Asst. teacher स्वाति गुप्ता

Asst. teacher स्वाति गुप्ता A teacher is a person who helps students to acquire knowledge, competence or virtue. Informally the role of teacher may be taken on by anyone.

06/05/2025

जिद मत करो मेरी जिंदगी की कहानी सुनाने की.. मैं हंसते-हंसते सुनाऊंगी तुम फूट-फूट कर लो पढ़ोगे...😭

18/04/2025
08/09/2024

💔Women's sacrifice is priceless💔
स्त्रियों द्वारा किए गए हर काम को प्राइसलेस कहकर उन्हें हर तरह के प्रॉपर्टी शेयर और अपने पैसे के अधिकार, अपना बैंक बैलेंस होने से महरूम रखा गया।

हालांकि ये priceless वाली तारीफों के बीच कभी कभी मुझे ये आवाजें भी आती हैं कि "women are gold digger"🤱

Dedicated to new generation women's..🙏
04/09/2024

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04/09/2024

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26/08/2024

स्त्रियों ये जो बार बार घर को पल पल में झाड़ती पोछती हो इसके स्थान पर अपना वक्त सिर्फ आर्थिक रूप से समृद्ध बनने में कीजिए सम्मान झाड़ू पोछा करने से नहीं दौलत कमा कर मिलता हैl

Truth..
07/07/2024

Truth..

लगातार पुरुषों से वादविवाद के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुँची हूँ कि स्त्रियों को  जीवन में बच्चे पैदा करने के अतिरिक्त...
03/06/2024

लगातार पुरुषों से वादविवाद के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुँची हूँ कि स्त्रियों को जीवन में बच्चे पैदा करने के अतिरिक्त सब कुछ करना चाहिए बच्चों से ही स्त्रियों की जीवन में सबसे बड़ी हार है ..बच्चे ही आपके जीवन की सबसे बड़ी बाधा है स्त्रिया एक बार माँ बनने के बाद फिर कभी अपने लिए नहीं जीती अतः जीवन की शुरुआत की अपेक्षा जीवन के अंतिम चरण में जब कोई विकल्प शेष नहीं हो तो बच्चों को पैदा करे अन्यथा यह भूल कभी नहीं करनी चाहिए क्युकी बच्चों के बाद आपके जीवन के सारे रास्ते अवरुद्ध हो जाते कैरियर रूप यौवन स्वास्थ्य शरीर कुछ भी पहले जैसा नहीं रहता और जिस पुरुष के वंश के लिए आप बच्चे को पैदा करती हैं वहीं पुरुष बच्चों के पैदा होने के बाद आपको छोड़कर बाहर घूमता मुँह मारता हुआ आसानी से देख सकती है मतलब आप घरों में बच्चों को पाले और पुरुष बाहर मजे करते घूमें ..क्युकी शातिर पुरुषों को मालूम है कि अब आप बच्चों को छोड़कर नहीं जाएगी और यह इसी बात का फायदा उठाकर अत्याचार करते जाते हैं और अगर बच्चे पैदा हो भी जाते हैं तो पुरुषों का वंश पुरुषों के सिर पर दे मारे
माता नहीं सुनी कुमाता जैसे गीत गाकर सिर्फ स्त्रियों को मूर्ख बनाया गया है. जब भी अलग होने का नंबर आए बच्चों को छोड़कर जाए. आधे समाज की अक्ल ऐसे ही ठिकाने लगाई जा सकती है..होता यह है कि आप बच्चों को लेकर निकल जाती हैं या पुरुषों के अत्याचार सहन करती है..आने वाली पीढ़ी ध्यान पूर्वक सुनिए इस जीवन में भ्रम है कि कोई आपका है हकीकत में अकेले आए हैं अकेले ही जायेगे..लेकिन अब यह परम्परा बदल दीजिए की बच्चे आपको पालने है इनके मोह से खुद को मुक्त कीजिए..मैंने जीवन के आखिरी सफ़र में माता-पिता को बच्चों के लिए अफसोस करते देखा है...अपने मन को कठोर कीजिए और जीवन में आगे बढ़ जाए...आधे पुरुष तो पढ़कर ही स्वर्ग
सिधार जायेगे..शेष की बुद्धि पालने पौषने पर ठिकाने आ जाएगी जागो स्त्रियों जागो..🙏

सवाल यह नहीं कि पुरुष सही है या गलत सवाल यह है कि स्त्रियों से उनका बोलने का अधिकार क्यूँ छिना जाए स्त्रियाँ जब भी किसी ...
31/05/2024

सवाल यह नहीं कि पुरुष सही है या गलत सवाल यह है कि स्त्रियों से उनका बोलने का अधिकार क्यूँ छिना जाए स्त्रियाँ जब भी किसी पुरुष के खिलाफ मुँह खोलती है तो एक बड़ा समूह उसी स्त्री पर दोषारोपण करता नजर आता है..हकीकत यह है कि स्त्रियों की सुनवाई के दफ्तर हर जगह खोले गए हैं लेकिन स्त्रियाँ छली सिर्फ अपराधियों द्वारा जाती है आम इंसान आम आदमी स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार करता ही नहीं है लेकिन जो करते हैं वह इस प्रकार के दोषारोपण पहले से ही जानते हैं कि यदि यह स्त्री कानून या समाज में मुँह खोलेगी तो सबसे पहला पत्त्थर मारने का कार्य वहीं पुरुष करेगा जिससे महिला शोषित हुई है अब यह पुरुष पिता भाई पति रिश्तेदार कोई भी हो सकता है ..और स्त्रियों का दुर्भाग्य है कि स्त्रियों का साथ स्त्रियाँ कभी नहीं देती इसका अर्थ यह नहीं है कि स्त्रियाँ सच के साथ नहीं होती वह सबकुछ जानती है लेकिन सभी स्त्रियाँ पुरुषों के आधीन होती है बहुत कम स्त्रियों को स्वतंत्र विचार व्यक्त करने की आज़ादी होती है..बस इसी बात का फायदा अपराधी पुरुषों द्वारा उठाया जाता है..वह स्त्रियों का खुलेआम शोषण भी करते हैं और स्त्रियों को समाज द्वारा डराया जाता है कानून में पेचीदगियों के चलते सही स्त्रियों को न्याय भी नहीं मिल पाता क्युकी वह अपने जीवन का सफ़र ईमानदारी से पूरा करती हैं और अपराधी पुरुषों द्वारा सारे सबूत या तो खत्म कर दिए जाते हैं या ऐसा माहौल स्त्रियों के विरुद्ध खड़ा कर देते हैं कि उनके पास मरने के अतिरिक्त कोई रास्ता शेष नहीं रहता..स्त्रियों को आवश्यकता है जीवन में हर कदम फूंक फूंक कर रखे पुरुषों के ऊपर आश्रित होने से बचिए जितना जल्दी हो जीवन में आत्मनिर्भर बनिये सहज ही किसी भी पुरुष पर विश्वास नहीं कीजिए अपने ज्ञान चक्षु सदैव अपने आसपास के पुरुषों के लिए खोलकर रखिये खासकर अपने पति के लिए सदैव सजग रहे क्युकी यही मात्र एक ऐसा रिश्ता है जिसका विकल्प सहज नहीं मिलता शेष हर रिश्ते का विकल्प हो सकता है...जीवन में हर मुसीबत का सामना धैर्य पूर्वक कीजिए मुसीबत के वक्त अपनी योजनाएं किसी से भी साझा नहीं कीजिए खुद पर विश्वास रखिए कोई ना कोई समाधान आपको अवश्य मिलेगा प्रकृति का नियम है जीवन में कुछ भी हमेशा के लिये नहीं रहता नहीं सुख नहीं दुःख नहीं रिश्ते 👍

अक्सर हम टूटे हुए रिश्तों को जोड़ने का प्रयास करते रहते हैं और सोचते हैं कि सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन जो रिश्ते एक बार ट...
29/05/2024

अक्सर हम टूटे हुए रिश्तों को जोड़ने का प्रयास करते रहते हैं और सोचते हैं कि सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन जो रिश्ते एक बार टूट जाते हैं वह कभी नहीं जुड़ते और अगर जुड़ भी जाते हैं तो उनमे पहले जैसी मिठास नहीं रहती इसलिए जब भी कभी जीवन में कोई रिश्ता टूटे तो आप भी उस रिश्ते को अलविदा कह दीजिए क्युकी टूटे रिश्तों में प्रेम ढूढ़ने का अर्थ है जैसे घर जलने के बाद राख में बचा हुआ सामान ढूढ़ना .💔
पहली बात तो जलने के बाद कुछ शेष बचता ही नहीं है और यदि कुछ बचता भी है तो वह इतना कुरूप हो चुका होता है कि उसे फिर से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है..🤎

पुरुष स्त्रियों का शोषण कर सकते हैं उपहास कर सकते मनोरंजन कर सकते हैं स्त्रियाँ ज्ञानी हो अज्ञानी हो पुरुषों को कोई फर्क...
25/05/2024

पुरुष स्त्रियों का शोषण कर सकते हैं उपहास कर सकते मनोरंजन कर सकते हैं स्त्रियाँ ज्ञानी हो अज्ञानी हो पुरुषों को कोई फर्क नहीं पड़ता है उनकी नज़र में स्त्रियों का कोई स्थान नहीं है और अगर कोई स्थान है तो वह है सिर्फ उन्हें पाने का देखने का छूने का स्त्रियाँ पुरुषों के लिए दोयम दर्जे की थी है और रहेगी क्युकी आपने स्वयं अपने बेटों को सीखाया है कि बर्तन खाने के बाद टेबल पर से उठाने का काम स्त्रियों का है खाना पकाने का काम झाड़ू पोछा और कपड़े घर के सारे तुच्छ कार्य स्त्रियों के होते हैं और पुरुषों के कार्य साफ सुथरा वस्त्र पहनकर ऑफिस दुकान पर जाने के लिए है जब पुरुष बचपन से यही देखते हुए आए हैं तो जो उन्हें घर का काम करने के लिए कहेगा वह महामूर्ख ही लगेगा..हमने कार्य भी स्त्री पुरुषों में बांट दिया है..उसके बाद सारे आर्थिक अधिकार भी पुरुषों के पास सुरक्षित हैं घर जमीन जायदाद रुपये पैसे
स्त्रिया सिर्फ तिजोरी में रखे पैसों की देखभाल कर सकती है मगर खर्च करने का अधिकार सिर्फ पुरुष को होता है स्त्रियों को नहीं जिस घर में आप अधिकार पूर्वक झाड़ू पोछा करती है उस घर के द्वार पर आपके नाम की तख्ती भी नहीं होती पहले पिता फिर भाई पति फिर बेटे के आधीन स्त्रियों का जीवन बितता है. वह नहीं शिक्षा का अधिकार रखती है नहीं नौकरी के पैसे कमाकर खर्च करने का अधिकार रखती है और अगर कोई अधिकार जताती है उसे तेज तरार बताकर नीचा दिखाया जाता है नहीं पिता कोई जायदाद देते हैं नहीं पति यही कारण है कि स्त्रियों को दोयम दर्जे का माना जाता है जरूरी नहीं हर बात कही जाए पुरुष बड़ी होशियारी से स्त्रियों का शोषण कर देते हैं..जिनके घर थोड़ी उठक पटक होकर शांत हो जाते हैं और स्त्रिया शांत हो जाती हैं वहाँ सामंजस्य हो जाता है जहाँ स्त्रियाँ हक की बात करती है वह घर टूट जाते हैं..जब स्त्रिया लड़ नहीं सकती तब वह जबान चलाती हैं और मजे की बात उनके हाथो में चूडी इसलिए पहनाई गई है ताकि पुरुषों पर हाथ नहीं उठा सके पाँव में भारी भारी पाजेब पहना दी गई कि दोड़ नहीं सके किसी से बात करे तो सारे जेवरात एक साथ बोल उठे और घरों के पुरुषों की नज़र जैसे गाय भैस पर होती है स्त्रियों पर बनी रहे.
स्त्रियों को पालतू पशुओं के समान सिखाया जाता है सिर झुकाए स्त्रिया सुन्दर लगती है मुँह खोलती स्त्री डायन लगती है वाद विवाद करती स्त्रिया विद्वान की अपेक्षा राक्षसी लगती है दुनिया भर की बकवास स्त्रियों के विषय में कर दी गई है लिख दी गई है शास्त्रों को पाखंडीयों ने अर्थ का अनर्थ कर दिया है सब कुछ उल्टा-पुल्टा सीखाया जा रहा है गाँव में एक विवाह हुआ सास ने कहा मेरी बहू इतनी अच्छी है सुबह मुझसे पहले जग जाती है सारे घर का काम करती हैं
मैं बहुत खुश हूँ मैंने मुस्कुरा कर अपने बेटे की तरफ देखा तो उसका ज़वाब आया कि वह अनपढ़ कर भी क्या सकती है और इनको बहू थोड़ा ही चाहिए थी एक कामवाली बाई चाहिए थी जो मिल गई है सब खुश हैं सास खुश हैं वह बहू खुश हैं समाज खुश हैं क्युकी समाज भी स्त्रियों को बाई से अधिक अधिकार कहाँ देता है और स्त्रियों बाई से अधिक सोच भी कहाँ पाती है अपनी अपनी ओकात है कोई बाई कम दाम पर कार्य करती हैं कोई अधिक लेकिन काम करने से बाई का घर नहीं हो जाता उसी प्रकार स्त्रियों का कहीं कोई घर नहीं होता...सबकुछ होता है मगर सम्मान नहीं होता..
स्त्रिया बाई से अधिक भी कुछ और सार्थक कर सकती है यह बात इस समाज को सोचने में वक्त लगेगा अभी तो स्त्रिया ही नहीं समझ पाती है पुरुषों को समझने में तो बहुत वक्त लगेगा..🙏

आसान नहीं होताएक प्रतिभाशाली स्त्री से प्रेम करना,क्योंकि उसे पसंद नहीं होती जी हुजूरी,झुकती नहीं वो कभीजबतक न होरिश्तों...
10/05/2024

आसान नहीं होता
एक प्रतिभाशाली स्त्री से प्रेम करना,
क्योंकि उसे पसंद नहीं होती जी हुजूरी,
झुकती नहीं वो कभी
जबतक न हो
रिश्तों में प्रेम की भावना।
तुम्हारी हर हाँ में हाँ और न में न कहना वो नहीं जानती,
क्योंकि उसने सीखा ही नहीं झूठ की डोर में रिश्तों को बाँधना।
वो नहीं जानती स्वांग की चाशनी में डुबोकर अपनी बात मनवाना,

वो तो जानती है बेबाक़ी से सच बोल जाना।
फ़िज़ूल की बहस में पड़ना उसकी आदतों में शुमार नहीं,
लेकिन वो जानती है तर्क के साथ अपनी बात रखना।
वो क्षण-क्षण गहने- कपड़ों की माँग नहीं किया करती,
वो तो सँवारती है स्वयं को अपने आत्मविश्वास से,
निखारती है अपना व्यक्तित्व मासूमियत भरी मुस्कान से।

तुम्हारी गलतियों पर तुम्हें टोकती है,
तो तकलीफ़ में तुम्हें सँभालती भी है।
उसे घर सँभालना बख़ूबी आता है,
और अपने सपनों को पूरा करना भी।
अगर नहीं आता तो किसी की अनर्गल बातों को मान लेना।
पौरुष के आगे वो नतमस्तक नहीं होती,
झुकती है तो तुम्हारे निःस्वार्थ प्रेम के आगे।
और इस प्रेम की ख़ातिर अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देती है।

हौसला हो निभाने का तभी ऐसी स्त्री से प्रेम करना,
क्योंकि टूट जाती है वो धोखे से,
छलावे से, पौरुषत्व के अहंकार से,
और फिर जुड़ नहीं पाती है,
किसी शल्य उपचार से।❤️🧡🩷

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