30/10/2025
आरव और मीरा की कहानी 🌹👇
🌾 "बरगद के नीचे वादा"
गांव के किनारे एक पुराना बरगद का पेड़ था, जिसके नीचे हर शाम आरव और मीरा मिला करते थे। हवा में सरसों के फूलों की महक घुली रहती, और पास के तालाब में सूरज की परछाईं झिलमिलाती।
आरव गांव का बढ़ई था — हाथों में हुनर और आंखों में सपने। मीरा मुखिया की बेटी थी — निडर, हँसमुख, और ज़िद्दी भी। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे एक गहरी मोहब्बत में बदल गई थी।
एक दिन खबर फैली कि मीरा की शादी शहर के किसी अमीर जमींदार के बेटे से तय कर दी गई है। आरव का दिल टूट गया, मगर उसने हार नहीं मानी। उसने रातों-रात एक सुंदर लकड़ी की नाव बनाई — “उम्मीद” नाम की।
शादी की रात, जब पूरा गांव रोशनी में डूबा था, मीरा चुपके से अपने कमरे की खिड़की से बाहर निकली। बरगद के नीचे आरव इंतज़ार कर रहा था। दोनों के चेहरे पर डर भी था, और प्यार की चमक भी।
“क्या तुम सच में सब छोड़ सकती हो?” आरव ने पूछा।
मीरा मुस्कुराई — “प्यार छोड़ने के लिए नहीं, निभाने के लिए होता है।”
वे नाव में बैठकर नदी के उस पार निकल गए। हवा तेज़ थी, लहरें उफान पर — पर उनके दिल में सिर्फ़ एक यकीन था।
सुबह जब गांव वाले जागे, तो सिर्फ़ वो नाव दिखी, जो नदी के दूसरे किनारे रेत में अटकी थी। किसी को पता नहीं चला कि आरव और मीरा कहां गए — पर बरगद के नीचे अब भी हर शाम हवा में उनकी हँसी की गूंज सुनाई देती है।