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छात्र/छात्राओं के सर्वांगीण विकास से ? Sunil Shukla DIRECTOR S I E Shukla Institute of Education GORAKHPUR
24/05/2023
#नाच_ना_जाने_आंगन_टेढ़ा
हम बताएं पांच साल में क्या होता है ?
#शेर_शाह_सूरी ने पांच साल (1540-1545AD) राज किया और युद्धों के चलते लगभग साढ़े तीन साल दिल्ली से दूर भी रहा। इसके बावजूद देखिए
#उसका_रिपोर्ट_कार्ड :
1 उसने ज़मीन के सर्वे और मपाई का पेमाईस सिस्टम शुरू किया। ज़मीन को नापने के लिए 39 इंच के लोहे की छड़ का स्टैंडर्ड तय किया, जिसे गज़ कहा गया आज भी चालू है यह व्यवस्था।
2. ज़मीन की पेमाईस बाद लैंडयूज मुताबिक खसरान नक्से तामीर कर भू-बन्दोबस्त की राजस्व प्रणाली शुरू की जो हुबहू आज तक कारगर ढंग से चल रही है। उन खसरों के अनुसार ही ख़रीद फ़रोख़्त के लिए निर्धारित फीस पर ‘पट्टा’ पंजीकरण सिस्टम शुरू किया, जो आदिनांक तक बहाल है। मुगलों और अँग्रेजों ने शेरशाह सूरी की इस राज्य-व्यवस्था तकनीक को सीखा, अनुसरण किया और कामयाबी से शासन किया। #राजा_टोडरमल, जिसे #शेरशाह_सूरी खोजकर लाये, निर्विवाद रूप से इस राज्य-व्यवस्था के अविष्कारक और संस्थापक थे और असल #विश्व- #रत्न थे।
3. रिजर्व बैंक की तरह मानक रुपये का चलन शुरू किया जो 178 रत्ती का चांदी का सिक्का था! एक रुपया 64 दाम का होता था जो बाद में ‘आना’ कहलाया। करेंसी के लिए भी तय स्टैंडर्ड के सोने, चांदी और कांसे के सिक्के शुरू किए गए!
4. दोआब, पंजाब, बिहार और सवालख (नागौर मेड़ता या नागाणा) की कृषिभूमियों की पेमाईस व खसराबन्दी करके शेरशाह सूरी ने #सरकार नाम से 47 जिले बनाए। हर जिले यानि सरकार में एक फ़ौजी अफ़सर (शिक़दर-ए-शिक़दरान) और एक सिविल अफ़सर (मुंसिफ़) नियुक्त किया। इन्हें आज के पुलिस अधीक्षक(SP) और जिला मैजिस्ट्रेट (DM) समझ लें।
5. खेती की ज़मीन को अच्छा, औसत और बुरा- चायी दोयम, दोयम, बारानी दोमट- तीन श्रेणियों में बांटा गया और उसी अनुसार लगान तय किया। किसानों के लिए क़र्ज़ (तक़ावी) की व्यवस्था शुरू की।
6. सभी टैक्स ख़त्म तरके व्यापार में दो ही तरह की टैक्स व्यवस्था - एक राज्य में समान के प्रवेश पर और दूसरा दुकान पर समान की बिक्री पर- ठीक आज की कस्टम ड्यूटी और सेल टैक्स की तरह।
7. मंत्रिमंडल को व्यवस्थित किया जिसमें
वित्त मंत्री (दीवान-ए-वजीरत),
रक्षा मंत्री (दीवान-ए-अर्ज़),
विदेश मंत्री (दीवान-ए-रसालत),
संचार मंत्री (दीवान-ए-इंशा)
बनाए गए!लेकिन सारे फ़ैसलों पर ख़ुद शेर शाह की मंजूरी जरूरी थी!
8. जागीरदारी सिस्टम की जगह ज़्यादातर जगहों पर रयतवारी सिस्टम शुरू करके वंशवाद पर आधारित जागीरदारी को खत्म किया क्योंकि रयतवारी में सरकार तनख़्वाह पर अफ़सर नियुक्त करती थी, ठीक आज के IAS सिस्टम की तरह।
#यही_एकमात्र_कारण_था_कि_राजस्थान_गुजरात_सिन्ध_के_रजवाड़ों_ने_हुमायूँ_का_साथ_दिया। ो_छुपाकर_पाला_पोसा_बड़ा_किया।
9. हर सरकार(जिले) में दीवानी अदालतें बनायी, जिसमें मुंसिफ़ (आज के DM) जज का किरदार निभाते थे। फ़ौजदारी अदालतें भी बनायी, जिसमें शिक़दर (आज के SP) क्रिमिनल केस के जज होते थे!
10. फ़ौज में भी एक नया सिस्टम बनाया, जिसमें घोड़ों को दाग़ कर निशानदेही की व्यवस्था की, फ़ौजियों के विस्तृत रेकार्ड, उनकी भर्ती और यूनिट की व्यवस्था शुरू की जो बाद में मनसबदारी प्रथा में विकसित हुआ, ठीक आज के रेजिमेंट सिस्टम की तरह!
11. डाक व्यवस्था शुरू की,1700 सरायें बनवाईं!
12. पेशावर से सोनारगांव (बांग्लादेश) तक 3000 किमी लम्बी ोड बनवायी। इसके साथ साथ
आगरा से जोधपुर, आगरा से बुरहानपुर, लाहौर से मुलतान के राजमार्ग भी बनवाए तथा सभी महत्वपूर्ण सड़कों पर फलदार या छायादार पेड़ भी लगवाए!
13. यात्रियों की सुरक्षा की जवाबदेही गांव के मुखिया और लोगों की तय की। यात्री के साथ लूटपाट होने पर गांव के लोग या तो अपराधी को पेश करें या फिर मिल कर यात्री के नुक़सान की भरपायी करें। इस प्रयोजनार्थ गाँवों की परंपरागत खाप पंचायतों को मान्यता दी।
आज २२ मई, १५४५ के दिन शेरशाह की बारूद के धमाके में मौत हुई।
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- भँवरलाल बेनीवाल।
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