13/09/2026
*एआई के दौर में साइबर सुरक्षा जरूरी, ‘डिजिटल अरेस्ट’ से रहें सतर्क*
*महंत दिग्विजयनाथ व महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ में स्मृति व्याख्यान युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ में शुक्रवार को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं साइबर सुरक्षा’ विषय पर स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दोनों महापुरुषों के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। शिक्षक एवं विद्यार्थियों ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्रसेवा को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
मुख्य वक्ता आयुष चौरसिया, सीईओ, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MPIT), गोरखपुर ने विद्यार्थियों को एआई की संभावनाओं और इसके रचनात्मक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, सुरक्षा और अनुसंधान सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बदलाव ला रहा है। विद्यार्थियों को एआई का उपयोग ज्ञान, नवाचार, रचनात्मकता और समस्या समाधान के लिए करना चाहिए।
उन्होंने साइबर सुरक्षा के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए फिशिंग, फर्जी लिंक, संदिग्ध कॉल व संदेश, ओटीपी, पासवर्ड तथा व्यक्तिगत एवं बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।
*‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी से रहें सावधान*
आयुष चौरसिया ने विद्यार्थियों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के प्रति विशेष रूप से सचेत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई वास्तविक कानूनी व्यवस्था नहीं है। साइबर ठग पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को वीडियो कॉल अथवा फोन पर डराते हैं और गिरफ्तारी का भय दिखाकर धन की मांग करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, कॉल समाप्त करें और किसी भी प्रकार की धनराशि, ओटीपी या निजी जानकारी साझा न करें। संबंधित विभाग से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना ही सुरक्षित उपाय है।