वीकृति देने से इनकार कर दिया। ज़िद्दी नेहरू ने इसे अपना अपमान समझा और इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पुनः पारित करवाकर राष्ट्रपति के पास भिजवाया।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति को इसकी स्वीकृति देनी पड़ी। इस घटना ने नेहरू को डालमिया का जानी दुश्मन बना दिया। नेहरू के इशारे पर डालमिया के खिलाफ कंपनियों में घोटाले के आरोपों को लोकसभा में जोरदार ढंग से उछाला गया। इन आरोपों के जांच के लिए एक विविन आयोग बना। बाद में यह मामला स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिसमेंट (जिसे आज सी बी आई कहा जाता है) को जांच के लिए सौंप दिया गया। नेहरू ने अपनी पूरी सरकार को डालमिया के खिलाफ लगा दिया। उन्हें हर सरकारी विभाग में प्रधानमंत्री के इशारे पर परेशान और प्रताड़ित करना शुरू किया। उन्हें अनेक बेबुनियाद मामलों में फंसाया गया।

नेहरू की कोप दृष्टि ने एक लाख करोड़ के मालिक डालमिया को दिवालिया बनाकर रख दिया। उन्हें टाइम्स ऑफ़ इंडिया, हिन्दुस्तान लिवर और अनेक उद्योगों को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ा। अदालत में मुकदमा चला और डालमिया को तीन वर्ष कैद की सज़ा सुनाई गई। तबाह हाल और अपने समय के सबसे धनवान व्यक्ति डालमिया को नेहरू की वक्र दृष्टि के कारण जेल की कालकोठरी में दिन व्यतीत करने पड़े।

व्यक्तिगत जीवन में डालमिया बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उन्होंने अच्छे दिनों में करोड़ों रुपये धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए दान में दिये।

इसके अतिरिक्त उन्होंने यह संकल्प भी लिया था कि जबतक इस देश में गोवध पर कानूनन प्रतिबंध नहीं, लगेगा वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। उन्होंने इस संकल्प को अंतिम सांस तक निभाया। गौवंश हत्या विरोध में 1978 में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।

नेहरू के जमाने मे भी 1 लाख करोड़ के मालिक डालमिया को साजिशों में फंसा के नेहरू ने कैसे बर्बाद कर दिया। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिस व्यक्ति ने नेहरू के सामने सिर उठाया उसी को नेहरू ने मिट्टी में मिला दिया। देशवासी प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद और सुभाष बाबू के साथ भी यही हुआ था।

06/10/2021

सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने पर प्रकाशित किया गया
60 साल तक भारत में प्रतिबंधित रहा नाथूराम गोडसे
का अंतिम भाषण -
#मैंने_गांधी_को_क्यों_मारा !

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोड़से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी लेकिन नाथूराम गोड़से घटना स्थल से फरार नही हुए बल्कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया
नाथूराम गोड़से समेत 17 देशभक्तों पर गांधी की हत्या का मुकदमा चलाया गया इस मुकदमे की सुनवाई के दरम्यान #न्यायमूर्ति_खोसला से नाथूराम जी ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर जनता को सुनाने की अनुमति माँगी थी जिसे न्यायमूर्ति ने स्वीकार कर लिया था पर यह कोर्ट परिसर तक ही सिमित रह गयी क्योकि सरकार ने नाथूराम के इस वक्तव्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया था लेकिन नाथूराम के छोटे भाई और गांधी की हत्या के सह-अभियोगी गोपाल गोड़से ने 60 साल की लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विजय प्राप्त की और नाथूराम का वक्तव्य प्रकाशित किया गया l

*मैंने गांधी को क्यों मारा*

नाथूराम गोड़से ने गांधी हत्या के पक्ष में अपनी
150 दलीलें न्यायलय के समक्ष प्रस्तुति की
नाथूराम गोड़से के वक्तव्य के कुछ मुख्य अंश....
नाथूराम जी का विचार था कि गांधी की अहिंसा हिन्दुओं
को कायर बना देगी कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी को मुसलमानों ने निर्दयता से मार दिया था महात्मा गांधी सभी हिन्दुओं से गणेश शंकर विद्यार्थी की तरह अहिंसा के मार्ग पर चलकर बलिदान करने की बात करते थे नाथूराम गोड़से को भय था गांधी की ये अहिंसा वाली नीति हिन्दुओं को कमजोर बना देगी और वो अपना अधिकार कभी प्राप्त नहीं कर पायेंगे...

1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोलीकांड
के बाद से पुरे देश में ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ
आक्रोश उफ़ान पे था...

भारतीय जनता इस नरसंहार के #खलनायक_जनरल_डायर
पर अभियोग चलाने की मंशा लेकर गांधी के पास गयी
लेकिन गांधी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन
देने से साफ़ मना कर दिया ।

महात्मा गांधी ने खिलाफ़त आन्दोलन का समर्थन करके भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का जहर घोल दिया महात्मा गांधी खुद को मुसलमानों का हितैषी की तरह पेश करते थे वो #केरल_के_मोपला_मुसलमानों द्वारा वहाँ के 1500 हिन्दूओं को मारने और 2000 से अधिक हिन्दुओं को मुसलमान बनाये जाने की घटना का विरोध
तक नहीं कर सके कांग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में #नेताजी_सुभाष_चन्द्रबोस को बहुमत से काँग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गांधी ने #अपने_प्रिय_सीतारमय्या का समर्थन कर रहे थे गांधी ने सुभाष चन्द्र बोस से जोर जबरदस्ती करके इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर कर दिया...

23 मार्च 1931 को भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गयी पूरा देश इन वीर बालकों की फांसी को
टालने के लिए महात्मा गांधी से प्रार्थना कर रहा था लेकिन गांधी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए देशवासियों की इस उचित माँग को अस्वीकार कर दिया ।

गांधी #कश्मीर_के_हिन्दू_राजा_हरि_सिंह से कहा कि
#कश्मीर_मुस्लिम_बहुल_क्षेत्र_है_अत:वहां का शासक
कोई मुसलमान होना चाहिए अतएव राजा हरिसिंह को
शासन छोड़ कर काशी जाकर प्रायश्चित करने जबकि हैदराबाद के निज़ाम के शासन का गांधी जी ने समर्थन किया था जबकि हैदराबाद हिन्दू बहुल क्षेत्र था गांधी जी की नीतियाँ धर्म के साथ बदलती रहती थी उनकी मृत्यु के पश्चात सरदार पटेल ने सशक्त बलों के सहयोग से हैदराबाद को भारत में मिलाने का कार्य किया गांधी के रहते ऐसा करना संभव नहीं होता ।

पाकिस्तान में हो रहे भीषण रक्तपात से किसी तरह से अपनी जान बचाकर भारत आने वाले विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली मुसलमानों ने मस्जिद में रहने वाले हिन्दुओं का विरोध किया जिसके आगे गांधी नतमस्तक हो गये और गांधी ने उन विस्थापित हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया महात्मा गांधी ने दिल्ली स्थित मंदिर में अपनी प्रार्थना सभा के दौरान नमाज पढ़ी।

जिसका मंदिर के पुजारी से लेकर तमाम हिन्दुओं ने विरोध किया लेकिन गांधी ने इस विरोध को दरकिनार कर दिया लेकिन महात्मा गांधी एक बार भी किसी मस्जिद में जाकर गीता का पाठ नहीं कर सके
लाहौर कांग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से विजय
प्राप्त हुयी किन्तु गान्धी अपनी जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया गांधी अपनी मांग
को मनवाने के लिए अनशन-धरना-रूठना किसी से बात
न करने जैसी युक्तियों को अपनाकर अपना काम
निकलवाने में माहिर थे इसके लिए वो नीति-अनीति का लेशमात्र विचार भी नहीं करते थे ।

14 जून 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था लेकिन गांधी ने वहाँ पहुँच कर
प्रस्ताव का समर्थन करवाया यह भी तब जबकि गांधी
ने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश
पर होगा न सिर्फ देश का विभाजन हुआ बल्कि लाखों
निर्दोष लोगों का कत्लेआम भी हुआ लेकिन गांधी
ने कुछ नहीं किया....

धर्म-निरपेक्षता के नाम पर मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के जन्मदाता महात्मा गाँधी ही थे जब मुसलमानों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाये जाने का विरोध किया तो महात्मा गांधी ने सहर्ष ही इसे स्वीकार कर लिया और हिंदी की जगह हिन्दुस्तानी (हिंदी+उर्दू की खिचड़ी) को बढ़ावा देने लगे बादशाह राम और बेगम सीता जैसे शब्दों का
चलन शुरू हुआ...

कुछ एक मुसलमान द्वारा वंदेमातरम् गाने का विरोध करने पर महात्मा गांधी झुक गये और इस पावन गीत को भारत का राष्ट्र गान नहीं बनने दिया ।

गांधी ने अनेक अवसरों पर शिवाजी महाराणा प्रताप व
गुरू गोबिन्द सिंह को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा वही दूसरी
ओर गांधी मोहम्मद अली जिन्ना को क़ायदे-आजम
कहकर पुकारते था ।

कांग्रेस ने 1931 में स्वतंत्र भारत के राष्ट्र ध्वज बनाने के
लिए एक समिति का गठन किया था इस समिति ने
सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र को भारत का
राष्ट्र ध्वज के डिजाइन को मान्यता दी किन्तु गांधी जी
की जिद के कारण उसे बदल कर तिरंगा कर दिया गया
जब सरदार वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में सोमनाथ
मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया तब गांधी जी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला ।

भारत को स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान को एक समझौते के तहत 75 करोड़ रूपये देने थे भारत ने 20 करोड़ रूपये दे भी दिए थे लेकिन इसी बीच 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने आक्रमण से क्षुब्ध होकर 55 करोड़ की
राशि न देने का निर्णय लिया | जिसका महात्मा गांधी ने
विरोध किया और आमरण अनशन शुरू कर दिया जिसके परिणामस्वरूप 55 करोड़ की राशि भारत ने पाकिस्तान को दे दी महात्मा गांधी भारत के नहीं अपितु पाकिस्तान के राष्ट्रपिता थे जो हर कदम पर पाकिस्तान के पक्ष में खड़े रहे फिर चाहे पाकिस्तान की मांग जायज हो या नाजायज गांधी ने कदाचित इसकी परवाह नहीं की
उपरोक्त घटनाओं को देशविरोधी मानते हुए नाथूराम
गोड़से जी ने महात्मा गांधी की हत्या को न्यायोचित
ठहराने का प्रयास किया...

नाथूराम ने न्यायालय में स्वीकार किया कि माहात्मा गांधी बहुत बड़े देशभक्त थे उन्होंने निस्वार्थ भाव से देश सेवा की मैं उनका बहुत आदर करता हूँ लेकिन किसी भी देशभक्त को देश के टुकड़े करने के एक समप्रदाय के साथ पक्षपात करने की अनुमति नहीं दे सकता हूँ गांधी की हत्या के सिवा मेरे पास कोई दूसरा उपाय नहीं था...!!

#नाथूराम_गोड़सेजी द्वारा अदालत में
दिए बयान के मुख्य अंश...

मैने गांधी को नहीं मारा
मैने गांधी का वध किया है..

वो मेरे दुश्मन नहीं थे परन्तु उनके निर्णय राष्ट्र के
लिए घातक साबित हो रहे थे...

जब व्यक्ति के पास कोई रास्ता न बचे तब वह मज़बूरी
में सही कार्य के लिए गलत रास्ता अपनाता है...

मुस्लिम लीग और पाकिस्तान निर्माण की गलत निति
के प्रति गांधी की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने ही मुझे
मजबूर किया...

पाकिस्तान को 55 करोड़ का भुगतान करने की
गैरवाजिब मांग को लेकर गांधी अनशन पर बैठे..
बटवारे में पाकिस्तान से आ रहे हिन्दुओ की आपबीती
और दुर्दशा ने मुझे हिला के रख दिया था...

अखंड हिन्दू राष्ट्र गांधी के कारण मुस्लिम लीग
के आगे घुटने टेक रहा था...

बेटो के सामने माँ का खंडित होकर टुकड़ो में बटना
विभाजित होना असहनीय था...

अपनी ही धरती पर हम परदेशी बन गए थे..
मुस्लिम लीग की सारी गलत मांगो को
गांधी मानते जा रहे थे..

मैने ये निर्णय किया कि भारत माँ को अब और
विखंडित और दयनीय स्थिति में नहीं होने देना है
तो मुझे गांधी को मारना ही होगा
और मैने इसलिए गांधी को मारा...!!

मुझे पता है इसके लिए मुझे फाँसी ही होगी
और मैं इसके लिए भी तैयार हूं...

और हां यदि मातृभूमि की रक्षा करना अपराध हे
तो मै यह अपराध बार बार करूँगा हर बार करूँगा ...
और जब तक सिन्ध नदी पुनः अखंड हिन्द में न बहने
लगे तब तक मेरी अस्थियो का विसर्जन नहीं करना...!!

मुझे फाँसी देते वक्त मेरे एक हाथ में केसरिया ध्वज
और दूसरे हाथ में #अखंड_भारत का नक्शा हो...

मै फाँसी चढ़ते वक्त अखंड भारत की जय
जयकार बोलना चाहूँगा...!!

हे भारत माँ मुझे दुःख है मै तेरी इतनी
ही सेवा कर पाया....!!

#नाथूराम_गोडसे

🙏 🙏🙏जय हिंद 🚩🚩

जय हिन्दुस्तान 🙏🙏🙏

24/09/2021
05/09/2021

हमारे उन सभी टीचर्स को दिल से आदरभाव,जिन्होंने हमारी गलती होने पर शहतूत डंडी से हमारी कालाढूंगी तोड़ी ,कान मरोड़े,पेंसिल फंसा कर उंगलियां मरोड़ी,मुर्गा बनाया,गालों पर छापे डाले,यकीन जानिए हम जो है, आपसे ही है मासाब....आप जहां भी है,हमेशा यादों में हमारे साथ साथ है,आपको शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं!

04/09/2021

सुन्दर बुद्धिस्ट विवाह...
न कोई ढोंग न कोई दिखवा न कोई बाजा।
लड़का और लड़की दोनों पेंट शर्ट में शादी कर रहे हैं न दूल्हा सजा हुआ है और न ही दुल्हन लहँगा चुनरी में सजी हुई है इसे कहते हैं , साधारण विवाह । बुद्धिस्ट विवाह ।ऐसे विवाह करने वालो को ढेरों बधाईयाँ

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