अपना ग्वालियर

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मकरध्वज मंदिर ग्वालियर स्थित प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में वर्णित हनुमान जी और अहिरावण के युद्ध को प्रमाणित करता एक अनूठा ...
16/04/2020

मकरध्वज मंदिर ग्वालियर स्थित प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में वर्णित हनुमान जी और अहिरावण के युद्ध को प्रमाणित करता एक अनूठा दार्शनिक स्थान है । रामायण में वर्णित पाताल लोक ग्वालियर और उसके आसपास का क्षेत्र ही है, इसका प्रमाण है शहर के निकट जंगलों में बना सदियों पुराना मकरध्वज मंदिर है। इन गांवों में प्रचलित किंवदंतिया बताती हैं कि मंदिर से सटी गुफा में ही राम-रावण युद्ध के दौरान अहिरावण ने राम-लक्ष्मण का अपहरण कर बंधक बना कर रखा था। जब हनुमान जी श्री राम और लक्षमण जी को अहिरावण के बंधन से मुक्त कराने यहां आये थे तब मकरध्वज द्वारा उनका मार्ग अवरुद्ध किया गया और दोनों के बीच हुए वार्तालाप के दौरान हनुमान जी ने उनको बताया की मकरध्वज उनके ही पुत्र हैं इस प्रकार हनुमान जी ने श्री राम और लक्षमण जी को अहिरावण के बंधन से मुक्त कराकर मकरध्वज जी को यहाँ का राजा बना दिया था। यहां आज भी कई पौराणिक अवशेष एवं कलाकृतियां देखी जा सकती हैं।

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05/03/2020

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सभी आदरणीय ग्वालियर वासियों को मेरा प्रणाम ! अगर आपके पास ऐसे कपडे हैं जिनका उपयोग आप नहीं करते हैं तो कृपया करके जरुरत ...
20/12/2019

सभी आदरणीय ग्वालियर वासियों को मेरा प्रणाम ! अगर आपके पास ऐसे कपडे हैं जिनका उपयोग आप नहीं करते हैं तो कृपया करके जरुरत मंद लोगो के लिए उनका दान करें ! आपके एक प्रयास से किसी जरुरत मंद का भला हो सकता है ! धन्यवाद
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जय भोलेनाथ, हर हर महादेव नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सब, आज आपको हज़ारों साल पुराने शिवलिंग के दर्शन करवाते हैं , यह सिद्...
22/08/2019

जय भोलेनाथ, हर हर महादेव
नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सब, आज आपको हज़ारों साल पुराने शिवलिंग के दर्शन करवाते हैं , यह सिद्धस्थान अमर पहाड़ के करीब, गिरवाई नाम के एक कस्बे की सीमा पर बना हुआ हैं जहां कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु दर्शन करने जाते हैं

संगीत सम्राट तानसेन ( ग्वालियर  के अनमोल रत्न) तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाल हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक म...
22/03/2019

संगीत सम्राट तानसेन ( ग्वालियर के अनमोल रत्न)

तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाल हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक महान ज्ञाता थे। उन्हे सम्राट अकबर के नवरत्नों में भी गिना जाता है। संगीत सम्राट तानसेन की नगरी ग्वालियर के लिए कहावत प्रसिद्ध है कि यहाँ बच्चे रोते हैं, तो सुर में और पत्थर लुढ़कते हैं तो ताल में। इस नगरी ने पुरातन काल से आज तक एक से बढ़कर एक संगीत प्रतिभायें संगीत संसार को दी हैं और संगीत सूर्य तानसेन इनमें सर्वोपारि हैं। प्रारम्भ से ही तानसेन मे दूसरों की नकल करने की अपूर्व क्षमता थी। बालक तानसेन पशु-पक्षियों की तरह- तरह की बोलियों की सच्ची नकल करता था और हिंसक पशुओं की बोली से लोगों को डरवाया करता था। इसी बीच स्वामी हरिदास से उनकी भेंट हो गयी । मिलने की भी एक मनोरंजक घटना है।उनकी अलग-अलग बोलियों को बोलने की प्रतिभा को देखकर वो काफी प्रभावित हुए। स्वामी जी ने उन्हें उनके पिता से संगीत सिखाने के लिए माँग लिया। इस तरह तानसेन को संगीत का ज्ञान हुआ। हर साल दिसम्बर में बेहट में तानसेन की कब्र के पास ही राष्ट्रिय संगीत समारोह ‘तानसेन समारोह’ आयोजित किया जाता है। जिसमे हिन्दुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक का तानसेन सम्मान और तानसेन अवार्ड दिया जाता है।

तानसेन समाधि परिसर, हजीरा, ग्वालियर

सभी ग्वालियर वासियों को होली की हार्दिक शुभकामनायें
21/03/2019

सभी ग्वालियर वासियों को होली की हार्दिक शुभकामनायें

मांढरे वाली माता मंदिर ग्वालियरशहर के ऐतिहासिक मंदिरों में मांढरेवाली माता का मंदिर भी शामिल है। कंपू क्षेत्र के कैंसर प...
02/12/2018

मांढरे वाली माता मंदिर ग्वालियर

शहर के ऐतिहासिक मंदिरों में मांढरेवाली माता का मंदिर भी शामिल है। कंपू क्षेत्र के कैंसर पहाड़ी पर बना यह भव्य मंदिर स्थापत्य की दृष्टि से तो खास है ही, साथ ही इस मंदिर में विराजमान अष्टभुजा वाली महिषासुर मर्दिनी मां महाकाली की प्रतिमा अद्भुत और दिव्य है। बताया जाता है कि इस मंदिर को करीब 140 वर्ष पूर्व आनंदराव मांढरे जो कि जयाजीराव सिंधिया की फौज में कर्नल के पद पर थे, के कहने पर ही तत्कालीन सिंधिया शासक ने यह मंदिर बनवाया था। आज भी इस मंदिर की देखरेख और पूजा-पाठ का दायित्व मांढरे परिवार निभा रहा है।
बताया जाता है कि जयविलास पैलेस और मंदिर का मुख आमने-सामने है। जयविलास पैलेस से एक बड़ी दूरबीन के माध्यम से माता के दर्शन प्रतिदिन सिंधिया शासक किया करते थे। साढ़े तेरह बीघा भूमि विरासतकाल में इस मंदिर को राजवंश द्वारा प्रदान की गई। मंदिर की हर बुनियादी जरूरत को सिंधिया वंश द्वारा पूरा किया जाता है।

शीतला माता मंदिर ग्वालियर शहर से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर सांतऊ शीतला माता का मंदिर स्थित है। शीतला माता का यह मंदिर क...
17/06/2018

शीतला माता मंदिर

ग्वालियर शहर से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर सांतऊ शीतला माता का मंदिर स्थित है। शीतला माता का यह मंदिर करीबन चार सौ साल पुराना है| मंदिर के पुजारी महंत नाथूराम के अनुसार उनके पूर्वज महंत गजाधर मौजूदा मंदिर के पास ही बसे गांव सांतऊ में रहते थे। वे गोहद के पास स्थित खरौआ में एक प्राचीन देवी मंदिर में नियमित रूप से गाय के दूध से माता का अभिषेक करते थे। महंत गजाधर की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी मां कन्या रूप में प्रकट हुईं और महंत से अपने साथ ले चलने को कहा। गजाधर ने माता से कहा कि उनके पास कोई साधन नहीं है वह उन्हें अपने साथ कैसे ले जाएं। तब माता ने कहा कि वह जब उनका ध्यान करेंगे वह प्रकट हो जाएंगी। गजाधर ने सांतऊ पहुंचकर माता का आवाहन किया तो देवी प्रकट हो गईं और गजाधर से मंदिर बनवाने के लिए कहा। गजाधर ने माता से कहा कि वह जहां विराज जाएंगी वहीं मंदिर बना दिया जाएगा। सांतऊं गांव से बाहर निकल कर जंगलों की इस पहाड़ी पर माता विराज गईं। तब से महंत गजाधर के वंशज इस मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।शीतला माता को डकैत ही नहीं पुलिस वाले भी बहुत मानते थे। यहां चंबल के कुख्यात डकैतों ने घंटे चढ़ाए हैं। जब चंबल क्षेत्र में डकैतों का बोलबाला था तब भी यहां भक्तों का मेला लगता था। खास बात यह थी की माता के दर्शनों को आने वाले भक्तों से न केवल इन डकैतों ने कभी लूटपाट की और न कभी इनकी तरफ देखा। यहीं नहीं जहां माता विराजमान हैं वहां काफी घना जंगल है और वहां कभी शेर रहा करते थे।

16/06/2018

सभी ग्वालियरवासियों को ईद मुबारक

प्राचीन कोटेश्वर शिव मंदिर (ग्वालियर, मध्यप्रदेश)प्राचीन कोटेश्वर मंदिर भगवान शिव के आराध्य के रूप में तो विख्यात है ही,...
03/06/2018

प्राचीन कोटेश्वर शिव मंदिर (ग्वालियर, मध्यप्रदेश)

प्राचीन कोटेश्वर मंदिर भगवान शिव के आराध्य के रूप में तो विख्यात है ही,साथ में इस मंदिर की दीवारों पर सदियों पुरानी चित्रकला आज भी जीवंत है। ये चित्र एक धरोहर के साथ ही भगवान शिव की महिमा को भी बताते हैं। कोटेश्वर महाराज का मंदिर पूरे अंचल की आस्था का केन्द्र है। मंदिर में जो शिवलिंग है वो दिव्य है और सदियों पुराना है। 17वीं शताब्दी में मुगल शासक औरंगजेब ने ग्वालियर के दुर्ग पर कब्जा कर लिया और उसे जेल में तब्दील कर दिया। दुर्ग पर एक शिव मंदिर था,जिसमें बीचों बीच शिवलिंग स्थापित था। तोमर राजवंश के शासक उसकी पूजा करते थे। औरंगजेब ने दुर्ग के मंदिर से शिवलिंग को कोट में फेंक दिया था। किले की कोट में शिवलिंग मिलने के कारण शिवलिंग को कोटेश्वर महादेव कहा गया औऱ मंदिर का नाम कोटेश्वर मंदिर रखा गया। बताया जाता है कि औरंगजेब के इस हमले के दौरान नाग देवता मंदिर में आ गए और नागों के डर से औरंगजेब के सैनिक मंदिर को तहस-नहस वापस चले गए। शिवलिंग शताब्दियों तक किले की तलहटी में मलबे के नीचे दबी रही। संत देव महाराज को स्वप्न में नागों के द्वारा रक्षित मूर्ति के दर्शन हुए, उनके कानों में उसे बाहर निकलवा कर पुनस्र्थापित किए जाने का आदेश गूंजा।महंत देव महाराज के अनुरोध पर जयाजी राव सिंधिया ने किला तलहटी में पड़े मलवे को हटा कर प्रतिमा को निकाला और मंदिर बनवा कर उसमें मूर्ति की पुनप्रतिष्ठा कराई। इसी दौरान मंदिरों की दीवारों व छत पर शिव की महिमा बताते हुए कई चित्र बनाए गए हैं। ये चित्र सदियों से जीवंत बने हुए हैं और भगवान शिव की गाथा का वर्णन करते हैं।

श्री गरगज धाम हनुमान मंदिर, बहोड़ापुर (ग्वालियर, मध्यप्रदेश)श्री गरगज धाम हनुमान जी का मंदिर ग्वालियर के बहोड़ापुर नामक स्...
02/06/2018

श्री गरगज धाम हनुमान मंदिर, बहोड़ापुर (ग्वालियर, मध्यप्रदेश)

श्री गरगज धाम हनुमान जी का मंदिर ग्वालियर के बहोड़ापुर नामक स्थान पर स्थित बड़ा ही शांत एवं मनोरम स्थल है| हनुमान जयंती के अवसर पर यहाँ विशेष विद्युत् एवं पुष्प सज्जा की जाती है। यहाँ श्रद्धालु अपनी मनोकामना की पुर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं एवं उनकी मनोकामना चमत्कारिक रूप से पूर्ण होती है। कई भक्तो को अपने अनुभव सुनते एवं सुनाते देखा जा सकता है ।

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