पी0एम0 श्री कम्पोजिट विद्यालय, बहलोलपुर, गुन्नौर

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पीएम श्री योजना (पीएम स्कूल फ़ॉर राइज़िंग इंडिया) का मकसद है कि मौजूदा स्कूलों को बेहतर बनाकर उन्हें अनुकरणीय बनाया जाए. इस योजना के तहत, केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय, और संघ राज्य क्षेत्र सरकारें मिलकर काम करती हैं.

**पी एम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय (1-8) बहलोलपुर**             (for National Education Policy 2020)
16/06/2026

**पी एम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय (1-8) बहलोलपुर**












(for National Education Policy 2020)













11/06/2026

समर कैंप गतिविधि- अंत्याक्षरी **पी एम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय (1-8) बहलोलपुर**












(for National Education Policy 2020)













23/05/2026

समर कैंप गतिविधि- नाटक मंचन**पी एम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय (1-8) बहलोलपुर**












(for National Education Policy 2020)













21/05/2026

समर कैंप गतिविधि**पी एम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय (1-8) बहलोलपुर**












(for National Education Policy 2020)













19/05/2026

🕉️ज्ञानसागर ग्रंथमाला 🕉️
भारतीय ज्ञान पाठावली,९६६
श्रेणी - मेघा ( १८,१९,२० आयु वर्ग)
*पूजा हो तो ऐसी*
क्रमांक - ४८७,१९मई २०२६
लेखक: दीनानाथ बत्रा
*4. जनसेवकों का अपना आदर्श*
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष थे। पत्रकार उनसे भेंट करना चाहते थे। वे उनसे मिलने स्टेशन पर पहुँचे। डाक्टर साहब तीसरी श्रेणी के डिब्बे में यात्रा करके आये थे। पत्रकार हैरान हुए। एक प्रतिनिधि ने उनसे पूछ लिया, "डाक्टर साहब!
क्या प्रथम श्रेणी में आपका आरक्षण नहीं हो पाया जो आपको तीसरी श्रेणी में यात्रा करनी पड़ी है? इसमें तो बहुत कष्ट हुआ होगा।"
"नहीं, मैं प्रायः इस श्रेणी में ही यात्रा करता हूँ। आप जानते हैं कि हमारी संस्था निर्धन संस्था है। ऐसी बचत से संस्था की अन्य आवश्यक गतिविधियों के संचालन में सहायता मिलती है। मैं स्वयं बचत न करूं तो सहयोगियों से इस कार्य के लिए आग्रह कैसे कर सकूँगा?" यह था उत्तर डाक्टर मुखर्जी का।
यह घटना जन-नेताओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है तथा जन-सेवकों के लिए सच्चा आदर्श।
5. *डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की सौम्यता*
बात सन् 1935 की है। राजेन्द्र बाबू कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये थे। वे प्रयाग गये और वहाँ अंग्रेजी समाचार-पत्र 'लीडर' के सम्पादक श्री चिन्तामणि से भेंट करने की इच्छा से उनके कार्यालय पहुँचे। चपरासी को परिचय-पत्र दिया। वह उसे सम्पादक की मेज पर रख कर बाहर आकर बैठ गया। उधर सम्पादक महोदय अपने कार्य में व्यस्त थे और उनकी दृष्टि कार्ड पर गयी ही नहीं।
बाबू जी बाहर प्रतीक्षा करने लगे। यहाँ कार्यालय तक आते-आते वर्षा के कारण उनके कपड़े भीग गये थे। जब तक अंदर से बुलावा नहीं आता तब तक उधर निकट ही मजदूरों की अंगीठी के पास जा बैठे और हाथ सेकने तथा कपड़े सुखाने लगे।
थोड़ी देर में श्री चिन्तामणि ने कार्ड देखा और वे घबरा गये। अविलम्ब वे बाहर दौड़े। राजेन्द्र बाबू वहाँ निकट होते तो दिखाई देते। खोज हुई, तो वे मजदूरों के बीच बैठे पाये गये। चिन्तामणि जी ने अपनी सफाई देनी प्रारम्भ की और कहा, "श्रीमन्, क्षमा कीजिएगा, आपको प्रतीक्षा करनी पड़ी। कार्ड पर मेरा ध्यान ही नहीं गया।" हँसते हुए राजेन्द्र बाबू ने कहा, "इसमें क्षमा की क्या बात है? कपड़े सुखाना भी एक काम था। अच्छा हुआ इस बीच निपट गया।" सम्पादक 'बाबू जी' की सरल तथा सौम्य मूर्ति को निहारते रह गये।
*आभार*
पुनरूत्थान प्रकाशन सेवा ट्रस्ट
अहमदाबाद 🕉️









































15/05/2026

🕉️ज्ञानसागर ग्रंथमाला 🕉️
पुण्य भूमि भारत संस्कृति वाचन माला ,संपुट ७, क्रमांक -७, वर्ग -१
(श्रेणी -५से १२ वर्ष/आबाल वृद्ध,)
क्रमांक - ४८३-१५मई२०२६
*सुन्दर नूतन धरती*
मू. ले.: इन्दुमति काटदरे
अनुवाद: वासुदेव प्रजापति
अध्याय - ७
पृष्ठ संख्या - १४ एवं १५
*घाटी में रहने का आनन्द*
धरती पर घाटियाँ भी हैं। घाटी अर्थात् पहाड़ की तलहटी । परन्तु चारों ओर पहाड़ हो तथा बीच में सपाट मैदान हो तो उसे घाटी कहते हैं ।
घाटी का प्रदेश बहुत सुन्दर होता है। इसमें बहुत प्राणी रहते हैं । भाँति-भाँति के फल होते हैं। खेती भी बहुत होती है तथा वहाँ का मौसम भी अच्छा होता है ।
किन्तु घाटी में से बाहर जाना है तो पहाड़ को लांघ कर ही जाना पडता
है ।
घाटी ऊँची जगह पर भी होती है तो नीचे भी होती हैं।
हमारे देश में सुन्दर से सुन्दर घाटी का प्रदेश अर्थात् कश्मीर । चारों ओर हिमालय पर्वत है और बीच में है कश्मीर घाटी । कश्मीर घाटी ऊँचाई पर स्थित है , इसलिए वहाँ सर्दियों में बहुत बर्फ गिरती है ।
*आभार*
पुनरूत्थान प्रकाशन सेवा ट्रस्ट
अहमदाबाद 🕉️









































12/05/2026

🕉️ज्ञानसागर ग्रंथमाला 🕉️
पुण्य भूमि भारत संस्कृति वाचन माला ,संपुट ७, क्रमांक -७, वर्ग -१
(श्रेणी -५से १२ वर्ष/आबाल वृद्ध,)
क्रमांक - ४८०-१२मई२०२६
*सुन्दर नूतन धरती*
मू. ले.: इन्दुमति काटदरे
अनुवाद: वासुदेव प्रजापति
अध्याय - ४
पृष्ठ संख्या - ८ एवं ९
*जंगल लाते वर्षा*
धरती पर जंगल हैं। जंगल को अरण्य भी कहते हैं । अरण्य में बहुत सारे वृक्ष होते हैं । बहुत मोटे -मोटे वृक्ष होते हैं, बहुत ऊँचे -ऊँचे वृक्ष होते हैं । बहुत घने वृक्ष होते हैं । इनके बीच में से चलकर जाना भी सम्भव नहीं होता । सूर्य के प्रकाश को भी अन्दर जाने में कठिनाई होती है ।
जंगल में बाघ रहते हैं, सिंह रहते हैं। बड़े -बड़े हाथी रहते हैं,चीते रहते हैं। गैंड़े रहते हैं। सियार रहते हैं। ये सभी गुफा में रहते हैं। जंगल में बड़े- बड़े साँप और अजगर भी रहते हैं।
जंगल में जड़ी-बूटियाँ होती हैं। फलों के पेड़ होते हैं, औषधियाँ होती हैं ।
जंगल में ऋषि-मुनि तपस्या करते हैं। वहाँ इनके आश्रम होते हैं। इनमें विद्यार्थी पढ़ते हैं ।
जंगल जमीन का रक्षण करते हैं। जंगल भी वर्षा लाते हैं ।
हमारे देश में प्रमुख अरण्यों के नाम इस प्रकार हैं :
दंडकारण्य, नैमिषारण्य, दारुकावन, गीर वन, सुन्दर वन आदि ।
*आभार*
पुनरूत्थान प्रकाशन सेवा ट्रस्ट
अहमदाबाद 🕉️









































11/05/2026

🕉️ज्ञानसागर ग्रंथमाला 🕉️
पुण्य भूमि भारत संस्कृति वाचन माला ,संपुट ७, क्रमांक -७, वर्ग -१
(श्रेणी -५से १२ वर्ष/आबाल वृद्ध,)
क्रमांक - ४७९-११मई२०२६
*सुन्दर नूतन धरती*
मू. ले.: इन्दुमति काटदरे
अनुवाद: वासुदेव प्रजापति
अध्याय - ३
पृष्ठ संख्या - ६ एवं ७

*गहरे महासागर*
धरती के ऊपर महासागर हैं । महासागर अर्थात् पानी ही पानी । एक किनारे खड़े होने पर दूसरा किनारा दिखाई भी नहीं देता । गहरा इतना कि छोटे-बड़े पहाड़ इसमें समा जाये ।
महासागर को सागर भी कहते हैं । दरिया या समुद्र भी कहते हैं । समुद्र में बड़ी बड़ी लहरें उठती हैं । समुद्र में ज्वार-भाटा भी आता है । समुद्र घनगंभीर गर्जना करता है । समुद्र में जब तूफान आता है, तब पहाड़ जितनी ऊँची लहरें उठती हैं।
समुद्र में बड़े- बड़े मगरमच्छ रहते हैं । बड़े -बड़े दरियाई घोड़े होते हैं और भी असंख्य जलीय जीव-जन्तु होते
हैं । समुद्र में ही मोती मिलते हैं। प्रवाल होते हैं। नीलम और माणिक जैसे रत्न मिलते हैं। समुद्र में भिन्न-भिन्न प्रकार के शंख भी
मिलते हैं ।
पृथ्वी के ऊपर बहनेवाली सभी नदियाँ पहाड़ों से निकलती हैं और समुद्र में समा जाती हैं ।
समुद्र को समुद्रदेव के रूप में पूजा जाता है। हमारे देश के तीन ओर सागर हैं। पूर्व दिशा में गंगासागर, पश्चिम में सिन्धुसागर तथा दक्षिण में रत्नाकर स्थित है ।
*आभार*
पुनरूत्थान प्रकाशन सेवा ट्रस्ट
अहमदाबाद 🕉️









































10/05/2026

🕉️ज्ञानसागर ग्रंथमाला 🕉️
पुण्य भूमि भारत संस्कृति वाचन माला ,संपुट ७, क्रमांक -७, वर्ग -१
(श्रेणी -५से १२ वर्ष/आबाल वृद्ध,)
क्रमांक - ४७७-९ मई२०२६
सुन्दर नूतन धरती
मू. ले.: इन्दुमति काटदरे
अनुवाद: वासुदेव प्रजापति
अध्याय - १
पृष्ठ संख्या - १
हम कहाँ रहते हैं ? हम धरती पर रहते हैं । धरती कैसी है ? धरती गोल है । धरती कैसी गोल है ? धरती नारंगी जैसी गोल है । धरती का रूप कैसा है ? आकार कैसा है ? इसके ऊपर क्या क्या स्थित है ? धरती बहुत सुन्दर है । चलो ! जानकारी करते हैं कि धरती के कैसे हैं
रूप ।
*आभार*
पुनरूत्थान प्रकाशन सेवा ट्रस्ट
अहमदाबाद 🕉️









































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