16/07/2026
जामिआ अमीरुल उलूम मीनाईया, गोंडा शरीफ में 28 मुहर्रमुल हराम 1448 हिजरी को मुक़ाबला-ए-क़िराअत, अज़ान और ख़िताबत का शानदार इनइक़ाद हुआ। यह मुक़ाबला सज्जादानशीन हज़रत शाह जमाल मीना साहब की सरपरस्ती व रहनुमाई में मुनअक़िद किया गया। इसमें हिन्दुस्तान के मुख़्तलिफ़ सूबों से आए मुशारिकीन ने पूरे जोश व ख़ुरूस के साथ हिस्सा लिया।
मुक़ाबला-ए-क़िराअत में अव्वल मुक़ाम मोहम्मद सिफतैन रज़ा बिन मुज़फ़्फ़र हुसैन (सीतामढ़ी, बिहार), दूसरा मुक़ाम शफ़ीउद्दीन बिन शहाबुद्दीन (बहराइच, उत्तर प्रदेश) तथा तीसरा मुक़ाम मुहम्मद कैफ़ बिन मुहम्मद वज़ीर ख़ान (गोंडा, उत्तर प्रदेश) ने हासिल किया।
मुक़ाबला-ए-ख़िताबत में अव्वल मुक़ाम मुहम्मद शमशीर आलम बिन मुहम्मद निज़ामुद्दीन (मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार), दूसरा मुक़ाम अहमद रज़ा बिन उमर अंसारी (गढ़वा झारखंड) तथा तीसरा मुक़ाम दानिश रज़ा बिन मुहम्मद फ़रीदुद्दीन (गया, बिहार) ने हासिल किया।
मुक़ाबला-ए-अज़ान में अव्वल मुक़ाम मुहम्मद हस्सान रज़ा बिन इसरार अहमद (दरभंगा, बिहार) ने हासिल किया।
इस मौक़े पर इदारे के ज़िम्मेदारान ने तमाम कामयाब मुशारिकीन को दिली मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि ऐसे इल्मी व दीनी मुक़ाबले नौजवान नस्ल में क़ुरआन-ए-करीम, अज़ान और दीन की ख़िदमत का जज़्बा पैदा करने में अहम किरदार अदा करते हैं।
इदारे की जानिब से तमाम मुशारिकीन, असातिज़ा-ए-किराम, जजेस, वालिदैन और इंतिज़ामिया का तह-ए-दिल से शुक्रिया अदा किया गया, जिनकी मेहनत और तआवुन से यह प्रोग्राम कामयाबी के साथ मुकम्मल हुआ।