29/12/2025
चंद यादें, फिसलती ज़िन्दगी, और जाता हुआ साल!
कुछ ख्वाईशें पूरे हुए,
कुछ अधूरे रह गए सवाल।
कभी हँसी की गूंज थी,
तो कभी ख़ामोशी का बोझ,
वक़्त ने सिखा दिया
हर दर्द भी बनता है रोज़।
जो मिला, वो सबक़ बना,
जो खोया, वो याद बन गया,
जाता हुआ ये वर्ष भी
जीने का एक अंदाज़ दे गया।
अलविदा 2025
राधे-राधे🙏🙏
02/10/2025
20/09/2025
15/09/2025
02/03/2025