GZP Sushil

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GZP Sushil The Educator
Speaker | Motivator | Learner
Team Mentor of KKS Foundation
From-Ghazipur, Uttar Pradesh

"जय जवान... जय किसान "
02/10/2026

"जय जवान... जय किसान "

10वीं और 12वीं के बाद सिर्फ डिग्री नहीं, ज्ञान भी ज़रूरी है!मैं एक प्राइवेट शिक्षक हूँ और पिछले कुछ समय से एक बात बार-बा...
28/09/2026

10वीं और 12वीं के बाद सिर्फ डिग्री नहीं, ज्ञान भी ज़रूरी है!

मैं एक प्राइवेट शिक्षक हूँ और पिछले कुछ समय से एक बात बार-बार सुनने को मिल रही है।

जब 10वीं या 12वीं के बाद एडमिशन के लिए अभिभावक आते हैं, तो उनका पहला सवाल होता है— "अगर बच्चा क्लास नहीं करेगा, तब भी एडमिशन हो जाएगा?"

यही सोच चिंता की बात है।

मैं समझता हूँ कि कई बच्चों पर परिवार की जिम्मेदारियाँ होती हैं, लेकिन जिम्मेदारियाँ पूरी ज़िंदगी रहेंगी। अगर सीखने की उम्र में बच्चा क्लास से दूर रहेगा, तो उसके पास सिर्फ कागज़ की डिग्री रह जाएगी, ज्ञान और कौशल नहीं।

10वीं और 12वीं के बाद का समय भविष्य बनाने का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। चाहे ITI हो, कॉलेज हो या कोई अन्य कोर्स— नियमित क्लास, प्रैक्टिकल और सीखने की आदत ही आत्मविश्वास और कौशल देती है।

मेरे लिए शिक्षा का मतलब सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जानकारी, समझ और जीवनभर काम आने वाला हुनर है।

आपकी क्या राय है? क्या सिर्फ डिग्री काफी है या ज्ञान भी उतना ही ज़रूरी है? अपनी राय कमेंट में ज़रूर लिखिए और अगर बात सही लगे तो पोस्ट को शेयर कीजिए।

— सुशील शर्मा (GZP Sushil)

बदलाव की शुरुआत खुद से...समाज में कई ऐसी बातें होती हैं जिन्हें मैं गलत मानता हूँ। मन करता है कि उनके खिलाफ आवाज़ उठाऊँ,...
27/09/2026

बदलाव की शुरुआत खुद से...

समाज में कई ऐसी बातें होती हैं जिन्हें मैं गलत मानता हूँ। मन करता है कि उनके खिलाफ आवाज़ उठाऊँ, लोगों को जागरूक करूँ। लेकिन सच यह भी है कि कभी-कभी वही कमियाँ अपने ही परिवार और अपने आसपास दिखाई देती हैं।

ऐसी स्थिति में मैं खुद से एक सवाल करता हूँ—क्या मैं वही कर रहा हूँ, जो दूसरों को करने के लिए कह रहा हूँ?

इसीलिए मैंने एक बात अपने जीवन का सिद्धांत बना ली है—पहले खुद को बेहतर बनाना है, फिर जितना हो सके अपने लोगों को सही राह दिखानी है, और उसके बाद समाज में जागरूकता फैलानी है।

मैं यह नहीं कहता कि मैं पूरी तरह बदल चुका हूँ। मैं आज भी सीख रहा हूँ, खुद को सुधार रहा हूँ और हर दिन एक बेहतर इंसान बनने का प्रयास कर रहा हूँ।

मेरा उद्देश्य किसी की कमी गिनाना नहीं, बल्कि शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से अच्छी सोच और अच्छे संस्कार फैलाना है।

छोटे कदम ही बड़े बदलाव की शुरुआत करते हैं।

— GZP Sushil

नमस्कार साथियों!आज आप सभी के साथ एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करना चाहता हूँ।हमारी पहल, जो पहले KKS Foundation के नाम से ज...
26/09/2026

नमस्कार साथियों!
आज आप सभी के साथ एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करना चाहता हूँ।
हमारी पहल, जो पहले KKS Foundation के नाम से जानी जाती थी, अब एक नए और स्थायी नाम KKS Nexus के साथ आगे बढ़ेगी।
यह बदलाव जल्दबाज़ी में नहीं, बल्कि टीम के साथ लंबे विचार-विमर्श के बाद किया गया है। हमने ऐसा नाम चुना जो अलग पहचान बनाए, हमारे उद्देश्य को सही अर्थ दे और आने वाले वर्षों तक हमारी पहचान बना रहे।पेड़-पौधे लगाना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना।
स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े उपयोगी संदेश लोगों तक पहुँचाना।
समाज में अच्छा काम करने वालों का सम्मान करना और गलत प्रवृत्तियों के प्रति जागरूकता फैलाना।
टीम के साथ मिलकर अपने क्षेत्र में छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव लाना।
हमारी सोच-
"हर घर तक शिक्षा पहुँचे, हर बच्चे का सपना साकार हो।"
हम मानते हैं कि बदलाव अकेले नहीं, बल्कि साथ मिलकर आता है।
यदि हम अपने 24 घंटों में से सिर्फ 1 मिनट सकारात्मक सोच के लिए और सप्ताह या महीने का एक दिन समाज के लिए निकाल दें, तो अपने क्षेत्र में अच्छा परिवर्तन संभव है।
आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है
KKS Nexus नाम आपको कैसा लगा?
अब यही हमारी स्थायी पहचान रहेगी। आप सभी का सहयोग, सुझाव और साथ हमारे लिए सबसे बड़ी ताकत है।
आइए, मिलकर शिक्षा, पर्यावरण और समाज के लिए एक बेहतर कल बनाएँ।
आप सभी का दिल से धन्यवाद।
— सुशील शर्मा
Team Mentor – KKS Nexus
#ज्ञान_संरक्षण_सेवाएँ

क्या आपको भी याद हैं ऐसे हस्तलिखित नोट्स?ये नोट्स हमारे प्यारे विद्यार्थी ने अपनी मेहनत और लगन से तैयार किए हैं, जिन्हें...
24/09/2026

क्या आपको भी याद हैं ऐसे हस्तलिखित नोट्स?

ये नोट्स हमारे प्यारे विद्यार्थी ने अपनी मेहनत और लगन से तैयार किए हैं, जिन्हें हमने कक्षा में पढ़ाया था। इन्हें देखकर एक बात फिर से याद आ जाती है—काले स्केच पेन से बनाई गई सुंदर हेडिंग्स की अपनी ही एक अलग पहचान होती थी।

आज भी ऐसी साफ़-सुथरी हैंडराइटिंग और आकर्षक हेडिंग्स मन जीत लेती हैं। पहले नोट्स बनाना भी एक कला माना जाता था, और हर पेज में मेहनत साफ़ दिखाई देती थी।

मैं, सुशील शर्मा, आप सभी से एक सवाल पूछना चाहता हूँ—

कितने लोगों ने कभी ऐसे काले स्केच पेन वाली हेडिंग्स बनाईं या ऐसे नोट्स तैयार किए थे?

अपना जवाब कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखिए और इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाइए, ताकि बच्चों में सुंदर लेखन और व्यवस्थित नोट्स बनाने की प्रेरणा बनी रहे।

– GZP Sushil

मज़ाक में छुपी जलन पहचानना सीखिए।हर मुस्कुराहट अपनापन नहीं होती और हर मज़ाक सिर्फ़ मज़ाक नहीं होता। कुछ लोग हमारे साथ रह...
15/09/2026

मज़ाक में छुपी जलन पहचानना सीखिए।
हर मुस्कुराहट अपनापन नहीं होती और हर मज़ाक सिर्फ़ मज़ाक नहीं होता। कुछ लोग हमारे साथ रहकर, हँसते-बोलते हुए भी ऐसी बातें कह जाते हैं जिनमें अपनापन कम और जलन ज़्यादा छिपी होती है।

मेरा अनुभव कहता है कि कुछ लोग सामने साथ देने की बातें करते हैं, लेकिन अवसर मिलने पर पीठ पीछे वार करने से भी नहीं चूकते। इसलिए लोगों से नफ़रत नहीं, बल्कि समझदारी और सजगता के साथ रिश्तों को पहचानना ज़रूरी है।

सच्चे लोग आपकी सफलता से खुश होते हैं, जबकि कुछ लोग उसी सफलता पर ताना मारने का रास्ता चुन लेते हैं।

यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव और विचार है।

— सुशील शर्मा

छोटे-छोटे पैडल, बड़े-बड़े सपने... आज आराध्या शर्मा पूरे उत्साह और मुस्कान के साथ साइकिल चलाना सीखने की कोशिश कर रही है। ...
13/09/2026

छोटे-छोटे पैडल, बड़े-बड़े सपने...
आज आराध्या शर्मा पूरे उत्साह और मुस्कान के साथ साइकिल चलाना सीखने की कोशिश कर रही है। गिरने का डर कम है, सीखने की खुशी ज़्यादा है।
बच्चों के सपनों को बस एक मौका, थोड़ा विश्वास और थोड़ा साथ चाहिए। जब हम उन्हें सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, तो उनका आत्मविश्वास भी पहियों के साथ आगे बढ़ने लगता है।
हर नया प्रयास, एक नई उड़ान की शुरुआत है।
— सुशील शर्मा(KKS Foundation)

80 के दशक की तस्वीरें क्यों दिल को छू जाती हैं?पिछले कुछ दिनों से 80 के दशक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही ...
11/09/2026

80 के दशक की तस्वीरें क्यों दिल को छू जाती हैं?
पिछले कुछ दिनों से 80 के दशक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। उन्हें देखकर एक अलग ही अपनापन और सादगी महसूस होती है।

सोचने वाली बात यह है कि आज हमारे पास महंगे कपड़े, नए फैशन और आधुनिक सुविधाएँ हैं, फिर भी उन तस्वीरों जैसी सादगी और व्यक्तित्व हर जगह क्यों नहीं दिखता?

मुझे लगता है कि उस दौर की खूबसूरती केवल कपड़ों में नहीं थी, बल्कि लोगों के व्यवहार, संस्कार, सादगी और पारिवारिक जुड़ाव में भी थी।

अगर हम उस समय की अच्छी बातें—सम्मान, अपनापन, बड़ों का आदर, परिवार के प्रति जिम्मेदारी और भारतीय संस्कार—को आज के समय में अपनाएँ, तो हमारा समाज और भी बेहतर बन सकता है।

आइए, आधुनिकता के साथ अपनी भारतीय संस्कृति और अच्छे संस्कारों को भी आगे बढ़ाएँ।

यह मेरे व्यक्तिगत विचार हैं। अगर आपको ये बात अच्छी लगे, तो अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए और इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाइए।

— सुशील शर्मा(KKS फाउंडेशन)
#भारतीयसंस्कृति #संस्कार #युवा

शिक्षक दिवस 2026: आप सभी के प्रेम के लिए हृदय से आभारआज का शिक्षक दिवस मेरे जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक रहा। आज ...
05/09/2026

शिक्षक दिवस 2026: आप सभी के प्रेम के लिए हृदय से आभार

आज का शिक्षक दिवस मेरे जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक रहा। आज आईटीआई कॉलेज के विद्यार्थियों, विशेष रूप से मौर्य इलेक्ट्रीशियन प्रथम वर्ष के बच्चों, हमारे सम्मानित शिक्षकों, मेरे ग्रामीण क्षेत्र की ट्यूशन कक्षाओं के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों, मेरी प्यारी दादी माँ और KKS Foundation परिवार से जो स्नेह, सम्मान और अपनापन मिला, उसके लिए मैं हृदय से आप सभी का आभारी हूँ।

बच्चों ने शिक्षक दिवस पर मुझे अनेक सुंदर उपहार दिए, लेकिन सबसे बड़ा उपहार उनका प्रेम, सम्मान और मुस्कान थी। केक काटने के बाद बच्चों में जो उत्साह और हर्षोल्लास देखने को मिला, वह मेरे लिए अविस्मरणीय पल बन गया। इस अवसर पर बच्चों को केक और समोसे वितरित कर उनके साथ खुशियाँ साझा करने का सौभाग्य मिला।

मेरा हमेशा से मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उन्हें केवल सही मार्गदर्शन, अवसर और प्रोत्साहन की आवश्यकता है।

मैं बच्चों से यही कहना चाहता हूँ कि शिक्षक दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का दिन है जो हमें जीवन में कुछ सिखाते हैं। शिक्षा की शुरुआत हमारे घर से होती है, इसलिए सबसे पहले हमें अपने माता-पिता, अभिभावकों और गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए। यही संस्कार हमें एक बेहतर इंसान बनाते हैं।

आप सभी अभिभावकों और मेरे प्यारे बच्चों को ढेर सारा प्यार और शुभकामनाएँ।

– सुशील शर्मा
KKS Foundation

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