19/05/2024
शिक्षा जगत का एक और हास्यास्पद घोटाला
आपसे अनुरोध है कृपया पूरा पढ़ें
अक्सर अभिवावकों की शिकायत होती है कि बच्चे घर में पढ़ते नहीं है, इसके लिए अभिवावक स्कूल और ट्यूशन टीचर को जिम्मेदार मानते हैं और यहीं से शुरू होता है आपको मूर्ख बनाने का खेल।
अक्सर अभिवावकों की इच्छा होती है उनका बच्चा आधुनिक शिक्षा ग्रहण करे, मॉडर्न तरीके से पढे और दिन रात पढ़ते रहे।
इन सभी इच्छाओं को पूर्ति करने के लिए एक बड़ी साजिश के तहत संस्थानों के प्लान तैयार किया है।
पहली-दूसरी कक्षा तक के छात्रों को ये कहते हैं फलाने टॉपिक पर प्रोजेक्ट बनाओ, एक चार्ट पेपर खरीदकर उसपर फ़ोटो चिपकाओ और इंटरनेट से देखकर 20 पेज 3 दिन में लिख कर जमा करो। अब बच्चा परेशान है दिन रात करके इंटरनेट या मित्रों के कॉपी से और छाप के प्रोजेक्ट जमा कर देता है। अभिवावकों को लगता है उनका बच्चा बहुत पढ़ने लगा है, कितना सुंदर प्रोजेक्ट बना लेता है।
और इस तरह आपके बच्चे तो मेहनत बहुत करते हैं लेकिन सीखते कुछ नहीं हैं, आपको लगता है की बच्चा मॉडर्न हो गया है लेकिन उसे ग्रामर का "ग" भी नहीं पता होता है।
फिर उसके प्रोजेक्ट को रद्दी में बेच दिया जाता है, आप मॉडर्न बनने के चक्कर में मूर्ख बनते हैं, कुछ नई सीखने के उम्र में आपका बच्चा मानव प्रिंटर बन रहा है, जस बच्चे को ढंग से एक Sentence बनना नहीं आता है वो भी 20 पेज अंग्रेजी लिख रहा है, क्या ये आपको हास्यास्पद नहीं लग रहा है?
मैं दावा के साथ कहता हूँ जिसको आप प्रोजेक्ट कहते हो वो सिर्फ देखकर छापा हुआ दस्तावेज है क्योंकि बड़े-बड़े IIT के इंजीनियर को भी प्रोजेक्ट बनाने के लिए सोचना होता है और यहाँ छोटे बच्चे प्रोजेक्ट बना रहें हैं!
ये बच्चों का मानसिक शोषण है। जिसके लिए अभिवावक और संस्थान दोनों जिम्मेदार है।
इसे तुरंत रोकना होगा वैसे CBSE ने 2017 में ही रोक लगा दी है लेकिन...