28/09/2022
ईरान हिज़ाब और लड़कियां
ईरान एक मध्य एशियाई देश है जो धार्मिक तौर पर एक मुस्लिम राष्ट्र है वहां पर एक आंदोलन अभी खूब चर्चा में है , जिसमें महिलाएं ईरान की सड़कों पे हैं । जगह- जगह एक अलग किस्म की होली जलाई जा रही है जिसकी हिमाकत आज तक नहीं की गई लेकिन बहुत पहले की जानी चाहिए थी । ईरान की सड़कों पे जलती हुई आग और कुछ भी नहीं यह है उस प्राचीन संकुचित , अतर्किक , दकियानुशी और पितृसत्तात्मक विचारों के जलने की,जो मुस्लिम वर्ग की महिलाओं दिमागों में बचपन से लाद दिए जाते हैं और वो विचार है हिज़ाब और बुर्के। अब तो ये उनकी संस्कृति का हिस्सा हो चुके हैं और न चाहते हुए भी पहनना होता है ।
आज ईरान में जो सड़कों पर चिल्लाती , नारे लगाती ,आग में हिज़ाब जलती, और विरोध में अपने बाल तक काट देने वाली लड़कियों के वीडियो और फोटो हमें दिखाई दे रहे हैं ये बहुत पहले हो जाना चाहिए था लेकिन देर आए दुरूस्त आए .... बेहतर है ।
हिज़ाब पहनने के इस मुद्दे को धर्म से बांध देने को कोशिश होती रही है कि उसे बाहर से कुछ कहकर या दबाब बना कर बंद नहीं किया जा सकता था इसके लिए जरूरत थी आत्म जागरण की स्वप्रेरणा की और खुद महिलाओं को मर्जी की ... शायद महिलाओं में ये हिम्मत रही भी होगी लेकिन वो आगे नहीं आ पाई इस हिम्मत को जिंगारी देने का काम किया उस महिला को हत्या ने जो ईरान में कुछ दिन पहले ठीक तरीके से हिजाब न पहन पाने के कारण मार दी गई ।
अब महिलाएं सड़कों पर है और होना ही चाहिए और हर वर्ग की महिलाओं को होना चाहिए उन्हें हर उस मुद्दे पर होना चाहिए जहां जरूरत है , जो रूढ़ियां उनके अधिकारों को सीमित करे , उस हर एक व्यवस्था के लिए महिलाओं को सड़कों पर उतरना चाहिए और नारे लगाने चाहिए आग लगा देनी चाहिए उस व्यवस्था को जो उनके अधिकार सीमित करे उन्हें सीमाओं में बांधने की कोशिश करें, पुरुषों से कमतर करने की कोशिश करे।