Youth Hostel Association of India , Fort Unit Gwalior
he Youth Hostels Association of India is an ISO 9001-2008 Certified Organization. Organization (NGO).
Gwalior fort unit of YHAI is working in Gwalior for more adventure and social activity contact : Ram Narayan 9826352252 , Harsh Chaturvedi 9425338122 & Sunil Rai 9826257510. A non-profit making social body registered under the Societies Registration Act (1860) as a Non-Govt. The objective of the Association is to help young people of limited means to acquire greater knowledge and care of the co
08/12/2016
17/07/2016
Nelkeshwet
14/03/2016
गुजरी महल
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गुजरी महल के बनने की कहानी की शुरुआत होती है एक राजा और गाँव की अल्हड़ और साहसी गुजरी युवती की प्रेम कहानी से !
हुआ कुछ यूं की ग्वालियर के राजा मान सिंह तोमर शिकार करने गए तो देखा एक गूजर युवती निन्नी हिरण के शावक को बचाने शेर से भिड़ गई । इसके बाद उसने गांव के एक बच्चे की तरफ बढ़ रहे एक जंगली भैंसे को भी सींगों से पकड़ कर रोक दिया। शिकार करने आये राजा मानसिंह इस पहली ही मुलाकात में खुद ही निन्नी के नयनों के शिकार हो बैठे । फिर क्या था राजा ने उसके बड़े भाई अटल के सामने उसकी बहन से विवाह का प्रस्ताव भिजवाया । राजा का प्रस्ताव निन्नी ने स्वीकार तो कर लिया, लेकिन अपनी एक इच्छा जाहिर कर दी । निन्नी की इच्छा थी कि वह जन्म से राई गांव की जिस सांक नदी का पानी पीती रही है, वह उसे रानी बनने के बाद भी मिलता रहे।
निन्नी की शर्त पूरा करने के लिए राजा मान सिंह के इंजीनियरों ने योजना बनाई तो समझ में आया किले के सबसे ऊपर बने राजा मान सिंह के महल मानमंदिर तक पानी प्राकृतिक रूप से पहुंचा पाना असंभव है। लिहाजा किले के नीचे के शहर की ओर खुलने वाले प्रवेश द्वार पर निन्नी के लिए महल बनाने का फैसला किया गया ! फिर क्या था 50 किलोमीटर दूर राई गांव की सांक नदी से महल तक पानी लाने के लिए पहाड़ों का सीना चीर नहर बनवा दी गयी और राजा मान सिंह ने निन्नी के लिए करीब 30 मीटर ऊंचे ग्वालियर दुर्ग तक पाइपलाइन बिछवा दी ! इस विवाह की शर्त को पूरा करने पर राजा मानसिंह और निन्नी का विवाह बड़े धूमधाम से हुआ और ‘निन्नी’ बन गई ‘मृगनयनी’ और मृगनयनी के लिये किले के प्रवेश द्वार पर बनवाया महल कहलाया “गूजरी महल” !
महाराजा मान सिंह को रानी मृगनयनी से अटूट प्रेम था वो जब भी किले से बाहर निकलते या किले में प्रवेश करते मृगनयनी से जरूर मिलते थे, मृगनयनी इन अवसरों पर उनका स्वागत करती थीं। इसलिए महाराजा मान सिंह तोमर के महल से एक सुरंग सीधे नीचे गूजरी महल तक बनाई गई थी। इसी सुरंग के जरिए महाराजा मान सिंह तोमर गूजरी रानी से मिलने आया करते थे।
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(ग्वालियर पर्यटन को बढ़वा देने हेतु जनहित में जारी)
06/03/2016
Dev kho Gwalior
03/03/2016
जयविलास पैलेस
निर्माण -1874
क्षेत्रफल - 12 लाख वर्गफीट
कमरे - 400
लागत - तत्कालीन ₹1 करोड़ , वर्तमान ₹5000 करोड़
कहानी शुरू होती है इंग्लैंड के शासक एडवर्ड-VII को भारत आने से । जब इंग्लैंड के शासक का भारत आना हुआ तो जयाजी महाराज ने उन्हें ग्वालियर आने का निमंत्रण दे दिया । उनके भव्य स्वागत के लिए ही उन्होंने जयविवास पैलेस के निर्माण की योजना का जन्म हुआ, और खोज शुरू हुयी किसी आर्किटेक्ट की। ये खोज जा कर रुकी एक फ्रांसीसी आर्कीटेक्चर मिशेल फिलोस पर । मेशेल फिलोस ने 1874 में विशालकाय जयविलास पैलेस का निर्माण किया।
140 साल पहले जयाजी राव सिंधिया ने इस महल के निर्माण में एक करोड़ रुपए खर्च किए थे, लेकिन आज इसकी कीमत 5000 करोड़ रुपए आंकी जा रही है।
400 कमरे वाला यह महल पूरी तरह व्हाइट है और इसे 12 लाख वर्ग फीट में बना है। इस पैलेस का महत्वपूर्ण है दरबार हॉल है। 100 फीट लंबे 50 फीट चौड़े और 41 फीट ऊंचे हाल में दुनिया के सबसे बड़े झाड़-फानूस लगे हैं और इसी हॉल की दीवार और छत पर लगा है पूरे 450 किलो सोना।
09/02/2016
Happy deepawali to all YHAI members
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Yhai Gwalior
Gwalior
474001