12/05/2026
भाइयों प्रधानमंत्री मोदी की अपील कर रहे हैं कि यह मत खरीदो यह मत चलाओ वह मत करो और आम जनता के पैसे से मध्य प्रदेश के नेता 800गाड़ियों का काफिला लेकर अपनी शपथ ग्रहण समारोह कोसम्पन्न कर रहे हैं यहकैसी अपील है जो आम जनता के लिए तो लागू हो रहा है और उनके अपने नेता अपने लोग देश के कमाए हुए टैक्स को पेट्रोल में फूंक रहे हैं मोदी जी को चाहिए कि अपने लोगों कोसख्त संदेश दें अपनी पेंशन अपनी सैलरी अपनी सारी सुख सुविधा 2 साल के लिए बिल्कुल बंद कर दें या मोदी जी ही उनकी सब की सुख सुविधाएं बंद करें, सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करें,हवाई यात्राएं बंद करें, दूसरों को उदाहरण प्रस्तुत करें
राष्ट्र मेव जयते
04/05/2026
ओबीसी की तरह सामान्य वर्ग के इडब्लूएस श्रेणी के छात्रों को भी दिया जाये 10,000 रूपए स्टाइपेंड
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पिछली कैबिनेट में यह निर्णय लिया गया कि दिल्ली में रहकर पढ़ाई करने वाले ओबीसी छात्रों को 1550 रूपए के स्थान पर अब 10,000 रुपए स्टाइपेंड मिलेगा। मैं इस निर्णय की सराहना करता हूं लेकिन मैं एक बार पुनः कहूंगा कि इस योजना का लाभ सामान्य वर्ग के इडब्लूएस श्रेणी के छात्रों को भी दिया जाना चाहिए। कुछ बातें ऐसी होती हैं जो कहते रहना पड़ता है और कुछ हो या न हो पर हम कहते रहेगे । हम इसलिए भी कहते हे क्योंकि हमें डर लगा रहता है कि कहीं हम बोलना न भूल जाये जैसा कि बहुत सारे लोग भूल चुके हैं।
बचपन से अभी तक हम ने केवल एससी-एसटी वर्ग के लिए ही योजनाएं देखीं थीं लेकिन यह अच्छी बात है कि कुछ समय से लगातार पिछड़ा वर्ग के लिए योजनाएं घोषित हो रही हैं। अभी कुछ दिन पहले पिछड़ा वर्ग के छात्रों को निशुल्क यूपीएससी परीक्षा कोचिंग दिलवाने का निर्णय हुआ था और उसके भी कुछ दिन पहले पिछड़ा वर्ग के 600 बेरोजगार युवाओं को जापान में नौकरी दिलवाने का निर्णय हुआ था।उस समय भी हम यही चाहते थे कि साथ में सामान्य वर्ग इडब्लूएस श्रेणी के युवाओं को भी रख लेते तो क्या बुराई थी?
हमारी सोच यही रही है कि समाज के सभी वर्ग अपने भाई हैं उन्हें कुछ मिल रहा है उसमें हमें खुशी है लेकिन साथ में सामान्य वर्ग के इडब्लूएस श्रेणी को क्यों छोड़ दिया जाता है इसकी हमें शिकायत है। हमारे साथ भी समानता का व्यवहार हो।
एक तो दिक्कत यह भी है कि सामान्य वर्ग के इडब्लूएस श्रेणी का कोई विभाग नहीं है। सामान्य वर्ग के इडब्लूएस श्रेणी का कोई अलग से मंत्री नहीं है। सभी वर्गों के अलग-अलग विभाग हैं वे उनके कल्याण की योजनाएं बनाते रहते हैं।
सामान्य वर्ग के संगठनों को चाहिए कि वे पूर्व से गठित *सामान्य निर्धन आयोग में नियुक्ति व सामान्य वर्ग कल्याण विभाग के गठन की मांग उठायें।*
अभी फिलहाल सामान्य वर्ग सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत आता है।
पंकज महाराज
अध्यक्ष
सनातन ब्राह्मण महासभा
नरसिंहपुर
01/05/2026
आज की सच्चाई बच्चों को जरूर बताएं मैं काम भी सिखाए संस्कार दें तभी वह सही और सफल प्रकार के जीवन में अपने रिश्ते निभा पायेंगे
*।।संस्कार।।*
"शादी तय हो गई थी, कार्ड छप चुके थे और पूरा घर खुशियों से चहक रहा था.. लेकिन एक फोन कॉल ने खुशियों के उस महल को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया। आखिर दूल्हे के पिता ने ऐन वक्त पर रिश्ता क्यों तोड़ा? वजह ऐसी थी कि हर माता-पिता का कलेजा कांप जाए।"*
*अविनाश जी अपनी इकलौती बेटी आंचल की शादी को लेकर फूले नहीं समा रहे थे। दामाद शहर का माना-जाया अफसर था और सबसे बड़ी बात—वे लोग पूरी तरह 'दहेज मुक्त' शादी कर रहे थे। अविनाश जी को लग रहा था जैसे उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी लॉटरी लग गई हो।*
*लेकिन शादी से ठीक 20 दिन पहले, लड़के के पिता मिस्टर खन्ना का फोन आया।*
"अविनाश जी, माफ कीजिएगा, पर हम यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ा पाएंगे।" खन्ना जी की आवाज में एक अजीब सी गंभीरता थी।
अविनाश जी के पैरों तले जमीन खिसक गई। "लेकिन खन्ना साहब! क्या हुआ? कोई गलती हो गई हमसे? क्या हमने स्वागत-सत्कार में कोई कमी छोड़ दी?"
*खन्ना जी ने ठंडी आह भरी और बोले, "अविनाश जी, पिछले दो महीनों में मैं कई बार बिना बताए आपके घर आया। मैंने आपकी बेटी आंचल की डिग्रियाँ देखीं, उसकी खूबसूरती देखी, लेकिन जो नहीं दिखा... वो थे संस्कार और संवेदना।"*
*अविनाश जी हक्के-बक्के रह गए। खन्ना जी ने आगे जो कहा, वह हर उस माता-पिता के लिए सबक है जो अपनी बेटी को 'नाजुक कली' बनाकर पालते हैं:*
"जब भी मैं आपके घर आया, मैंने आपकी पत्नी को पसीने से तर-बतर किचन में काम करते देखा, कभी झाड़ू लगाते तो कभी भारी सामान उठाते देखा। लेकिन आंचल? वो हर बार अपने कमरे में सजी-धजी मोबाइल पर व्यस्त थी या सोफे पर बैठकर टीवी देख रही थी। उसे एक बार भी यह अहसास नहीं हुआ कि उसकी माँ थक रही है।"
*"अविनाश जी, मुझे मेरे घर के लिए एक सजावटी गुड़िया नहीं चाहिए जो बस शो-केस में खड़ी रहे। मुझे वो 'बहू' चाहिए जो रिश्तों का दर्द समझे। जो लड़की अपनी माँ के आंसू और थकान नहीं देख सकती, वो कल को मेरी बुजुर्ग पत्नी की सेवा क्या करेगी? जो हाथ माँ का बोझ नहीं बंटा सकते, वो हमारे घर की जिम्मेदारियाँ कैसे उठाएंगे?"*
अविनाश जी की आंखों के सामने अंधेरा छा गया। उन्हें समझ आ गया कि बेटी को 'राजकुमारी' बनाने के चक्कर में उन्होंने उसे एक जिम्मेदार 'इंसान' बनाना भुला दिया था।
*आजकल हर माता-पिता अपनी बेटी को ढेर सारा लाड़-प्यार देते हैं, जो सही भी है। लेकिन क्या उस प्यार की आड़ में हम उन्हें अपंग तो नहीं बना रहे?*
सोचिए जरूर: 🤔
👉 बेटी को घर के काम सिखाना उसे 'नौकरानी' बनाना नहीं, बल्कि उसे आत्मनिर्भर बनाना है। ताकि कल को उसे किसी के सामने बेबस न होना पड़े।
*👉 समय-समय पर उसे उसकी गलतियों पर टोकना जरूरी है। अगर वह मायके में डांट नहीं सहेगी, तो ससुराल में बड़ों की बात उसे 'अपमान' लगेगी और यहीं से घर टूटने की शुरुआत होती है।*
*👉 अक्सर लोग बेटों को दोष देते हैं कि उन्होंने माँ-बाप को वृद्धाश्रम भेज दिया। पर याद रखिए, उस बेटे के फैसले के पीछे किसी की 'बेटी' की सोच भी शामिल होती है। अगर हमने अपनी बेटी में सेवा भाव के संस्कार नहीं डाले, तो समाज में वृद्धाश्रम कभी बंद नहीं होंगे।*
*अपनी बेटी को सिर्फ 'बेटी' बनाकर मत पालिए, उसे किसी घर की 'मान-मर्यादा' और 'संस्कारी बहू' बनने के योग्य बनाइए। वरना सजा सिर्फ उसे नहीं, पूरे परिवार को भुगतनी पड़ेगी।*
*।। जय सियाराम जी।।*
*।। ॐ नमः शिवाय।।*
01/05/2026
माननीय PM & CM जी
*कृपया सारी योजना बंद कर दीजिये।*
*सिर्फ सांसद भवन जैसी कैन्टीन हर दस किलोमीटर पर खुलवा दीजिये।*
*सारे लफड़े ख़त्म।*
*29 रूपये में भरपेट खाना मिलेगा।*
*80% लोगों को घर चलानें का लफड़ा ख़त्म।*
*ना सिलेंडर लाना, ना राशन*
*और*
*घर वाली भी खुश ।*
*चारों तरफ खुशियाँ ही रहेगी।*
*फिर हम कहेंगे सबका साथ सबका विकास।*
*सबसे बड़ा फायदा 1र् किलो गेहूँ नहीं देना पड़ेगा*
*और PM जी को ये ना कहना पड़ेगा कि मिडिल क्लास के लोग अपने हिसाब से घर चलाएँ।*
*इस पे गौर करें*
*कृपया कड़ी मेहनत से प्राप्त हुई ये जानकारी देश के हर एक नागरिक तक पहुँचाने की कोशिश करें।*
*शान है या छलावा...।*
*पूरे भारत में एक ही जगह ऐसी है जहाँ खाने की चीजें सबसे सस्ती है।*
*चाय = 1.00*
*सुप = 5.50*
*दाल= 1.50*
*खाना =2.00*
*चपाती =1.00*
*चिकन= 24.50*
*डोसा = 4.00*
*बिरयानी=8.00*
*मच्छी= 13.00*
*ये सब चीजें सिर्फ गरीबों के लिए है और ये सब Available है Indian Parliament Canteen Delhi में*
*और उन गरीबों की पगार है 2,50,000 रूपये महीना वो भी बिना Income tax के ।*
*आपके Mobile में जितने भी नम्बर save है सबको forward करें ताकि सबको पता चलें …*
*कि यहीं कारण है कि इन्हें लगता है कि जो आदमी 50 या 100 रूपये रोज कमाता है वो गरीब नहीं हैं।*