ये सरस्वती शिशु मंदिर है जनाब, यहाँ की बात ही कुछ निराली है!!
यहाँ Recess नहीं होती, यहाँ मध्यावकाश होता है|
यहाँ 5 Minutes' Assembly नहीं होती, यहाँ पूरे 45 मिनिट की प्रार्थना होती है|
यहाँ School Bus नहीं चलतीं, यहाँ विद्यालय वाहन चलते हैं|
यहाँ Lost & Found Dept. नहीं होता, यहाँ होता है खोया-पाया विभाग( जहां पहचान बताकर ले जाएँ)|
यहाँ Class & Subject Teachers नहीं होते, होते हैं यहाँ कक्षाचार्य व विषयाचार्य|
न होता यहाँ Lunch Break, होता है यहाँ भोजन अवकाश और भोजन मंत्र|
यहाँ नहीं होते Unit Tests, होती है यहाँ इकाई मूल्यांकन परीक्षा|
यहाँ नहीं होती Querterly,Half Yearly exam और न ही होती तिमाही, छैमाही; यहाँ होती है त्रैमासिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षा( विशेष जांच भी )|
यहाँ नहीं होते Sir & Madam, यहाँ होते हैं आचार्य जी और दीदीजी|
यहाँ नहीं होती Home-work diary, यहाँ तो होती है गृहकार्य दैनंदिनी|
यहाँ नहीं होती Progress Report, यहाँ मिलते हैं प्रगति पत्रक|
यहाँ नहीं होती All Schools meet, यहाँ होते हैं सरस्वती शिशु संगम|
यहाँ आखिरी घण्टी पर नहीं लगा सकते सीधे घर को दौड़, यहाँ होता है पहले विसर्जन मंत्र|
और भी जाने क्या-कुछ नहीं होता है साथियों यहाँ, क्योंकि -
- ये सरस्वती शिशु मंदिर है जनाब, यहाँ की हर बात ही कुछ निराली है!!
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Saraswati shishu vidya Mandir, Mughalsarai
This page all about the Education, In Sanskrit “sishu” means children and “mandir” means temple. Golwalker. They also worship Bharat Mata.
Saraswati Sishu Mandir (सरस्वती शिशु मन्दिर)are a group of schools run by the Rashtriya Swayamsevak Sangh.[1] “Saraswati” is the Hindu goddess of knowledge, music and other creative arts. The birthplace of Saraswati Shishu Mandir is in Pakkibagh, Gorakhpur - a district of Uttar Pradesh in India. In 1952, late Nanaji Deshmukh and a group of RSS activists planned to educate children about Hindutva (
29/01/2020
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
सभी प्रदेशवासियों को बसंत पंचमी एवं सरस्वती पूजा की ढेर सारी शुभकामनाएं। यह बसंत हम सबके जीवन में नई उमंग, ऊर्जा और उत्साह का संचार लेकर आए,
विद्यालय परिवार ओर से एक बार फिर से आपको वसंतोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं ।
04/10/2019
25°17'29.2"N 83°07'36.5"E Mughalsarai Railway Settlement, Uttar Pradesh 232101, India
13/04/2019
श्री रामनवमी की शुभकामना ! हार्दिक बधाई
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श्री राम की जय हो !
चैत्र शुक्ल नवमी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। आज ही के दिन तेत्रायुग में रघुकुल शिरोमणि महाराज दशरथ एवं महारानी कौशल्या के यहाँ अखिल ब्रम्हांड नायक अखिलेश ने पुत्र के रूप में जन्म लिया था।
दिन के बारह बजे जैसे ही सौंदर्य निकेतन, शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए हुए चतुर्भुजधारी श्रीराम प्रकट हुए तो मानो माता कौशल्या उन्हें देखकर विस्मित हो गईं। उनके सौंदर्य व तेज को देखकर उनके नेत्र तृप्त नहीं हो रहे थे।
श्रीराम के जन्मोत्सव को देखकर देवलोकभी अवध के सामने फीका लग रहा था। देवता, ऋषि, किन्नार, चारण सभी जन्मोत्सव में शामिल होकर आनंद उठा रहे थे। आज भी हम प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल नवमी को राम जन्मोत्सव मनाते हैं और राममय होकर कीर्तन, भजन, कथा आदि में रम जाते हैं।
रामजन्म के कारण ही चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी कहा जाता है। रामनवमी के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना का श्रीगणेश किया था।
उस दिन जो कोई व्यक्ति दिनभर उपवास और रातभर जागरणका व्रत रखकर भगवान् श्रीरामकी पूजा करता है, तथा अपनी आर्थिक स्थितिके अनुसार दान-पुण्य करता है, वह अनेक जन्मोंके पापोंको भस्म करनेमें समर्थ होता है। —
23/03/2019
*** शहीदों को नमन् ***
ज़िंदज़गी हमको देने को ओढ़ा कफ़न।
जिनकी कुर्बानियों से ही महका चमन।
रोया दिनमान भी जिनकी कुर्बानी पर।
ऐसे अनुपम शहीदों को शत् शत् नमन।
में आजादी के लिए अभूतपूर्व जागृति का शंखनाद किया। देशभक्त सुखदेव, भगतसिंह और राजगुरू को अंग्रेज सरकार ने 23 मार्च को लाहौर षडयंत्र केस में फाँसी पर चढा दिया था। इन वीरों को फाँसी की सजा देकर अंग्रेज सरकार समझती थी कि भारत की जनता डर जाएगी और स्वतंत्रता की भावना को भूलकर विद्रोह नही करेगी। लेकिन वास्तविकता में ऐसा नही हुआ बल्की शहादत के बाद भारत की जनता पर स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने का रंग इस तरह चढा कि भारत माता के हजारों सपूतों ने सर पर कफन बाँध कर अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेङ दी।
1928 के प्रारंभ में ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित साइमन कमिशन भारत आया था। जिसमें एक भी भारतीय नही थे, अतः उसके विरोध में भारत के उन सभी शहरों में उसका बहिष्कार किया गया, जहाँ-जहाँ साइमन कमिशन गया था। उसे काले झंडे दिखाए गये। साइमन कमिशन को व्यापक जन विरोधी आन्दोलन का सामना करना पङा। इसी क्रम में जब साइमन कमिशन लाहौर पहुँचा तो वहाँ पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के नेतृत्व में इस कमिशन का व्यापक रूप से बहिष्कार किया किया गया। अंग्रेज सैनिकों ने इस बहिष्कार को रोकने के लिए जनता पर लाठी चार्ज किया, जिसमें लाला लाजपत राय गम्भीर रूप से घायल हो गये और कुछ दिनो बाद उनकी चोट के कारण मृत्यु हो गई। इस हादसे से पंजाब के नौजवान बैचेन हो गये। क्रान्तिकारी संगठन ‘हिन्दुस्तान सोशलिष्ट रिपब्लिक आर्मी’ जिसके सर्वोच्च कमांडर चन्द्रशेखर आजाद थे, उन्होने इस राष्ट्रीय अपमान का बदला लेने का निर्णय लिया। जिस अंग्रेज अफसर (सांडर्स) की मार से लाला जी की मृत्यु हुई उसे मारने की योजना बनाई गयी। इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए क्रान्तिकारियों एक दल गठित किया गया।
यह एक बङे पुलिस अधिकारी की हत्या करने की योजना थी, इसलिए इस योजना के हर पहलु पर बारिकी से अध्ययन किया गया एवं किसको क्या कार्य करना है, इसके लिए उनका कार्यक्षेत्र निर्धारित किया गया। लाला जी की मृत्यु के एक महीने पश्चात अर्थात 17 दिसम्बर को इस योजना को व्यवहारिक रूप से अंजाम देने का दिन निश्चित किया गया। पुलिस सुपरिटेंडन सांडर्स का ऑफिस डी.ए.वी. कॉलेज के सामने था, अतः वहाँ योजना से जुङे क्रान्तिकारी तैनात कर दिये गये। राजगुरू को सांडर्स पर गोली चलाने का संकेत देने का कार्य सौंपा गया। जैसे ही सांडर्स ऑफिस से बाहर निकला तभी राजगुरू से संकेत मिलते ही भगत सिंह ने उसपर गोलियाँ चला दी जिससे वह वहीं ढेर हो गया। भगत सिंह को पकङने के लिए हेड कांस्टेबल चानन सिंह ने उनका पीछा करने की कोशिश की किन्तु तभी चन्द्रशेखर आजाद ने उसपर गोली चला दी, जिससे सभी क्रान्तिकारी भागने में कामयाब हुए। इस हत्या काण्ड से पूरे देश में सनसनी फैल गई। सभी अखबारों ने इस खबर को प्रभुता से प्रकाशित किया। अंग्रेज सरकार की तरफ से इन क्रान्तिकारियों को पकङने की व्यापक कोशिश की गई। कुछ समय पश्चात लाहौर केस के लगभग सभी क्रान्तिकारी पकङे गये। तीन न्यायाधिशों की अदालत में देशभक्त क्रान्तिकारियों पर केस चला।
जेल से अदालत आते समय ये देशभक्त इंनकलाब जिन्दाबाद और अंग्रेज मुरदाबाद के नारे लगाते। सुखदेव और भगत सिंह की योजना थी कि इसतरह से वे अपनी कार्यशैली का प्रचार करेंगे और लोगों को स्वतंत्रता के प्रति जागृत करेगें। अदालती कार्यवाही को जनता तक पहुँचाने का कार्य सामाचार पत्र करते थे, जिससे पूरे देश की जनता सुखदेव, भगत सिंह और राजगुरू एवं अन्य क्रान्तिकारियों के पक्ष में थी। अदालती कार्यवाही के दौरान अपार जन समूह इक्कठा हो जाता था। अदालती कार्यवाही को बाधित देखकर भारत सरकार ने एक आर्डिनेंस जारी किया जिसके अनुसार उन लोगों की अनुपस्थिती में भी कारवाही जारी करते हुए मुकदमा समाप्त कर दिया गया। देशभक्तों ने काफी दिनों तक भूख हङताल भी की। 63 दिनों की भूख हङताल के दौरान जितेंद्र नाथ का निधन भी हो गया। जन आक्रोश के डर से अदालत की सजा जेल में ही सुनाई गयी, जिसके अनुसार भगत सिहं, राजगुरू और सुखदेव को 23 मार्च को फांसी की सजा की सजा मुकर्र की गई। कुछ लोगों को आजीवन काले पानी की सजा दी गई। इस फैसले के विरोध में देशभर में हङतालें हुई। इस केस के विरोध में पी.वी. कौंसिल में अपील की गई परन्तु देशभक्तों ने वायसराय से माफी माँगने से इंकार कर दिया। अतः राजगुरू, सुखदेव तथा भगतसिंह को 23 मार्च 1931 को सायंकाल 7 बजे लाहौर जेल में फांसी दे दी गई, अमूमन फांसी का वक्त प्रातःकाल का होता है किन्तु लोगों में भयव्याप्त करने हेतु इन्हे शाम को फांसी दी गई। उस दौरान जेल में हजारों कैदी थे, उन्होने भी डरने के बजाय पूरे जोश के साथ इंकलाब जिनंदाबाद, भारत माता की जय का आगाज किया। इंकलाब की गूंज पूरे लाहौर शहर में फैल गई। उनके शहादत की खबर से हजारो की संख्या में लोग जेल के बाहर इक्कठा होने लगे तथा इंकलाब जिन्दाबाद के नारे लगाने लगे। उग्र प्रर्दशन से बचने के लिए पुलिस ने शवों को रातो-रात फिरोजपुर शहर में सतुलज नदी के किनारे ले जाकर जला दिया। जब लाहौर के निवासियों को ये पता चला तो अनगिनत लोग इन भारत माता के वीर शहीदों को श्रद्धांजली देने वहाँ पहुँच गये और लौटते समय इस पवित्र स्थल से स्मृति स्वरूप एक-एक मुठ्ठी मिट्टी अपने साथ ले गये। वहाँ पर शहीदों की याद में एक विशाल स्मारक बनाया गया है। जहाँ प्रतिवर्ष 23 मार्च को लोग उन्हे श्रद्धांजली अर्पित करते हैं। ऐसे वीर सपूत जिन्होने अपनी शहादत से स्वतंत्रता का आगाज किया उनके परिचय को शाब्दिक रूप देकर उनकी वीरता को नमन करने का प्रयास कर रहे हैः-
19/02/2019
अपनी वीरता और पराक्रम के दम पर मुगलों को घुटने टेकने पर विवश कर देनेवाले, जिन्हें अदम्य साहस, कूटनीति, बुद्धिमता, कुशल एवं दयालु शासक और महान योद्धा के रूप में पूरा भारत जानता है। ऐसे भारत के अमर सपूत छत्रपति शिवाजी महाराज जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
15/02/2019
जम्मू-काश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए कायराना आतंकी हमले की हम घोर निंदा करते हैं। आतंकवाद पर कसते हुए शिकंजे की बौखलाहट और निराशा ही इस घटना से साफ दिखाई देती है। सरकार इस घटना के दोषियों पर शीघ्र कड़ी से कड़ी कार्रवाई करे।
हम सभी इस संकट की इस घड़ी में सेना और सरकार के साथ है। हम शहीद जवानों के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके परिजनों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करते हैं।
26/01/2019
आप सभी को विद्यालय परिवार की ओर से गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं,
विद्यालय में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह की कुछ झलकियां
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम् |
मूढै: पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा प्रदीयते ||
19/10/2018
नाभिकुंड पियूष बस याकें।
नाथ जिअत रावनु बल ताकें॥
खैंचि सरासन श्रवन लगि छाड़े सर एकतीस।
रघुनायक सायक चले मानहुँ काल फनीस॥
डोली भूमि गिरत दसकंधर। छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर॥
बरषहिं सुमन देव मुनि बृंदा।
जय कृपाल जय जयति मुकुंदा॥
15/10/2018
भारत के पूर्व राषट्रपति, वैज्ञानिक, मिसाइल मैन भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम जी के जयंती पर उनको शत-शत नमन।
अपनी पहली सफलता के बाद आराम करने में मत लग जाओ | क्यों की अगर दूसरी बार में तुम असफल हो गए तो कई होंठ ये कहने को तैयार हैं की पहली सफलता किस्मत से मिल गयी थी |
10/10/2018
शारदीय नवरात्रि पर्व का आरंभ आपके जीवन में नई खुशियों, नई ऊर्जा और नित नई सफलताएं लेकर आये। माँ दुर्गा आपको हमेशा बल, बुद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करें।
सभी देशवासियों को विद्यालय परिवार की ओर से नवरात्रि के पावन पर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!
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