27/01/2026
एक सीजन में 57 विकेट! इंग्लैंड का टिकट मिला, लेकिन मैदान पर एक कदम नहीं रख पाया! रणदेब बोस: 10 साल की मेहनत और 'अधूरी' आस! (2007)
क्रिकेट सिर्फ टैलेंट का खेल नहीं, "सही समय" (Right Time) का भी खेल है।
बंगाल के तेज गेंदबाज रणदेब बोस (Ranadeb Bose) इसकी जीती-जागती मिसाल हैं।
वह एक ऐसे दौर में पैदा हुए जब जहीर खान, आर.पी. सिंह और श्रीसंत अपने चरम पर थे।
वो जादुई साल (2006-07):
रणदेब बोस ने रणजी ट्रॉफी के उस सीजन में कहर बरपा दिया था।
उन्होंने 57 विकेट लिए! (यह उस समय किसी भी तेज गेंदबाज द्वारा एक सीजन में लिए गए सबसे ज्यादा विकेटों में से एक था)।
उन्होंने लगभग अकेले दम पर बंगाल को रणजी फाइनल में पहुँचाया।
गेंद दोनों तरफ स्विंग होती थी और टप्पा एकदम सटीक था। चयनकर्ता उन्हें नजरअंदाज नहीं कर पाए।
इंग्लैंड दौरा और दिल का टूटना (2007):
उन्हें राहुल द्रविड़ की कप्तानी वाली टीम इंडिया में इंग्लैंड दौरे के लिए चुना गया।
इंग्लैंड की परिस्थितियां (Swing Conditions) रणदेब बोस की गेंदबाजी के लिए स्वर्ग थीं।
सबको लगा कि उनका डेब्यू पक्का है।
लेकिन...
तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में उन्हें सिर्फ बेंच पर बैठना पड़ा।
जहीर खान, आर.पी. सिंह और श्रीसंत ने शानदार गेंदबाजी की (भारत सीरीज जीता), लेकिन रणदेब बोस को अपनी काबिलियत दिखाने का एक भी मौका (Single Chance) नहीं मिला।
खाली हाथ वापसी:
सीरीज खत्म हुई, वह बिना टेस्ट कैप पहने भारत लौट आए।
और सबसे दुखद बात?
उन्हें उसके बाद दोबारा कभी नहीं चुना गया।
एक खिलाड़ी जो अपने करियर की सबसे बेहतरीन फॉर्म में था, उसे बिना आजमाए ही खारिज कर दिया गया।
उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 317 विकेट लिए, लेकिन उनके नाम के आगे "India Test Player" कभी नहीं लग पाया।
द अनलकी पेसर:
गोल्डन सीजन: 57 Wickets in 2006-07 Ranji Trophy.
मौका: Selected for India's 2007 Tour of England.
त्रासदी: Returned without playing a single match.
ताकत: Tireless bowling & moving the ball both ways.
विरासत: A Bengal legend who deserved a Test Cap.
क्या आपको लगता है कि एक दौरे पर चुने गए हर खिलाड़ी को कम से कम एक मैच खेलने का मौका मिलना चाहिए?
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