10/10/2025
Swami Vivekananda Public School Sonahara Odrai Ghazipur
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10/10/2025
26/01/2024
★★★कौन कहता है कि भारत की खोज वास्को डी गामा ने की ,क्यों पढ़ाया जाता है फर्जी इतिहास।★★★
√●भारतवर्ष को अंग्रेजों ने नहीं खोजा था, यह सनातन है और इसके साक्ष्य भी हैं
√●इतिहास हमेशा विजित द्वारा लिखा जाता है और वह इतिहास नहीं विजित की गाथा होती है। भारत के साथ भी यही हुआ है पहले इस्लामिक आक्रमण और 800 वर्षों शासन और फिर अंग्रेज़ो के 200 वर्ष तक के शासन ने इस देश के इतिहास लेखन को इस तरह से प्रभावित किया कि आज भी लोगों को यही लगता है कि India को ब्रिटिश ने बनाया। लोगों के मन में यह हिन भावना बैठी हुई है कि ब्रिटिश के आने से पहले भारत या India था ही नहीं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेता और अपने आप को ‘History_Buff’ कहने वाले सैफ अली खान ने ये कह दिया कि मुझे नहीं लगता है India जैसा कोई कान्सैप्ट ब्रिटिश के आने से पहले था के नहीं। यह कोई हैरानी की बात नहीं है। पिछले 70 वर्षों में जिस तरह से इतिहास को उसी इस्लामिक और ब्रिटिश को केंद्र में रख कर पढ़ाया गया है ये उसी का परिणाम है। ब्रिटिश काल के इतिहासकारों ने अपने हिसाब से ही इतिहास लिखा जैसा एक विजित लिखता है यानि अपने ही गुणगान में। उनके द्वारा किताबों में यह जानबूझकर लिखा गया जिससे पढ़ने वालों को यह लगे कि उनके आने से पहले भारत नाम का कोई देश ही नहीं था और जो भी बनाया गया वह सिर्फ और सिर्फ ब्रिटिशर्स की देन है। उनके बाद हमारे देश के चाटुकार इतिहासकारों ने भी उसी को आधार बनाकर उनका गुणगान किया। इस वजह से आज हमारे देश में जो भी इतिहास पढ़ाया जाता है उसे पढ़ कर यही भावना आती है कि ब्रिटिश के आने से पहले भारत या India था ही नहीं।
√●भारत कोई 70 वर्ष पुराना देश नहीं है। यह हजारों वर्षों पुरानी एक सभ्यता है जिसकी पहचान भौगोलिक अवस्थिति से होती है। भारत के रहने वाले इतने पुराने है कि इसे सनातन यानि जो सदा से यानि अविरल समय से चला आ रहा है।
विष्णु पुराण में स्पष्ट लिखा है:
"उत्तरं यत समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणं।
वर्ष तद भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः।।"
√●इसका अर्थ यह है कि “समुद्र के उत्तर से ले कर हिमालय के दक्षिण में जो देश है वही भारत है और यहाँ के लोग भारतीय हैं”
√●सबसे पहले बात करते हैं पृथ्वी के भूगोल यानि ज्योग्राफी की। आज हमे वर्तमान की ज्योग्राफी में यह पढ़ाया जाता है कि पैंजिया पृथ्वी का पहला महाद्वीप या यूं कहे सुपर महाद्वीप था। अन्य सभी नवीन महाद्वीप (एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अंटार्कटिका एवं ऑस्ट्रेलिया) का जन्मदाता भी यही महाद्वीप है। टेकटोनिक प्लेट्स के movement के कारण पैंजिया महाद्वीप में खंडन हुआ और यह टूटकर इन 7 महाद्वीपों में बंट गया।
√●गोंडवाना पैंजिया के दक्षिणी भाग को कहते हैं। गोंडवाना भूमि में प्रायद्वीप भारत, दक्षिणी अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका और अंटार्कटिका समाहित है। अंगारा पैंजिया के उत्तरी भाग को कहते हैं। अंगारा भूमि में एशिया (प्रायद्वीपीय भारत को छोड़कर), उत्तरी अमेरिका एवं यूरोप समाहित है।
√●अब देखते है कि हमारे वेद-पुराणों में क्या लिखा है।
√●मत्स्यमहापुराण में सभी सात प्रधान महाद्वीपों के बारे में बताया गया है। सात द्वीपों में जम्बूद्वीप, प्लक्षद्वीप,शाल्मलद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंच द्वीप, शाकद्वीप तथा पुष्करद्वीप का वर्णन है। जम्बूद्वीप का विस्तार से भौगोलिक वर्णन है। आज जिसे एशिया कहा जाता है वही जम्बूद्वीप के नाम से जाना जाता था।
√●जम्बूद्वीप को बाहर से लाख योजन वाले खारे पानी के वलयाकार समुद्र ने चारों ओर से घेरा हुआ है। जम्बू द्वीप का विस्तार एक लाख योजन है। जम्बू (जामुन) नामक वृक्ष की इस द्वीप पर अधिकता के कारण इस द्वीप का नाम जम्बू द्वीप रखा गया था।
"जम्बूद्वीप: समस्तानामेतेषां मध्य संस्थित:,
भारतं प्रथमं वर्षं तत: किंपुरुषं स्मृतम्,
हरिवर्षं तथैवान्यन्मेरोर्दक्षिणतो द्विज।
रम्यकं चोत्तरं वर्षं तस्यैवानुहिरण्यम्,
उत्तरा: कुरवश्चैव यथा वै भारतं तथा।
नव साहस्त्रमेकैकमेतेषां द्विजसत्तम्,
इलावृतं च तन्मध्ये सौवर्णो मेरुरुच्छित:।
भद्राश्चं पूर्वतो मेरो: केतुमालं च पश्चिमे।
एकादश शतायामा: पादपागिरिकेतव: जंबूद्वीपस्य सांजबूर्नाम हेतुर्महामुने।"
(विष्णु पुराण)
√●भारतवर्ष का अर्थ है राजा भरत का क्षेत्र और इन्ही राजा भरत के पुत्र का नाम सुमति था ! इस विषय में वायु पुराण कहता है—
"सप्तद्वीपपरिक्रान्तं जम्बूदीपं निबोधत।
अग्नीध्रं ज्येष्ठदायादं कन्यापुत्रं महाबलम।।
प्रियव्रतोअभ्यषिञ्चतं जम्बूद्वीपेश्वरंनृपम्।।
तस्य पुत्रा बभूवुर्हि प्रजापतिसमौजस:।
ज्येष्ठो नाभिरिति ख्यातस्तस्य किम्पुरूषोअनुज:।।
नाभेर्हि सर्गं वक्ष्यामि हिमाह्व तन्निबोधत।"
√●ऋग्वेद में आर्यों के निवास स्थान को ‘सप्तसिंधु’ प्रदेश कहा गया है। ऋग्वेद के नदी सूक्त (10.75) में आर्य निवास में प्रवाहित होने वाली नदियों का वर्णन मिलता है, जो मुख्य हैं:- कुभा (काबुल नदी), क्रुगु (कुर्रम), गोमती (गोमल), सिंधु, परुष्णी (रावी), शुतुद्री (सतलज), वितस्ता (झेलम), सरस्वती, यमुना तथा गंगा। उक्त संपूर्ण नदियों के आसपास और इसके विस्तार क्षेत्र तक आर्य रहते थे। इसके अलावा महाभारत में पृथ्वी का वर्णन आता है।
"सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन।
परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥
यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः।
एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥
द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।।"
(वेदव्यास, भीष्म पर्व, महाभारत)
√●हिन्दी अर्थ : हे कुरुनन्दन! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भांति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखाई देता है। इसके दो अंशों में पिप्पल और दो अंशों में महान शश (खरगोश) दिखाई देता है।
√●अर्थात : दो अंशों में पिप्पल का अर्थ पीपल के दो पत्तों और दो अंशों में शश अर्थात खरगोश की आकृति के समान दिखाई देता है। आप कागज पर पीपल के दो पत्तों और दो खरगोश की आकृति बनाइए और फिर उसे उल्टा करके देखिए, आपको धरती का मानचित्र दिखाई देखा।
√●ब्रह्म पुराण, अध्याय 18 में जम्बूद्वीप के महान होने का प्रतिपादन है-
"तपस्तप्यन्ति यताये जुह्वते चात्र याज्विन।।
दानाभि चात्र दीयन्ते परलोकार्थ मादरात्॥ 21॥
पुरुषैयज्ञ पुरुषो जम्बूद्वीपे सदेज्यते।।
यज्ञोर्यज्ञमयोविष्णु रम्य द्वीपेसु चान्यथा॥ 22॥
अत्रापि भारतश्रेष्ठ जम्बूद्वीपे महामुने।।
यतो कर्म भूरेषा यधाऽन्या भोग भूमयः॥23॥"
√●अर्थात भारत भूमि में लोग तपश्चर्या करते हैं, यज्ञ करने वाले हवन करते हैं तथा परलोक के लिए आदरपूर्वक दान भी देते हैं। जम्बूद्वीप में सत्पुरुषों के द्वारा यज्ञ भगवान् का यजन हुआ करता है। यज्ञों के कारण यज्ञ पुरुष भगवान् जम्बूद्वीप में ही निवास करते हैं। इस जम्बूद्वीप में भारतवर्ष श्रेष्ठ है। यज्ञों की प्रधानता के कारण इसे (भारत को) को कर्मभूमि तथा और अन्य द्वीपों को भोग- भूमि कहते हैं।
√●इसी तरह अगर शक्तिपीठों का भौगोलिक स्थिति देखे तो वे बलूचिस्तान से लेकर त्रिपुरा, कश्मीर से कन्याकुमारी / जाफना तक फैले हुए हैं। यह एक बनावटी स्थिति नहीं है।
√●इतना ही नहीं जब हम अपने घरों में पुजा अर्चना के दौरान संकल्प लेते है तो उस दौरान प्रयोग में लाया जाने वाला मंत्र भी यही कहता है, जम्बू द्वीपे भारतखंडे आर्याव्रत देशांतर्गते। इस पंक्ति में मनुष्य के रहने के स्थान तथा उसके बारे में जानकारी दी जाती है जो पूजा करा रहा है।
√●इससे स्पष्ट होता है कि भारत भूमि 70 वर्ष पहले नहीं बल्कि हजारों वर्ष पुरानी है। अंग्रेजों ने 1947 में इसी भूमि को 2 टुकड़ों में बाँट दिया था जिससे सभी को यह लगता है कि अंग्रेजों ने भारत को बनाया। आधिकारिक तौर भारत का नाम “भारत गणराज्य” या “रिपब्लिक ऑफ इंडिया” के नाम से जाना जाता है। संविधान के अनुच्छेद 1(1) में स्पष्ट लिखा है कि India, that is Bharat, shall be a Union of States. यह एक मात्र ऐसा अनुच्छेद है जो भारत के नाम के बारे में उल्लेख करता है। इसी तरह 13 वीं शताब्दी के बाद, “हिंदुस्तान” शब्द का प्रयोग भारत के लिए एक लोकप्रिय वैकल्पिक नाम के रूप में किया जाने लगा, जिसका अर्थ है “हिंदुओं की भूमि”। लेकिन जितने भी आक्रमणकारी भारत आए सभी एक अलग संस्कृति से थे इसलिए उन्होंने हमारी सनातन संस्कृति को “हिन्दू धर्म” कहने लगे। तब से इस सनातन धर्म को हिन्दू धर्म के रूप में प्रचारित किया जाने लगा। वास्तविकता देखें तो पता चलता है कि जो भी सिंधु नदी के पार रहते हैं वे सभी हिन्दू हैं और ये कोई संप्रदाय नहीं है। अंगेज़ों ने जो लिखा वही लगातार पढ़ाये जाने आए यह बात भारत के लोगों के मन में कि भारत को अंग्रेजों ने बानया है। अब लोगों को इन कपोलकल्पित इतिहास से ऊपर उठ कर वास्तविकता को जानना चाहिए और अपने महान मातृभूमि पे गर्व करना चाहिए।
√●शास्त्रीय विद्वान आदरणीय Arun Upadhyay जी द्वारा की गई टिप्पणी से विषय वस्तु स्पष्ट हो जाती है, उनकी टिप्पणी के माध्यम से प्राप्त जानकारी निम्नानुसार प्रस्तुत है:
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√●आकाश में सृष्टि के ५ पर्व हैं-१०० अरब ब्रह्माण्डों का स्वयम्भू मण्डल, १०० अरब तारों का हमारा ब्रह्माण्ड, सौरमण्डल, चन्द्रमण्डल (चन्द्रकक्षा का गोल) तथा पृथ्वी। किन्तु लोक ७ हैं-भू (पृथ्वी), भुवः (नेपचून तक के ग्रह) स्वः (सौरमण्डल १५७ कोटि व्यास, अर्थात् पृथ्वी व्यास को ३० बार २ गुणा करने पर), महः (आकाशगंगा की सर्पिल भुजा में सूर्य के चतुर्दिक् भुजा की मोटाई के बराबर गोला जिसके १००० तारों को शेषनाग का १००० सिर कहते हैं), जनः (ब्रह्माण्ड), तपः लोक (दृश्य जगत्) तथा अनन्त सत्य लोक।
√●इसी के अनुरूप पृथ्वी पर भी ७ तल तथा ७ लोक हैं। उत्तरी गोलार्द्ध का नक्शा (नक्षत्र देख कर बनता है, अतः नक्शा) ४ भागों में बनता था। इसके ४ रंगों को मेरु के ४ पार्श्वों का रंग कहा गया है। ९०°-९०° अंश देशान्तर के विषुव वृत्त से ध्रुव तक के ४ खण्डों में मुख्य है भारत, पश्चिम में केतुमाल, पूर्व में भद्राश्व, तथा विपरीत दिशा में उत्तर कुरु। इनको पुराणों में भूपद्म के ४ पटल कहा गया है।
√●ब्रह्मा के काल (२९१०२ ई.पू.) में इनके ४ नगर परस्पर ९०° अंश देशान्तर दूरी पर थे-पूर्व भारत में इन्द्र की अमरावती, पश्चिम में यम की संयमनी (यमन, अम्मान, सना), पूर्व में वरुण की सुखा तथा विपरीत में चन्द्र की विभावरी। वैवस्वत मनु काल के सन्दर्भ नगर थे, शून्य अंश पर लंका (लंका नष्ट होने पर उसी देशान्तर रेखा पर उज्जैन), पश्चिम में रोमकपत्तन, पूर्व में यमकोटिपत्तन तथा विपरीत दिशा में सिद्धपुर।
√●दक्षिणी गोलार्द्ध में भी इन खण्डों के ठीक दक्षिण ४ भाग थे। अतः पृथ्वी अष्ट-दल कमल थी, अर्थात् ८ समतल नक्शे में पूरी पृथ्वी का मानचित्र होता था। गोल पृथ्वी का समतल नक्शा बनाने पर ध्रुव दिशा में आकार बढ़ता जाता है और ठीक ध्रुव पर अनन्त हो जायेगा। उत्तरी ध्रुव जल भाग में है (आर्यभट आदि) अतः वहां कोई समस्या नहीं है। पर दक्षिणी ध्रुव में २ भूखण्ड हैं-जोड़ा होने के कारण इसे यमल या यम भूमि भी कहते हैं और यम को दक्षिण दिशा का स्वामी कहा गया है। इसका ८ भाग के नक्शे में अनन्त आकार हो जायेगा अतः इसे अनन्त द्वीप (अण्टार्कटिका) कहते थे। ८ नक्शों से बचे भाग के कारण यह शेष है।
√●विष्णु पुराण (२/८)-
"मानसोत्तर शैलस्य पूर्वतो वासवी पुरी।
दक्षिणे तु यमस्यान्या प्रतीच्यां वारुणस्य च। उत्तरेण च सोमस्य तासां नामानि मे शृणु॥८॥
वस्वौकसारा शक्रस्य याम्या संयमनी तथा। पुरी सुखा जलेशस्य सोमस्य च विभावरी।९।
शक्रादीनां पुरे तिष्ठन्स्पृशत्येष पुर त्रयम्। विकोणौ द्वौ विकोणस्थस्त्रीन् कोणान् द्वे पुरे तथा।॥१६॥
उदितो वर्द्धमानाभिरामध्याह्नात्तपन् रविः। ततः परं ह्रसन्ती भिर्गोभिरस्तं नियच्छति॥१७॥
एवं पुष्कर मध्येन यदा याति दिवाकरः। त्रिंशद्भागं तु मेदिन्याः तदा मौहूर्तिकी गतिः।२६॥
सूर्यो द्वादशभिः शैघ्र्यान् मुहूर्तैर्दक्षिणायने। त्रयोदशार्द्धमृक्षाणामह्ना तु चरति द्विज।
मुहूर्तैस्तावद् ऋक्षाणि नक्तमष्टादशैश्चरन्॥३४॥'
√●सूर्य सिद्धान्त (१२/३८-४२)-
"भू-वृत्त-पादे पूर्वस्यां यमकोटीति विश्रुता। भद्राश्व वर्षे नगरी स्वर्ण प्राकार तोरणा॥३८॥
याम्यायां भारते वर्षे लङ्का तद्वन् महापुरी। पश्चिमे केतुमालाख्ये रोमकाख्या प्रकीर्तिता॥३९॥
उदक् सिद्धपुरी नाम कुरुवर्षे प्रकीर्तिता (४०) भू-वृत्त-पाद विवरास्ताश्चान्योऽन्यं प्रतिष्ठिता (४१)
तासामुपरिगो याति विषुवस्थो दिवाकरः। नतासु विषुवच्छाया नाक्षस्योन्नतिरिष्यते॥४२॥"
√●भारत भाग में आकाश के ७ लोकों की तरह ७ लोक थे। बाकी ७ खण्ड ७ तल थे-अतल, सुतल, वितल, तलातल, महातल, पाताल, रसातल। अतल = भारत के पश्चिम उत्तर गोल। तलातल = अतल के तल या दक्षिण में।
√●सुतल = भारत के पूर्व, उत्तर में। वितल = सुतल के दक्षिण।
√●पाताल = सुतल के पूर्व, भारत के विपरीत, उत्तर गोल। रसातल = पाताल के दक्षिण (उत्तर और दक्षिण अमेरिका मुख्यतः)
√●महातल = भारत के दक्षिण, कुमारिका खण्ड समुद्र।
√●विष्णु पुराण (२/५)-
"दशसाहस्रमेकैकं पातालं मुनिसत्तम।
अतलं वितलं चैव नितलं च गभस्तिमत्। महाख्यं सुतलं चाग्र्यं पातालं चापि सप्तमम्॥२॥
शुक्लकृष्णाख्याः पीताः शर्कराः शैल काञ्चनाः। भूमयो यत्र मैत्रेय वरप्रासादमण्डिताः॥३॥
पातालानामधश्चास्ते विष्णोर्या तामसी तनुः। शेषाख्या यद्गुणान्वक्तुं न शक्ता दैत्यदानवाः॥१३॥
योऽनन्तः पठ्यते सिद्धैर्देवो देवर्षि पूजितः। स सहस्रशिरा व्यक्तस्वस्तिकामलभूषणः॥१४॥
नीलवासा मदोत्सिक्तः श्वेतहारोपशोभितः। साभ्रगङ्गाप्रवाहोऽसौ कैलासाद्रिरिवापरः॥१७॥
कल्पान्ते यस्य वक्त्रेभ्यो विषानलशिखोज्ज्वलः। सङ्कर्षणात्मको रुद्रो निष्क्रामयात्ति जगत्त्रयम्॥१९॥
यस्यैषा सकला पृथ्वी फणामणिशिखारुणा। आस्ते कुसुममालेव कस्तद्वीर्यं वदिष्यति॥२२॥"
√●ब्रह्माण्ड पुराण (१/२/२०)-
"परस्परैः सोपचिता भूमिश्चैव निबोधत॥९॥
स्थितिरेषा तु विख्याता सप्तमेऽस्मिन् रसातले। दशयोजन साहस्रमेकं भौमं रसातलम्॥१०॥
प्रथमः तत्वलं नाम सुतलं तु ततः परम्॥११॥
ततस्तलातलं विद्यादतलं बहुविस्तृतम्। ततोऽर्वाक् च तलं नाम परतश्च रसातलम्॥१२॥
एतेषमप्यधो भागे पातालं सप्तमं स्मृतम्।"
√●भागवत पुराण (५/२४/७)-
"उपवर्णितं भूमेर्यथा संनिवेशावस्थानं अवनेरत्यधस्तात् सप्त भूविवरा एकैकशो योजनायुतान्तरेणायामं विस्तारेणोपक्लृप्ता-अतलं वितलं सुतलं तलातलं महातलं रसातलं पातालमिति॥७॥"
√●भागवत पुराण (५/२५)-
"अस्य मूलदेशे त्रिंशद् योजन सहस्रान्तर आस्ते या वै कला भगवतस्तामसी
समाख्यातानन्त इति सात्वतीया द्रष्टृ दृश्ययोःसङ्कर्षणमहमित्यभिमान लक्षणं यं सङ्कर्षणमित्याचक्ष्यते॥१॥
यस्येदं क्षितिमण्डलं भगवतोऽनन्तमूर्तेः सहस्रशिरस एकस्मिन्नेव शीर्षाणि ध्रियमाणं सिद्धार्थ इव लक्ष्यते॥२॥"
√●वास्तविक भूखण्डों के हिसाब से ७ द्वीप थे-जम्बू (एसिया), शक (अंग द्वीप, आस्ट्रेलिया), कुश (उत्तर अफ्रीका), शाल्मलि (विषुव के दक्षिण अफ्रीका), प्लक्ष (यूरोप), क्रौञ्च (उत्तर अमेरिका), पुष्कर (दक्षिण अमेरिका)। इनके विभाजक ७ समुद्र हैं।
√●यह ऐतिहासिक पौराणिक लेख तीन विद्वानों द्वारा प्राचीन वाग्मय के आधार पर लिखा गया है संशोधित किया गया है जो प्राचीन ऐतिहासिक संदर्भों को प्रदर्शित करता है।
26/01/2023
हज़ार रुपये की मामूली नौकरी करने वाला लड़का महंगे रेस्टोरेंट में बैठकर आर्डर कर रहा था, और उसके सामने थी उसकी एक्स-डिंपल जिसने उससे गरीब कहकर ठुकरा दिया था, क्या हुआ था लकी के साथ ?
Ch 1 - Unlucky Lucky
कहते हैं कि दिल्ली दिलबरों की है , दिलजलों की है। कहते तो ये भी हैं कि दिल्ली दिल्फ़रेबों की भी है, और लकी यानि की लक्ष्मण लाल अग्रवाल में ये सारे गुण मौजूद थे। लोग उसकी शक़्ल को देखकर ही कह देते थे कि दिल्ली से हो क्या? लकी वैसे दिखने में स्मार्ट और अट्रैक्टिव था, पर जेब से खस्ता हाल होने कि वजह से रहता सिंपल तरीके से था ।
शर्ट का रंग उड़ा हुआ और पैंट से पैबंद जुड़ा हुआ। कहने को तो उसकी उमर के लकड़े दिल्ली की सड़कों पर रात को मोटरबाइक दौड़ाते थे, लेकिन लकी उर्फ़ लक्ष्मण लाल अग्रवाल सिर्फ़ कमरे से कॉलेज, कॉलेज में पढ़ाई और गर्लफ्रेंड डिंपल के साथ थोड़ा वक़्त बिताना, फिर कॉलेज से दुकान, दूकान से जब होम डिलेवरी आये तो वहां और फिर घर चला जाता था। हाँ कभी-कभी जब वो किसी लड़के को खाली सड़क पर मोटरबाइक दनदनाते हुए देखता तो कहता-
‘एक दिन! एक दिन अपना टाइम आएगा! जब मैं चश्मा लगाकर बैठूँगा, और मेरे पीछे डिम्पल को बैठाऊँगा ! देखना, जब वो मेरी कमर में अपना हाथ कसेगी और मैं तेज़ी से मोटरसाइकिल को इंडिया गेट के आसपास दौड़ाऊँगा, तो सारे दिल्ली का दिल हम दोनों को देखकर जल जाएगा। दुकान में रखा हुआ बर्नोल भी काम नहीं आएगा।’ लकी ने कहा और अपने हाथ में बर्नोल की क्रीम को दबा दिया। जैसे ही उसने क्रीम को दबाया, उसका ढक्कन खुल गया और उसमें से सारी क्रीम बाहर आ गयी।
‘अबे गधे क्या कर रहा है! वो कोई स्पंज की गेंद है क्या, जो उसे दबा रहा है?’ - दुकान के मालिक ने उसे फटकारते हुए कहा और उसके माथे में एक चपत लगा दी।
‘सॉरी! सॉरी सर जी सॉरी!’ लकी ने अपना सिर बचाते हुए कहा । वो क़रोल बाग़ में स्थित एक छोटी सी मेडिकल स्टोर पर काम करता था। उसकी दुकान का नाम था चमन मेडिकल स्टोर और उसके ओनर का नाम था चमन लाल।
लकी पिछले 5 सालों से इन्हीं की दुकान पर काम कर रहा था। यहाँ इस छोटी शॉप पर काम करना उसकी मज़बूरी थी। लाइफ में कंगाली की वजह से उसे कॉलेज में पढ़ाई पूरी करने के लिए पार्ट टाइम जॉब करना जरुरी था, उसने कई अच्छी जगह, अच्छी तनख्वाह की नौकरी ढूंढ़ी, पर नहीं मिली। और वो इस मेडिकल पर ही अटक कर रह गया।
‘गधे! अब इसके पैसे कौन तेरा बाप भरेगा? कटेगा! इसका पैसा भी तेरी तनख़्वाह से कटेगा और एम आर पी से डबल कटेगा !’ - चमन ने अपने दांतों को किचमिचाते हुए कहा। ग़ुस्से की वजह से उसकी नाक फूल गयी थी और लकी की साँसे।
उसने घबराते हुए owner से पूछा-‘एम आर पी से डबल क्यूँ सर जी?’
‘ताकि अगली बार से ऐसी कोई हरकत करने से पहले तू डबल बार सोचे!’- चमन ने कहा और उसके हाथ से ट्यूब छीन ली। उसका जी तो चाह रहा था कि वो लकी की खोपड़ी पर और एक बार अपना हाथ साफ़ कर ले ,लेकिन उससे पहले ही दुकान का फ़ोन बजने लगा। फ़ोन की घंटी बजते ही लकी को वहाँ से निकलने का मौक़ा मिल गया और वो भागते हुए फ़ोन उठाने के लिए चला गया।
‘हेलो जी क़रोल बाग़ के बेस्ट मेडिकल चमन मेडिकल से बोल रहा हूँ! बताईए क्या काम था?’ ये लकी की पेटेंट लाइन थी। चाहे कहीं से भी फ़ोन आए, लेकिन उसे फ़ोन पर बस यही बोलना था। जैसे ही इधर से लकी ने अपनी बात कही, उधर से उसे जवाब आया-
‘मैं ब्लूमिं नाइट्स होटल के कमरा नम्बर 303 से बात कर रहा हूँ। एक छोटा सा ऑर्डर है, नोट करो और जल्दी से होटल पर डिलिवर करवा दो।’ - वो एक लड़के की आवाज़ थी। उसकी आवाज़ में काफ़ी भारीपन और एक अजीब सी जल्दबाज़ी थी। जैसे ही लकी ने वो आवाज़ सुनी, पता नहीं क्यूँ लेकिन उसे वो आवाज़ जानी पहचानी सी लगी।
‘जी बताइए सर आपका क्या ऑर्डर है!’
‘हाँ तो लिखो, हार्डप्ले के दो पैकेट और एक पैकेट टिशू !’ लकी जोकि अपना पेन लेकर तैयार खड़ा था, सेफ़प्ले का नाम सुनते ही झिझक गया था। असल में हार्डप्ले नाम का एक कंडोम आता था और इसलिए उसका नाम सुनते ही लकी शर्मा गया था। इतने साल से भी मेडिकल की दुकान पर काम करने के बाद भी उसे इन चीज़ों का नाम सुनने में शर्म आती थी।
‘हेलो! भाई लिखा कि नहीं लिखा?’ - उस आदमी ने फिर से लकी से पूछा।
‘जी! जी सर लिख लिया सर!’ - लकी ने खिसियाकर हँसते हुए कहा।
‘लिख लिया तो फिर लेकर निकल!’ उस लड़के ने कहा।
उसकी आवाज़ सुनकर ही ना जाने क्यूँ ऐसा लग रहा था कि वो कोई बहुत बड़ा आदमी था।
‘जी! जी सर मैं-सर लेकिन बाहर तो बारिश हो रही है।’ - लकी ने कहा उसने देखा की बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी। उनकी दुकान के सामने पानी भर गया था और तेज हवाओं की वजह से चमन मेडिकल स्टोर का बोर्ड भी गिर गया था।
लकी को लग रहा था कि वो इतनी तेज बारिश में अभी एकदम से तो वो नहीं निकल पायेगा।
तो उसने उस लड़के को समझते हुए कहा- "सर मैं आपका आर्डर ले तो आऊंगा, पर थोड़ा टाइम लगेगा, बारिश थोड़ी थम जाये। आप--" इससे पहले वो कुछ आगे बोल पाता फ़ोन पर लड़का बोल पड़ा-
‘तुम्हारे मालिक को पता है कि तुम मल्होत्रा जी के लड़के को मना कर रहे हो! बहस मत करो। हाँ पता है बारिश हो रही है! इसलिए सारा सामान अच्छे से थैली में पैक करके लाना। और लेट नहीं होना चाहिए समझे।’ - उस लड़के ने कहा और इससे पहले की लकी आगे कुछ कह पाता, उसने फ़ोन काट दिया था।
उधर से लकी के दुकान का owner उसे घूरकर देखे जा रहा था। लकी के हाथ में पेन और पेपर देखकर ही वो समझ गया था की उसके पास कोई ऑर्डर आया था। आज वैसे भी इतनी बरसात होने की वजह से सुबह से इक्का दुक्का ग्राहक ही दुकान पर आए थे, ऐसे में उसकी दुकान का मालिक एक भी ऑर्डर को छोड़ना नहीं चाहता था। वो लकी को देख रहा था और लकी बारिश की ओर देख रहा था।
‘बारिश का बहाना नहीं चलेगा! जाना पड़ेगा!’ - चमन लाल ने कहा।
‘मैं बहाना नहीं कर रहा, थोड़ी बारिश धीमी हो जाये तो मैं चला जाऊंगा। अभी आप खुद ही देखिये कितनी तेज बारिश है। वो पता नहीं कोई मिस्टर मल्होत्रा का बेटा कुछ ज्यादा ही जल्दी में था सर जी, मैं साइकल से तो पहुँच ही नहीं पाऊँगा इतनी जल्दी!’ लकी ने उनकी ओर देखते हुए कहा।
'क्या कहा, मिस्टर मल्होत्रा का बेटा, तू मेरी दूकान बंद करवाएगा क्या, अभी के अभी निकल उनका आर्डर लेके। वो हमारे बहुत पुराने कस्टमर हैं। चमन ने कहा ।
'पर-' लकी ने कहा ही था की चमन बोला ।
‘पर- वर कुछ नहीं, तू मेरी मोटर्सायकल ले जा!’ उन्होंने गुस्से में कहा।
‘अर्रे सर जी, 200 के ऑर्डर में मुश्किल से 40 रुपए बचेंगे, इससे तीन गुना का तो पेट्रोल ही लग जाएगा, और अगर गाड़ी रास्ते में बंद हो गयी तो और ख़र्चा!’ -
लकी ने समझाते हुए कहा । वो जानता था कि उसका मालिक इन सब बातों पर ध्यान नहीं देने वाला था ।
चमन लाल बोला- ‘कोई बात नहीं! तू जा! चाहे जो हो जाए, ग्राहक नाराज़ नहीं होना चाहिए! और वो तो मल्होत्रा जी का बेटा है।’
चमन लाल ने मोटरसाइकिल की चाबी लकी की ओर उछालते हुए कहा। लकी ने चाबी ली, उसे देख कर उसके अंदर मिक्स फीलिंग्स आयीं, एक तो वो खुश हुआ कि बड़े दिनों बाद बाइक चलाने मिलेगी, पर वहीं दूसरी तरफ दुखी इसलिए हुआ कि बाइक मिली भी तो ऐसी तेज बारिश में, अगर ख़राब हो गयी तो इसकी चपत भी उसके सर ही पड़ेगी। वो मुँह लटकाकर रेनकोट और हेलमेट पहनते हुए वहाँ से निकल गया। बाहर आके बाइक को देख के लकी ने मन में सोचा- 'चलो ठीक है, जो होगा देखा जायेगा, कम से कम बाइक चलाने मिल रही है।"
दरअसल लकी इतने साल काम करने के बाद भी अपने लिए एक मोटरसाइकल भी नहीं ख़रीद पाया था। लकी की तनख़्वाह ही इतनी भर थी कि सिर्फ़ उसके कमरे का किराया, उसकी साइकल में डालने वाली हवा का खर्चा, बिजली-पानी का बिल और डिम्पल के साथ महीने में एक-दो बार बाहर खाने का खर्चा ही निकल पाता था। उसे डिम्पल की कही बात अक़्सर याद आती थी।
‘लकी! अगर अगले दो महीने में बाइक नहीं ख़रीदी ना, तो मैं तेरे से ब्रेकऊप कर लूँगी देखना।’
असल में डिम्पल को लकी के साथ बाइक पर घूमने की बड़ी तमन्ना थी। लकी की इस उजाड़ ज़िंदगी में वही तो एक थी, जिसके लिए ज़िंदा रहने को उसका जी चाहता था। जब भी वो उससे बाइक की बात करती, तो लकी डिम्पल की इस बात को हँसकर टाल देता था। वो अपने मन में इस बात को अच्छे से जानता था कि डिम्पल उससे बहुत प्यार करती थी और वो उसे कभी छोड़कर नहीं जा सकती थी। वो दोनों एक दूसरे में ऐसे घुले-मिले थे, जैसे बादल में बरसात घुल जाती थी। लकी को डिम्पल बहुत पसंद थी और वो उसके लिए दुनिया जहां की ख़ुशियाँ ख़रीदकर ला देना चाहता था। वो चाहता था कि एक दिन वो डिम्पल को प्लेन में बैठाए! लेकिन उसके ये सब ख़्वाब इस कम तनख्वाह की नौकरी की वजह से तो कभी पूरे नहीं होने वाले थे।
पर आज उसके पास मौक़ा था। वो डिम्पल को अपने साथ इस बारिश में राजपथ घुमाना चाहता था। वो उसे दिल्ली दिखाना चाहता था। चमन लाल को देने के लिए उसने पहले से बहाना सोच रखा था। बस जल्दी से वो ये डिलेवरी देकर सीधे डिम्पल के पी जी पर ही जाने वाला था।
उसने होटल ब्लूमिं नाइट्स के बाहर मोटरबाइक पार्क की और सीधा होटल के अंदर चला गया। लकी ने रिसेप्शन पर पहुंच कर नमस्ते करते हुए रिसेप्शनिस्ट को बोला-
‘जी मैं चमन मेडिकल स्टोर से आया हूँ, रूम नम्बर 303 का ऑर्डर था।’ रिसेप्शन पर खड़ा आदमी उसके हाथ में काली थैली को देखकर ही समझ गया था कि उसमें क्या था और वो मंद-मंद मुस्कुराते हुए बोला-
‘थर्ड फ़्लोर पर है। लिफ़्ट से चले जाओ। रैनकोट यहीं उतार देना।’ - जैसा उस आदमी ने कहा, लकी ने वैसा ही किया और लिफ़्ट में चढ़ने के कुछ ही देर के बाद वो तीसरे माले पर पहुँच गया था। वो रूम नम्बर 303 के बाहर पहुंचा और उसने डोरबेल बजाई। जैसे ही दरवाज़ा खुला, लकी ने थैली आगे बढ़ाते हुए कहा-
‘नमस्ते मैं चमन मेडिकल स्टोर से लकी, ये आपका-‘ इससे पहले की लकी आगे कुछ कह पता, उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी थीं। उसने अपने सामने जो देखा, उसके बाद उसे ऐसा लगा की बंद छत के नीचे भी उसके ऊपर आसमान से आकर एक ज़ोरदार बिजली गिर गयी थी। उसके सामने एक लड़की खड़ी थी। वो लड़की और कोई नहीं बल्कि उसकी गर्लफ्रेंड डिम्पल ही थी। उसने एक पर्पल कलर का नाईट गाउन पहना हुआ था। उसके काले घने बाल गीले थे और उसने उन्हें अपने कंधों पर फैला रखा था। उसकी ख़ुशबू से ही ये चीज़ साफ़ पता चल रही थी की वो अभी-अभी नहाकर आयी थी।
‘डिम्पल! डिम्पल त- तुम यहाँ क्या कर रही हो !’ लकी को अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। उसने दो बार अपनी पलकें झपकाकर देखा, लेकिन दोनों बार उसे अपने सामने डिम्पल ही नज़र आयी।
‘तुम यहाँ क्या मेरा पीछा करते हुए आए हो?’ - डिम्पल ने उल्टा उसी के ऊपर पलटवार करते हुए कहा। लकी को देखकर उसके दिल की धड़कन भी तेज हो गई थी। उसे उम्मीद नहीं थी कि लकी यहाँ आ जाएगा। उसने ना तो सुबह से उसे फ़ोन किया था और ना ही उसके मेसेज का कोई जवाब दिया था। वो अपने मन में सोचकर बैठी थी कि वो अगले दिन खुद ही उससे मिलकर बोल देगी कि उसकी तबियत ख़राब थी।
‘डिम्पल बेबी क्या हो गया ? किससे बात कर रही हो ?’ - अचानक से एक गबरू जवान सा लड़का दरवाज़े के पास आकर खड़ा हो गया था। उसने बनियान और चड्ढा पहना हुआ था। लकी उसे पहचान गया था।
‘साले राहुल के बच्चे! तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी डिम्पल को हाथ लगाने की-‘ लकी ने जैसे ही राहुल को देखा, उसके तन बदन में मानो आग लग गयी थी। वो उसे इस वक्त इतना बुरा मारना चाहता था, इतना बुरा पीटना चाहता था जिसकी कोई हद नहीं थी।
लकी जिस कॉलेज में पढ़ता था, राहुल और डिंपल भी उसी में पढ़ते थे, और वो कॉलेज राहुल के फादर का ही था। डिम्पल ने राहुल के पिता की एक कम्पनी में जॉब पकड़ ली थी और राहुल उस पर बहुत लाइन मारता था। लकी ने एक दो बार डिम्पल को उससे दूर रहने के लिए भी कहा था, लेकिन डिम्पल ने उसे ये कहकर टाल दिया था कि वो सिर्फ़ अच्छे दोस्त थे। आज भी इससे पहले कि वो आगे बढ़ता, डिम्पल उन दोनों के बीच में आ गयी थी।
‘रुक जाओ!’ डिम्पल ने गुस्से में कहा और लकी के सीने पर हाथ रखकर उसे रोक दिया। लकी लम्बी साँसें ले रहा था और कुछ ही साँसों के बाद उसका ग़ुस्सा शांत हो गया था। अब डिम्पल के पास भी छुपाने के लिए कुछ नहीं रह गया था, इसलिए उसने लकी से कहा-
‘लकी! आज से तुम्हारा मेरा ब्रेकअप!’
‘ब्रेकअप!’ लकी के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी थी। उसकी ऑंखें नम हो गयीं। लकी को उसकी बातों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। उसने डिम्पल की ओर देखा और बोला-
‘डिम्पल हम पिछले एक साल से एक दूसरे के साथ हैं और तुम हो कि मुझसे ब्रेकअप करना चाहती हो! अरे मैं तो तुम्हारे लिए नयी बाइक भी लेने वाला था!’
‘चल रहने दे! आज ही याद आ रही है तुमको बाइक की! अरे तेरे पास मुझे बाहर घुमाने के, खिलाने पिलाने के पैसे तो हैं नहीं, तू कहाँ से लेगा बाइक और अगर ले भी लेगा, तो उसमें पेट्रोल कहाँ से डलवाएगा! तेरी 8000 रुपए महीने की नौकरी से ये सब नहीं होने वाला है समझे! लोग हँसते हैं मेरे ऊपर जब मैं सरोजिनी में तेरे साथ घूमती हूँ! मैं ऐसी लाइफ़ नहीं जीना चाहती लकी! मैं तेरी तरह गरीब नहीं रहना चाहती! तूने मुझे फँसाया था, उल्लू बनाया तूने मुझे! इसलिए मैंने राहुल से मैच अप कर लिया है! आज से यही है मेरा बोयफ़्रेंड!’ डिम्पल ने ग़ुस्से में कहा।
‘अच्छा! तो बेबी यही है तुम्हारा वो बेकार सा एक्स बॉयफ्रेंड?’ राहुल ने पूछा और डिम्पल के बग़ल में आकर खड़ा हो गया। फिर उसने लकी के हाथ से थैली उठाई और उसमें से हार्डप्ले का पैकेट निकालकर उसे चिढ़ाने के लिए उसे हवा में लहराने लगा।
‘बाप रे! इससे बदकिस्मत इंसान इस दुनिया में और कौन होगा!’ राहुल ने उसकी टांग खींचते हुए कहा। लकी के पास उसकी बात का कोई जवाब नहीं था। उसने ग़ुस्से से डिम्पल को देखा, और अपनी हाथों की मुट्ठी भींच ली, फिर वहाँ से निकल गया।
‘अबे पैसे तो लेजा! सब कुछ फ़्री ही दे जाएगा क्या!’ राहुल ने ज़ोर से ठहाका लगाते हुए कहा, लेकिन लकी बिना उसकी बात सुनते हुए ही निकल गया। उसके दिमाग़ में डिम्पल के कहे शब्द गूँज रहे थे।
उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि डिम्पल उसके साथ ऐसा भी कुछ कर सकती थी। जिस इंसान के लिए वो इतना कुछ करना चाह रहा था, उसे उसकी कोई क़दर ही नहीं थी। लकी इतना हताश हो गया था कि बूरी तरह से रोने लगा था। इस बार वो लिफ़्ट से नहीं बल्कि सीढ़ियों से नीचे उतरा और एक-एक सीढ़ी उतरने के साथ उसके आंसू आँखों से छलकते जा रहे थे। जब उसकी आवाज़ सुनकर कुछ लोग अपने कमरे से बाहर आए, तो लकी ने तुरंत अपने आँसू पोंछे और तेजी वहाँ से भाग गया। उसे ज़िंदगी में पहली बार प्यार हुआ था और पैसों की कमी की वजह से ना सिर्फ़ उसका प्यार बल्कि उसकी पूरी ज़िंदगी बर्बाद हो गयी थी।
जैसे ही लकी बाहर आया तो उसने देखा की बाहर अंधेरा हो गया था। आसमान में तेज बिजली कड़की, और बारिश जो थोड़ी थमी थी एकाएक फिर झमाझम बरसने लगी, ये देख लकी के थमे हुए आंसू एक बार फिर छलक गए। उसका दिल बूरी तरह टूट चुका था, लेकिन उसे इस बात की ख़ुशी भी हो रही थी। आख़िर आज उसे डिम्पल का असली चेहरा नज़र आ गया था। वो तो उसके साथ घर बसाने की सोच रहा था, लेकिन अच्छा हुआ कि उसने पहले ही उसका घर बर्बाद होने से बचा लिया। लकी को दुख तो बहुत हो रहा था, पर उसे ये भी लग रहा था कि आगे चलकर यही दुख उसे ख़ुशी देने वाला था।
लेकिन और एक चीज़ थी जो लकी को परेशान कर रही थी। वो थी उसकी माली हालत। उसकी जेब इतनी तंग थी कि उसे फटी हुई जेब की पेंट पहनकर घूमना पड़ता था। कभी-कभी तो लकी सिर्फ़ रोटी खाकर दिन काट देता था। वो कबसे कोशिश कर रहा था कि कोई अच्छा काम पकड़ सके, लेकिन उसे कहीं कोई काम देने को राजी नहीं था। उसने टूटे हुए दिल को दिलासा देते हुए मन में सोचा कि डिम्पल पर होने वाले खर्चे बच जाने से शायद उसके हालात कुछ सुधर जाएँगे, पर फिर भी वो रातोंरात रईस नहीं हो जाने वाला था। उसने ऊपर आसमान की ओर देखा और जोर से चिल्लाया-
‘अगर इतना ही unlucky बनाना था, तो फिर नाम लकी क्यूँ रखा भगवान!’ वो जितनी ज़ोर से चिल्ला सकता था, उतनी ज़ोर से चिल्लाया। उसकी आवाज़ से आसपास खड़े लोग एक बार को डर गए थे। लकी ऊपर ही देख रहा था और उसके आंसू बारिश के पानी के साथ मिल गए थे। जैसे ही वो फूटकर रोने को था, तभी उसके फ़ोन पर एक मैसेज आया। जैसे ही लकी ने अपना फ़ोन निकालकर उस मेसेज को पढ़ना शुरू किया, उसकी तो आँखें चमक गयीं। अचानक से उसके आंसू हँसी में बदल गए और वो ज़ोर-ज़ोर से वहीं सड़क पर नाचने लगा था।
उस मेसेज में लिखा था-
‘परिवार की रिसर्च और परिवार के निर्णय के हिसाब से, अग्रवाल परिवार का वारिस , लक्ष्मण लाल अग्रवाल उर्फ़ लकी ने ग़रीबी अभ्यास की परीक्षा को पास कर लिया है और आज से ही वो उस ज़मीन और उस जायदाद का मालिक हो जाएगा, जो परिवार ने उसके नाम कर रखी थी।’
Ch 2 - Lucky Ka Bank Account
उस मेसेज को पढ़ने के बाद भर बरसात में भी उसका चेहरा सूरज की तरह खिल उठा था । लकी ने इस मेसेज को पढ़कर ख़त्म किया ही था की उसके फ़ोन पर बारिश की बूँदें जमा होने लगी थी । लकी ने थोड़ी देर की ख़ुशी मनाने के बाद याद किया की वो सच में गरीब नहीं था । असल में उसके परिवार ने उसे एक परीक्षा में डाल दिया था, जिसका नाम था ग़रीबी अभ्यास परीक्षा । इस परीक्षा के तहत लकी को अग्रवाल ख़ानदान में उसके नाम की ज़मीन और जायदाद पर तब तक हक़ नहीं मिलने वाला था जब तक की वो इस परीक्षा को पास नहीं कर लेता । अचानक से उसे याद आया की वो गरीब नहीं था बल्कि गरीब होने की परीक्षा दे रहा था । हालाँकि परीक्षा देते- देते उसे आठ साल हो गए थे, इसलिए उसे ऐसा एहसास हो रहा था कि वो कभी परीक्षा को पास नहीं कर पाएगा और हमेशा- हमेशा के लिए गरीब ही रह जाएगा ।
‘अच्छा हुआ चली गयी! अब मिलना कभी!’ लकी ने होटल की तीसरी मंज़िल के ओर देखा और पानी के अंदर ही अपना पैर पटक दिया । वो डिम्पल को कोस रहा था । उसने अपनी मोटरसाइकल उठाई और फिर से चमन मेडिक स्टोर जाने के लिए मुड़ने लगा ।
अगले दिन जब लकी की आँख खुली तो वो सीधा उठा और तैयार हो शहर के सबसे बड़े बैंक न्यू सिटी बैंक पोंछा । न्यू सिटी बैंक ना सिर्फ़ शहर का सबसे बड़ा बैंक था, बल्कि वो सबसे अमीर बैंक भी था । वहाँ पर शहर के सबसे अमीर लोगों के ही पैसे जमा किए जाते थे । लकी वाहां पैसे को निकलवाने के लिए जा रहा था । न्यू सिटी बैंक साउथ दिल्ली में बसा हुआ था और उसके दरवाज़े के बाहर महँगी से महँगी गाड़ी खड़ी हुई थी ।
‘भाई अब इसमें से कौनसी गाड़ी लेगा?’ लकी ने मन ही मन सोचा । उसे यक़ीन नहीं हो रहा था की कल तक वो एक मोटरसाइकल तक नहीं ख़रीद पा रहा था और आज वो एक कार और वो भी इतनी महँगी कार ख़रीदने की सोच रहा था । फिर उसने अपनी नज़र गाड़ी पर से हटाई और बैंक के अंदर जाने लगा । उसने देखा कि बाहर बहुत भीड़ थी और महँगे से महँगे कपड़े पहने हुए लोग बैंक के अंदर जा रहे थे ।
‘कहाँ दवाओं की बदबू और कहाँ यह ख़ुशबू!’ - उसने एक बहुत ही गहरी साँस के अंदर ज़्यादा से जयाद ख़ुशबू को समेटने की कोशिश करते हुए अपने मन में सोचा । लेकिन अगले ही पल उसके मन में संकोच पैदा हो गया था । रातोंरात लकी की क़िस्मत तो बदल गयी थी, लेकिन रातोंरात वो अपने कपड़े नहीं बदल पाया था । इतने बड़े बैंक में वो वही कपड़े पहनकर आ गया था जो वो अक्सर अपने काम पर पहनकर जाता था ।
‘पैसे लेते ही सबसे पहले नए कपड़े ख़रीदने है ।’ - लकी ने अपने आप से कहा और फिर बैंक के अंदर दाखिल होने लगा । जैसे ही उसने दरवाज़े को धक्का दिया, उसे आवाज़ आयी,
‘आउच!’ लकी थोड़ा सा हड़बड़ी में दिखाई दे रहा था और इस जल्दबाज़ी के चक्कर में वो एक लम्बे बाल वाली लड़की से जा टकराया था, जोकि उसके बग़ल में ही चल रही थी ।
‘माफ़ करना मैं आपको देख नहीं पाया ।’ - लकी ने तुरंत उससे हाथ जोड़कर माफ़ी माँगते हुए कहा । उस लड़की ने इतने अच्छे कपड़े पहन रखे थे की उसे देखकर ही लग रहा था की वो किसी अमीर घराने की लड़की थी । इसलिए सॉरी बोलते वक़्त ना चाहते हुए भी लकी के हाथ उसके सामने जुड़ गए थे ।
लेकिन जब उस लड़की ने लकी के कपड़ों और उसके हुलिये को देखा तो उसने अपनी नाक बोंह सिकोड़ ली । वो लगभग हर रोज़ इस बैंक में आया और ज़ाया करती थी । लेकिन उसने आजतक इस बैंक के अंदर लकी जैसे फटीचर आदमी को घुसते हुए नहीं देखा था । उसके बालों में से आँवले के तेल की गंध आ रही थी । उसने ग़ुस्से भरी नज़रों से लकी को देखा और बोली,
‘क्यूँ नहीं देख पाए? मैं क्या ट्रैन्स्पेरेंट हूँ? तुम्हें इतनी बड़ी लड़की दिखाई नहीं देती?’
इससे पहले की बात आगे बढ़ती, उस लड़की ने देखा की इस बैंक की मैनेजर यासमिन पटेल उन दोनों की ओर बड़ी चली आ रही थी । उसने भी लकी को देखकर वैसी ही शक़्ल बनाई थी जैसी शक़्ल उस लम्बी लड़की ने बनाई थी ।
‘I’am so sorry miss ! आपको कहीं लगी तो नहीं?’ - यासमिन ने उस लड़की से पूछा और फिर घिन्न भरी नज़रों से लकी की ओर देखने लगी ।
लकी तमतमाती आँखों से उन दोनों को देखे जा रहा था । वो जानता था कि उसने इतनी जोर से भी दरवाज़ा नहीं खोला था की उसे चोट लग जाएग । लेकिन असल में उसे यह नहीं मालूम था की वो लोग उसे नहीं बल्कि उसके कपड़ों को देख रहे थे । यासमिन ने लकी को ऊपर से नीचे तक देखा और ना जाने क्यूँ उसके मन में शक़ पैदा हो गया ।
‘क्या आप मुझे बता सकते है की आप यहाँ पर किस काम से आए है?’ - यासमिन ने बड़ी मुश्किल से अपने चहरे पर एक मुस्कान लाते हुए कहा । वो उसका हुलिया देखते ही समझ गयी थी की वो यहाँ का कस्टमर नहीं था । लकी ने अपने आपको सम्भाला और कहा,
‘हाँ मैं वो अपना पैसा निकालने के लिए आया था ।’
‘पैसा निकालने के लिए आए हो?’ - यासमिन ने लकी की ही बात को दोहराते हुए कहा ।
वैसे तो वो लकी की बात पर ज़ोर से हँसना चाहती थी, लेकिन उसने अपने आपको थोड़ा सा क़ाबू में कर लिया था । लकी की बात सुनकर उसे लग रहा था की वो कोई पागल था, जो यहाँ ज़बरदस्ती घुसा चला आया था ।
‘हाँ तो क्या आपके पास कार्ड है?’- यासमिन ने उससे आगे पूछा ।
न्यू सिटी बैंक का कार्ड हासिल करना एक बहुत ही मुश्किल काम था । अगर किसी को भी उस बैंक का कार्ड लेना था, तो सबसे पहले उस आदमी को अपने खाते में पाँच लाख रुपए पहले से जमा करवाकर रखने पड़ते थे, तब जाकर उसे कहीं कार्ड मिलता था । लेकिन लकी तो पहली ही बार यहाँ आ रहा था इसलिए उसके पास कार्ड होने की कोई सम्भावना नहीं थी । लकी जब यासमिन के सवाल का जवाब नहीं दे पाया तो यासमिन ने फिर से उससे पूछा,
‘मैं पूछ रही हूँ क्या आपके पास कार्ड है?’ - वो समझ गई थी की लकी पागल ही था, जो कहीं से भागकर सीधा उनके बैंक में आ गया था ।
‘नहीं!’ - लकी ने उसके सवाल का जवाब दिया और वो फिर से इधर-उधर देखने लगा ।
जैसे ही उस लम्बे बालों लड़की ने लकी का जवाब सुना तो वो खिलखिलाकर हँस पड़ी । यासमिन को तो सिर्फ़ लग रहा था की वो पागल है, लेकिन वो लड़की तो अपने मन में मान ही चुकी थी यह लड़का कोई पागल है, जो कहीं झोपडपट्टी से यहाँ आ गया है । इससे पहले की आगे कोई कुछ कह पाता, उस लम्बे बालों वाली लड़की के पिता वहाँ आए और बोले,
‘चलो बेटी ।’ - उनके हाथ में कुछ काग़ज़ात थे । लकी ने देखा की उन्होंने महँगा सा सूट पहन रखा था । उस लड़की ने यासमिन के दोनों हाथों को पकड़ा और बोली,
‘यासमिन देखो, अगर इस तरह के सड़कछाप लोग तुम्हारे बैंक में ऐसे ही घुसे चले आने लगे और बाक़ी के कस्टमर्ज़ को परेशान करने लगे तो इससे तुम्हारे बैंक की इमेज और उसके शेयर को काफ़ी नुक़सान होगा । एक मैनेजर होने के नाते तुम्हें इन सब चीजों का ध्यान रखना चाहिए । मुझे उम्मीद है की आगे मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं होगा ।’ - उस लड़की ने कहा और अपने पिता के साथ बैंक से बाहर निकल गयी ।
‘अपना ध्यान रखना कोयल मैडम!’ - मैनेजर ने उसे उसकी गाड़ी तक छोड़ने के लिए आते हुए कहा ।
आज तो वो बाल-बाल बच गयी थी । कोयल और उसके पिता इस बैंक के सबसे पुराने और सबसे वफ़ादार कस्टमर थे । अगर आज यासमिन उन्हें नाराज़ कर देती और वो उसके बैंक से अपना खाता बंद करवा देते तो शायद यासमिन की नौकरी जा सकती थी और यह सब हो रहा था उस पागल लकी की वजह से ।
‘इसे जल्द से जल्द यहाँ से भगाना पड़ेगा ।’- यासमिन ने अपने आप से कहा और फिर से बैंक के अंदर आने लगी । यासमिन उसे अपने बैंक से बाहर निकालने के तरीक़े के बारे में सोच तो रही थी मगर जैसे ही वो बैंक में दाखिल हुई, उसने देखा कि लकी वहाँ था ही नहीं ।
‘अर्रे! अब यह कहाँ चला गया?’ उसने अपने आप से पूछा ।
वो इधर उधर देखने लगी, लेकिन लकी वहाँ भी नहीं था । यासमिन को अच्छे से पता था की वो उसके सामने तो बाहर भी नहीं निकला था, इसका मतलब वो था तो बैंक के अंदर ही, लेकिन यासमिन उसे ढूँढ नहीं पा रही थी । कुछ देर तक बैंक के सारे कोनों को देख लेने के बाद यासमिन को लगा की शायद लकी यहाँ बहुत ही असहज महसूस कर रहा होगा और जब वो कोयल को दरवाज़े पर छोड़ने के लिए आयी थी तब उसके पीछे- पीछे वो भी निकल गया होगा ।
‘चलो! जान बची!’ - यासमिन ने अपने आप से कहा और आपे केबिन में आकर बैठ गयी । जैसे ही उसने आज के दिन की पहली फ़ाइल उठाई थी, उसे किसी की एक झलक दिखी । यह और कोई नहीं बल्कि लकी ही था ।
‘अर्रे! यह कहाँ छुपा हुआ था?’ - यासमिन ने अपने आप से कहा और तुरंत फ़ाइल को टेबल पर रखकर वो ऑफ़िस से बाहर आ गयी । उसने देखा कि लकी बैंक के V.I.P लौंज के बाहर खड़ा था, और उसके खम्भे की आड़ की वजह से वो यासमिन की नज़र से बाहर हो गया था ।
अब यासमिन को वो मिल तो गया था, लेकिन उसके लिए उससे भी बड़ी एक और मुसीबत खड़ी हो गयी थी । लकी जिस कमरे के बाहर अभी खड़ा था, उस कमरे के अंदर शहर के सभी रईस लोगों का उठना बैठना था । बैंक के सिलसिले में या किसी और काम के सिलसिले में वो सभी लोग यहीं आकर बात किया करते थे । उस कमरे के अंदर जो लोग बैठे थे, उन सबके करोड़ों रुपए इस वक़्त बैंक में रखे हुए थे । अब अगर ऐसे में लकी वहाँ घुस जाता तो वो सब लोग मिलकर यासमिन की गर्दन पर चढ़ जाते ।
‘रुको! जहां हो वहीं खड़े रहो!’ - यासमिन जोर से और साथ ही ग़ुस्से से चिल्लायी ।
बाक़ी के लोग जो वहाँ खड़े थे वो यासमिन की यह चीख सुनकर डर गए थे । कुछ लोगों को उसके इतने ज़ोर से आवाज़ करने की वजह से ग़ुस्सा भी आ गया था और यासमिन सबसे मुस्कुराते हुए माफ़ी माँगकर आगे बढ़ती जा रही थी । वो लकी को किसी भी तरह से उस कमरे में जाने से रोकना चाहती थी लेकिन उससे पहले ही वो उस कमरे के अंदर दाखिल हो चुका था ।
‘अर्रे यार यह आदमी है या गधा!’ - यासमिन ने अपना ही सिर पिटते हुए कहा और वो भी उस कमरेके दरवाज़े की ओर बढ़ने लगी । उसने उस कमरे का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की लेकिन वो अंदर से लॉक हो गया था ।
‘बाप रे! यह कैसा आदमी है, बिना पर्मिशन के अंदर घुसा तो घुसा, लेकिन दरवाज़ा भी अंदर से बंद कर लिया! अब!’ - यासमिन की साँस फूलती जा रही थी ।
उसे बहुत डर लग रहा था । उसका जी यह सोच-सोचकर ही घबराए जा रहा था की ना जाने अंदर लकी और उस रिलेशन मैनेजर के बीच में क्या हो रहा होगा ।
इधर जैसे ही लकी कमरे में दाखिल हुआ, वहाँ का कस्टमर रिलेशन मैनेजर जोकि सोफ़े पर फैला हुआ था वो उसे देखते ही अचानक सीधा बैठ गया था ।
‘हेलो सर, कैसे है आप?’ - उसके मुँह से बिना लकी को देखे यही शब्द निकले । उसे याद था की इस कमरे में कुछ ख़ास लोग ही आते थे और जो भी आते थे, यासमिन उनके आने की खबर उसे पहले ही दे देती थी, लेकिन इस वक़्त जो आदमी उसके सामने खड़ा था, उसे देखते ही वो भी अपनी जगह पर जम गया था । ना तो वो कहीं से भी V.I.P लग रहा था और ना ही वो उसका कोई रिश्तेदार था ।
‘कौन हो भाई? क्या चाहिए तुम्हें?’ -उस मैनेजर ने उस 20 साल के जवान लड़के को देखते हुए कहा ।
‘मैं यहाँ अपना पैसा लेने के लिए आया हूँ ।’ - लकी ने सीधा मुद्दे की बात को मैनेजर के सामने रखते हुए कहा ।
‘तुम्हारे पास हमारा सुप्रीम कार्ड है?’ - मैनेजर ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और पूछा ।
‘नहीं ।’ लकी ने कहा ।
‘तो फिर हम तुम्हें कोई पैसा नहीं दे सकते । चलो अभी दरवाज़ा खोलो और बाहर निकलो ।’ मैनेजर ने कहा और सोफ़े पर से उठ गया ।
‘नहीं! मैं अपना पैसा लिए बिना नहीं जाऊँगा ।’ - लकी भी ज़िद पर अड़ गया ।
‘अर्रे बोला ना बिना कार्ड वाले को पैसा नहीं मिलता है । और वैसे भी पैसा होगा तभी तो निकलेगा ।’ मैनेजर ने उसके क़रीब आते हुए कहा ।
‘पैसा है तभी तो निकालने आया हूँ ।’ लकी ने कहा ।
‘देख फ़ालतू की बहस मत कर सुबह- सुबह और चुपचाप निकल जा, वरना मैं सिक्यरिटी को बुला लूँगा तो वो लोग मार-मारकर बाहर निकालेंगे ।’ - लकी यह सुनकर घबरा गया था ।
मैनेजर के चहरे का ग़ुस्सा उसे साफ़ नज़र आ रहा था, लेकिन ऐसा भी नहीं था की वो झूठ बोल रहा हो । भले ही उसके पास कार्ड नहीं था लेकिन इसका मतलब यह नहीं था, कि वो AGRAWAL ख़ानदान का लड़का नहीं था । जैसे- जैसे मैनेजर उसकी ओर बढ़ता जा रहा था, लकी का डर भी बढ़ता जा रहा था ।
मैनेजर को लग रहा था की वो कोई सनकी था और वो उसे धक्के मारकर बाहर निकालने के लिए आगे बढ़ ही रहा था की अचानक घबराए हुए लकी के दिमाग़ में के आइडिया आया,
‘फ़िंगर्प्रिंट!’ - उसने अपना अंगूठा कमरे में मौजूद उस मैनेजर के सामने उठाते हुए कहा ।
‘फ़िंगर्प्रिंट?’ मैनेजर ने चौंकते हुए पूछा ।
‘आपने कहा ना आपको कार्ड चाहिए, पर मेरे पास कार्ड नहीं है, फ़िंगर्प्रिंट है और मुझे मालूम है कि आपके यहाँ फ़िंगर्प्रिंट से भी पैसा निकल जाता ।’ - यह कहते ही लकी ने एक राहत की साँस ली थी । लेकिन मैनेजर को यह समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर लकी को फ़िंगर्प्रिंट की जानकारी कैसे थी?
‘तुम फ़िंगर्प्रिंट यूज़ करना चाहते हो?’ - मैनेजर ने लकी को घूरते हुए पूछा । लकी की शक़्ल और उसका हुलिया मैनेजर के लिए उसकी बातों से मेल नहीं खा रहे थे ।
‘हाँ!’ - लकी ने सीना चौड़ा करते हुए कहा । उसे इस तरह देख तो मैनेजर और भी confuse हो गया था । मैनेजर ने सोचा की उसे एक चांस देना चाहिए, इसलिए उसने लकी को फ़िंगर्प्रिंट इस्तेमाल करने की इजाज़त दे दी थी । वो अपनी टेबल के पास गया और उसके दराज में फ़िंगर्प्रिंट वाली मशीन ढूँढने लगा । दो-तीन ड्रोस में झांकने के बाद आख़िरकार उसे वो मशीन मिल गयी थी ।
‘चुपचाप यहाँ पर अंगूठा लगाओ ।’ - मैनेजर ने मशीन को आगे बढ़ाते हुए कहा ।
लकी ने अपनी फटी हुई पैंट के पिछले हिस्से अपना अंगूठा पोंछा और फिर उस मशीन पर लगा दिया । दो सेकंड के बाद मशीन में से एक आवाज़ आने लगी । उसके अंदर एक लाल बत्ती जल रही थी और वो जोर- जोर बीप कर रही थी ।
‘तुम्हारा फ़िंगर्प्रिंट मैच नहीं कर रहा है ।’ - मैनेजर ने लकी को ऐसे देखा जैसे वो कोई बड़ा अपराधी था ।
मैनेजर उसकी पैंट की ओर देखने लगा । उसे लग रहा था कि लकी ने अपनी जेब में कोई हथियार छुपा रखा था और वो मैनेजर को बेवक़ूफ़ बना रहा था । इससे पहले की लकी अपनी जेब से कोई बंदूक़ या बम निकालता, मैनेजर ने अपना फ़ोन निकाला और पुलिस का नम्बर लगाने लगा ।
लकी ने उसकी स्क्रीन पर देख लिया था की वो 100 नम्बर पर फ़ोन लगा रहा था । लकी बुरी तरह से घबरा गया था । वो बहुत ही उत्साह और जोश में अंदर तक तो चला आया था, लेकिन उसे मालूम नहीं था कि वो इतनी बड़ी मुसीबत में फँसने वाला है ।
Ch 3 - Kismat ka Pitara
लकी बैंक के अंदर दाखिल तो हो गया था, लेकिन जब मैनेजर ने उससे पैसे निकालने के लिए कार्ड माँगा तो उसके पास कार्ड नहीं था । उसकी फटेहाल हालत देखकर पहले ही मैनेजर को ग़ुस्सा आ रहा था और उसमें लकी ने यह डिमांड रख दी कि वो फ़िंगर्प्रिंट
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23/09/2025
18/08/2025