Satyam Classes for Excellence

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निपूतों के गैंग को आपके बच्चे चाहिए.. मोहन भागवत का कहना है कि तीन बच्चे पैदा करने की जरूरत है। वरना समाज खतरे में आ जाय...
03/12/2024

निपूतों के गैंग को आपके बच्चे चाहिए..

मोहन भागवत का कहना है कि तीन बच्चे पैदा करने की जरूरत है। वरना समाज खतरे में आ जायेगा।
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हां, खतरे तो बहुतेरे हैं इस समाज पर।

बेरोजगारी, घटती डिस्पोजेबल इनकम, महंगी रोटी दाल, दवा, कपड़े, घर और कर्ज।

लेकिन सबसे बड़ा खतरा इस समाज पर कोई है,
तो वो मि. भागवत का संगठन है जिसने ऑक्टोपस की तरह, समाज का गला चौतरफा दबा रखा है।

याने प्रशासन, राजनीति, संस्कृति की कोमलता, उसकी पवित्रता नष्ट करने वाला,

जिस चीज को छुए,
उसे भस्म कर देने वाला।

युवा, आबाल वृद्ध के मानस में जहर भरने वाला हजार मुख का दैत्य, भागवत जिसके शीर्षमुख हैं।
●●
विश्वास नही। आसपास देखिए। हर वो चीज जिस पर दस साल पहले आपको सामान्य भरोसा था। आज कैसा देखते हैं उसे??

टीवी अखबार ?? जज ज्यूडिशियरी?? पुलिस प्रशासन ?? यूपीएससी, पीएससी?? नीट आईआईटी रिजल्ट? सर्वे?? एग्जिट पोल?? ठेके? ट्रेनों की समय सारणी??

शिक्षको, सेलेब्रिटियों की सीख?? मामाजी का फारवर्ड??अपना भविष्य?? पढ़ा गया इतिहास??

एनसीईआरटी की किताब?

चुनाव आयोग?सुप्रीम कोर्ट? बड़े बड़े जज?? कौन सी चीज है, जो अधोगामी,पथभ्रष्ट नही हो गयी।
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दस साल पहले आप इनके निर्णयों और काम और भरोसा करते थे। आज इनमे से किस पर भरोसा है?

दूसरो की छोड़िए,
क्या खुद पर भरोसा है??

तब हमें सम्विधान, और अपने जनता होने की ताकत भरोसा था। मोमबत्ती लेकर बैठे पांच हजार लोग सरकार हिला लेते थे।

जंतर मंतर पर 10 दिन तख्ती लेकर बैठा शख्स भी सत्ता के कंगूरों तक अपनी बात पहुँचा लेता था। सत्ता लचीली थी, झुकती थी।

ज्ञापन लेती थी।

कम से कम सुनवाई का उपक्रम करती थी। समाधान का आश्वासन तो देती थी।
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राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, स्पीकर, तमाम संवैधानिक पद, उस पर बैठे लोग, हर व्यक्ति.. या कहिये संस्थान पर एक भरोसा था।

कि कोई एक गलत करे,
तो दूसरा बाधा बनेगा।

तब उचित और अनुचित में संघर्ष होगा। कोई न कोई सत्य को अपहेल्ड करेगा। आज क्या हाल है इस विश्वास का?
●●
साफ पता है कि सरकार झूठ बोलती है, नकली आंकड़े देती है, प्रोपगंडा करती हैं, ठगती है। लालच देती, अतथ्य से कन्फ्यूज करती हैं। बेईमानी, छल, हेकड़ी से काम करती है।

पकड़ी जाती है, तो विवाद करती है, प्रहार करती है। और नजीर पेश करती है।

समाज का श्रेष्ठ वर्ग जो करता दिखता है, दूसरे हिस्से उसकी कॉपी करते हैं। तब ये नाली नीचे तक बहती है।

संसद से चौपाल से घर के ड्राइंग रूम तक, विवाद, हेठी, झूठ, डाइवर्जन बह रहा है। वर्कप्लेस, सिनेमा, किताबे, बातें, न्यूज, जहर से अटे पड़े हैं।

फाल्सी, अतथ्य, बेईमानी, ठगी, आपके गिर्द घेरा बनाये हैं। चाहे अनचाहे, समर्थन विरोध में आप इस जहर से लथपथ हैं। इस दौर की सचाई यही है।
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और यह आरएसएस की देन है।

ये जहर, ये भ्रंश इसकी कुशिक्षा और इसके दूषित डीएनए से सने लोगो की मुख्यधारा पर कब्जे का नतीजा है।

एक संगठन जिसने जो फासिज्म को धर्म के चोले में पेश करता है। उसके बूते राजनीति करता है। छिपकर, पीछे रहकर.. बिना दिखे,

पर हर जगह दिखकर।

सदा से झूठी फुसफुसाहटो पर अपना विस्तार करता आया है। छल, डबल स्पीक, वादाखिलाफी, भ्रम, भय और षडयंत्र से समाज पर कब्जा, नियंत्रण करता गया है।

हमारे दिमाग से खेलता है।
रोज झूठ का नया जाल रचता है।
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वरना जिन लोगो ने बैन हटाने के लिए राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने कान पकड़ने का लिखित वचन दिया था।

आज वह संगठन अपने चेले चपाटियो को सर्वोच्च पदों तक पहुचाने में कैसे कामयाब है?
वह भी इलेक्टोरल पॉलिटिक्स के रास्ते।

सोचिये जरा।
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ऐसा नही कि गलतियां, बेईमानी पहले न थी। पर हमारी सोच में गलत, कम से कम "गलत" तो होता था।

सत्य खुल जाए तो शर्म का, इस्तीफों का, आलोचना का बायस होता था।

पर आज गलत ही सही है। "सत्य-मेरे ठेंगे पर" यही हमारे समाज को इस संगठन का कॉन्ट्रिब्यूशन है। दरअसल आरएसएस ने इस देश को, इसकी संस्कृति को, सर के बल खड़ा कर दिया है।
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110 करोड़ के समाज मे बड़ा हिस्सा अब दंगाई, गालीबाज, हेकड़ीबाज, मूर्ख, दमनकारी और अंहकारी मानसिकता का शिकार हो चुका है।
आरएसएस ने इस देश के यूथ को जॉम्बी बना दिया है।

लेकिन यह अभी नाकाफी है। फौज और बड़ी चाहिए। भूखे, नंगे, लड़ाकुओं, मरजीवड़ों के दस्ते चाहिए। तो भागवत को लगता है कि जो इनकी सुनते हैं, उनकी मानते हैं, उन्हें संख्या बढ़ानी चाहिए।
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पागलपन घटा, पागल लोग घटे..

तो पागलपन की यह फैक्ट्री खतरे में आ जायेगी। जिन निपूतो को बच्चो की मौतों का कभी फर्क नही पड़ता, उन्हें अपनी सनक की अग्नि में झोंकने को आहूति चाहिए।

इसलिए,
साहबान, कदरदान, मेहरबान..

निपूतों के गैंग को आपके बच्चे चाहिएl
Manish Singh

★ PM मोदी, अब आपके ख़तरनाक इरादों को समझने में हिंदुस्तान का SC/ST/OBC कोई ग़लती नहीं कर सकता..★ काँग्रेस से निकाले गए और ...
28/04/2024

★ PM मोदी, अब आपके ख़तरनाक इरादों को समझने में हिंदुस्तान का SC/ST/OBC कोई ग़लती नहीं कर सकता..

★ काँग्रेस से निकाले गए और अब बीजेपी के नेता आचार्य प्रमोद ने साफ़ साफ़ लफ़्ज़ों में ए'लान कर दिया है कि बीजेपी भारत से आरक्षण हटाने वाली है..

★ मोदी, आचार्य प्रमोद कोई ऐरेगैरे बीजेपी के नेता नहीं है..आपने आचार्य प्रमोद का "कल्कि धाम" का उद्घाटन किया था..

◆ उस वक़्त मोदी ने कहा था कि "कल्कि धाम" अगले 1000 सालों की रूपरेखा तए करेगा..

◆ तो मोदी, यही है आपका "1000 साल का प्रोग्राम" जिसमें आप महात्मा गाँधी, बाबासाहेब अंबेडकर और पंडित नेहरुजी के बनाए सँविधान को मिटाना चाहते हैं?

● आरक्षण ख़त्म करने की बात आरएसएस के मोहन भागवत भी कर चुके हैं..और अलग अलग वक़्त पर बीजेपी के अलग अलग नेता आरक्षण ख़त्म करने की बात की है..

👉 जब राहुल गाँधी ज़ातीय जनगणना, आरक्षण, समाज के हर वर्ग को इंसाफ़ देने की बात कर रहे हैं तब बीजेपी के नेता इस मुल्क के बहुसंख्यक को ख़त्म करने की बात कर रहे हैं..

👉 डायरेक्टली/इंडिरेक्टली एक बात कहने में गुरेज़ नहीं करना चाहिए कि आरक्षण में ज़्यादातर ज़ातियां "बहुसंख्यक समाज" से है..

👉 मैंने बारबार लिखा है कि बीजेपी सबसे बड़ी "बहुसंख्यक विरोधी" पार्टी है..अल्पसंख्यक तो बस एक छलावा है..

✋ अगर देश को बचाना चाहते हैं तो काँग्रेस और INDIA गठबंधन को वोट कीजिए

#कृष्णनअय्यर कृष्णन अय्यर काँग्रेस पेज #भारतजोड़ोन्याययात्रा #भारतजोड़ोयात्रा

ये डेविड लेटीमर हैं, अमेरिका इस शख़्स ने शौक़ शौक़ में एक ऐसा कारनामा किया है जो भविष्य में बहुत काम आने वाला है, डेविड ...
26/04/2024

ये डेविड लेटीमर हैं, अमेरिका इस शख़्स ने शौक़ शौक़ में एक ऐसा कारनामा किया है जो भविष्य में बहुत काम आने वाला है, डेविड जो अब 83 साल के हैं, उन्होंने 1960 में एक 35 लीटर की कैपेसिटी वाली बॉटल में एक्सपेरिमेंट के लिए स्पाइडरवॉर्ट्स नाम के पौधे के बीज डाले, मिट्टी में थोड़ी सी खाद मिलाई और तार की मदद से इस पौधे के बीजॉ को इस बॉटल में टॉप दिया, और बॉटल का ढक्कन बंद कर दिया, उन्होंने बॉटल को अपने घर की खिड़की पास ऐसी जगह रखा जहां दिन भर इस बॉटल पर धूप पड़ती रहे, धीरे धीरे बॉटल के अंदर पौधों का पनपना शुरू हो गया, और पनपते पनपते एक बोतल के अंदर एक पूरा ईको सिस्टम यानि पारिस्थितिकी तंत्र डेवलोप हो गया, सड़ी गली पत्तियाँ खाद और पोषक तत्वों का निर्माण करती हैं और धूप से प्रकाश संश्लेषण करके पौधे विस्तार पाते गए, उन्होंने केवल एक बार सन् 1972 में इस बॉटल का ढक्कन खोला था और उसमें 1 ग्लास पानी डाला था, आज 63 साल बाद एक बोतल के अंदर बना तंत्र पूरी तरह से विकसित है, यहीं पौधों की ज़रूरत की कार्बन डाइऑक्साइड भी बन जाती है और सूक्ष्म जीव भी इसके अंदर पनप चुके हैं,

ब्रिटेन की रॉयल हार्टिकल्चर सोसाइटी इस ईकोसिस्टम को पाना चाहती है ताकि वो इस प्रयोग से और जानकारियाँ जुटा सके, लेकिन डेविड अपनी बसाई एक छोटी सी दुनिया अपने नाती पोतों के लिए एक निशानी बतौर उन्हें देकर जाना चाहते हैं, मुझे लगता है, ये प्रयोग भविष्य में अंतरिक्ष और अन्य ग्रहों पर इंसानी कॉलोनी बनाने में काफ़ी मददगार हो सकता है,
ख़ैर जो भी हो, अभी तक तो यही होता आया है कि प्रकृति ने हम इंसानों को बनाया, लेकिन ये किसी इंसान का एक छोटी ही सही लेकिन पूरी प्रकृति को रचने का पहला मामला है,
Mohd Tasheen azad

Parmod Pahwa जी की वाल सेतुम्हे कुछ अजीब नही लगता वॉटसन??किसी रईस के अस्तबल से बेशकीमती घोड़ा चोरी हो गया। स्कॉटलैंड यार...
23/04/2024

Parmod Pahwa जी की वाल से

तुम्हे कुछ अजीब नही लगता वॉटसन??

किसी रईस के अस्तबल से बेशकीमती घोड़ा चोरी हो गया। स्कॉटलैंड यार्ड कोई सुराग न लगा पाई तो उसने शर्लक होल्मस से मदद मांगी।
●●
शर्लक नें मौका ए वारदात पर चौकस तफ्तीश की। घुड़साल बड़ी थी, चारो ओर से सुरक्षित। रात को हर दरवाजे पर गार्ड्स लगते थे। भयंकर कुत्ते खुले छोड़ दिये जाते थे।

तमाम तफ्तीश के बावजूद सुराग नही लगा। इंस्पेक्टर बेचैन हो रहा था, बार बार शर्लक को देखता। वाटसन भी चुप थे। शर्लक के चेहरे पर रंग बदल रहे थे।

एकाएक वो ठहर गए।

पास रखी तिपाई पर बैठकर, पाइप सुलगाया। एक गहरा कश लिया और धुएँ का गहरा बबूला छोड़ते हुए बोले

- तुम्हें कुछ अजीब नही लगता वाटसन??
- है तो। मुझे लगता है चोरी के वक्त घोड़े को हिनहिनाना तो चाहिए था।
- नही वॉटसन। दरअसल बड़ा सवाल ये है कि कुत्ते क्यो नही भौंके??
- ओह,ओह, ओह। इसका मतलब कुत्ते चोर को पहचानते थे???
- नाउ यू आर देयर... शर्लक मुस्कुराए। तो अब बताओ, चोरी किसने की।।

एक क्षण तक वॉटसन सोचते रहे। फिर दिमाग मे एक विस्फोट हुआ, आँखे फैल गयी।

जोश में दोनो हाथ ऊपर उठाकर वॉटसन जोर जोर से चिल्लाए।

चौकीदार ही चोर है!!
चौकीदार ही चोर है!!

𝙲𝚛𝚎𝚍𝚒𝚝 𝚐𝚘𝚎𝚜 𝚝𝚘 𝙴𝚛.𝙽𝚊𝚛𝚒𝚗𝚍𝚎𝚛 𝚂𝚒𝚗𝚐𝚑 𝙼𝚘𝚗𝚐𝚊 𝚓𝚒,शिशुपाल सिंह

एक होस्टल कैंटीन में रोज़-रोज़     नाश्ते में खिचड़ी दे देने से परेशान       85 छात्रों ने होस्टल वार्डन से           शि...
23/04/2024

एक होस्टल कैंटीन में रोज़-रोज़
नाश्ते में खिचड़ी दे देने से परेशान
85 छात्रों ने होस्टल वार्डन से
शिकायत करी और
बदल-बदल के नाश्ता देने को कहा.

100 में से सिर्फ 15 छात्र ऐसे थे,
जिनको खिचड़ी बहुत पसंद थी।
और वो छात्र चाहते थे, कि
खिचड़ी तो रोज़ ही बने.
बाकी के 85 छात्र
परिवर्तन चाहते थे।

वार्डन ने सभी छात्रों से वोट करके
नाश्ता तय करने को कहा.

उन 15 छात्रों ने, जिनको ...
खिचड़ी बहुत पसंद थी,
खिचड़ी के लिए वोट किया।

बाकी बचे 85 लोगों ने
आपस में कोई सामंजस्य नहीं रखा,
और कोई वार्तालाप भी नहीं किया,
और अपनी बुद्धि एवम् विवेक से
अपनी रूचि अनुसार वोट दिया।

13 ने डोसा चुना,
12 ने परांठा,
14 ने रोटी,
12 ने ब्रेड बटर,
11 ने नूडल्स , और
12 ने पूरी सब्जी को वोट दिया.
11 ने छोले भटूरे
🤔 अब सोचो🤔
क्या हुआ होगा ?

उस कैंटीन में आज भी
वो 85 छात्र, रोज़ खिचड़ी ही खाते हैं.
क्यों - क्योंकि वो 15 छात्र बहुमत में, एकजुट रहे

*शिक्षा*👇

जब तक हिस्सों में 85% बंटे रहोगे,
तब तक 15% वालों का वर्चस्व रहेगा.

समाज के लिये संदेश👇

👉🏽 एक बनो, नेक बनो, शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो

नही तो हमेशा खिचड़ी ऐसे ही खानी पड़ेगी😎
Sathrun adil

फेसबुक इस पोस्ट को निगल जाएगा, अगर ज़रा बहुत दिखाई दे, तो प्लीज़ पढ़िए....दिल डर जाता है यह देखकर कि दुनिया की बड़ी और बेहूद...
05/04/2024

फेसबुक इस पोस्ट को निगल जाएगा, अगर ज़रा बहुत दिखाई दे, तो प्लीज़ पढ़िए....

दिल डर जाता है यह देखकर कि दुनिया की बड़ी और बेहूदा ताक़त के ख़िलाफ़ खड़े होने की क़ीमत क्या है?

सिर्फ 52 साल के जूलियन पॉल असांज, एक खोजी पत्रकार का यह हश्र देखकर मन बड़ा टूटने से लगता है.

हमने तो उन्हें खूबसूरत जवानी में चमकती आंखों के साथ लोगों के लिए जूझते देखा था.

हम ही उन्हें अब इसी काम के लिए एक टूटे हुए कमज़ोर बूढ़े की भद्दी हो चुकी ज़िन्दगी के लिए जूझते देख रहे हैं!

लोग उन्हें भूल चुके हैं, उनका ज़िक्र बंद हो गया है, यह तो और दर्दनाक है.

जूलियन असांज जैसे लोगों का यही हश्र होता है!

जो इसमें से खुशकिस्मत होते हैं, उन्हें मौके पर ही मार ही दिया जाता है; जो थोड़े बदकिस्मत होते हैं, उन्हें असांज की तरह ज़िन्दगी की हर सांस के लिए रोज़ मरना पड़ता है!

दुनिया के बड़े से बड़े मुल्क, एक से एक सच्ची बात कहने वाले महारथी, नोबल-बुकर- मैग्सेसे के विजेता, असांज-जैसों के हश्र पर खामोश रहते हैं, क्योंकि असांज ने वह सच बोला होता है, वह सच खोजा होता है, वह सच लिखा होता है, जो शरीफ़ लोगों की शराफ़त के परखच्चे उड़ा दे.

जूलि/यन अ/सांज वि/कि ली/क्स के संस्थापक हैं. यहाँ उनके किये कामों को बहुत सराहा गया.

2008 में उन्हें इकॉनोमिस्ट फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन अवार्ड और 2010 में सेम एडम्स अवार्ड भी दिया गया.

मगर जैसे ही उन्होने इराक युद्ध से जुड़े लगभग 4 लाख दस्तावेज़ अपनी वेबसाइट पर जारी किए, जिसमें अमेरिका, इंग्लैंड एवं NATO की सेनाओं के "गंभीर युद्ध अपराध" करने के अकाट्य प्रमाण मौजूद थे, उनके बुरे दिन शुरू हो गए!

दुनिया भर मे वह भेष बदल बदल कर भटके, शरण मांगी, मगर इतनी बड़ी दुनिया जूलियन के लिए सिकुड़ कर छोटी सी हो गई.

उन्हें पकड़कर दुनिया की महाशक्ति ने जेल में डाल दिया, जहां से सबको इंतेज़ार है कि अब एक ताबूत ही बाहर आएगा, जिसके अंदर दुनिया को जगाने के दस्तावेज बनाने वाला अपनी अंतिम सांसों को छोड़कर लेटा होगा!

हम अक्सर सोचते हैं कि अगर जूलियन बाहर होते, तो यह जो युद्ध गज़ा में चल रहा है; फिलिस्तीन को ज़बरन भूख और प्यास से तोड़ा जा रहा है, यहां वह "अरब-अमरीका- इज़राइल के गठजोड़" की कहानी के दस्तावेज़ ज़रूर बाहर करता!

वह बतलाता कि फिलिस्तीन की मौत की क़ीमत किन किन सौदागरों ने किस किस वजह से दी है, मगर अफसोस कि वह नही है!😢

यह पोस्ट इसलिए लिखा है, क्योंकि _52 साल के जूलियन पर एक डॉक्यूमेंट्री आई है._
*"I AM SLOWLY DYING"* नाम से, इसे देख लीजिए.

इसके तो शो रखने चाहिए, जूलियन के कुछ चाहने वालों ने यह प्रयास किये हैं, वह भी उस महाशक्ति के नीचे, जो हाथ में मशाल लेकर तो समंदर के किनारे खड़ी है, मगर उसका दिल बड़ा काला और पैर बड़े घिनौने हैं!

मांगने पर लिंक दे देंगे. हो सके तो देखिये, खोजकर पढ़िए.

उसको बचा भले न सकिये, मगर उसको जान लीजिए, उसके कामो को जान लीजिए.

यही उसके लिए बहुत होगा कि उसने जिस काम के लिए नरक चुना, कम से कम उस काम को तो हम जानते हैं!

जूलियन को सज़ा भले किसी और गुनाह की मिली हो, मगर सबको पता है कि उसका गुनाह क्या था.

हमारी दहलीज पर भी, यही तो हो रहा है!

जब तक हम खुद मार न दिए जाएं, हमे पढ़ते रहिए...यह रिश्ता लंबा नही चलेगा, एक गोली की आवाज़ के साथ खामोश हो जाएगा. मेरी सांसे उखड़ जाएंगी मगर यह तो हमेशा तसल्ली रहेगी कि न डरकर लिखा और न ही डरकर रहे, न लालच में विचार बदले, न सत्ता की थाल के पास बैठकर चटखारे लगाए.

उसूल भरी जिंदगी चुनी और मर गए....जूलियन हमारे साथ हमेशा रहेंगे, क्योंकि वह हममें हैं!

*Hafeez Kidwai*

इब्न ए आदम- मेरा त्याग पत्र स्वीकार कीजिए । - लेकिन आप हमारी पार्टी में थे ही कब बाबा ??- मैंने अपना धर्म ईमान सब आपके च...
05/04/2024

इब्न ए आदम
- मेरा त्याग पत्र स्वीकार कीजिए ।
- लेकिन आप हमारी पार्टी में थे ही कब बाबा ??

- मैंने अपना धर्म ईमान सब आपके चक्कर में बेच दिया और आप …..
- धर्म ईमान आपने धंधे के चक्कर में बेचा है । आपको धंधा मिला और हमें सत्ता , हिसाब बराबर ।

- जितना मुझे धंधा मिला उतना तो आपने एक ही कंपनी से इलेक्टोरल बॉण्ड से ले लिये होंगे ।
- इतना विचलित होना ठीक नहीं बाबा , यह कोर्ट निष्पक्ष है , मैं कुछ नहीं कर सकता ??

- फिर नारा क्यों लगवाते हो कि मोदी है तो मुमकिन है ??
- बाक़ी सब जगह मुमकिन है । ED, सीबीआई , IT से आपको कोई दिक्कत हुई ??

- वो तो ठीक है लेकिन अब कोर्ट का क्या करूँ ??
- सावरकर बन जाओ ।

- वो तो मैं बन चुका लेकिन कोर्ट मान नहीं रहा ।
- अब सब तो अंग्रेज़ों की तरह दरियादिल नहीं होते कि माफ़ भी कर दें और पेंशन भी दे दें ।

- आप ज्ञान ना दें , तरीक़ा बताये ।
- तरीक़ा अगर मेरे पास होता तो इलेक्टोरल बॉण्ड का रायता इतना फेला होता । इलेक्टोरल बॉण्ड से याद आया बाबा आपने नहीं ख़रीदे थे बॉण्ड ??

- अब हमारे आपके रिश्ते में यह काग़ज़ कहाँ से आ गये ?? हम तो सीधे लेनदेन में विश्वास रखते हैं ना ।
- तो फिर यह त्यागपत्र का ड्रामा बंद करों और 2014 की तरह कोई नया पैंतरा लेकर आओ ।

- सलवार वाला ??
- अरे नहीं बाबा , काला धन , टैक्स फ्री और 35 रुपए लीटर पेट्रोल वाला ।

26/03/2024

चुनावी मौसम में बेरोजगारी पर इलेकटरल बाणड का प्रभाव दिखेगा ?

एक दिन बादशाह अकबर ने अपनी दरबार में नवरत्नों से पूछा कि "हमारे राज्य में मूर्ख कितने हैं?"सभी नवरत्नों ने एक स्वर में उ...
26/03/2024

एक दिन बादशाह अकबर ने अपनी दरबार में नवरत्नों से पूछा कि "हमारे राज्य में मूर्ख कितने हैं?"
सभी नवरत्नों ने एक स्वर में उत्तर दिया कि बादशाह सलामत इसका जवाब आप पहले बीरबल से ही जानिये । अकबर ने बीरबल की तरफ देखा तो बीरबल ने कहा हुजूर थोड़ा समय दीजिए ताकि ठीक ठीक गिनती की जा सके। बादशाह ने बीरबल को एक साल का समय प्रदान कर दिया ।

कुछ समय बीतने पर बीरबल ने एक तख्ती पर 'मैं मूर्ख हूँ' लिखकर अकबर की पोशाक पर चिपका दिया। यह देख सारे दरबारी भी ऐसी ही तख्ती लगाकर घूमने लगे। राज दरबार पर आश्रित अन्य लोगों ने भी तख्ती लगा ली। खुद को बड़ा विद्वान समझने वाले लोग भी 'मैं हूँ मूर्ख' के नारे लगाने लगे।

बीरबल ने अकबर से कहा, "हुजूर अब मूर्खों की गिनती कर ली जाए।"

😛😀😀🧘

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