29/10/2025
https://youtu.be/SqLOanWxhLw?si=ag8Gu9V_IEb6MTye
बड़ी ख़बर जमियत उलैमा ए हिंद की तरफ़ से आ रही है,
: बाढ़ ग्रस्त प्रांतों में लोगों को नए घर बनाकर देगी जमीयत- मौलाना अरशद मदनी,
Big news is coming from Jamiat Ulama-e-Hind.
: Jamiat Ulama-e-Hind will build new homes for people in flood-hit provinces - Maulana Arshad Madani.
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बाढ़ ग्रस्त प्रांतों में लोगों को नए घर बनाकर देगी जमीयत- मौलाना अरशद मदनी // Jamiat Ulama i Hind 🇮🇳
Jamiat will build new houses for people in flood-affected provinces - Maulana Arshad Madaniबड़ी ख़बर जमियत उलैमा ए हिंद की तरफ़ से आ रही है,: बाढ़ ग्रस्त प्र...
28/10/2025
https://youtu.be/cfJ7wznm1qE?si=t40YrUvVZ0COXN5f
मदारिस के संबंध मे
*मौलाना सैयद काब रशीदी* का *_बड़ा ऐलान_*
*सभी प्रकार के आधिकारिक नोटिसों के जवाब के लिए, आप जमीयत उलेमा हिंद के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं*
*उत्तर प्रदेश*
*_पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए
*वरिष्ठ वकीलों के एक पैनल की घोषणा*
*मौलाना सैयद काब रशीदी* *अधिवक्ता_ भारत का सर्वोच्च न्यायालय*
*कानूनी सलाहकार, जमीयत उलेमा हिंद उत्तर प्रदेश*
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मदरसों के लिए मौलाना सैयद काब रशीदी का बड़ा ऐलान/ مدرسوں کے لئے مولانا سید کعب رشیدی کا بڑا اعلان
*_ब्रेकिंग न्यूज़_**मदारिस के संबंध में**मौलाना सैयद काब रशीदी* का *_बड़ा ऐलान_**सभी प्रकार के आधिकारिक नोटिसों के जवाब ...
02/09/2024
जमीअत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि बुलडोजर से न्याय नहीं, बल्कि न्याय का कत्ल होता है।
"किसी के आरोपी होने के कारण घरों को ध्वस्त नहीं किया जा सकता |"
जमीअत उलेमा-ए-हिंद (मौलाना महमूद असद मदनी) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। अदालत 'बुलडोजर कार्रवाइयों' के लिए देशभर में मार्गदर्शक दिशानिर्देश बनाएगी।
नई दिल्ली, 2 सितंबर: जमीअत उलेमा-ए-हिंद की याचिका संख्या 295/2022 पर सुनवाई करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि त्वरित न्याय के लिए बुलडोजर प्रणाली नहीं चलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने प्रारंभिक टिप्पणियों में कहा कि आरोपी तो दूर, किसी अपराधी के घर पर बुलडोजर चलाने का किसी को अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अवैध निर्माणों का संरक्षण नहीं करेगी, लेकिन कुछ मार्गदर्शक सिद्धांतों का होना आवश्यक है।
जस्टिस बी आर गवई और के जस्टिस विश्वनाथन की बेंच ने विभिन्न राज्यों में 'बुलडोजर कार्रवाइयों' के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को 13 सितंबर तक मसौदा प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है ताकि उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया जा सके। ये प्रस्ताव वरिष्ठ वकील नचिकेता जोशी के पास एकत्र किए जाएंगे, जिन्हें उन्हें संकलित करके अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का कहा गया है। बेंच ने इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 17 सितंबर निर्धारित की है।
आज जमीअत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी और जमीअत की ओर से याचिकाकर्ता मौलाना नयाज अहमद फारूकी सचिव जमीअत उलेमा-ए-हिंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे और एम आर शमशाद अदालत में पेश हुए, इस मामले में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड फरुख रशीद हैं। यह मामला जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने जहांगीरपुरी दिल्ली में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ दायर किया था, जिसमें जमीअत को उस समय बड़ी सफलता मिली थी और बुलडोजर पर रोक लगाई गई थी, लेकिन देश में लगातार जारी बुलडोजर कार्रवाई पर जमीअत ने नेतृत्व करते हुए तीन प्रदेशों के खिलाफ विशेष याचिका दाखिल की है।
वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने विभिन्न, विशेषकर यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में हुए हाल के घटनाक्रमों को उदाहरण के रूप में पेश किया। इसमें एक पिता-पुत्र का भी मामला शामिल था, जिस पर जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि एक पिता का बेटा नाफरमान हो सकता है, लेकिन उसके पिता के घर को इस आधार पर ध्वस्त किया जाना सही नहीं है।
सालिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने इस बीच तर्क पेश किया कि अवैध निर्माणों से संबंधित नगरपालिका कानूनों के तहत मकानों को ध्वस्त किया गया। जमीअत के अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने राज्य सरकारों की ओर से लोगों के घरों को ध्वस्त करने के बढ़ते चलन पर चिंता व्यक्त की, और जोर देकर कहा कि घर का अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक पहलू है। उन्होंने यह भी मांग की कि अदालत को ध्वस्त किए गए घरों की पुनर्निर्माण का आदेश देना चाहिए। उन्होंने तर्क किया कि जयपुर में स्कूल में दो बच्चों का झगड़ा हुआ तो उस में मुस्लिम बच्चे के पिता का घर गिरा दिया गया, जबकि इस मकान का मालिक राशिद खान मामूली ऑटो-रिक्शा चालक है, जिसने बड़ी मुश्किल से पैसे बचाकर घर खरीदा था। यह कैसा न्याय है? और भी आश्चर्यजनक कहानियाँ हैं, यूपी के कन्नौज में एक गरीब नाई की दुकान गिरा दी गई, केवल इस कारण से कि एक वीडियो आया कि वह सिर पर मालिश करते हुए हाथ में थूक लगा रहा है। कहां से इसे आप न्याय कहेंगे और कौन सा नगरपालिका कानून इसे कानून के अनुसार कहा जाएगा?
जमीअत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी का बयान:
अदालत में हुई आज की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए इस मामले के महत्वपूर्ण पक्षकार अध्यक्ष जमीअत उलेमा-ए-हिंद मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि बुलडोजर से न्याय नहीं, बल्कि न्याय का कत्ल होता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बुलडोजर की कार्रवाई की जाती है उससे एक पूरे समुदाय को सजा दी जाती है, किसी आरोपी का घर गिरने से केवल उसे नहीं बल्कि पूरे परिवार को नुकसान उठाना पड़ता है। मौलाना मदनी ने कहा कि आप महिलाओं के संरक्षण की बात करते हैं, आपने कुछ वर्षों में डेढ़ लाख मकानों को गिरा दिया, इनका सबसे अधिक नुकसान महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों को होता है। जिन्होंने कुछ नहीं किया, उन्हें दर-दर भटकना पड़ता है, यह न्याय का कौन सा तरीका आपने स्थापित किया है? हमें उम्मीद है कि अदालत इस पर कठोर कदम उठाएगी। मौलाना मदनी ने कहा कि इससे न केवल मुसलमान बल्कि हर न्यायप्रिय तबका परेशान है। मौलाना मदनी ने कहा कि न्याय के के लिए जमीअत उलेमा-ए-हिंद हर संभव संघर्ष करेगी और बिल्कुल चुप नहीं बैठेगी।
#सुप्रीमकोर्ट
Arshad Madani