21/10/2024
करकचतुर्थी शुभाशयाः
सौभाग्यम् आरोग्यम् च भवतु भवत्याः।
करकचतुर्थी व्रतम् भवत्संयुक्ते वैवाहिके जीवनस्य सुखसमृद्धिं च आनीतु।
धर्म, आरोग्य, दीर्घायुः पतिसंयुक्तं च भवतु सदा।
शुभकरकचतुर्थी!
Kashi Ramratan International Private
21/10/2024
करकचतुर्थी शुभाशयाः
सौभाग्यम् आरोग्यम् च भवतु भवत्याः।
करकचतुर्थी व्रतम् भवत्संयुक्ते वैवाहिके जीवनस्य सुखसमृद्धिं च आनीतु।
धर्म, आरोग्य, दीर्घायुः पतिसंयुक्तं च भवतु सदा।
शुभकरकचतुर्थी!
बच्चों का नाम रखने के बिषय में समाज के एक बहुत बड़े वर्ग को न जाने हो क्या गया है? लगता है जैसे समाज पथभ्रष्ट एवं दिग्भ्रमित हो गया है.
एक सज्जन ने अपने बच्चों से परिचय कराया, और बताया की पोती का नाम *अवीरा* रखा है, बड़ा ही यूनिक_नाम रखा है।
यह पूछने पर कि इसका अर्थ क्या है, बे बोले कि बहादुर, ब्रेव, कॉन्फिडेंशियल।
सुनते ही मेरा दिमाग चकरा गया। फिर बोले कृपा करके बताएं आपको कैसा लगा?
मैंने कहा बन्धु अवीरा तो बहुत ही अशोभनीय नाम है नहीं रखना चाहिए.
उनको बताया कि..
1. जिस स्त्री के पुत्र और पति न हों. पुत्र और पतिरहित (स्त्री)
2. स्वतंत्र (स्त्री), उसका नाम होता है अवीरा. जिसके बारे में शास्त्रों में लिखा गया है कि..
*नास्ति वीरः पुत्त्रादिर्यस्याः सा अवीरा*
उन्होंने बच्ची के नाम का अर्थ सुना तो बेचारे मायूस हो गए, बोले महोदय क्या करें अब तो स्कूल में भी यही नाम हैं बर्थ सर्टिफिकेट में भी यही नाम है। क्या करें?
आजकल लोग कुछ नया करने की ट्रेंड में कुछ भी अनर्गल करने लग गए हैं *जैसे कि* ...
--लड़की हो तो मियारा, शियारा, कियारा, नयारा, मायरा तो अल्मायरा आदि..
--लड़का हो तो वियान, कियान, गियान, केयांश, रेयांश आदि...
और तो और इन शब्दों के जब अर्थ पूछो तो
दे गूगल ... दे याहू ...
और उत्तर आएगा "इट मीन्स रे ऑफ लाइट" "इट मीन्स गॉड्स फेवरेट" "इट मीन्स ब्ला ब्ला"
नाम को यूनीक रखने के फैशन के दौर में एक सज्जन ने अपनी गुड़िया का नाम रखा " *श्लेष्मा* ".
स्वभाविक था कि नाम सुनकर मैं सदमें जैसी अवस्था में था.
सदमे से बाहर आने के लिए मन में विचार किया कि हो सकता है इन्होंने कुछ और बोला हो या इनको इस शब्द का अर्थ पता नहीं होगा तो मैं पूछ बैठा "अच्छा? श्लेष्मा! इसका अर्थ क्या होता है?
तो महानुभाव नें बड़े ही कॉन्फिडेंस के साथ उत्तर दिया "श्लेष्मा" का अर्थ होता है "जिस पर मां की कृपा हो" मैं सर पकड़ कर 10 मिनट मौन बैठा रहा !
मेरे भाव देख कर उनको यह लग चुका था कि कुछ तो गड़बड़ कह दिया है तो पूछ बैठे.
क्या हुआ मैंने कुछ ग़लत तो नहीं कह दिया?
मैंने कहा बन्धु तुंरत प्रभाव से बच्ची का नाम बदलो क्योंकि श्लेष्मा का अर्थ होता है "नाक का कचरा" उसके बाद जो होना था सो हुआ.
यही हालात है समाज के एक बहुत बड़े वर्ग का।
फैशन के दौर में फैंसी,फटे और अधनंगे कपड़े पहनते
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*गौदान_क्यों_करते_हैं?*
*गौ_दान_का_क्या_महत्व_है*
*धर्म शास्त्रों के अनुसार मृत्योपरांत प्रत्येक जीव को परलोक यात्रा के समय, एक विशेष नदी पार करनी पड़ती है। जिसमें जीव अपने कर्मों के अनुसार नाना प्रकार के कष्ट सहता है।*
*अत: वैतरणी नदी की यात्रा को सुखद बनाने के लिए मृतक व्यक्ति के नाम वैतरणी गोदान का विशेष महत्व है। पद्धति तो यह है कि मृत्यु काल में गौमाता की पूंछ हाथ में पकड़ाई जाती है, या स्पर्श करवाई जाती है। लेकिन ऐसा न होने की स्थिति में गाय का ध्यान करवा कर प्रार्थना इस प्रकार करवानी चाहिए।*
*👉वैतरणी गोदान मंत्र-*
*"धेनुके त्वं प्रतीक्षास्व यमद्वार महापथे।*
*उतितीर्षुरहं भद्रे वैतरणयै नमौऽस्तुते।।*
*पिण्डदान कृत्वा यथा संभमं गोदान कुर्यात।"*
*👉गरूड़ पुराण में बताया गया है- यमलोक का रास्ता भयानक और पीड़ा देने वाला है। वहां एक नदी बहती है जो कि सौ योजना अर्थात एक सौ बीस किलोमीटर है। इस नदी में जल के स्थान पर रक्त और मवाद बहता है और इसके तट हड्डियों से भरे हैं। मगरमच्छ, सूई के समान मुखवाले भयानक कृमि, मछली और वज्र जैसी चोंच वाले गिद्धों का ये निवास स्थल है।*
*यम के दूत जब धरती से लाए गए व्यक्ति को इस नदी के समीप लाकर छोड़ देते हैं, तो नदी में से जोर-जोर से गरजने की आवाज आने लगती है। नदी में प्रवाहित रक्त उफान मारने लगता है। पापी मनुष्य की जीवात्मा डर के मारे थर-थर कांपने लगती है।*
*केवल एक नाव के राही ही इस नदी को पार किया जा सकता है। उस नाव का नाविक एक प्रेत है। जो पिण्ड से बने शरीर में बसी आत्मा से प्रश्न करता है कि किस पुण्य के बल पर तुम नदी पार करोगे।*
*जिस व्यक्ति ने अपने जीवनकाल में गौदान की हो केवल वह व्यक्ति इस नदी को पार कर सकता है, अन्य लोगों को यमदूत नाक में कांटा फंसाकर आकाश मार्ग से नदी के ऊपर से खींचते हुए ले जाते हैं।*
*शास्त्रों में कुछ ऐसे व्रत और उपवास हैं, जिनका पालन करने से गौदान का फल प्राप्त होता है।*
*पुराणों के अनुसार दान वितरण है। इस नदी का नाम वैतरणी है। अत: दान कर जो पुण्य कमाया जाता है, उसके बल पर ही वैतरणी नदी को पार किया जा सकता ह
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