Samta Inter College Sadat Ghazipur U. P.

Samta Inter College Sadat Ghazipur U. P.

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S.M.S.U. Inter College was Establish in 1970 by Shri Kali Charan Yadav (Ex. Education Minister(Uttar

Shri Mahant Shivdas Udasin Inter College (SMSU) in Sadat Ghazipur popularly known as Samata,This is an autonomous intermediate college in Ghazipur attached to UP Board.

Briggy Bro-Chalti Ka Naam Gaadi Hai [Official Music Video] 05/03/2021

दिनेश सिंह यादव (पूर्व छात्र - समता इण्टर कॉलेज 2005) द्वारा एक बेहतरीन गाना - चलती का नाम गाड़ी आज रिलीज़ हुआ है. कृप्या गाना सुने और ब्रिग्गी ब्रो यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करके भाई का हौसला बढ़ाये.

Briggy Bro-Chalti Ka Naam Gaadi Hai [Official Music Video] Song-Chalti Ka Naam Gaadi haiSinger-Briggy BroLyrics-Briggy BroArtits:Anand Pant ,Tarun MehraMusic Director-R.Jay KangMix & Master-R.Jay KangVideo Director -...

Tere Baap Bol Rahe Hain | Offical Video | Briggy Bro | Latest Rap Song 2020 02/03/2020

दिनेश सिंह यादव (समता छात्र 2002-2005), कपिल शर्मा शो राइटर, चाची चोप्स बिग गंगा भोजपुरी का न्यू सॉन्ग खुद की आवाज में। एक बार सुने और लाइक शेयर और सब्सक्राइब करें।

Tere Baap Bol Rahe Hain | Offical Video | Briggy Bro | Latest Rap Song 2020 SONG-TERE BAAP BOL RAHE HAIN. Artist/Lyrics- Briggy Bro Music- Rjay Kang Starring- Toshi Tamanna. Director - Faadu & Sandeep Sharma (Director of Doob Song) P...

द डूब सोंग The Doob Song - Official Music Video | Briggy Bro | Rjay Kang | New भोजपुरी Rap Song 2019 21/12/2019

अपने समता इंटर कॉलेज से पढ़ा हुआ अपना एक छात्र आज हिंदी और भोजपुरी की फिल्मी दुनिया में अश्लीलता से परे होकर अपने कॉमेडी से, राइटिंग से, एक्टिंग से और अब सिंगिंग में भी एक अलग ही पहचान बना चुका है। दिनेश सिंह यादव बड़ा गांव प्यारेपुर सादात गाजीपुर की एक्टिंग सिंगिंग इत्यादि इस वीडियो में देखें लाइक करें और शेयर करें।

द डूब सोंग The Doob Song - Official Music Video | Briggy Bro | Rjay Kang | New भोजपुरी Rap Song 2019 Presenting the official music video of The Doob Song. Singer: Briggy Bro Music: Rjay Kang Lyrics: Briggy Bro Arranger/Programmer: Rjay Kang Producer: Briggy ...

12/07/2019

बड़े दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि, समता परिवार के सदस्य व समता इण्टर कालेज में बड़ेबाबू के पद पर कार्यरत श्री रामवृक्ष यादव जी का आज सुबह निधन हो गया ।

भगवान उनकी अंतरात्मा को शांति दें, शोकाकुल समता परिवार

25/05/2019

ग़ाज़ीपुर से मनोज सिन्हा का हार जाना बहुत निराशाजनक है। सबका मानना है की जातिवाद की वजह से हार गए जो की 100 प्रतिशत सत्य भी है। देश में एक सन्देश भी पहुँच गया की ग़ाज़ीपुर आज भी जातिवाद में जकड़ा हुआ है। अब चिंतन करने वाली बात यह है की अगर हर जगह जातिवाद कम हुआ है तो ग़ाज़ीपुर से क्यों नहीं कम हुआ। बहुत सारी वजहें भी हो सकती है।

2014 में मनोज सिन्हा केवल 33 हजार वोट से जीते थे और संकेत भी मिल गया था की अगली लड़ाई आसान नहीं भाजपा के लिए। यहाँ तक की 2017 के विधानसभा चुनाव में भी सैदपुर जखनियां जंगीपुर में सपा भारी थी हालांकि जखनियां में मामूली वोटों से हार गयी और सुभासपा की जीत हुयी।

मनोज सिन्हा की हार की कुछ वजह मुझे भी एहसास हो रही है लेकिन 100 प्रतिशत दावा नहीं है कि सही वजह यही है। अगर मेरे विश्लेषण में कुछ गलत लगता है तो करेक्ट करें। कृपया तू तू मैं मैं या गाली गलौज ना करें।

1- 2017 विधान सभा चुनाव के समय की एक अफवाह या सच्चाई

2017 के विधानसभा चुनाव के पहले मनोज सिन्हा के खिलाफ एक बात बहुत तेजी से फैली थी की वो भाजपा के कार्यकर्ताओ से बोले है की किसी यादव दलित या मुस्लिम के काम की फरमाइस मेरे पास मत लाना क्योकि उससे कोई फायदा नहीं वो हमेशा सपा बसपा को ही वोट देते है। मैं इसे अफवाह मानता हूँ। लेकिन अगर पिछले 5 साल में देखा जाये तो मनोज सिन्हा जी का दौरा सैदपुर और जखनियां विधान सभा में कुछ चुनिंदा गावों तक ही सिमित था। यादव दलित या मुस्लिम बाहुल्य गावों में तो शायद ही कोई दौरा हुआ हो अगर हुआ भी होगा तो बहुत कम। इससे ये अफवाह भी एक विकराल रूप लेने लगी और लोगों को ये सच महसूस होने लगा। कुछ महानुभाव यहाँ तक बोल दिए कि सिन्हा जी खुद जातिवादी सोच के है। इस क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता भी बहुत सुस्त है। सरकार की योजनाए लोगों तक नहीं पहुँचा पाते। अपने व्यक्तिगत लाभ से ज्यादा नहीं सोचते है।

2- आर्मी की भर्ती स्थल का करमपुर से वाराणसी स्थानांतरण

मनोज सिन्हा जी के कार्यकाल में करमपुर हॉकी स्टेडियम में आर्मी भर्ती का आयोजन स्वीकृत हुआ था। जिले के लड़को में बहुत ख़ुशी थी. अचानक करमपुर से आर्मी भर्ती को वाराणसी स्थानांतरण कर दिया गया था और उसमे भी मनोज सिन्हा का ही नाम सामने आया की वही करमपुर से हटवा कर बनारस करवा दिए क्योंकि करमपुर हॉकी स्टेडियम के मैनेजर का सपा पार्टी से सम्बन्ध है। सच्चाई क्या थी वो लोगों तक नहीं पहुंची। मुझे भी सच्चाई नहीं पता।

3- यादव दलित मुस्लिम वोटरों का उपहास

अगर कोई यादव दलित मुस्लिम भाजपा की नीतियों से प्रभावित होता है और भाजपा को वोट देने की बात करता है तो खुद भाजपा समर्थक लोग उसका समर्थन ना करके उपहास करते है। उदहारण के तौर पे अगर किसी चट्टी चौराहे पे जहाँ हर पार्टी के लोग आते हो अगर कोई यादव या दलित बोलता है कि इस बार भाजपा को वोट दूंगा तो भाजपा समर्थक बोलते है कि तोहन क कउनो भरोसा ना ह साइकिल, हाथी छोड़ के कहीं और जाई ना सकता। अब ऐसा सुनने के बाद वो फिर साइकिल और हाथी को ही वोट दे देता है। ग़ाज़ीपुर की बात तो छोड़ दीजिये दिल्ली नॉएडा में भी ये तंज सुनने को मिलता है। यादव टाइटल अच्छा अखिलेश। भाजपा समर्थित लोगों को ऐसी सोच निकाल देनी चाहिए क्योंकि सब जाति के लोग पढ़ लिख रहे है और अच्छा बुरा का आंकलन करने में सक्षम भी है। अब ये नहीं कह सकते है कि यादव है तो साईकल और दलित है तो हाथी।

4- चुनाव के दौरान भी यादव दलित बाहुल्य गावों की अनदेखी

इस पॉइंट पे ज्यादा नहीं पता है। सादात ब्लॉक में एक गॉव में राजपूत ठीकठाक है उनलोगों के यहाँ सिन्हा जी की सभा हुयी जबकि वहीं बगल के गावों में एक मिनट के लिए भी नहीं रुके क्योंकि बगल के गावो में यादव दलित की संख्या ज्यादा है। अपने तरफ का जातिगत सामंजस्य ही कुछ ऐसा है की कोई खास समुदाय किसी खास समुदाय में किसी नेता को देखने या सुनने तक नहीं जाता है । अगर वहीं नेता किसी सार्वजनिक जगह पे आता है तो सारे समुदाय के जा सकते है। ऐसे ही पॉइंट्स को सपा बसपा कार्यकर्ता उठाकर यादव दलित के वोट को भाजपा में जाने से रोक लेते है। जातिवाद से परे होकर सभी से वोट माँगना प्रत्याशी, कार्यकर्ता का काम है जनता दे या ना दे।

और भी इसी तरह की छोटी छोटी वजहें है जो मुझे इस हार कि वजह महसूस हो रही है।

मनोज सिन्हा के हारने का दुःख तो है लेकिन उम्मीद है की राज्यसभा से भाजपा उन्हें फिर मौका देगी।

Photos from Samta Inter College Sadat Ghazipur U. P.'s post 15/08/2016

Wish you all a Happy Independence Day...Bharat Mata Ki Jai....

Photos from Samta Inter College Sadat Ghazipur U. P.'s post 14/08/2016
24/06/2016

दिनेश लाल यादव निरहुआ
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गाजीपुर- दिनेश लाल यादव निरहुआ गाजीपुर जिले के एक छोटे से ग्राम टड़वा के रहने वाले है ।आज दिनेश भोजपुरी फिल्म के एक बड़े कलाकार बन गये है पहले दिनेश की स्थिति ठीक नहीं थी ।पूरा बचपन गरीबी में बीता है ।जब से दिनेश लाल यादव अपना एलबम निरहूआ सटल रहे निकाला तब से दिनेश भोजपुरी जगत मे निरहूआ के नाम से प्रसिद्ध हो गये ।
एक नजर दिनेश लाल यादव के बारे में-
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- दिनेश गाजीपुर के छोटे से गांव टंडवा के रहने वाले हैं।
- जब दिनेश छोटे थे तब उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।
- पैसों के लिए पिता कुमार यादव निरहुआ और उनके भाई को लेकर कोलकाता चले आए।
- हालांकि, इस दौरान उन्होंने पत्नी और तीन बेटियों को गांव में ही छोड़ दिया।
- कोलकाता में कुमार यादव बेलघरिया के आगरपाड़ा की झोपड़पट्टी में अपने दोनों बेटों के साथ रहने लगे।
- इस दौरान वे 3500 रुपए में मजदूरी करने लगे। यहीं से दिनेश ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई शुरू की।

(चर्चा में क्यों : फिल्म 'बम बम बोल रहा है काशी' रिलीज के तीन दिनों के बाद अपनी लागत निकालने के करीब पहुंच गई है। फिल्म की प्रोड्यूसर एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा हैं।)
कभी एक साइकिल नहीं थी घर में
- दिनेश लाल यादव के छोटे भाई प्रवेश लाल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि भइया ने बहुत संघर्ष किया है।
- घर में साइकिल तक नहीं थी। कहीं आने-जाने के लिए पैदल ही सफर तय करना पड़ता था।
- 2003 में जब उन्होंने अपना पहला एलबम निकाला तो फिर उनका समय बदला।
- फिर वे भोजपुरी फिल्मों के स्टार बन गए। इसके बाद उन्हें फिल्मों में मौका मिला।
- दिनेश के भाई प्रवेश भी भोजपुरी फिल्मों में काम करते हैं।
- प्रवेश ने बताया कि यूपी, बिहार, झारखंड, पंजाब की जनता अब सेलिब्रिटी के रूप में देखती है।
- फिल्मों में आगे बढ़ने के लिए फैमली सपोर्ट बहुत जरुरी होता है।
पिता चाहते थे नौकरी करें दिनेश
- बताया जाता है कि 1997 में कुमार यादव अपने गांव लौट आए। इसके बाद दिनेश ने गाजीपुर के मलिकपुरा कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की।
- दिनेश के पिता चाहते थे कि उनका बेटा पढ़ लिखकर कोई अच्‍छी सी नौकरी करे, लेकिन दिनेश को कुछ और ही भाता था।
- दिनेश अपने चचेरे भाई बिरहा गायक विजय लाल यादव से काफी प्रभाव.....

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Ghazipur
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