Indian International Teachers Association - IITA

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Indian International Teachers Association - IITA | www.iitaindia.in 13/07/2022

आपको गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं!
गुरु-शिष्य परंपरा के प्रतीक महान ऋषि व्यास के जन्म के इस शुभ दिन पर महान शिक्षकों को नमन ।
शुभ गुरु पूर्णिमा!💐🙏
डॉ निरकेष शर्मा
ग्वालियर

Indian International Teachers Association - IITA | www.iitaindia.in IITA is an award-winning, research-for-development (R4D) organization, providing solutions to hunger, poverty, and the degradation of natural resources in Africa.

12/07/2022

*संस्कृत एक अद्भुत भाषा है।*
जैसे कि

अंग्रेजी में 'THE QUICK BROWN FOX JUMPS OVER A LAZY DOG' एक प्रसिद्ध वाक्य है । जिसमें अंग्रेजी वर्णमाला के सभी अक्षर समाहित कर लिए गए हैं । मज़ेदार बात यह है की अंग्रेज़ी वर्णमाला में कुल 26 अक्षर ही उप्लब्ध हैं जबकि इस वाक्य में 33 अक्षरों का प्रयोग किया गया है । जिसमें चार बार O और A, E, U तथा R अक्षर का प्रयोग क्रमशः 2 बार किया गया है । इसके अलावा इस वाक्य में अक्षरों का क्रम भी सही नहीं है 33। जहां वाक्य T से शुरु होता है वहीं G से खत्म हो रहा है ।
अब ज़रा संस्कृत के इस श्लोक को पढिये।-

*क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोSटौठीडढण:।*
*तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।।*

अर्थात: पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर और महासागर का सर्जन करनार कौन ?? राजा मय ! जिसको शत्रुओं के भी आशीर्वाद मिले हैं।

श्लोक को ध्यान से पढ़ने पर आप पाते हैं की संस्कृत वर्णमाला के सभी 33 व्यंजन इस श्लोक में दिखाई दे रहे हैं वो भी क्रमानुसार। यह खूबसूरती केवल और केवल संस्कृत जैसी समृद्ध भाषा में ही देखने को मिल सकती है!
*आर्य वरदान धर्मयोद्धा कर्मवीर*
पूरे विश्व में केवल एक संस्कृत ही ऐसी भाषा है जिसमें केवल *एक अक्षर* से ही पूरा वाक्य लिखा जा सकता है। किरातार्जुनीयम् काव्य संग्रह में केवल “न” व्यंजन से अद्भुत श्लोक बनाया है और गजब का कौशल्य प्रयोग करके भारवि नामक महाकवि ने थोडे में बहुत कहा है-

*न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नानानना ननु।*
*नुन्नोऽनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नुन्ननुन्ननुत्॥*

अर्थात: जो मनुष्य युद्ध में अपने से दुर्बल मनुष्य के हाथों घायल हुआ है वह सच्चा मनुष्य नहीं है। ऐसे ही अपने से दुर्बल को घायल करता है वो भी मनुष्य नहीं है। घायल मनुष्य का स्वामी यदि घायल न हुआ हो तो ऐसे मनुष्य को घायल नहीं कहते और घायल मनुष्य को घायल करें वो भी मनुष्य नहीं है। वंदेसंस्कृतम्!

एक और उदहारण है।

*दाददो दुद्द्दुद्दादि दादादो दुददीददोः।*
*दुद्दादं दददे दुद्दे ददादददोऽददः।।*

अर्थात: दान देने वाले, खलों को उपताप देने वाले, शुद्धि देने वाले, दुष्ट्मर्दक भुजाओं वाले, दानी तथा अदानी दोनों को दान देने वाले, राक्षसों का खंडन करने वाले ने, शत्रु के विरुद्ध शस्त्र को उठाया।

है ना खूबसूरत !! इतना ही नहीं, क्या किसी भाषा में केवल *2 अक्षर* से पूरा वाक्य लिखा जा सकता है ?? संस्कृत भाषा के अलावा किसी और भाषा में ये करना असंभव है। माघ कवि ने शिशुपालवधम् महाकाव्य में केवल “भ” और “र ” दो ही अक्षरों से एक श्लोक बनाया है। देखिये -

*भूरिभिर्भारिभिर्भीराभूभारैरभिरेभिरे*
*भेरीरे। भिभिरभ्राभैरभीरुभिरिभैरिभा:।।*

अर्थात- निर्भय हाथी जो की भूमि पर भार स्वरूप लगता है, अपने वजन के चलते, जिसकी आवाज नगाड़े की तरह है और जो काले बादलों सा है, वह दूसरे दुश्मन हाथी पर आक्रमण कर रहा है।

एक और उदाहरण -

*क्रोरारिकारी कोरेककारक कारिकाकर।*
*कोरकाकारकरक: करीर कर्करोऽकर्रुक॥*

अर्थात - क्रूर शत्रुओं को नष्ट करने वाला, भूमि का एक कर्ता, दुष्टों को यातना देने वाला, कमलमुकुलवत, रमणीय हाथ वाला, हाथियों को फेंकने वाला, रण में कर्कश, सूर्य के समान तेजस्वी [था]।

पुनः क्या किसी भाषा मे केवल *तीन अक्षर* से ही पूरा वाक्य लिखा जा सकता है ?? यह भी संस्कृत भाषा के अलावा किसी और भाषा में असंभव है!
उदहारण -

*देवानां नन्दनो देवो नोदनो वेदनिंदिनां।*
*दिवं दुदाव नादेन दाने दानवनंदिनः।।*

अर्थात - वह परमात्मा [विष्णु] जो दूसरे देवों को सुख प्रदान करता है और जो वेदों को नहीं मानते उनको कष्ट प्रदान करता है। वह स्वर्ग को उस ध्वनि नाद से भर देता है, जिस तरह के नाद से उसने दानव [हिरण्यकशिपु] को मारा था।
**ओ३म् सर्वज्ञ*✒️
*वेद वरदान आर्य*©️
जब हम कहते हैं की संस्कृत इस पूरी दुनिया की सभी प्राचीन भाषाओं की जननी है तो उसके पीछे इसी तरह के खूबसूरत तर्क होते हैं। यह विश्व की अकेली ऐसी भाषा है, जिसमें "अभिधान-सार्थकता" मिलती है। अर्थात् अमुक वस्तु की अमुक संज्ञा या नाम क्यों है, यह प्रायः सभी शब्दों में मिलता है। जैसे इस विश्व का नाम संसार है तो इसलिये है क्यूँकि वह चलता रहता है, परिवर्तित होता रहता है-
संसरतीति संसारः गच्छतीति जगत् आकर्षयतीति कृष्णः रमन्ते योगिनो यस्मिन् स रामः इत्यादि।

विश्व की अन्य भाषाओं में ऐसी अभिधानसार्थकता नहीं है। Good का अर्थ अच्छा, भला, सुंदर, उत्तम, प्रियदर्शन, स्वस्थ आदि है। किसी अंग्रेजी विद्वान् से पूछो कि ऐसा क्यों है तो वह कहेगा है बस पहले से ही इसके ये अर्थ हैं। क्यों हैं वो ये नहीं बता पायेगा।

ऐसी सरल, तर्कसंगत और समृद्ध भाषा आज अपने ही देश में अपने
ही लोगों में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड रही है।

28/06/2022

*Specialty of Today's date: 28622 or 2862022*

▪︎28=6+22=(6×2²)+(6+2)÷2=(6×2+2)(6–2²)=(6+2)2+(6÷2)!2=(6²÷2)+(6+2²)=(6²+2)–(6+2²)=(6²–2)–(6×2÷2)=(6–2)!÷2+(6+2)2=(6–2)!+2+(6–2²)=(6–2)!–2+(6×2÷2)=(6+2²!)–(6–2²)=(6×2+2)+(6×2+2)=(6÷2)!²–(6–2)2=(62+2)–(6÷2)!²=(62÷2)–(6÷2)!÷2, 2+8=6+2², 2×8=(6+2)2, 2⁸=2^(2+6)(digits reversed), 28–6=2⁰×22
▪︎28+6+2²=2+8+6+22, 2+8+62+2, 28×6+2÷2, 2⁸–6+2², 28+6+2÷2, 28+6–2÷2, 2⁸–6–2÷2, 2×8+6–2÷2, 2×8×6–2÷2, 286+2÷2, 2+86–2÷2, 2+8×6+2÷2, 2+8×6–2÷2 are semiprimes
▪︎28×6–2÷2, 2×86+2÷2, 2⁸+6+2÷2, 2⁸–6+2÷2, 2×8+6+2÷2, 2×8×6+2÷2, (2+8)6+2÷2, (2+8)6–2÷2=28+62÷2, 2(8+6)+2÷2, 2+86+2÷2, 2+862÷2 are primes

▪︎–2+86+2÷2=2+86+2⁰–2²=28(6÷2)+02÷2=2×8×6–(20+2)÷2=28+62–0!–2²=2+86–2–02÷2=28×6÷2+02÷2=2(8+6)(2+0!)+2÷2=28+6²–0!+22=–[2÷8]+6+20×2²=2×8!÷6!–2–0!–2²! is *28th Semiprime*
▪︎2×86÷2–0!+22=2×8!÷6!–2⁰–2²=–2+86–2+0!+2²!=2×8×6+(20+2)÷2=[2÷8]+6+(20÷2)²=[2÷8]×6+202÷2=2×8×6+(20+2)÷2=286÷2–(0!+2)!² is *28th Prime*
▪︎[2÷8]+6(2⁰+22)=2×8+6÷2+(0!+2²)!={286–(2+0!)!–2}÷2={2⁸+(6–2)!–02}÷2=[2÷8]+6+(2+0!)!22={[2÷8]+6}20–2÷2 & (–2+8+6)20–2÷2=(2+8)(6–2)!–02÷2=2(8–6÷2)!–02÷2 are *28th Chen & Solinas primes*
▪︎–28+6!÷2–02÷2 is *28th Harmonic & Isolated prime*
▪︎2⁸–6²–0!+2²=2⁸–(6×2–0!+22)=(2+8+6–2⁰)²–2=220+(2+6)÷8+2(digits reversed) & (28–6+2+0)²+(2÷2)²=[2÷8]+(6–2–0²)!² are *28th Additive & Lucky primes*
▪︎286–2⁰–2²=2⁸+6+20–2÷2 is *28th Pythagorean prime*
▪︎2×8(6–2)!–02÷2 & 2⁸(6÷2)+02÷2 are *28th Long prime & Emirp*
▪︎–28+6!–(2⁰+2)²=–2×8+6!–20–2÷2=2÷2+0²+682(digits reversed) is *28th Happy prime*
Its TAU day also
Happy tau day

28/06/2022

भविष्य में अग्निवीर होना, अनिवार्य होना चाहिए...

★ ऐसा भारत जिसका कलेक्टर भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका कप्तान भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका मॅजिस्ट्रेट भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका बँक कर्मचारी भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका डॉक्टर भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका इंजिनियर भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका लेखपाल भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका पंचायत कर्मी भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका अध्यापक भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका दरोगा भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका सिपाही भी अग्निवीर सैनिक हो ,
★ ऐसा भारत जिसका खुफिया कर्मी भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका नेता भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका ग्राम प्रधान भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका ड्राईवर भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका व्यापारी भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका ठेकेदार भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका अधिवक्ता भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका न्यायाधीश भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका उद्योगपति भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसके हर कदम पर अग्निवीर सैनिक हों....

वह भारत इतना ताकतवर होगा जिससे टकराना किसी के लिए आसान नही होगा..

न कही भ्रष्टाचारी होंगे
न कही देशद्रोही होंगे
न कहीं लुटेरे होंगे
न कहीं आतंकी होंगे

27/06/2022

Food for thought

TEACHER is a generic word we have imported from the British. In this short thread, let me explain u the word TEACHER

U will realize how rich Sanatan Dharma & its mother language Sanskrit is & why we have a rotten education system

Sanskrit words for "teacher" is based on their unique abilities & these are 6 phases or called it an evolution of a Teacher

1. The teacher who gives you Information is called ADHYAPAK

2. The one who imparts knowledge along with Information is called UPADHYAYA

3. The one who Imparts skill is called ACHARYA

4. The one who is able to give deep insight into a subject is called PANDIT

5. The one who has a visionary view on a subject and teaches you to think in that manner is called DHRISHTA

6. The one who is able to awaken the wisdom in you, leading you from darkness to light is called GURU

These are 6 Unique abilities of a TEACHER, the word we use in general term

If u read Gita, the life journey is from Karm Yog to Gyan Yog

Which means that teaching journey of a Teacher is from ADHYAPAK to GURU and a student Journey is to learn under ADHYAPAK to GURU

This is wholistic Sanatan Education which we lost in race to Degree

Jai Shri Ram

संस्कृत सम्भाषण शिविर योजना -उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ 26/06/2022

*अपनी गर्मी की छुट्टियों का सदुपयोग कीजिए*
*और कुछ नया करें...*

ओनलाईन निःशुल्क संस्कृत सीखने हेतु पंजीयन करें ।
एक घंटे की अवधि वाली यह कक्षा गूगल मीट पर आपके द्वारा चुने समय पर होगी ।
पंजीयन की अन्तिम तिथि 15 जुलाई

प्रथमस्तरीय संस्कृत भाषा शिक्षण हेतु पंजीयन लिंक् -
https://sanskritsambhashan.com/

जो प्रथमस्तरीय कक्षा कर चुके हैं उनके लिए द्वितीयस्तरीय संस्कृत भाषा शिक्षण हेतु पंजीयन लिंक् -
https://sanskritsambhashan.com/second_level_reg.php

संस्कृत सम्भाषण शिविर योजना -उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ उ.प्र. संस्कृतसंस्थानम् लखनऊ इस लॉकडाउन के समय मे संस्कृत सम्भाषण सीखने का अवसर प्रदान कर रहा है। यदि आप भी अध्ययन ....

19/06/2022

*अग्निपथ अग्निवीर योजना पर उठे प्रत्येक सवाल का सकारात्मक जवाब:*

*Q. क्या सरकार सेना की सारी भर्ती की जगह अग्निवीर ही लेगी?*
उत्तर - नहीं.... सेना की अन्य भर्तियाँ पहले की तरह ही रहेंगी... अग्निवीर बस एक नया Option है. आपको NDA, OTA करके अफसर बनना हो तो आप बन सकते हैं.... अग्निवीर एक एंट्री level का option है. हाँ यह जरूर है कि पहले की तरह सीधी भर्ती की जगह अग्निवीर से होगी.

*Q. क्या इस भर्ती में सेना के शारीरिक और अन्य मापदंडो का ध्यान रखा जाएगा??*
उत्तर - जी बिल्कुल, जो भी शारीरिक, मानसिक, मेडिकल, पढ़ाई लिखाई के मापदंड आज हैं, वही सब इस भर्ती पर भी लागू होंगे.. उनमे कोई ढीलाई नहीं होगी.

*Q. चार साल की सर्विस के बाद क्या होगा?*
उत्तर - जो लोग चुने जाएंगे, उनका फिर से एक test जैसा होगा, उनकी पिछली 4 साल की performance को देख कर 25% जवानों को Permanent नौकरी मिलेगी, अन्य को एकमुष्ट राशि दे कर वापस भेज दिया जाएगा. इन जवानों को आगे शिक्षा के लिए उपयुक्त option मिलेंगे, CAPF में भर्ती में प्राथमिकता मिलेगी, राज्य पुलिस भर्ती में प्राथमिकता मिलेगी, और साथ ही प्राइवेट नौकरी और अपने व्यवसाय का option तो है ही.

*Q. क्या यह योजना पेंशन का पैसा बचाने के लिए लायी गयी है??*
उत्तर - पेंशन का पैसा बचाना एकमात्र उद्देश्य नहीं है.... योजना का उद्देश्य है बेहतर लोगों को भर्ती करना... और other Ranks में भी Short Service Commission जैसी व्यवस्था बनाना.... ताकि लोग सेना से जुड़ें, सेवा दें, कुछ समय बाद Permanent हो सकते हैं, अन्यथा बाहर option देख सकते हैं. सेना का उद्देश्य पेंशन बचाना नहीं है..... इतने लोग भर्ती होंगे, उनकी ट्रेनिंग का खर्च, उनकी सैलरी और एकमुष्ट राशि का खर्च भी आएगा ही... वो भी चार साल में, और उसके बाद हर साल.... उसे आप कैसे अनदेखा कर रहे हैं??

*Q. भर्ती के बाद चार साल में से जवान 9 महीने तो छुट्टी पर रहेगा... ऐसे में वो क्या युद्ध लड़ने को तैयार होगा?*

उत्तर - ये तो अभी के भर्ती में भी है ना??? सेना साल में 3 महीने की छुट्टी हर जवान और अफसर को देती है... अग्निवीरों को भी मिलेगी ही. कारगिल के युद्ध में कई जवान तो पहली पोस्टिंग में ही युद्ध के मैदान में उतर गए थे.... क्या उन्होने कम बहादुरी दिखाई थी??

सेना की ट्रेनिंग पर सवाल मत उठाईये, वो एक साधारण से लड़के को कुछ ही महीनों की ट्रेनिंग से एक महामानव बना देती है... अगर विश्वास नहीं तो कारगिल में बलिदान हुए और वीरता चक्र पाए लोगों की लिस्ट उठा कर देखिये..... सैकड़ो ऐसे थे जिनकी service 4 साल से कम थी.... गलवान में बहादुरी दिखाने वाले कई जवान तो 1-2 साल की service वाले ही थे.... उन्होने क्या कम बहादुरी दिखाई थी???

*Q. 4 साल की service वाला जवान क्या युद्ध में उतनी प्रतिबद्धता दिखा पायेगा जो एक रेगुलर commission वाला जवान या अफसर दिखाता है?*

उत्तर - यह बड़ा अजीब सा सवाल है.... और दुःख की बात है कि यह सेना के लोग ही उठा रहे हैं.

क्या एक अग्निवीर सैनिक, जो सीमा पर तैनात होगा... वो पाकिस्तान या चीन कि तरफ से गोली चलने पर वहाँ से भाग जायेगा?? या उसकी ऊँगली ट्रिगर नहीं दबा पाएगी?? या उसका निशाना नहीं लगेगा... क्योकि वो 4 साल की service वाला है?? या वो आतंकवादी पर गोली नहीं चलाएगा.... किसी mission पर नहीं जाएगा.... क्यूंकि वो 4 साल वाला है???

ऐसे ही सवाल Short Service Commission वाले और Territorial आर्मी वालों पर भी उठते हैं... लेकिन इन लोगों ने समय समय पर दिखाया है कि इनका योगदान रेगुलर commission वालों से कहीं कम नहीं है....... अगर दुश्मन हमला करेगा तो अग्निवीर भी उसी बहादुरी से लड़ेगा जैसे अन्य लड़ेंगे....... उन पर सवाल उठा कर आप जवान या योजना की बेइज्जती नहीं कर रहे, बल्कि सेना की सीख और ट्रेनिंग को बदनाम कर रहे हैं.

*Q. 4 साल की service के बाद जो लड़के वापस आएंगे, तो नक्सली या गैंगस्टर बन जाएंगे.*
उत्तर - वैसे तो ऐसे सवाल उठाने वालों को जवाब नहीं बल्कि एक झापड़ लगना चाहिए... लेकिन चलिए जवाब ही देते हैं. आपको ऐसा क्यों लगता है कि ये जवान नक्सली या गैंगस्टर बनेंगे??? क्या उनके साथ कोई अन्याय हो जायेगा??? क्या उन्हें सरकार बेवजह निकाल रही है, जो वो बदला लेने के लिए ऐसे कदम उठाएंगे?? पहले दिन से सबको पता है कि 75% लोग वापस जाएंगे.... आप अच्छा प्रदर्शन नहीं करेंगे तो वापस जाना ही पड़ेगा.

और सबसे बड़ी बात... आज तक कितने सेना वाले नक्सली या गैंगस्टर बन गए हैं?? कोई data हो तो कृप्या share करें... अन्यथा अपनी चोंच बंद रखें.

*Q. सेना को ऐसी योजना की क्या जरूरत है??*
उत्तर - नयी global परिस्थिति, नये समीकरण, नये तरह के challenges से लड़ने के लिए इस तरह की योजना की जरूरत है. हम 2.5 मोर्चे की लड़ाई की बात करते हैं... लेकिन ऐसी लड़ाई के लिए सेना को युवा रहना होगा, lean and mean रहना होगा... Cost Effective रहना होगा... ज्यादा से ज्यादा trained resource जल्दी से जल्दी उपलब्ध होने होंगे.....आधे मोर्चे से लड़ने के लिए देश के भीतर भी एक Resources की layer होनी जरूरी है... जो समय आने पर लड़ सके...

वहीं सेना एक अन्य समस्या से भी जूझ रही है.... Service के दबाव और तनाव से जनित दुर्घटना और आत्महत्या जैसी प्रवृति का बढ़ना.... ऐसी योजनाओं से कहीं ना कहीं यह दबाव कम ही होगा.

सबसे बड़ी बात.... यह योजना युवाओ को सेना से जोड़ने की प्रक्रिया को आसान ही करेगी..... हर साल 40-45 हजार युवा सेना से जुड़ेंगे....10 साल में हमारे पास हमारी सेना का लगभग 30% का resource pool होगा... जो Army से trained होगा... बेशक़ वो कोई business कर रहा हो, पुलिस में हो, CAPF में हो... लेकिन Army की ट्रेनिंग और strategic सोच उसके साथ जिंदगी भर रहेगी..... ये लाखो लोग समाज और देश के लिए उपयोगी ही होंगे.

*Q. चार साल के बाद अग्निवीर को सरकार बेसहारा छोड़ देगी?*
उत्तर - ऐसा नहीं है. आप इसको एक अलग तरह के शिक्षा कोर्स की तरह समझिये. आज भी लाखो बच्चे हर साल इंजीनियरिंग, बीएड जैसे कोर्स में दाखिला लेते हैं... लाखों खर्च करते हैं.... Btech BE के चार साल, या बीएड के 2 साल बाद कितनो की नौकरी लगती है??? फिर वो बच्चे क्या करते हैं???

अग्निवीर बच्चो को ग्रेजुएशन कराया जाएगा... ट्रेनिंग मिलेगी, army का माहौल और काम करने का अनुभव मिलेगा.... उच्च तकनीकी ज्ञान, strategic समझ, टीम management, stress management जैसा ज्ञान मिलेगा..... साथ में 4 साल सैलरी मिलेगी.... एकमुष्ट लाखों रूपए मिलेंगे... उसके बाद 25% को सेना रख लेगी... अन्य के लिए CAPF, राज्य पुलिस, प्राइवेट नौकरी और अपना बिज़नेस का विकल्प तो है ही....

तो बताइये कौन बेसहारा हुआ.... लाखों रूपए फूंक का Btech कर 10-15 हजार की नौकरी करने वाला.. या अग्निवीर सैनिक??

*Q. अग्निवीर योजना से किसी ख़ास मजहब वालों को फायदा होगा??*
उत्तर - ऐसे सवाल उठाने वालों की मूर्खता की कोई सीमा नहीं..... इस योजना में आपके प्रदर्शन के हिसाब से एंट्री मिलेगी.. ना कि आपके धर्म या मजहब के हिसाब से.... ये कोई आरक्षण योजना नहीं है.... आप में दम है तो entrance निकालिये और भर्ती हो जाइये. बाकि ऐसे सवाल उठाने वालों से पहले data मांगा कीजिये.... जो वो कभी देंगे नहीं.

*Q. मेरा army में जाने का सपना टूट गया... मुझे पेंशन नहीं मिलेगी तो मैं क्यों जाऊं?*
उत्तर - कोई सपना नहीं टूटा है... आप मेहनत कीजिये, भर्ती हो जाइये... फिर चार साल जबरदस्त काम कीजिये, अपना josh जूनून दिखाइए... ताकि सेना आपको 25% लोगों में शामिल कर permanent कमिशन देने पर मजबूर हो जाए... फिर लीजिये पेंशन और अन्य लाभ... किसने रोका है आपको??

इस सन्देश को सभी समूह में भेजने की कृपया करे जी। केवल जागरूकता ही भृमित युवाओं को रोक सकती है।
साभार
डॉ निरकेष शर्मा
Intednational teachers Association

14/06/2022

*रावण विद्वान था* जबकि *हनुमानजी, विद्यावान थे*।
*एक रोचक कथा*

*विद्वान और विद्यावान में अन्तर:-*

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥
एक होता है विद्वान और एक विद्यावान।

दोनों में आपस में बहुत अन्तर है। इसे
हम ऐसे समझ सकते हैं, रावण विद्वान है और हनुमानजी विद्यावान हैं।

रावण के दस सिर हैं। चार वेद और छह: शास्त्र दोनों मिलाकर दस हैं। इन्हीं को दस सिर कहा गया है। जिसके सिर में ये दसों भरे हों, वही दस शीश हैं।

रावण वास्तव में विद्वान है लेकिन विडम्बना क्या है ?
सीताजी का हरण करके ले आया। कईं बार विद्वान लोग अपनी विद्वता के कारण दूसरों को शान्ति से नहीं रहने देते। उनका अभिमान दूसरों की सीता रुपी शान्ति का हरण कर लेता है और हनुमानजी उन्हीं खोई हुई सीता रुपी शान्ति को वापिस भगवान से मिला देते हैं।

हनुमानजी ने कहा -
विनती करउँ जोरि कर रावन।
सुनहु मान तजि मोर सिखावन॥
हनुमानजी ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं विनती करता हूँ,तो क्या हनुमानजी में बल नहीं है ?
नहीं, ऐसी बात नहीं है। विनती दोनों करते हैं।
जो भय से भरा हो या भाव से भरा हो।

रावण ने कहा कि तुम क्या, यहाँ देखो कितने लोग हाथ जोड़कर मेरे सामने खड़े हैं।
कर जोरे सुर दिसिप विनीता।
भृकुटी विलोकत सकल सभीता॥
यही विद्वान और विद्यावान में अन्तर है।

हनुमानजी गये, रावण को समझाने। यही विद्वान और विद्यावान का मिलन है।

रावण के दरबार में देवता और दिग्पाल भय से हाथ जोड़े खड़े हैं और भृकुटी की ओर देख रहे हैं।
परन्तु हनुमानजी भय से हाथ जोड़कर नहीं खड़े हैं। रावण ने कहा भी -
कीधौं श्रवन सुनेहि नहिं मोही।
देखउँ अति असंक सठ तोही॥

रावण ने कहा - “तुमने मेरे बारे में सुना नहीं है ? तू बहुत निडर दिखता है !”

हनुमानजी बोले – “क्या यह जरुरी है कि तुम्हारे सामने जो आये, वह डरता हुआ आये ?”
रावण बोला – “देख लो, यहाँ जितने देवता और अन्य खड़े हैं, वे सब डरकर ही खड़े हैं।”
हनुमानजी बोले - “उनके डर का कारण है, वे तुम्हारी भृकुटि की ओर देख रहे हैं।”
भृकुटी विलोकत सकल सभीता।
परन्तु मैं भगवान राम की भृकुटि की ओर देखता हूँ।
उनकी भृकुटि कैसी है ? बोले,

भृकुटि विलास सृष्टि लय होई।
सपनेहु संकट परै कि सोई॥

जिनकी भृकुटि टेढ़ी हो जाये तो प्रलय हो जाए और उनकी ओर देखने वाले पर स्वप्न में भी संकट नहीं आए।
मैं उन श्रीरामजी की भृकुटि की ओर देखता हूँ।
रावण बोला - “यह विचित्र बात है। जब रामजी की भृकुटि की ओर देखते हो तो हमारे आगे हाथ क्यों जोड़ रहे हो ?

विनती करउँ जोरि कर रावन।
हनुमानजी बोले – “यह तुम्हारा भ्रम है। हाथ तो मैं उन्हीं को जोड़ रहा हूँ।”

रावण बोला - “वह यहाँ कहाँ हैं ?”

हनुमानजी ने कहा कि
“यही समझाने आया हूँ।"
मेरे प्रभु रामजी ने कहा था -
सो अनन्य जाकें असि मति न टरइ हनुमन्त।
मैं सेवक सचराचर रुप स्वामी भगवन्त॥

भगवान ने कहा है कि सबमें मुझको देखना। इसीलिए मैं तुम्हें नहीं, तुझ में भी भगवान को ही देख रहा हूँ ।” इसलिए हनुमानजी कहते हैं -
खायउँ फल प्रभु लागी भूखा।
और सबके देह परम प्रिय स्वामी॥

हनुमानजी रावण को प्रभु और स्वामी कहते हैं और रावण -
मृत्यु निकट आई खल तोही।
लागेसि अधम सिखावन मोही॥

रावण खल और अधम कहकर हनुमानजी को सम्बोधित करता है।
यही विद्यावान का लक्षण है कि अपने को गाली देने वाले में भी जिसे भगवान दिखाई दे,वही विद्यावान है।

*विद्यावान का लक्षण है* -
विद्या ददाति विनयं।
विनयाति याति पात्रताम्॥

पढ़ लिखकर जो *विनम्र* हो जाये,
वह *विद्यावान* और जो पढ़ लिखकर
*अकड़* जाये, वह *विद्वान*।

तुलसीदासजी कहते हैं -
बरसहिं जलद भूमि नियराये।
जथा नवहिं वुध विद्या पाये॥

जैसे बादल जल से भरने पर नीचे आ जाते हैं, वैसे विचारवान व्यक्ति विद्या पाकर विनम्र हो जाते हैं।
इसी प्रकार *हनुमानजी हैं - विनम्र* और *रावण है - विद्वान*।

यहाँ प्रश्न उठता है कि विद्वान कौन है ?

इसके उत्तर में कहा गया है कि जिसकी दिमागी क्षमता तो बढ़ गयी, परन्तु दिल खराब हो, हृदय में अभिमान हो, वही विद्वान है और अब प्रश्न है कि

विद्यावान कौन है ?

उत्तर में कहा गया है कि *जिसके हृदय*में *भगवान हो* और जो दूसरों के हृदय में भी भगवान को बिठाने की बात करे, वही विद्यावान है।

हनुमानजी ने कहा – “रावण ! और तो ठीक है, पर तुम्हारा दिल ठीक नहीं है।
कैसे ठीक होगा ? कहा कि
राम चरन पंकज उर धरहू।
लंका अचल राज तुम करहू॥

अपने हृदय में रामजी को बिठा लो
और फिर मजे से लंका में राज करो।

यहाँ हनुमानजी रावण के हृदय में भगवान को बिठाने की बात करते हैं, इसलिए वे विद्यावान हैं।

सीख :- विद्वान ही नहीं बल्कि “विद्यावान” बनने का प्रयत्न करें। 🙏

जय श्री सीता राम 🌹🙏🏻

14/06/2022

DO WE REALLY NEED EDUCATION FOR SUCCESS??????
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●As per meaning of the word "SUCCESS" on Google:

"THE ACCOMPLISHMENT OF AN AIM OR PURPOSE".

Success is relative differential of each others' lives.
Some People Believe :

*Getting a job, home and car

*Some think being a billionaire businessman is success;

*Few believe that getting a medal for their nation is success.

*For some success is inner peace and content

Success differs with each human mind. But yes!!!!!, Many define success into few words - Money ++ Fame ++ Inner contentment!

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●ACCORDING TO ME, THERE IS MORE DIFFERENCE BETWEEN EDUCATION AND SUCCESS.

A great person said that your education, and your talents just 20% on your success, 80% your passion, hard and smart work, virtue.

I DON'T MEAN TO SAY EDUCATION IS NOT IMPORTANT AT ALL.!!.

YES... Education plays an important role in one's success but we don't only require education to get successful¡¡¡

●About 20 years ago, education was something that a person did only if he/she wanted to.

Unfortunately, as the years went by, the idea of "Education is the key to success" got more, and more enforced.

●People eventually started to believe that education was the single way to succeed, and the only thing needed for success. Despite the fact, many people believe a college degree will lead them to be successful, in reality, education is not the solitary way to succeed.

Not everybody can receive an education, or even an excellent education from a "decent academic" college/university.

●"There are many students who have no desire to attend college and who would be much better off

Education or book learning had nothing to do with the success of those people that chose to take another path rather than the typical one (education). People can be successful in any field with the right skills.

Book learning has a lot to do with the knowledge a person has, but not with the skills a person has. There are many A+ graduates out there that cannot get a job, or are stuck working at a place that had nothing to do with their degree.

●A numerous amount of students in college care more about grades than knowledge; some graduate having forgotten everything they ever learned. So there goes a college graduate with little knowledge and no skills. Can a person like that succeed? No.

That's why education is not the key to success. People cannot just go to college and expect that passing classes will get them to succeed.

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THE MAIN THING A PERSON NEEDS IN ORDER TO SUCCEED IS DRIVE ,MOTIVATION AND PASSION.

HE/SHE HAS TO KNOW WHAT THEIR END GOAL IS AND WHAT THEY NEED TO DO TO GET IT.

●98 % of children are born creative geniuses according to a test devised by NASA scientists.
But as we get old the number of creative geniuses drops to an astonishingly low average.

WHY......????

Its noticed that our education system teaches us that being wrong is the worst possible outcome. Nowhere is there a better example of this than standardized testing.

which ultimately destroying the creativity in most percentage of child.

■STUDY..STUDY...STUDY... PASSS.
YES... YOU ARE SUCCESSFUL.
With numerous applauds and appreciation.

BUT THINK FOR A WHILE ARE YOU REALLY SATISFIED WITH YOUR SUCESSS THAT EDUCATION BROUGHT INTO YOUR LIVELYHOOD.... IF YES.. ITS AWESOME TO HEAR...APPLAUDS TO U..👏👏👏■

But there are loads of people who proved that education is not the only to make yourself successful by breaking all the stereotypes existing around.

It's not the only education that makes people successful but it's the problems that exists around and the way we tackle it and bring out the solution makes us successful.

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●PERSONALITIES WHO PROVED IT RIGHT BY THEIR SUCCESS THROUGH THEIR DISCOVERIES AND CREATIVITIES.

■THOMAS ALVA EDISON■
from being a school dropout out to the illumination of the world

■THE WRIGHT BROTHERS■
who just had the formal education in their highschool brought about a revolution in the world.

■QUENTIN TARANTINO■
The Oscar winning director was a school dropout

■NARENDRA MODI■.
His life from being a chaiwala to being a prime minister if the biggest inspiration that anyone could get.

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COMING TO SUCCESS IN FINANCIAL INDEPENDENCE WITHOUT EDUCATION

■Net worth: $400 million
●ELLEN DEGENERES●
most successful comedians and hosts in Hollywood history, but she had to work her way there over time. She enrolled in the University of New Orleans, but dropped out after only one semester. She worked odd jobs from house painter to vacuum salesperson to oyster shucker. In the ‘80s, she was doing standup at comedy clubs and finally got a national spotlight on Johnny Carson’s Tonight Show. By the ‘90s, she had her own sitcom, and of course, now she’s the queen of daytime TV with her talk show Ellen.

■Net worth: $2.2 billion
●ROBERT EDWARD TURNER●
didn’t actually drop out of college. Instead, he was kicked out of Brown University for having a woman in his dorm room. Luckily, he was able to work for his father’s successful advertising company, which he later turned into the Turner Broadcasting Company, launching the first 24-hour cable news network, CNN

■Net worth: $35 millio
●ANNA WINTOUR●
Fashion designers the world over seek the capricious approval of Anna Wintour, who has been editor in chief of American Vogue since 1988. The Brit attended the all-girls school North London Collegiate School, but never pursued higher education. The daughter of a newspaper editor, she quickly rose through the ranks of fashion publications. “I think my father really decided for me that I should work in fashion,” she said in the documentary The September Issue.

■Net worth: $340 million
●RUSSELL WENDELL SIMMONS●
The hip-hop world is populated by many self-made strivers, but not just on the talent side. Simmons, one of the godfathers of rap and the cofounder of Def Jam Recordings, never finished his education at City College of New York. He’s become a bestselling author and inspiration to people who want to become the best at what they do.

■Net worth (at time of death): $10.2 billion
●STEVE JOBS●
Mastermind was a rebel in so many ways, and that extended to education. He showed an early interest in computing and went to Reed College in Portland, Oregon, but dropped out after only one semester. He ended up pursuing Eastern spiritualism in India before returning to the United States and convincing his friend Steve Wozniak to start a business with him

■Net worth: $23.5 billion
●MICHAEL SAUL DELL●
Like many of the other tech mavens of the 1980s and ‘90s, Dell showed an early interest in computers. But his parents wanted him to be a doctor, so he enrolled at the University of Texas at Austin as a premed student. He left after only one year because his side work refurbishing and selling computers became so successful. Today he’s still in the same basic business as CEO of Dell Technologies.

■Net worth: $20.7 billion
●PAUL ALLEN●
Bill Gates right-hand man were buddies going back to high school, even creating their own data tracking tool. While they parted ways when Bill Gates went to Harvard and Allen entered Washington State University, they reunited only two years later, dropping out to make Microsoft what it is.

■Net worth (at time of death): $99 million
●DAVE THOMAS●
No one knew how to sell a burger with a smile like Dave Thomas. The founder and former CEO of Wendy’s didn’t make it to college, having left high school to work at the Hobby House Restaurant in Fort Wayne, Indiana. He opened his first Wendy’s in 1969, and eventually turned it into a fast-food empire thanks in no small part to his role as charming mascot in a number of TV ads.

■Net worth: $199 billion (in today’s money)
●HENERY FORD●
revolutionized manufacturing and transportation with his car company’s innovation, the assembly line. But he did so without a fancy engineering or business background: He left his family’s farm at 16 to move to Detroit, and became an apprentice in a machine shop. He went on to build his first car in 18 century.
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MY POINT OF VIEW:
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■"EDUCATION IS AN OPTIONAL BUT KNOWLEDGE IS MANDATORY FOR SUCCESS..

EDUCATION IS ONE SUCH RESOURCE FOR KNOWLEDGE..

BUT EDUCATION ALONE IS NOT KNOWLEDGE"■

●EDUCATIONAL SYSTEM SHOULD RATHER ENHANCE CREATIVITY AND SELF CONFIDENCE.. RATHER THAN MUGGING UP FACTS TO SHOW THE MEMORY QUOTIENT OF A STUDENT●

10/06/2022

*Specialty of Today's date: 10622 or 1062022*

▪︎10=6+2²=6×2–2=(6×2+2)–(6+2)÷2=(6×2²)–(6×2+2)=(6+22)–(6²÷2)=(6–2)!÷2–(6–2²)=(62–2)÷(6×2÷2)=(6+2)2–(6×2÷2)=(6+2²!)÷(6÷2)!÷2=(6²÷2)–(6–2)2=(6+2÷2)+(6÷2)!÷2=(6–2÷2)(6–2²)=(6–2÷2)+(6–2÷2)=(6²+2)–(6+22)=(6²–2)–(6×2²)=(6×2÷2)+(6+2)÷2=(6–2)!+2–(6+2)2=(6–2)!–2–(6–2)!÷2, 1+0=1–0=1⁰=6÷2–2, 1×0=6(2–2), 106=(20×2²)+(2+02²!)=(20÷2)²+(2+02²)=(202÷2)+(2⁰+2²)=(20+22)+2^(0!+2)2, 10+6=20–2², 10–6=2⁰×2²
▪︎1⁰×6+2², 1⁰+62+2, 10×6+22, 10×6–22, 10(6÷2)!+2, 10(6÷2)!–2, 1+(–0!+6)!+22, 1⁰+6×22, 1⁰+6×2²!, –1⁰+6×2²! are semiprimes
▪︎1⁰+6+2², 10×6+2÷2, 10×6–2÷2, 106+2÷2, 1⁰+6+22, 1⁰+6+2²!, –1⁰+6×22 are primes

▪︎10+(6+2)2=1+0⁶!+2²!=(1+0!)6×2+2=2+26–0!–1(digits reversed)=1+0!+6×2²=10+(6–2)²=10+6+(2+0!)!+2²=10+6×2+02²=10×6÷2–02²=(10+6)2–(0!+2)2=1⁰×6+20×2÷2=1⁰⁶×2+02²!=1⁰⁶+2+0!+22 is *10th Semiprime*
▪︎–1⁰+6+2²!=(10×6–2)÷2=1⁰+6+22=–1–0!+62÷2=2+26+01(digits reversed)=–1+(–0!+6)!÷2²=(10×6×2⁰–2)÷2=(10+6)2+0!–2²=–10+6²–0!+2²=(–1⁰+6)²+02²=–1⁰+6+20+2²={(–1⁰+6)!÷2–02}÷2 is *10th Chen & Prime*
▪︎1⁰×62÷2=1+(–0!+6)!÷2²=1⁰+6+2²!=(10×6+2)÷2=2²!+6+01(digits reversed)=(10+6)2–02÷2=10×6÷2+02÷2=–1⁰+6²–02²=(1⁰×62+0²)÷2=1⁰×6+2⁰+2²! & 10×6–2÷2=1+(–0!+6)!÷2–2=–1⁰+62–2=10×6×2⁰–2÷2=1⁰+62–02²=10(6÷2)!–02÷2 are *10th Solinas & Right-truncatable primes*
▪︎(1⁰+6)²–2=–10+62–0!–2²=(–1⁰+6)²+022=(10–6+2+0!)²–2=10+6²+02÷2=(10–6)!2–02÷2 is *10th Additive, Left-truncatable prime*
▪︎–1⁰+6²×2=10×6+(20+2)÷2=10(6+2)–(0!+2)²=1+(–0!+6){(2+0!)!2+2}=10+62–02÷2=–1⁰+(6÷2)02²!=1⁰+6+2^(0!+2)2 is *10th Good prime*
▪︎10(6+2)+(0!+2)²=1⁰+(6–2)022=1+0!+62+0!+2²!=1+(–0!+6)!–2^(0!+2²)=–1+(–0!+6)(2+0!)²2 is *10th Pythagorean, Sophie Germain prime*
▪︎–1+(–0!+6)!–22=1+(–0!+6)!–2²!=10×6×2–0!–22=1+0!–6+202÷2=106–(2⁰+2)²=1+(–0!+6)20–2²=1⁰+6(20–2²) is *10th Isolated, Pierpont prime*
▪︎106+2+0!+2²=(–1⁰+6)!–2–0!–2²=1+(–0!+6)(20+2)+2=1⁰+{62–(0!+2)!}2 is *10th Emirp, Harmonic prime*
▪︎(–1⁰+6)!+20–2÷2=(1⁰+6)20–2÷2 is *10th Happy prime*

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