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अत्यंत सुन्दर अत्यंत सराहनीय
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया है कि अब Certificate of Practice (CoP) के लिए वकीलों को कोई अलग या अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
BCI के महासचिव श्री श्रीमंतो सेन द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार, All India Bar Examination (AIBE) के रजिस्ट्रेशन के समय जो फीस जमा की जाती है, वही CoP के शुल्क को भी कवर करती है। इसका अर्थ है कि अब उम्मीदवारों को परीक्षा पास करने के बाद किसी भी राज्य बार काउंसिल को अलग से पैसा नहीं देना होगा।
मुख्य बातेंः
1. AIBE फीस में CoP शुल्क शामिल है। कोई अलग भुगतान नहीं लिया जाएगा।
2. राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया गया है कि वे CoP के नाम पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क न लें।
3. BCI स्वयं प्रत्येक उम्मीदवार के लिए राशि प्रदान करेगी -₹700 (सामान्य व ओबीसी वर्ग) और ₹500 (SC/ST/Divyang वर्ग) ताकि राज्य बार काउंसिलें प्रमाणपत्र के वितरण आदि का कार्य सुचारु रूप से कर सकें।
4. सभी प्रमाणपत्र (COP) बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा ही छपवाए जाएंगे और राज्य बार काउंसिलों को भेजे जाएंगे
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20/07/2025
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे अब मुश्किल में पड़ सकते है क्योंकि उनके विवादित बयान और उनके कार्यकर्ताओं की हिंसा पर अब एक्शन लिया जा सकता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि राज ठाकरे के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने यह याचिका दाखिल की है। इस याचिका में राज ठाकरे और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता घनश्याम उपाध्याय ने बताया कि इससे पहले उन्होंने हिंदी भाषा के मुद्दे पर गैर-मराठी नागरिकों पर हो रहे हमलों के खिलाफ अधिकारियों को शिकायत भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उपाध्याय का कहना है कि कई बार अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद, राज ठाकरे और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
विजय रैली में हिंसा को सही ठहराया
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज ठाकरेने मराठी भाषा के नाम पर गैर-मराठी नागरिकों पर हो रहे हमलों को जायज ठहराने की कोशिश की है। याचिका में राज ठाकरे, उनके चचेरे भाई और शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे द्वारा 5 जुलाई को आयोजित विजय रैली का हवाला दिया गया है और दावा किया गया है कि राज ठाकरे ने मराठी न बोलने वालों की पिटाई को जायज ठहराया था।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया है कि राज ठाकरे ने मराठी भाषा के मुद्दे को राजनीतिक फायदे के लिए उछाला है, ताकि आगामी बीएमसी चुनावों में इसका फायदा उठाया जा सके।
यह भी पढ़ें - 'रंग बदलने में गिरगिट से तेज हैं उद्धव', शिंदे ने बताया फडणवीस को कैसे दिया धोखा
महाराष्ट्र में भाषा के नाम पर मारपीट
बता दें कि मुंबई में मराठी बनाम हिंदी भाषा का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज ठाकरे के समर्थकों द्वारा गैर-मराठी भाषियों की पिटाई के कई मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में, मनसे नेता के बेटे ने शराब के नशे में प्रभावशाली व्यक्ति राजश्री मोरे के साथ बदसलूकी की थी। इससे पहले, लोगों ने मराठी बोलने पर एक दुकानदार की पिटाई कर दी थी। जिन लोगों ने उसे पीटा, उन्होंने अपने गले में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) से जुड़े स्कार्फ पहने हुए थे।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
19/07/2025
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के कल्याणी की एक अदालत ने देश में संभवतः पहली बार साइबर क्राइम के मामले में शुक्रवार को नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इन ठगों ने पिछले साल रानाघाट के एक निवासी से 'डिजिटल गिरफ्तारी' की धमकी देकर एक करोड़ रुपये ठगे थे।
अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस तर्क से सहमति जताई कि इस तरह के अपराध 'आर्थिक आतंकवाद' से कम नहीं हैं। इन नौ दोषियों को महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात से गिरफ्तार किया गया था। इनमें से एक महिला भी शामिल है। ये सभी एक बड़े साइबर गैंग का हिस्सा हैं, जिसने अब तक देशभर में 108 लोगों से कुल 100 करोड़ रुपये की ठगी की है। इन सभी के खिलाफ देश के अन्य हिस्सों में भी मुकदमे चल सकते हैं।
कल्याणी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुबर्थी सरकार ने गुरुवार को सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दिया था। शुक्रवार को उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 338 (दस्तावेजों की जालसाजी) सहित BNS और IT एक्ट की कुल 11 धाराओं के तहत सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई। बचाव पक्ष ने संकेत दिया है कि वे इस फैसले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।
डिजिटल सबूतों के आधार पर पकड़ा गया
सीआईडी के आईजीपी अखिलेश कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि इन साइबर अपराधियों को डिजिटल सबूतों के आधार पर पकड़ा गया। उन्होंने कहा कि जांच से पता चला कि ठग अलग-अलग राज्यों में फैले बैंक खातों के जरिए पैसे ट्रांसफर कर रहे थे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और मोबाइल फोन जब्त किए। खातों और मोबाइल नंबरों के विश्लेषण से यह पूरा नेटवर्क उजागर हुआ। पांच महीने चले इस मुकदमे के दौरान चार राज्यों से 29 गवाहों ने अदालत में आकर बयान दिए। इनमें अंधेरी (वेस्ट) पुलिस स्टेशन के SHO और एसबीआई, पीएनबी, केनरा बैंक, बंधन बैंक, फेडरल बैंक और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के शाखा प्रबंधक शामिल थे। पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट 2600 पन्नों की थी।
कई लोगों को ठग चुका है ये गिरोह
विशेष लोक अभियोजक बिवास चटर्जी ने बताया कि उन्होंने अदालत को बताया कि यह गिरोह केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि कई लोगों को ठग चुका है और यह 'आर्थिक आतंकवाद' है। उन्होंने कहा कि हमने अदालत को बताया कि कैसे दो पीड़ित एक रिटायर्ड प्रोफेसर और एक राज्य सरकार के सेवानिवृत्त इंजीनियर की जीवनभर की कमाई विदेशी खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इनमें से एक खाता शायद कंबोडिया में है। इसी तरह एक अन्य पीड़ित को अपनी संपत्ति बेचकर आरोपियों को पैसे देने पड़े और उन्हें एक आश्रम में रहना पड़ा
16/06/2025
🛑 "अब इंसाफ में देरी नहीं!" 🛑
🚨 "FIR दर्ज होने के 3 साल के भीतर मिलेगा न्याय..." - अमित शाह जी का बड़ा ऐलान!
📜 नया कानून अब तय करेगा समयबद्ध न्याय प्रणाली का रास्ता।
⚖️ अब पीड़ित को सालों-साल कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे!
* जनता को न्याय
* अपराधियों को समय पर सजा
* बदलता भारत, सशक्त न्याय व्यवस्था
क्या आप इस फैसले से सहमत हैं?
👇 कमेंट करके अपनी राय ज़रूर दें!
15/02/2025
क्या आपकी वसीयत भी हो सकती है अमान्य? सुप्रीम कोर्ट ने एक चौंकाने वाला फैसला सुनाया, जिसमें संपत्ति विवाद में वसीयत को संदिग्ध करार दिया गया। जानिए कैसे गलतियां आपकी संपत्ति को कानूनी जटिलताओं में फंसा सकती हैं
Supreme court decision: प्रोपर्टी वसीयत को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, वसीयत काफी नहीं… सबूत की भी होगी जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में एक संपत्ति विवाद पर सुनवाई करते हुए वसीयत को संदिग्ध करार दिया। यह मामला बालासुब्रमणिया तंथिरियार (वसीयतकर्ता) द्वारा अपनी संपत्ति को विभाजित करने से संबंधित था। वसीयतकर्ता ने अपनी पूरी संपत्ति को चार भागों में विभाजित किया था, जिसमें से तीन हिस्से पहली पत्नी और उसके बच्चों को दिए गए थे।
वसीयत की वैधता पर उठा सवाल
इस मामले में विवाद का मुख्य कारण वसीयत की प्रामाणिकता थी। निचली अदालत और उच्च न्यायालय दोनों ने वसीयत के आधार पर अपीलकर्ताओं के दावे को खारिज कर दिया था और इसे संदिग्ध माना था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, जहां अदालत ने भी वसीयत की वैधता पर संदेह जताया। कोर्ट ने पाया कि वसीयत की सत्यता साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए थे।
वसीयत निष्पादन में संदेह
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अपीलकर्ता यह साबित करने में असफल रहे कि वसीयतकर्ता ने जो कुछ भी लिखा था, उसे पूरी तरह से समझने के बाद ही इस दस्तावेज़ को निष्पादित किया था। इस कारण वसीयत को वैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि वसीयत में स्वयं ही कुछ विरोधाभासी बातें मौजूद थीं, जिससे इसकी प्रामाणिकता पर संदेह उत्पन्न होता है।
वसीयत के दस्तावेज़ में विरोधाभास
सुप्रीम कोर्ट ने वसीयत में मौजूद एक महत्वपूर्ण विरोधाभास की ओर इशारा किया। वसीयत में एक ओर यह कहा गया था कि वसीयतकर्ता पूरी तरह होशोहवास में है और अपने निर्णय खुद ले रहा है, वहीं दूसरी ओर उसमें यह भी लिखा था कि वह गंभीर दिल की बीमारी से ग्रसित था और कई डॉक्टरों से इलाज करा रहा था। इस विरोधाभास के चलते अदालत ने इसे संदेहास्पद करार दिया।
गवाह और नोटरी पब्लिक की भूमिका संदिग्ध
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह था कि प्रतिवादी महिला ने यह स्वीकार किया कि उनके पति ने यह वसीयत निष्पादित की थी, लेकिन इसकी तैयारी में उनका कोई हाथ नहीं था। वहीं, वसीयत के गवाह ने दावा किया कि नोटरी पब्लिक ने वसीयतकर्ता को वसीयत पढ़कर सुनाई थी, लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं दिया जा सका। इसके अलावा, गवाह भी वसीयतकर्ता का परिचित नहीं था, जिससे उसकी गवाही पर स
15/02/2025
MP High Court: पति-पत्नी के बीच अनबन के मुद्दे पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है. कोर्ट का कहना है कि अगर महिला अपने पति के अलावा किसी और पुरुष की ओर आकर्षित है, लेकिन फिजिकल रिलेशन नहीं बनाया, तो इसे 'धोखा' नहीं माना जा सकता.
जस्टिस जीएस आहलुवालिया की बेंच ने टिप्पणी की, "रिश्ते में अडल्टरी या धोखेबाजी तभी हो सकती है, जब व्यक्ति का शादी से बाहर किसी और व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध हो". इसी के साथ कोर्ट ने पति की इस अपील को खारिज कर दिया कि उसकी पत्नी किसी और से प्यार करती है और इसीलिए उसे मेनटेनेंस का अधिकार नहीं है.
फैमिली कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती
दरअसल, इस मामले में पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और रिव्यू पेटीशन दायर की थी. याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें उसे अपनी पत्नी को 4 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने को कहा गया था.
सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा, "अगर पत्नी अपने पति के अलावा किसी और व्यक्ति के प्रति प्यार और स्नेह रखती है, लेकिन कभी शारीरिक संबंध नहीं बनाए हैं, तो यह साबित नहीं करता कि महिला व्यभिचार में रह रही है."
कम आय हो, तो भी पत्नी को देना होगा मेनटेनेंस
वहीं, कोर्ट ने यह भी कहा कि पति की कम आय इस बात का मानदंड नहीं हो सकती कि वह पत्नी को भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता न दे. शादी करने से पहले भी याचिकाकर्ता यह जानता था कि अपने खुद के भरण-पोषण के लिए भी उसकी आय कम है, फिर भी उसने शादी की.
अगर वह एक सक्षम व्यक्ति है तो उसे अपनी पत्नी के भरण-पोषण के लिए या भरण-पोषण राशि के भुगतान के लिए कुछ कमाना होगा.
13/02/2025
सुप्रीम कोर्ट ने की ये टिप्पणियां
- भारत के संविधान की धारा 21 के तहत, प्रत्येक व्यक्ति को एक सम्मानजनक जीवन जीने का मौलिक अधिकार है.
- शून्य घोषित विवाह की पत्नी को नाजायज पत्नी कहना बहुत अनुचित है .
- दुर्भाग्य से, हम पाते हैं कि इस तरह की आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल एक उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ के फैसले में किया गया है.
- इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल महिलाओं के प्रति द्वेषपूर्ण है.
- बॉम्बे उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ द्वारा बनाया गया कानून स्पष्ट रूप से सही नहीं है.
09/01/2025
एक और एग्जाम रद्द ।।
15/11/2024
वकीलों के लिए खुशखबरी ।।
15/11/2024
अब होगी जेल। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपराधिक माना
14/04/2024
भीमराव रामजी आम्बेडकर(14 अप्रैल 1891–6 दिसंबर 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे।
[1] उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था।
[2] वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे।
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