26/01/2026
आज विद्यालय में ७७वाँ गणतंत्र दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। नन्हें हाथों में लहराता तिरंगा और जुबां पर देशभक्ति के तराने—आज के दिन ने हमें अपने संविधान और लोकतंत्र पर गर्व करने का एक और अवसर दिया। जय हिन्द! 🇮🇳 "
26/01/2026
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं।
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊं॥
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊं।
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूं, भाग्य पर इठलाऊं॥
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ में देना तुम फेंक॥
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने।
जिस पथ जावें वीर अनेक॥
माखन लाल चतुर्वेदी-
23/01/2026
सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने । विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते ॥
वसंत पंचमीणां शुभेच्छा:।
15/01/2026
Navyug Children Higher secondary school, joyfully celebrated Lohri and Makar Sankranti 🎉🌞. Children came in bright and colourful outfits 🧡💛 and danced to lively songs 💃🕺, spreading energy and happiness. They made colorful kites 🪁, adding fun and excitement to the festival. Everyone enjoyed delicious Lohri snacks like popcorn and peanuts 🍿🥜 while learning about the significance of these harvest celebrations 📚✨. The day was filled with laughter, cheer, cultural pride and beautiful memories for all 😊🎊
Teachers in charge: Ms Nidhi
Ms Madhuri
14/01/2026
संक्रांति/पोंगल की शुभकामनाएँ
मकर संक्रांति
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मकर संक्रांति का ये पावन विहान
है आनंद उत्सव. …गूँजे मंगल गान
सूर्य मकर राशि में …हो रहा प्रवेश
मिटाये मन की वेदना और क्लेश ।
श्याम मेघ को चीर नीलाभ हर्षित
चहुँ ओर पुष्प की महक सुवासित
लोहरी की प्रखर प्रज्वलित आग्नेय
करें भस्म निज मन में द्वेष-मालिन्य।
रंगारंग पतंगों का पहन नव परिधान
उल्लसित मुदित झूम रहा आसमान।
ऋतु ने मुस्कुरा कर ज्यों ली अंगड़ाई
शस्य श्यामल धरा, चहकी तरुणाई।
गुड की मिठास जैसी हो मधुर वाणी
तिल की महक ओढ़े झूमें ये अवनी।
नवधान औ ख़ुशहाली का ये द्योतक
खेत खलिहान समृद्धि का ये प्रतीक।
उत्तरायण का शुभारंभ ये है दर्शाता
मंगल कार्य आवहन कर मन हर्षाता।
पोंगल, लोहड़ी, बिहू तो कहीं संक्रांति
विभिन्न परिवेश, विभिन्न नाम धारती।
परंपरागत तिलगुड़ सेवन से है मिठास
दूर करें ये मन की कटुता और खट्टास
नव वर्ष में पावन पर्व की ये मधुर बेला
हर गाँव हर गली है ख़ुशियों का मेला।
@भार्गवी रविन्द्र….
05/01/2026
तही प्रकाश हमारा भयो, पटना शहर बिखे भव लयो.
04/01/2026
, India’s first woman teacher and a pioneering champion of equality and education. On this auspicious day, we commemorate the birth anniversary of Savitribai Phule, a trailblazing social reformer and an unsung hero of Indian history. Born on January 3, 1831, in Maharashtra, Savitribai Phule’s life and work have left an indelible mark on the annals of education and women’s rights in India. Her remarkable journey serves as an enduring source of inspiration, particularly for students striving to make a positive impact on society.
01/01/2026
*सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया!!*
*सर्वे भद्राणि पश्यंतु ,मा कश्चित् दुख भागभवेत्!!*
🙏*आपको और आपके परिवार को आंग्ल नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ
28/12/2025
एक महत्वपूर्ण कविता:
एक वक्त था जब तख़्त बचाने को
धर्मों की गर्दन मरोड़ी जाती थी,
आस्था को अपराध कहकर
तलवार से नीति जोड़ी जाती थी।
औरंगज़ेबी सत्ता जानती थी....
शस्त्र से शरीर जीते जाते हैं, विचार नहीं,
और यदि संस्कार और विचार जीवित रहे
तो साम्राज्य देर-सवेर ढह जाते हैं।
सरहिंद में बालक लाए गए,
तलवार से विचार डराए गए,
चोला बदलो.... जीवन मिलेगा,
सल्तनत के सूत्र समझाए गए।
परन्तु साहबजादों ने ललकारा...
“शीश झुकता नहीं,
धर्म बिकता नहीं,
और सिंह डरता नहीं।”
ईंटें उठीं, साँसें घुटीं,
पर संकल्प विकल्परहित रहा,
दीवारें तो खड़ी हुईं मगर
सल्तनत का महल दरक गया।
शीशगंज में शीश गिराया गया,
ताकि विचार थरथराने लगे पर...
तलवार की क्षमता का परिचय....
हाकिम! केवल सिर कट सकते हैं,
संस्कार नहीं...
वक्त ने स्वयं स्वीकार किया....
सत्ता शरीर पर रेंग सकती है,
परन्तु संस्कार पर नहीं और
जो समाज धर्म के लिए मर-मिटे,
उस पर कोई साम्राज्य इतिहास में
न टिक सका और न टिक सकेगा ...
©️ सम्भावना पन्त