Resolution ias Academy

Resolution ias Academy

Share

this page for comptitive exam.for upsc/psc/ssc/Bank

20/05/2026

Good night friends

18/05/2026
17/05/2026

Streat food

17/05/2026

चौबे जी का लड़का है अशोक, एमएससी पास।
नौकरी के लिए चौबे जी निश्चिन्त थे, कहीं न कहीं तो जुगाड़ लग ही जायेगी।
ब्याह कर देना चाहिए।
मिश्रा जी की लड़की है ममता, वह भी एमए पहले दर्जे में पास है, मिश्रा जी भी उसकी शादी जल्दी कर देना चाहते हैं।
सयानों से पोस्ट ग्रेजुएट लड़के का भाव पता किया गया।
पता चला वैसे तो रेट पांच से छः लाख का चल रहा है, पर बेकार बैठे पोस्ट ग्रेजुएटों का रेट तीन से चार लाख का है।
सयानों ने सौदा साढ़े तीन में तय करा दिया।
बात तय हुए अभी एक माह भी नही हुआ था, कि पब्लिक सर्विस कमीशन से पत्र आया कि अशोक का डिप्टी कलक्टर के पद पर चयन हो गया है।
चौबे- साले, नीच, कमीने... हरामजादे हैं कमीशन वाले...!
पत्नि- लड़के की इतनी अच्छी नौकरी लगी है नाराज क्यों होते हैं?
चौबे- अरे सरकार निकम्मी है, मैं तो कहता हूँ इस देश में क्रांति होकर रहेगी... यही पत्र कुछ दिन पहले नहीं भेज सकते थे, डिप्टी कलेक्टर का 40-50 लाख यूँ ही मिल जाता।
पत्नि- तुम्हारी भी अक्ल मारी गई थी, मैं न कहती थी महीने भर रुक जाओ, लेकिन तुम न माने... हुल-हुला कर सम्बन्ध तय कर दिया... मैं तो कहती हूँ मिश्रा जी को पत्र लिखिये वो समझदार आदमी हैं।
प्रिय मिश्रा जी,
अत्रं कुशलं तत्रास्तु !
आपको प्रसन्नता होगी कि अशोक का चयन डिप्टी कलेक्टर के लिए हो गया है। विवाह के मंगल अवसर पर यह मंगल हुआ। इसमें आपकी सुयोग्य पुत्री के भाग्य का भी योगदान है।
आप स्वयं समझदार हैं, नीति व मर्यादा जानते हैं। धर्म पर ही यह पृथ्वी टिकी हुई है। मनुष्य का क्या है, जीता मरता रहता है। पैसा हाथ का मैल है, मनुष्य की प्रतिष्ठा बड़ी चीज है। मनुष्य को कर्तव्य निभाना चाहिए, धर्म नहीं छोड़ना चाहिए। और फिर हमें तो कुछ चाहिए नहीं, आप जितना भी देंगे अपनी लड़की को ही देंगे।वर्तमान ओहदे के हिसाब से देख लीजियेगा फिर वरना हमें कोई मैचिंग रिश्ता देखना होगा।
मिश्रा परिवार ने पत्र पढ़ा, विचार किया और फिर लिखा-
प्रिय चौबे जी,
आपका पत्र मिला, मैं स्वयं आपको लिखने वाला था। अशोक की सफलता पर हम सब बेहद खुश हैं। आयुष्मान अब डिप्टी कलेक्टर हो गया हैं। अशोक चरित्रवान, मेहनती और सुयोग्य लड़का है। वह अवश्य तरक्की करेगा।
आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि ममता का चयन आईएएस के लिए हो गया है। कलेक्टर बन कर आयुष्मति की यह इच्छा है कि अपने अधीनस्थ कर्मचारी से वह विवाह नहीं करेगी।

22/04/2026

अपना ही घर पराया हो जाए, तो इंसान के पास सिर्फ हिम्मत ही सहारा बनती है…”
मेरा नाम माया है। उम्र ठीक-ठीक नहीं पता, करीब 35–40 साल होगी। मैं लखनऊ रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर 12 साल तक रही हूं—यही मेरा घर था, और यही मेरी पहचान बन गया।
मैं बरेली की रहने वाली हूं। बचपन गरीबी में बीता, पढ़ाई कभी नसीब नहीं हुई। पोषण की कमी से मेरे पैर टेढ़े हो गए और मैं ठीक से चल भी नहीं पाती। 13 साल की उम्र में शादी हो गई और 14 में मां बन गई। लेकिन ससुराल में मुझे कभी अपनापन नहीं मिला—पति श'राब पी'ता था, मा'रता था, और घर में मुझे खाना तक सही से नहीं दिया जाता था।
एक दिन बात इतनी बढ़ गई कि उसने मेरे छोटे बेटे को भी अ'पश'ब्द कहे। उसी रात मैंने फैसला लिया और ससुराल छोड़ दिया। उम्मीद थी कि मायका सहारा देगा, लेकिन वहां भी पिता ने कह दिया—“अब यह घर तुम्हारा नहीं है।”
उस दिन सब कुछ ख'त्म हो गया… लेकिन मैं नहीं टूटी।
मैं अपने बेटे को लेकर बिना सोचे ट्रेन में बैठ गई और लखनऊ पहुंच गई। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर बैठ गई—अब यही मेरा घर था। कुछ दिन मदद मांगकर गुजारा किया, लेकिन आत्मसम्मान ने हाथ फैलाने नहीं दिया।
एक रिक्शा चालक ने सहारा दिया, लेकिन वहां भी हालात बिगड़ गए। बेटी के जन्म के बाद मैंने वह घर भी छोड़ दिया और फिर से स्टेशन पर आ गई—इस बार दो बच्चों के साथ।
यहीं एक पुलिसकर्मी राशिद भाई मिले, जिन्होंने इंसानियत दिखाई। उन्होंने बच्चों के लिए दूध और खाना दिलवाया। उनकी मदद से मैंने गु'ट'खा बे'चने का काम शुरू किया और धीरे-धीरे जिंदगी संभलने लगी।
मैंने कभी भीख नहीं मांगी। कम कमाया, लेकिन खुद कमाया। आज मैं स्टेशन पर नहीं रहती, एक छोटे किराये के घर में रहती हूं। ट्राई साइकिल से काम करती हूं।
मेरा बेटा अब काम करता है, और बेटी स्कूल जाती है। मैं हर महीने थोड़ी बचत करती हूं—ताकि मेरी बेटी की जिंदगी मेरी जैसी न हो।

19/04/2026

Kitna Dard Hota hai

Want your school to be the top-listed School/college in Gwalior?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Address


Tansen Nagar
Gwalior
474002