05/09/2025
O Captain! My Captain!
“A teacher affects eternity; he can never tell where his influence stops.” ― Henry Adams
हम में से अधिकांश के पास पाँच या छह से अधिक लोग नहीं होते हैं जो हमें याद करते रहते हैं। शिक्षकों के पास हजारों शिष्य होते हैं जो उन्हें जीवन भर याद रखते हैं।
सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🙏
इनमें से कितने आचार्य जी को आप लोग जान रहे हैं?
25/08/2025
इस बार पुरातन छात्र सम्मेलन दीपावली के समय रखा जाए?
सरस्वती शिशु मंदिर, प्रेमचंद नगर में पढ़े सभी भैया बहन बताएं, अपनी राय कमेंट करें
कोई बैच अगर यह कार्यक्रम आयोजन करना चाहता है तो कमेंट में बताए
इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें अपने मित्रों के बीच में
28/03/2025
हमारे प्रिय आचार्य त्रय श्री रविन्द्र त्रिगुणायत जी, श्री बृजराज दुबे जी एवं श्री मार्कण्डेय तिवारी जी 29 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। कृपया आप सभी विद्यालय प्रांगण में उपस्थित होकर अपनी कृतज्ञता अर्पित करे और आचार्यों से शुभाशीष लें।
यहां पर भी तीनों आचार्यों के साथ कोई अविस्मरणीय पल ,घटना हो उसे सांझा करें 🙏 उनके साथ की फोटो भी शेयर करें।
Note- बस लाइक करके इतिश्री न करें जिन्होंने आपके बचपन को संवारा उसे बनाया उनके लिए 5 मिनट समय निकलकर लेख लिखना कोई विशेष कठिनाई का कार्य नहीं होना चाहिए। कमेंट सेक्शन में ज्यादा से ज्यादा यादों का सैलाब आना चाहिए।
धन्यवाद!🙏
Saraswati Shishu Mandir, Turkmanpur, Gorakhpur
Saraswati Sishu Mandir (Hindi:सरस्वती शिशु मन्दिर)are a group of s
25/10/2023
इस वर्ष पूर्व छात्र सम्मेलन के आयोजन की कोई खबर नहीं मिल रही है। जो बैच कार्यक्रम आयोजित करना चाह रहे हैं, वो आगे आएं 🙏
निवेदन है कि पूर्व छात्र परिषद् इस बाबत एक परिचर्चा का आयोजन करे।
सभी लोग अपने विचार प्रस्तुत करें 🙏
इस पोस्ट को सभी अपने फेसबुक वॉल पर शेयर करें 🙏
15/11/2022
हिंदी कविता में छायावाद युग के प्रवर्तक और अप्रतिम महाकाव्य 'कामायनी' के महान रचनाकार महाकवि जयशंकर प्रसाद को साहित्य में हिमालय की तरह स्थान प्राप्त है। उनके काव्य साहित्य और नाटकों की तो खूब चर्चा होती है लेकिन तथ्य यह भी है कि उनकी ही कहानियों से हिदी में आधुनिक लेखन का सूत्रपात हुआ।
प्रसाद जी की पुरस्कार, गुंडा, घीसू, प्रतिध्वनि, आकाशदीप, आंधी, इंद्रजाल, उर्वशी, प्रलय और अंतिम कहानी सालवती आज भी बिल्कुल वैसी ही ताजगी से लबरेज और ज्वलंत लगती हैं। विशेषज्ञ इसके पीछे उनके उतार-चढ़ाव भरे व्यक्तिगत जीवन और बनारसी जीवनशैली को मूल प्रेरणा मानते हैं। सातवीं कक्षा में जब वे बनारस के क्वींस कालेज में पढ़ाई कर रहे थे, तभी पिता का देहांत हो जाने से उनका एकेडमिक जीवन से नाता टूट गया। तीन वर्ष बाद माता, फिर भाई और पत्नी के निधन ने उन्हें पूरी तरह से झकझोर दिया। चौक के निकट नारियल बाजार स्थित सुंघनी की दुकान चलाने की जिम्मेदारी उन पर आ गई। कहा जाता है, दुकान पर ही बैठे-बैठे वह रद्दी कागज के पन्नों पर कविता के रूप में अपनी भावनाओं को शब्द देने लगे। बाद में जीवनपर्यत उन्होंने यहीं से हिदी साहित्य की सेवा की। उनका योगदान महान साबित हुआ। हिन्दी साहित्य के इतिहास में उन जैसा कोई दूसरा व्यक्तित्व नहीं दर्ज है।
जानकार बताते हैं कि प्रसाद अपने अंतिम समय में जब गंभीर रूप से बीमार थे, तो स्वास्थ्य-लाभ के लिए बनारस से बाहर जाकर प्रवास करने की चिकित्सकीय सलाह दी गई लेकिन उन्होंने काशी को छोड़ना स्वीकार नहीं किया। 15 नवंबर, 1937 को 48 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने अतिम सांस ली। प्रसाद जी रहे जागरण पाक्षिक पत्र के संपादक
प्रसाद जी पर जीवंत संस्मरण लिखने वाले उनके निकटस्थ विनोदशंकर व्यास की पुस्तक के अनुसार फरवरी 1929 में बनारस के पुस्तक मंदिर से जागरण पाक्षिक पत्र का प्रथम अंक शुरू हुआ। संपादन करने वाले प्रसाद जी ने ही इसका नामकरण किया था। इसी में उन्होंने लिखा था कि अपवित्रता, असत और दुष्चरित्र कला का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। बाद में इस पत्र का संपादन मुंशी प्रेमचंद ने किया। बुद्धि पर स्थापित की ह्दय की सत्ता :
आचार्य रामचंद्र शुक्ल की पौत्री व साहित्यकार डा. मुक्ता के अनुसार अपनी कहानियों में प्रसाद जी काफी मुखर रहे। उन्होंने 'ममता' और 'घीसू' कहानियों में महिलाओं की स्थिति से लोगों के दिलों को झकझोरा। उनकी ऐसी कहानियां आज भी प्रासंगिक हैं। बीएचयू में हिदी विभाग के प्रो. सत्यपाल शर्मा के अनुसार 'कामायनी' में उन्होंने बुद्धि के साथ हृदय के सामंजस्य पर जोर दिया और हृदय की सत्ता स्थापित की। बीसवीं सदी में मनुष्य जिस संवेदना के विच्छेद का शिकार हो रहा, उसे प्रसाद जी ने अपने साहित्य से भरसक दूर करने का प्रयास किया। किसी भी पत्र-पत्रिका से नहीं लेते थे पैसे : प्रसाद जी ने अपने साहित्यिक जीवन में किसी भी पत्र-पत्रिका से पुरस्कार स्वरूप मिले धन को स्वीकार नहीं किया। हिदुस्तानी एकेडमी से 500 और नागरी प्रचारिणी से 200 रुपये की राशि मिली थी, उन्होंने वह सब नागरी प्रचारिणी को सौंप दी। इसके अलावा उन्होंने किसी कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करना या किसी सभा का सभापति होना स्वीकार नहीं किया। 1933 में पहली बार आचार्य शुक्ल, प्रसाद व प्रेमचंद आए एक साथ : 1933 में पहली बार बनारस में हुई ऐतिहासिक बैठक में जवाहरलाल नेहरू, कमला नेहरू, संपूर्णानंद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, मुंशी प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद एक साथ मिले। इस सभा में नेहरू जी ने कहा था कि हिदी को भी बांग्ला भाषा की तरह से समृद्धि के लिए अभी और कार्य करना पड़ेगा। इस पर बाद में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने लिखा कि जिस सभा के साक्षी आचार्य शुक्ल, मुंशी जी और प्रसाद रहे हों, वहां पर हिदी के लिए ऐसे बोल व्यावहारिक नहीं।
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मुंशी प्रेमचंद और प्रसाद जी के लेखन- दृष्टिकोणों में भले ही अंतर रहे, लेकिन दोनों के बीच व्यक्तिगत संबंध अत्यंत सौहार्द्रपूर्ण रहे।
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प्रसाद ने 'कंकाल' उपन्यास लिखा तो प्रेमचंद उनने आत्मीय रूप से जुड़ गए थे। उन्होंने अपने जीवन में जो भी क्षण जिया, उसे साहित्य का रूप दिया। बनारस की रहन-सहन और जीवनशैली को सबसे बेहतर उन्होंने ही चित्रित किया है। उनके सिद्धांत शैव-दर्शन से जुड़े हुए थे, जिसके आधार पर उन्होंने 'कामायनी' की रचना की। देशप्रेम के चरम रूप और राजनीति के दांव-पेच उनके नाटकों में देखने को मिलते हैं। उन्होंने अपने अंत समय में फिल्म निर्माण में भी रुचि ली, लेकिन वह पूर्ण न हो सका।
-प्रो. ओ पी सिंह अध्यक्ष भारतीय भाषा केंद्र,
जेएनयू नई दिल्ली
15/11/2022
सरस्वती शिशु मंदिर तुर्कमानपुर ने सांस्कृतिक प्रश्न मंच के तरुण वर्ग में "अखिल भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान प्रतियोगिता" जो प्रयागराज में सम्पन्न हुई है, में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। भैया- बहनों,आचार्य, प्रधानाचार्य सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं ! इस वर्ष अखिल भारतीय स्तर पर यह दूसरा पुरस्कार है।
विद्यालय परिवार ने घोष और माल्यार्पण के द्वारा जोरदार स्वागत किया किया।
http://vidyabhartionline.org/Students-of-SSM-Turkmanpur-won-the-akhil-bharatiya-sanskrit-prashn-manch
04/11/2022
सरस्वती शिशु मंदिर तुर्कमानपुर गोरखपुर की ऐतिहासिक जीत। अखिल भारतीय वैदिक गणित की प्रतियोगिता भोपाल में संपन्न हुई जिसमें किशोर वर्ग के छात्रों ने अपने विद्यालय को देश में प्रथम स्थान दिलाया है। इस अवसर पर गोपाल शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्रीमान चंद्रमणि ओझा, गोपाल शिक्षा समिति के मंत्री श्री राकेश मौर्या तथा विद्यालय के माननीय प्रबंधक श्री रामनाथ गुप्त एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री संतोष कुमार द्विवेदी तथा विद्यालय परिवार ने स्थान प्राप्त छात्रों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त की है।
विजेता प्रतिभागियों के नाम हैं।
आवेदन सिंह
आर्यन पाण्डेय
प्रांजल त्रिपाठी
गोरखपुर : अखिल भारतीय वैदिक गणित की प्रतियोगिता में तुर्कमानपुर के छात्रों ने बनाया कीर्तिमान
गोरखपुर। अखिल भारतीय वैदिक गणित की प्रतियोगिता भोपाल में संपन्न हुई। जिसके किशोर वर्ग में सरस्वती शिशु मंदिर तुर...
25/10/2022
Sarswati shishu mandir is inviting you to a scheduled Zoom meeting.
Topic: पुरातन छात्र सम्मेलन २०२२
Time: Oct 25, 2022 01:30 PM Pacific Time (US and Canada)
Join Zoom Meeting
https://us05web.zoom.us/j/83821027791?pwd=UVlZcSs3SHBRaHZLQlBoMElndnc2UT09
Meeting ID: 838 2102 7791
Passcode: MzPX34
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19/10/2022
1995 बैच
कौन कौन है इस बैच का ग्रुप में?😀