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शिक्षा जगत से जुड़ी ?

14/04/2026
शिक्षा जगत का एक और हास्यास्पद घोटाला आपसे अनुरोध है कृपया पूरा पढ़ें अक्सर अभिवावकों की शिकायत होती है कि बच्चे घर में प...
19/05/2024

शिक्षा जगत का एक और हास्यास्पद घोटाला
आपसे अनुरोध है कृपया पूरा पढ़ें
अक्सर अभिवावकों की शिकायत होती है कि बच्चे घर में पढ़ते नहीं है, इसके लिए अभिवावक स्कूल और ट्यूशन टीचर को जिम्मेदार मानते हैं और यहीं से शुरू होता है आपको मूर्ख बनाने का खेल।
अक्सर अभिवावकों की इच्छा होती है उनका बच्चा आधुनिक शिक्षा ग्रहण करे, मॉडर्न तरीके से पढे और दिन रात पढ़ते रहे।
इन सभी इच्छाओं को पूर्ति करने के लिए एक बड़ी साजिश के तहत संस्थानों के प्लान तैयार किया है।
पहली-दूसरी कक्षा तक के छात्रों को ये कहते हैं फलाने टॉपिक पर प्रोजेक्ट बनाओ, एक चार्ट पेपर खरीदकर उसपर फ़ोटो चिपकाओ और इंटरनेट से देखकर 20 पेज 3 दिन में लिख कर जमा करो। अब बच्चा परेशान है दिन रात करके इंटरनेट या मित्रों के कॉपी से और छाप के प्रोजेक्ट जमा कर देता है। अभिवावकों को लगता है उनका बच्चा बहुत पढ़ने लगा है, कितना सुंदर प्रोजेक्ट बना लेता है।
और इस तरह आपके बच्चे तो मेहनत बहुत करते हैं लेकिन सीखते कुछ नहीं हैं, आपको लगता है की बच्चा मॉडर्न हो गया है लेकिन उसे ग्रामर का "ग" भी नहीं पता होता है।
फिर उसके प्रोजेक्ट को रद्दी में बेच दिया जाता है, आप मॉडर्न बनने के चक्कर में मूर्ख बनते हैं, कुछ नई सीखने के उम्र में आपका बच्चा मानव प्रिंटर बन रहा है, जस बच्चे को ढंग से एक Sentence बनना नहीं आता है वो भी 20 पेज अंग्रेजी लिख रहा है, क्या ये आपको हास्यास्पद नहीं लग रहा है?
मैं दावा के साथ कहता हूँ जिसको आप प्रोजेक्ट कहते हो वो सिर्फ देखकर छापा हुआ दस्तावेज है क्योंकि बड़े-बड़े IIT के इंजीनियर को भी प्रोजेक्ट बनाने के लिए सोचना होता है और यहाँ छोटे बच्चे प्रोजेक्ट बना रहें हैं!
ये बच्चों का मानसिक शोषण है। जिसके लिए अभिवावक और संस्थान दोनों जिम्मेदार है।
इसे तुरंत रोकना होगा वैसे CBSE ने 2017 में ही रोक लगा दी है लेकिन...

अभिवावकों के नाम खुला पत्रये घोटाला जानलेवा है। ये पोस्ट हजारों छात्रों और सैकड़ों अभिवावकों के बातचीत के बाद लिख रहा हूँ...
24/04/2024

अभिवावकों के नाम खुला पत्र
ये घोटाला जानलेवा है।
ये पोस्ट हजारों छात्रों और सैकड़ों अभिवावकों के बातचीत के बाद लिख रहा हूँ।

अभिवावकों का अक्सर बच्चों पर दवाब होता है कि वो परीक्षाओं में ज्यादा अंक लेकर आएं, जिसका परिणाम ये हुआ है कि आपके बच्चे चोर बनते जा रहें हैं, वो परीक्षा में ज्यादा अंक लाने के लिए सारे अनैतिक हथकंडे अपना रहे हैं जैसे चोरी करना, किसी से पुछ के लिख देना इत्यादि।
जरा सोंच के दिखिए बच्चा को चोर बनाने के पीछे कौन जिम्मेदार है?
आज देश में होने वाली नर्सरी से लेकर बोर्ड तक की सारी परीक्षाओं में बच्चे चोरी करके लिखना चाहते हैं। क्यों?
फिर अभिवावक शिक्षक पर दवाव डालते हैं कि आपको इतना पैसा दे रहें हैं मेरे बच्चे का अंक क्यों नहीं बढ़ रहा है, कुछ शिक्षक भी बच्चे और अभिवावक को खुश करने के लिए परीक्षा में आने वाले कुछ प्रश्न बच्चे को बता देते हैं, कुछ शिक्षक तो आसान सवाल ही परीक्षा में सेट करते हैं ताकि सब बच्चा 99 अंक लेकर आए, अभिवावक बच्चों का रिजल्ट स्टेटस में लगाकर खुश हैं और बच्चा भी खुश है और शिक्षक तो एकदम गदगद है।
सच पूछिए तो अभिवावक और शिक्षक दोनों मिलकर भविष्य के लिए एक बच्चा तैयार कर रहें हैं जो शायद कोटा के किसी कोठरी में आत्महत्या कर लेगा, क्योंकि वो वहाँ का दवाब नहीं झेल पाएगा।
यहाँ चोरी करके या आसान सवाल पर ज्यादा अंक बटोर लेने वाले छात्र जब वास्तविक सवाल देखते हैं तो सहम जाते हैं।
कोटा में होने वाले अधिकांश आत्महत्या के लिए परोक्ष रूप से उस बच्चे के माता पिता और बचपन के शिक्षक बराबर के जिम्मेदार हैं।
इसलिए जब आपके बच्चे परीक्षा देने जाए तो उसे ईमानदारी से परीक्षा देने बोलें ज्यादा अंक लाने के लिए प्रोत्साहित करें, दवाब बिल्कुल ना डालें।
आपके सुझाव और विरोध दोनों का स्वागत है।
जल्द ही इससे बड़े एक और घोटाले पर पोस्ट करूंगा, उसपर रिसर्च जारी है।

होली 2 दिन क्यों हुआ ?दरअसल हिन्दू कैलेंडर पृथ्वी के घूर्णन गति से नहीं बल्कि चाँद के गति से दिन का निर्धारण करता है।पुर...
26/03/2024

होली 2 दिन क्यों हुआ ?
दरअसल हिन्दू कैलेंडर पृथ्वी के घूर्णन गति से नहीं बल्कि चाँद के गति से दिन का निर्धारण करता है।
पुराने समय में चाँद का आकार रोज बदलता दिखता था इसलिए हिन्दू त्योहार का निर्धारण उसी आधार पर होता है।
पूर्णिमा से चाँद अगले 15 दिन तक छोटा होता है इसलिए इसे कृष्ण पक्ष कहते हैं और अममावस्या से चाँद बढ़ने लगता है इसलिए उसे शुक्ल पक्ष कहते हैं।
चाँद का बढ़ना हिन्दू धर्म में शुभ माना जाता है इसलिए अधिकांश त्योहार शुक्ल पक्ष में ही मनाया जाता है।
चाँद पृथ्वी के चारो तरफ 360 डिग्री 30 चंद्र दिनों में घूमती है इसलिए जब 360 को 30 से भाग देते हैं तो 12 डिग्री आता है यानि एक जब पृथ्वी 12 डिग्री घूम लेती है तो उसे हम एक चंद्र दिन कहते हैं।
केप्लर के नियम के हिसाब से चाँद सब पृथ्वी से दूर होगा तब तेज चलेगा और जब नजदीक होगा तो धीरे चलेगा, इसलिए चाँद की गति समान नहीं हो सकती है।
चंद्र दिन को सूर्य दिन से कोई मतलब भी नहीं है, जैसे इस वर्ष होली में दिखा, 25 मार्च को 12:29 मिनट सुबह तक पूर्णिमा था, उसके बाद चंद्र दिन बदल गया इसलिए कुछ लोग 25 मार्च 12:29 के बाद होली मना लिए तो कुछ लोग 26 मार्च को मना रहें हैं। होली चैत के प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है जो इस साल अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 25 मार्च दोपहर 2024 से 26 मार्च 2024 दोपहर तक है।
बहुत शानदार विज्ञान है हिन्दू कैलेंडर का जल्द और रिसर्च करेंगे तो पोस्ट भी करेंगे और वीडियो भी डालेंगे। इसे समझने में मजा आ रहा है।

मान लीजिए आपने एक 20 हजार रुपए में  मोबाइल खरीदी, अगले साल वो मोबाइल काम करना बंद कर दे तो आप कैसा महसूस करेंगे? आप ठगा ...
26/02/2024

मान लीजिए आपने एक 20 हजार रुपए में मोबाइल खरीदी, अगले साल वो मोबाइल काम करना बंद कर दे तो आप कैसा महसूस करेंगे? आप ठगा हुआ महसूस करेंगे आपको लगेगा आपका पैसा बर्बाद हो गया, दिल पर पत्थर रखकर आप उसे 4-5 हजार खर्च करके बनाएंगे और दुखी होंगे।
लेकिन क्या आपने कभी सोंचा है कि आपके बच्चे जो पिछले साल पढे थे वो अगर इस साल भूल चुके हैं तो क्या आपने उसके शिक्षा पर जो पिछले साल खर्च किया था वो बर्बाद हुआ या नहीं?
मान लीजिए स्कूल, कोचिंग, ट्यूशन, किताब, कॉपी, ड्रेस इत्यादि सब खर्च जोड़ लें तो साल के कम से कम 20 हजार जरूर खर्च करते होंगे और उसके बाद जो उस बच्चे को 20 हजार में हासिल हुआ वो अगले साल उसके पास नहीं रहा तो क्या आपको 20 हजार का नुकसान हुआ या नहीं?
शिक्षा भी एक वस्तु ही है जिसे आप अर्जित करने के लिए धन खर्च कर रहें हैं लेकिन क्या आपको कभी इस बात का दुख होता है? आप हर साल बच्चे का रिजल्ट देखकर खुश हो जाते हैं ये वही बात है हर साल नई मोबाईल खरीद कर खुश हो रहें हैं और पुरानी मोबाइल का ख्याल भी नहीं है।
मेरी बात को सोचिएगा, आपकी सहमति और असहमति का समान रूप से स्वागत है।

01/02/2024

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित 10+2(उच्चतर माध्यमिक) की परीक्षा में शामिल होने जा सभी छोटे भाई/बहनों को ढेर सारी शुभकामनाएं।

गजब बिडम्बना है, एक तरफ सरकारें छात्रों के ऊपर दवाब कम करने हेतु पाठ्यक्रम को कम करते जा रही है, बोर्ड के परीक्षाओं में ...
21/01/2024

गजब बिडम्बना है, एक तरफ सरकारें छात्रों के ऊपर दवाब कम करने हेतु पाठ्यक्रम को कम करते जा रही है, बोर्ड के परीक्षाओं में सवाल को आसान करते जा रही है वहीं दूसरी ओर प्रतियोगी परीक्षाओं में सवालों के लेवल को कठिन किया जा रहा है। कल 6 छठी कक्षा के नवोदय के परीक्षा में गणित का शानदार सवाल पूछा गया, शानदार इसलिए कह रहा हूँ कि ये सवाल सिर्फ वो छात्र बना सकते जो समझदार हैं, स्टेप रट के कक्षाओं को टॉपर बनने वाले छात्रों से ये सवाल हिलेगा भी नहीं, कुछ सवाल तो SSC जैसे परीक्षाओं के थे जो 5 वीं के छात्र से पूछे गए थे। जब मैं 2011 में नवोदय का परीक्षा दिया तब इतना कठिन सवाल नहीं पूछा गया था।
मैं व्यक्तिगत तौर पर इसे अच्छा कदम मानता हूँ क्योंकि दिनों-दिन प्रतयोगिता बढ़ती जा रही है। सिर्फ किताबी कीड़ा बनाना बेहद खतरनाक है। छात्रों, अभिवावकों और शिक्षकों को समझना होगा कि अब रटने का दौर खत्म हो रहा है। बोर्ड परीक्षाओं में अच्छा अंक लाना आसान हो रहा है लेकिन प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने के लिए शुरुआत से ही गंभीर होना होगा।
गाँव के बच्चे दसवीं के 90% अंक लाकर जब IIT और NEET जैसे परीक्षाओं की तैयारी करते हैं तब उनके हाथ पैर फूलने लगते हैं, इसलिए शुरू से ही उन्हें तनाव झेलने की ऊर्जा विकसित करनी चाहिए वरना किसी छात्र की आत्महत्या की खबर बहुत दुखदायी होती है।

क्या गणित पढ़ने से आत्महत्या की प्रवृति घटती है ?हो सकता है मेरी राय गलत हो लेकिन पिछले एक साल में अगर में कोटा में  छात्...
04/12/2023

क्या गणित पढ़ने से आत्महत्या की प्रवृति घटती है ?
हो सकता है मेरी राय गलत हो लेकिन पिछले एक साल में अगर में कोटा में छात्रों में होने वाली आत्महत्या की दर को देखें तो पता चलता है कि सबसे ज्यादा आत्महत्या NEET यानी मेडिकल की तैयारी करने वाले छात्रों ने की है JEE यानी इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले छात्रों पर भी बहुत मानसिक दवाब होता है मगर उनमें आत्महत्या ना के बराबर दिखती है।
उसी प्रकार मेडिकल कॉलेज में भी इंजीयरिंग कॉलेज के मुकाबले ऐसी घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती है।
क्या गणित बनाने से परिस्थितियों से जूझने की क्षमता ज्यादा बेहतर विकसित होती है ?
इसपर रिसर्च होना चाहिए।
मैंने भी कोई छात्रों में को देखा है जो गणित में तेज हैं वो किसी काम को संयमित रूप से और पूरे मनोयोग के करते हैं, हर विषय पर तार्किक होकर सोंचते हैं लेकिन जो छात्र गणित में कमजोर हैं वो इंस्टाग्राम पर ज्यादा ऐक्टिव हैं। उनके अंदर बुरे परिस्थिति को झेलने की क्षमता कम है वो जिंदगी को भी रील्स के तरह जीना चाहते हैं पसंद आया तो पूरा झेल लो नहीं आया तो छोड़ देते हैं, रुक के उसे सुधारने के लिए नहीं जूझना चाहते।
नोट- उपर लिखी बाते मेरे निजी अनुभवों और छात्रों के बातचीत पर आधारित है हो सकता है मेरी राय गलत हो, आपके सुझावों से मुझे इस विषय को समझने में मदद मिलेगी।

26/12/2022



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