Saraswati Vidya Mandir, Ghatsila

Saraswati Vidya Mandir, Ghatsila Saraswati Vidya Mandir An interersting thing is that across all grades, the initial class starts with a subject known as "SADACHAR".

Saraswati Vidya Mandir,Ghatsila
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Saraswati Vidya Mandir is a group of schools.Just you know “Saraswati” is the Hindu goddess of knowledge, music and other creative arts & “vidya” means knowledge and “mandir” means temple. Educational beliefs



To develop a national system of education aimed at moulding the youth into the feelings of Hindutva and patriot

ism by imparting all-roun...d physical, mental, intellectual and spiritual development, and making them capable of facing modern challenges successfully and dedicating their life for the service and upliftment of the natives of backward and remote tribal areas and the dwellers of the slums so that the down-trodden may get rid of economic exploitation, social humiliation and injustice and usher in a new era of mutual equity, cultural integrity and economic prosperity. In this class, the teacher tells students about historical stories and legends of freedom fighters and religions of India.

होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।
08/03/2023

होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।

शिक्षक दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं l
05/09/2022

शिक्षक दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं l

02/04/2022

हिन्दू नव वर्ष, विक्रम संवत 2079 की आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं, नव वर्ष सबके जीवन में सुख, समृद्धि, संपन्नता और आरोग्यता का संचार करे।
🚩 जय श्री राम 🚩

21/02/2022

अमेरिका में एक नवयुवक दिन में लकड़ियाँ काटता और रात को पढ़ाई किया करता था। जब उसे अवकाश मिलता, घर से दस मील दूर जाकर पुस्तकालय से किताबें लाकर उन्हें पढ़ा करता। पढ़-लिखकर वो वकील बना और उसने स्थानीय अदालत में वकालत शुरू की। गरीब होने के बावजूद उसने कभी झूठा मुकदमा नहीं लड़ा। वह युवक था अब्राहम लिंकन, जो कई बार हारने के बावजूद निराश नहीं हुआ और अपने पुरुषार्थ के बल पर 52 वर्ष की आयु में अमेरिका का राष्ट्रपति चुना गया। सफलता उनके पास आती है, जो साहसी होते हैं।

01/02/2022
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।। गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं!
24/07/2021

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।। गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं!

राख की रस्सी - ...................लोनपो गार तिब्बत के बत्तीसवें राजा सौनगवसै गांव के मंत्री थे। वे अपनी चालाकी और हाज़िर...
04/09/2020

राख की रस्सी - ...................
लोनपो गार तिब्बत के बत्तीसवें राजा सौनगवसै गांव के मंत्री थे। वे अपनी चालाकी और हाज़िर जवाबी के लिए दूर-दूर तक मशहूर थे। कोई उनके सामने टिकता न था। चैन से ज़िंदगी चल रही थी। मगर जब से उनका बेटा बड़ा हुआ था उनके लिए चिंता का विषय बना हुआ था। कारण यह था कि वह बहुत भोला था। होशियारी उसे छूकर भी नहीं गई थी। लोनपो गार ने सोचा, "मेरा बेटा बहुत सीधा-सादा है। मेरे बाद उसका काम कैसे चलेगा!" एक दिन लोनपो गार ने अपने बेटे को सौ भेडे देते हुए कहा, "तुम इन्हें लेकर शहर जाओ। मगर इन्हें मारना या बेचना नहीं। इन्हें वापस लाना सौ जौ के बोरों के साथ वरना मैं तुम्हें घर में नहीं घुसने दूंगा।" इसके बाद उन्होंने बेटे को शहर की तरफ़ रवाना किया।

लोनपो गार का बेटा शहर पहुँच गया। मगर इतने बोरे जौ खरीदने के लिए उसके पास रुपए ही कहाँ थे? वह इस समस्या पर सोचने-विचारने के लिए सड़क किनारे बैठ गया। मगर कोई हल उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था। वह बहुत दुखी था। तभी एक लड़की उसके सामने आ खड़ी हुई। "क्या बात है तुम इतने दुखी क्यों हो?" लोनपो गार के बेटे ने अपना हाल कह सुनाया। "इसमें इतना दुखी होने की कोई बात नहीं। मैं इसका हल निकाल देती हूँ।" इतना कहकर लड़की ने . . . . .

Hindi Short Story Bakthothi

विवेक का नाश - सर्वनाश - तब समूचा हिंदुस्तान रियासतों में बँटा हुआ था। इन्हीं में से एक रियासत विक्रमपुर के राजा थे चित्...
16/08/2020

विवेक का नाश - सर्वनाश -

तब समूचा हिंदुस्तान रियासतों में बँटा हुआ था। इन्हीं में से एक रियासत विक्रमपुर के राजा थे चित्रसेन। विक्रमपुर रियासत छोटी होने के बावजूद राजा चित्रसेन का अहं बहुत बढ़ा-चढ़ा था। वे स्वयं को राजाधिराज एवं सम्राट से कम नहीं समझते थे। उनकी सनक भी उनके अह के अनुरूप ही विद्रूप एवं भयावह थी। अपनी इस विचित्र सनक के कारण वह अच्छी से अच्छी चीज में कसर निकाल देते थे। प्रायः यही होता कि उनके पास पुरस्कार की आशा लगाकर आने वाले दण्ड पाकर लौटते। आखिरकार धीरे धीरे यह हुआ कि कलाकारों ने उनके पास आने का साहस करना बंद कर दिया।

एक बार किसी अन्य रियासत से एक मूर्तिकार विक्रमपुर आया। वह राजा चित्रसेन से भेंट करने के लिए उत्सुक था। लोगों ने उसे समझाया कि वह राजा से नहीं मिले, किंतु वह नहीं माना। इस लगातार की रोक-टोक की वजह से उसकी उत्सुकता और बढ़ गयी थी।

वह राजदरबार में गया। प्रणाम करने के उपरांत उसने राजा को अपनी विद्या से परिचित कराया। राजा ने मूर्तिकार को सरसरी नजर से देखा, उसके

हाथ में सारस की एक मूर्ति थी। राजा कड़ककर बोला- "सारस इतना छोटा होता है? तुम्हें क्या दंड दूँ"

दंड देने का अधिकार आपका है महाराज। मूर्तिकार हाथ जोड़कर बोला। फिर उसने कहा- किंतु आपको बता दूँ कि मेरी कला कभी भी संदेह का विषय नहीं बनती। मैं हर बिन्दु पर ध्यान देता हूँ। ऐसा सारस यहाँ से कुछ हजार मील दूर एक स्थान पर पाया जाता है। आप यदि आज्ञा दे तो मैं आपकी नजरबंदी में जाकर उसे यहाँ लाकर दिखा सकता हूँ। क्या मजाल, जो जरा-सा भी अंतर पड़ जाए, मैं तो सिर्फ हाव-भाव पर ही नहीं, वजन पर भी ध्यान देता

राजा चिढ़ गया उसकी जरूरत नहीं तुम मेरी मूर्ति बनाओ मुझे देख लो। ध्यान रहे जर सा भी नुक्स निकलने पर तुम्हारा सिर कलम कर दिया जाएगा।

"मुझे मंजूर है। मूर्तिकार ने कहा। आवश्यक सामान की व्यवस्था राजा ने करा दी। चार दिन बाद मूर्तिकार दरबार में आया। मूर्ति उसके साथ थी, उसने उसे कपड़े से ढक रखा था।

"कपड़ा हटाओ। राजा के कहने पर मूर्तिकार ने कपड़ा हटा दिया। मूर्ति सिर से कमर तक ही थी। राजा चीखा- ये पूरी मूर्ति है?" 'महाराज, आपने मूर्ति बनाने को कहा था, पूरी या आधी का आदेश आपने नहीं दिया था। राजा के चेहरे पर क्रोध तैर रहा था। मूर्तिकार ने आगे कहा- यह हूबहू आपकी मूर्ति है। इसका वजन चालीस सेर है। पैरों को छोड़कर आपका भी वजन इतना ही है। यह मैं दावे के साथ कह रहा हूँ।"

यदि परीक्षण से तुम्हारा दावा..? क्रोध से खौलता-उबलता राजा चित्रसेन अभी और कुछ कह पाता कि बीच में मूर्तिकार बोल उठा-तो आप मेरा सिर कलम करा सकते है।

परीक्षण किया जाए। राजा भावावेश में चीख उठा। "ल. . . लेकिन. . .।

Hindi Motivational story or Moral story

मारने वाले से बचाने वाले की आयु ज़्यादा है। ( Hindi Story )राजा श्रोणिक सदा अशान्त रहते थे। निद्रा की न्यूनता, चेहरे की उ...
24/07/2020

मारने वाले से बचाने वाले की आयु ज़्यादा है। ( Hindi Story )
राजा श्रोणिक सदा अशान्त रहते थे। निद्रा की न्यूनता, चेहरे की उदासी, अतृप्ति और आशंका उन्हें हर घड़ी हैरान किये रहती थी। कारण और समाधान पूछने वे भगवान बुद्ध ( Bhagwan Buddha )के पास गये।

प्रवचन चल रहा था, सभी भिक्षु अति प्रसन्नमुद्रा में उसे श्रवण कर रहे थे चेहरे पर तेजस्विता और आनन्द की पुलकन से सभी दिव्य लग रहे थे।

राजा की जिज्ञासा को समझते हुए तथागत ने उसी प्रवचन में यह तथ्य जोड़ दिया कि मनुष्य क्लान्त और उल्लसित क्यों

रहता है। उन्होंने कहा-तृष्णायें ही मनुष्य को खाती हैं। उनसे बचा जा सके तो राजा-रंक सभी समान रूप से सुखी रह सकते हैं।

सुबह-सुबह एक लोहार घर से बाहर निकला। रास्ते में उसे लोहे के दो टुकड़े मिल गए। उसने उन्हें उठा लिया। घर लौटने पर लोहार ने एक टुकड़े से तलवार बनायी और दूसरे को ढाल बना दिया।

कुछ दिनों के बाद एक योद्धा आकर तलवार और ढाल खरीद कर ले गया। उस योद्धा ने कई युद्धों में उनका उपयोग किया। एक युद्ध में तलवार टूट गयी, मगर ढाल भी पास ही पड़ी थी।

रात में जब सब सो गए, तलवार कराहती हुई ढाल से बोली, बहिन देखो मेरी कैसी दुर्दशा हो गयी है और एक तू है,

ज्यों-की-त्यों सुरक्षित।

हम दोनों में एक फर्क जो है-ढाल ने कहा।

वह क्या? तलवार पूछ बैठी.....

bhagwan buddha hindi story

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