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लगातार 4 वर्षों से बच्चों का साथ देकर उनकी सफलता के लिए प्रयासरत......
19/08/2024

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17 March 2024SundayTime: 9:00 am
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Towards the being human.......
04/03/2024

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सपने आपकी मार्गदर्शन हमारा
21/02/2024

सपने आपकी मार्गदर्शन हमारा

इस कोर्स का लाभ लेकर अपने गणित के डर को छू मंतर करिए।कक्षा छह से ऊपर के बच्चों के लिए।दो महीने का यह कोर्स बिल्कुल नि:शु...
03/02/2024

इस कोर्स का लाभ लेकर अपने गणित के डर को छू मंतर करिए।
कक्षा छह से ऊपर के बच्चों के लिए।
दो महीने का यह कोर्स बिल्कुल नि:शुल्क है।
संपर्क सूत्र: 7677988311वाटसएप

शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी के अनमोल विचार:- विचारों से क्रांति आती है, हथियारों से नहीं।
28/09/2023

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10/09/2023

भारत का अर्थ:-
भा - ज्ञान
रत - लिप्त
अर्थात भारत का अर्थ है "ज्ञान में लिप्त"।

 : 30 अगस्त को आसमान में चमकेगा दुर्लभ सुपर ब्लू मून, जानें कैसे देख सकेंगे आपBlue Moon: नासा के अनुसार, यह घटना तब होती...
30/08/2023

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30 अगस्त को आसमान में चमकेगा दुर्लभ सुपर ब्लू मून, जानें कैसे देख सकेंगे आप
Blue Moon: नासा के अनुसार, यह घटना तब होती है जब चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी के सबसे करीब (पेरिजी के रूप में जानी जाती है) उसी समय होती है जब चंद्रमा भरा होता है. 30 अगस्त को, चंद्रमा पृथ्वी से 357,244 किमी और भी करीब होगा. इन आंकड़ों की तुलना लगभग 405,696 किमी की दूरी से की जाती है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपने सबसे दूर बिंदु पर होता है.

30 अगस्त को, चंद्रमा पृथ्वी से 357,244 किमी और भी करीब होगा.
30 अगस्त को, चंद्रमा पृथ्वी से 357,244 किमी और भी करीब होगा.

स्काईगेजर्स इस सप्ताह एक खगोलीय घटना के लिए तैयार हैं क्योंकि वे 30 अगस्त को दुर्लभ सुपर ब्लू मून का दीदार करेंगे. उस रात चंद्रमा के स्पष्ट दृश्य वाला कोई भी व्यक्ति सामान्य से थोड़ा उज्जवल और बड़ा पूर्ण चंद्रमा देख सकता है.

अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, यह पूर्ण चंद्रमा अगस्त में दूसरा पूर्ण चंद्रमा होगा, जो 1946 में स्काई एंड टेलीस्कोप पत्रिका द्वारा पेश की गई नई परिभाषा के अनुसार इसे ब्लू मून बना देगा. अगस्त का पहला सुपरमून महीने के पहले दिन हुआ था जब चंद्रमा पृथ्वी से 357,530 किमी दूर था. दूसरा 30 अगस्त को होगा, और चंद्रमा और भी करीब पृथ्वी से 357,244 किमी की दूरी पर होगा.

ब्लू मून क्या है?
नासा के अनुसार, यह घटना तब होती है जब चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी के सबसे करीब (पेरिजी के रूप में जानी जाती है) उसी समय होती है जब चंद्रमा भरा होता है. 30 अगस्त को, चंद्रमा पृथ्वी से 357,244 किमी और भी करीब होगा. इन आंकड़ों की तुलना लगभग 405,696 किमी की दूरी से की जाती है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपने सबसे दूर बिंदु पर होता है. स्पेस डॉट कॉम के अनुसार ब्लू मून दो प्रकार का होता है मौसमी और मासिक.

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आज रात देखिए सुपर ब्लू मून, दिखेगा अधिक बड़ा और चमकदार, जानिए खासियत

स्काईगेज़र नीले चांद को खोजने के लिए सूर्यास्त के तुरंत बाद पूर्व की ओर देख सकते हैं. स्पेस डॉट कॉम के अनुसार, नीले चंद्रमा के साथ आकाश में एक विशेष अतिथि के तौर पर शनि भी शामिल होगा. चक्राकार गैस की विशालकाय वस्तु विरोध से बस कुछ ही दिन पहले होगी, जिस बिंदु पर यह पृथ्वी से देखे जाने वाले सूर्य के ठीक विपरीत स्थित है, जिससे यह रात के आकाश में विशेष रूप से उज्ज्वल हो जाता है.

पिछला ब्लू मून अगस्त 2021 में उगा था
मीडिया आउटलेट का कहना है कि नीला चंद्रमा अपेक्षाकृत बार-बार होता है, खगोलीय रूप से कहें तो, हर दो से तीन साल में एक बार होता है. आखिरी ब्लू मून अगस्त 2021 में उगा था, और अगला अगस्त 2024 में उगने की उम्मीद है. नासा के अनुसार, पूर्ण चंद्रमाओं के बीच लगभग 29.5 दिन होते हैं, इसलिए फरवरी में कभी भी मासिक ब्लू मून का अनुभव नहीं होगा, क्योंकि इसमें सामान्य वर्ष में केवल 28 दिन होते हैं और लीप वर्ष में 29 दिन होते हैं. कभी-कभी फरवरी में पूर्णिमा नहीं होती है, इसे समय और तिथि के अनुसार ब्लैक मून के रूप में जाना जाता है.

  3 दिन पहले बाल-बाल बचा Space Station, टुकड़े-टुकड़े होने से बचा।24 अगस्त 2023 को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (Internati...
27/08/2023


3 दिन पहले बाल-बाल बचा Space Station, टुकड़े-टुकड़े होने से बचा।

24 अगस्त 2023 को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (International Space Station- ISS) बाल-बाल बचा है. उसकी तरफ भारी मात्रा में अंतरिक्ष का कचरा आ रहा था. वह भी तेज गति से. इससे बचने के लिए स्पेस स्टेशन में लगे रूसी मॉड्यूल के इंजन और थ्रस्टर्स को 21.5 सेकेंड के लिए ऑन किया गया. नासा ने इसकी पुष्टि भी की है. (फोटोः NASA)

नासा ने अपने ईमेल में लिखा है कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन Zveda सर्विस मॉड्यूल के इंजन को 21.5 सेकेंड्स के लिए ऑन किया गया था. ताकि पूरे स्पेस स्टेशन को उसकी ऑर्बिट में आ रहे कचरे से बचाया जा सके. स्पेस स्टेशन को करीब 1640 फीट नीचे गिराया गया. आमतौर पर यह 400 किलोमीटर की ऑर्बिट में चक्कर लगाता है. (फोटोः गेटी)

1999 के बाद से अब तक स्पेस स्टेशन की दिशा और ऊंचाई में 30 बार से ज्यादा करेक्शन किए गए हैं. यानी उसे ऊपर या नीचे किया गया है. ताकि अंतरिक्ष के कचरों से बचाया जा सके. वैसे 24 साल से अंतरिक्ष में वैज्ञानिकों की प्रयोगशाला बना हुआ स्पेस स्टेशन साल 2030 में काम करना बंद कर देगा. एक साल के अंदर ही उसे प्रशांत महासागर में गिरा दिया जाएगा.

स्पेस स्टेशन की जिंदगी अब सिर्फ 7 साल बची है. बची क्या है... बस उसे चलाया जा रहा है. नासा ने पिछले साल घोषणा की थी कि यह स्पेस स्टेशन 8 साल बाद काम करना बंद कर देगा. 2030 में यहां से एस्ट्रोनॉट्स चले आएंगे. साल 2031 तक यह प्रशांत महासागर के किसी सुदूर निर्जन इलाके में गिरा दिया जाएगा.

साल 1998 में इसे लॉन्च किया गया था. तब से लेकर यह हर दिन धरती के 16 चक्कर लगाता है. दिसंबर 2020 तक यह कुल मिलाकर 131, 440 चक्कर लगा चुका है. चक्कर लगाने की गति भी बहुत भयानक है. यह एक सेकेंड में 7.66 किलोमीटर की दूरी तय करता है. यानी 27,600 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार. 4.44 लाख किलोग्राम वजनी स्पेस स्टेशन की चौड़ाई 357.5 फीट और लंबाई 239.4 फीट है.

NASA का प्लान है कि वह इसे जनवरी 2031 में इसे प्रशांत महासागर के प्वाइंट निमो (Point Nemo) में गिराएंगे. ताकि यह जमीन से करीब 2700 किलोमीटर समुद्र में गिरे. यहीं पर उसकी कब्र बनेगी. यह जगह पुरानी स्पेस स्टेशन, पुरानी सैटेलाइट्स और अन्य अंतरिक्षीय कचरे के लिए ही निर्धारित की गई है.

प्वाइंट निमो के आसपास किसी जहाज का आना-जाना वर्जित है. न हवा में न पानी में. आसपास कोई रहने लायक स्थान नहीं है. यहां पर किसी तरह की इंसानी गतिविधि नहीं होती. यहां से कोई भी इंसानी सभ्यता कम से कम 2700 किलोमीटर की दूरी पर ही मिलती है.

गिराने से पहले ISS से सारी काम की चीजों को हटाया जाएगा. उन्हें प्राइवेट सेक्टर के स्पेस स्टेशन पर ले जाया जाएगा. यह काम स्पेस स्टेशन के गिरने तक जारी रहेगा. इस काम में करीब 1.3 बिलियन डॉलर्स यानी 97,116,630,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.

अमेरिकन फुटबॉल फील्ड के आकार का ISS हर डेढ़ घंटे में धरती का एक चक्कर लगाता है. यह नवंबर 2000 से लगातार एस्ट्रोनॉट्स का घर बना हुआ है. यहां पर हमेशा 7 से 8 एस्ट्रोनॉट्स रहते हैं. असल में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को सिर्फ 15 साल काम करने के लिए ही बनाया गया था. लेकिन जांच-पड़ताल के बाद पता चला कि अभी यह कुछ साल और काम कर सकता है.

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को बनाने में और उसपर अभी काम करने वाले देशों में अमेरिका, रूस, जापान, कनाडा, ब्राजील, यूके, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, स्पेन, नॉर्वे, नीदरलैंड्स, इटली, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क और बेल्जियम शामिल हैं. दिसंबर 2021 तक 19 देशों के करीब 251 एस्ट्रोनॉट्स यहां जा चुके हैं. रह चुके हैं. अमेरिका से सबसे ज्यादा 155 एस्ट्रोनॉट्स, रूस से 52, जापान से 11, कनाडा से 8, इटली से 5, फ्रांस-जर्मनी से चार-चार और बाकी देशों से एक-एक एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन की यात्रा कर चुके हैं. इसमें मलेशिया, साउथ अफ्रीका, साउथ कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात, ग्रेट ब्रिटेन, कजाकिस्तान जैसे देश भी शामिल हैं.

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