18/07/2026
#मासूमियत_पर_हावी_होता_गुस्सा
लखनऊ के एक स्कूल से सामने आया वायरल वीडियो, जिसमें एक छोटी सी मॉनिटर बच्ची एक दूसरे मासूम बच्चे को बेरहमी से मार रही है, उसे देखकर मन अत्यंत व्यथित और विचलित है। यह केवल एक स्कूल की घटना नहीं है, बल्कि हमारे पूरे समाज के लिए एक बहुत बड़ा चेतावनी संकेत है।
इसे देखकर मन में बार-बार यही सवाल उठता है कि आखिर इतने छोटे बच्चों में इतनी उग्रता और ऐसा गुस्सा कहाँ से आ रहा है? हमारे नैतिक मूल्यों को देने में हमसे कहाँ कमी रह जा रही है?
#बच्चों_में_बढ़ते_गुस्से_और_उग्रता_के_मुख्य_कारण
1. आज बच्चे मोबाइल और टीवी पर कार्टून या गेम्स के नाम पर अनजाने में अत्यधिक आक्रामक और हिंसक कंटेंट देख रहे हैं। जो वे देखते हैं, वही उनके व्यवहार में उतरने लगता है।
2. सोशल मीडिया के इस दौर में बच्चे स्क्रीन से तो जुड़ रहे हैं, लेकिन इंसानी भावनाओं से दूर होते जा रहे हैं। वे दूसरों के दर्द को महसूस करना नहीं सीख पा रहे हैं।
3. बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने आस-पास बड़ों को करते हुए देखते हैं। यदि घर या परिवेश में छोटी-छोटी बातों पर चिल्लाना या हाथ उठाना सामान्य माना जाता है, तो बच्चे इसे ही सही व्यवहार मान लेते हैं।
4. आधुनिक जीवन की भागदौड़ में कहीं न कहीं हम बच्चों को केवल किताबी ज्ञान में आगे बढ़ाने की होड़ में लगे हैं, जिससे उनके भीतर करुणा, धैर्य और प्रेम जैसे मानवीय मूल्यों का विकास पीछे छूट रहा है।
#प्रयास_और_उपाय
1. बच्चों को मोबाइल या टीवी देने से ज्यादा जरूरी है यह देखना कि वे उस पर क्या देख रहे हैं। उन्हें आक्रामक गेम्स और हिंसक वीडियो से पूरी तरह दूर रखना होगा।
2. बच्चों के सामने बातचीत का लहजा हमेशा संयमित होना चाहिए। यदि हम उनके सामने शांति और प्रेम से पेश आएंगे, तो वे भी उसी भाषा को सीखेंगे।
3. चाहे स्कूल हो या घर, बच्चों को पंचतंत्र जैसी नैतिक कहानियों, महापुरुषों के प्रेरक प्रसंगों और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से दूसरों के प्रति दया और सम्मान का भाव सिखाना अनिवार्य है।
4. स्कूलों में कक्षा मॉनिटर या लीडर बनाने का उद्देश्य बच्चों में जिम्मेदारी की भावना जगाना होना चाहिए, न कि उन्हें किसी प्रकार का अधिकार या सत्ता का अहसास कराना। शिक्षकों को निरंतर बच्चों के व्यवहार पर नजर रखनी होगी।
आइए, हम सब मिलकर एक शिक्षक, एक माता-पिता और एक सजग नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी को समझें। बच्चों को केवल पढ़ाना ही काफी नहीं है, उन्हें एक संवेदनशील और सहृदय इंसान बनाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।