05/01/2024
"कारों का मिस्त्री बनने की चाहत रखने वाला बना Preventive Officer, BA में 2 बार फेल, 7 बार फेल होने के बाद 29 वर्ष की आयु में मिली ड्रीम पोस्ट....!"
विनोद कुमार टाक की एक सच्ची कहानी(जरूर पढ़ें):
राजस्थान के अनूपगढ़ जिले की घड़साना तहसील के भारत-पाक सीमा से सटे एक छोटे से गांव 7 GD का निवासी विनोद कुमार टाक जिसकी परवरिश एक किसान परिवार में हुई। दिन में गांव के ही स्कूल में पढ़ाई करके पिता के साथ खेती में हाथ बंटाता। ग्रामीण परिवेश के कारण विनोद की बचपन में पढ़ाई में रुचि नहीं थी। 8 वीं पास करने बाद घरवालों ने विनोद को शहर के एक निजी स्कूल में भर्ती करवाया। विनोद रोजाना अपनी साइकिल लेकर गांव के बच्चों के साथ स्कूल जाता। शहर की उच्च स्तर की शिक्षा प्रणाली में विनोद खुद को असहज महसूस करता। शहरी वातावरण भोले भाले विनोद को रास नहीं आया। पढ़ाई में कमजोर होने के कारण विनोद को C सेक्शन(Slow Learner Students) में शिफ्ट कर दिया गया। वहां अपने शरारती साथियों के साथ विनोद दिन भर मस्ती करता और घर आ जाता। वहां से उसने 10th 62% व 12th(Arts) 61 % अंकों के साथ उत्तीर्ण की। उसके बाद विनोद ने BA में एडमिशन लिया जहां विनोद 1st year में फेल हो गया। फेल होने के बाद उसने घर पर नहीं बताया। 1st year पास करने के बाद विनोद एक बार फिर 2nd year में फेल हो गया। BA में English Literature subject में कमजोर होने की वजह से वह बार बार फेल हो रहा था।पढ़ाई में असफलता से निराश विनोद ने पढ़ाई छोड़ने का मन बना लिया। इस दौरान उसने कोई काम सीखने की ठान ली। एक दिन विनोद के किसी निजी जानकर की गाड़ी खराब हो गई। विनोद उनके साथ गाड़ी ठीक करवाने आया, तो मिस्त्री ने 5400 रुपए का बिल बनाया। मिस्त्री के बिल को देखकर विनोद हैरान हो गया। विनोद को लगा मिस्त्री के काम में अच्छी कमाई है, तो अगले ही दिन विनोद अपनी साइकिल लेकर मिस्त्री मार्केट की दुकानों में काम की तलाश में निकलता है, तो एक मिस्त्री उसे काम पर रखने का आश्वासन देकर अगले दिन आने को बोलता है। और उसे 2 महीने बिना किसी तनख्वाह के काम सीखने लिए रख लेता है। विनोद 2 दिन दुकान पर काम करता है और उसे सारा दिन कठिन परिश्रम करने के बाद बिना किसी पैसे के घर जाना पड़ता। फिर उसे किसी दोस्त ने समझाया की "तू पढ़ाई कर,और किसी competition एग्जाम की तैयारी कर। तुझे वक्त जरूर लगेगा लेकिन मेहनत करेगा तो सफलता जरूर मिलेगी।" दोस्त के समझाने पर उसने मिस्त्री का काम छोड़ दिया। जैसे तैसे विनोद ने BA 47% अंकों के साथ उत्तीर्ण की। 2015-17 के समय में SSC की भर्तियां काफी थी। तो विनोद ने SSC की तैयारी का मन बनाया।तो विनोद शहर में अपने दोस्तों के साथ किसी कोचिंग संस्थान की तलाश में निकल पड़ा। और वे इस तरह जाखड़ क्लासेज में पहुंचे। वहां कोचिंग के डायरेक्टर लालचंद जाखड़ शाम के समय ऑफ के बाद अपनी स्प्लेंडर बाइक से हेलमेट पहनकर घर की ओर रवाना हो रहे थे।तो विनोद ने सर को रोका और कोचिंग के बारे में पूछा। करीब आधे घण्टे की बातचीत के बाद विनोद को सर ने अगले दिन सुबह 8 बजे आने को बोला। उन दिनों जाखड़ सर ने English Spoken batches को छोड़कर SSC के स्पेशल 1st batch की शुरुआत की थी। विनोद ने वहां अपने दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ाई शुरू कर दी। English में काफी कमजोर विनोद को जाखड़ सर की पढ़ाने की शैली पसंद आई। और धीरे धीरे वह इसमें इंप्रूवमेंट लाने लगा। इस दौरान जाखड़ सर ने विनोद की पढ़ने की ललक देखकर उसे SSC CGL की बड़ी पोस्ट के बारे में बताया। और कहा कि लक्ष्य हमेशा बड़ा चुनो, और अपनी ड्रीम पोस्ट चुनों व उसे पाने के लिए पूरी जी जान लगा दो। सर की बात मानकर विनोद ने पूरे अनुशासन के साथ अपनी पढ़ाई शुरू कर दी। विनोद के SSC के CGL,CPO,CHSL के प्री एग्जाम पास हुए। लेकिन फाइनल रिजल्ट में सफलता नहीं मिली। फिर CPO 2018 में विनोद मात्र 1 मार्क्स से फेल हो गया। उन दिनों SSC Exams का शेड्यूल बहुत खराब था। Prelims की परीक्षा देने के बाद फाइनल रिजल्ट तक 3 साल का समय लगता था। CGL 2019 में विनोद ने अच्छा प्रदर्शन किया और Mains की Answer Key में अच्छे मार्क्स आने के बाद उसके दोस्तों के द्वारा इंस्पेक्टर बनने की बधाईयां दी जाने लगी। विनोद भी पूरी तरह आश्वस्त था कि उसकी तो इंस्पेक्टर पोस्ट पक्की है। लेकिन 3 महीने बाद रिजल्ट में नाम नहीं मिलने पर विनोद भी हैरान था कि क्या हो गया?... उस 18 नवंबर mains Maths की शिफ्ट में नॉर्मलाइजेशन में 180+ मार्क्स होने पर भी 100 के करीब मार्क्स घटा दिए गए। इसके बाद कोर्ट केस हुआ, बड़े स्तर पर ट्विटर कैंपेन भी चली लेकिन सरकार द्वारा कोई सुनवाई नहीं हुई।फिर इतनी मेहनत के बाद नाइंसाफी से निराश विनोद पूरी तरह टूट चुका था। जाखड़ सर के कहने पर विनोद ने दोबारा पढ़ाई शुरू की। एक नौकरी की तलाश में विनोद को CPO 2018 में सब इंस्पेक्टर(CRPF) के रूप में पहली सफलता मिली। घर परिवार और दोस्तों में खुशियों का माहौल था। सभी विनोद की मेहनत को देखकर भगवान का शुक्रिया कर रहे थे कि आखिर भगवान ने विनोद की सुन ली। इसी बीच विनोद के घरवाले उसका रिश्ता तय कर देते हैं, लड़की के R**T की परीक्षा में अच्छे मार्क्स थे और उसका सिलेक्शन होना तय था। इसी बीच विनोद के मन में अलग ही ख्याल चल रहे थे। और उसके मन में अभी भी अपनी dream post घूम रही थी। फिर उसने अपने विवेक से निडर होकर सब इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ने का मन बनाया। 4200 GP की नौकरी छोड़ने के निर्णय की सब आलोचना कर रहे थे। लोग कयास लगा रहे थे कि आगे पता नहीं इसको नौकरी मिलेगी या नहीं। उधर से विनोद को रिश्ता टूटने का डर भी सता रहा था। इस बीच विनोद को घरवालों का पूरा सपोर्ट मिलता है। यहां तक की ससुराल वाले भी उसे सपोर्ट करते हैं। अपने परिवार के सपोर्ट के कारण 3 साल बाद 2022 में MTS में Ministry of Home Affairs में नौकरी मिलती। Corona काल के दौरान 3 साल का लंबा समय विनोद के लिए काफी मुश्किल भरा था। यह एक छोटी सी नौकरी टूटे हुए विनोद के लिए मलहम का काम करती है। फिर CGL 2022 में विनोद अच्छी तैयारी करता है। इसी बीच उसकी शादी तय कर दी जाती है। Mains देने के 10 दिन बाद ही उसकी शादी होती है। विनोद की बारात खुशी खुशी रवाना होती है। घोड़ी पर बैठा विनोद खुशी के साथ अपने आगे नाच रहे मित्रों को निहार रहा होता है। इसी बीच Mains की Answer Key आती है। और कोई दोस्त घोड़ी पर बैठे विनोद को उसके मार्क्स बता देता है। विनोद के स्वयं द्वारा बताए गए शब्दों के अनुसार, शादी की खुशी में मुस्करा रहे विनोद को बड़ा झटका लगता है। उसको अपने मार्क्स सुनकर पता लग चुका था कि वह फेल हो चुका है। बुरी तरह से टूट चुका विनोद निराश चेहरे, दुखी मन और सुन्न हो चुके हाथ पावों से आगे बढ़ता है। उसे पास चल रहे गानों की ध्वनि भी सुननी बंद हो जाती है। ऐसा लग रहा था जैसे उसके लिए सब कुछ रुक सा गया हो। उसके कुछ सहपाठी दोस्त अच्छे मार्क्स की खुशी में और कुछ फेल होने के गम में दारू पीकर उसके आगे आगे नाच रहे थे। मानो वे विनोद को दुख भुलाने का संकेत दे रहे हो, जिससे वह अपने गम को भूल सके। उस समय विनोद की क्या मनोदशा थी? "एक तरफ शादी होने की खुशी दूसरी तरफ फेल होने का गम" वह विनोद ही जाने....! शादी के थोड़े दिनों बाद ही R**T की परीक्षा में लड़की भी फेल हो जाती है। नए विवाहित दंपति के लिए एक के बाद एक 2 बड़े झटके थे। इस बुरे समय के दौरान दोनों पति पत्नी एक दूसरे को संभालते हैं। और आगे की पढ़ाई पूरे कठिन परिश्रम के साथ दोबारा प्रारंभ करते हैं। विनोद दिल्ली जैसे बड़ी सिटी में मन मारकर नौकरी कर रहा था। वहां एक छोटी नौकरी से दोनों के खर्चे निकलना भी काफी मुश्किल था। विनोद मेट्रो से ऑफिस जाता तो बैग में बुक रखता और पढ़ता जाता। मेट्रो में मोबाइल में ही सेक्शनल टेस्ट लगाता जाता। ये समय विनोद के लिए काफी मुश्किल भरा था। अपने ऑफिस में बड़े अधिकारियों को विनोद देखता तो उसके मन में हमेशा रहता की वह भी एक दिन बड़ा अधिकारी बनेगा। इस दौरान ऑफिस के Seniors का विनोद को पूरा सपोर्ट मिलता। वह ऑफिस में फ्री समय में अपनी पढ़ाई जारी रखता। विनोद जॉब के दौरान अपनी पढ़ाई का समय बड़ी मुश्किल से निकालता और कठिन मेहनत करता। रोजाना सुबह 4 बजे उठकर Mains का 2 घण्टे का ऑनलाइन टेस्ट लगाता। 26 अक्टूबर को CGL 2023 का mains विनोद का अच्छा जाता है। पोस्ट preference भरते समय विनोद ने अपनी ड्रीम पोस्ट Preference form में पहले नंबर पर fill की। 4 दिसंबर को CGL 2023 में विनोद को Preventive Officer के रूप में अपनी ड्रीम पोस्ट मिली। देर रात करीब 10 बजे रिजल्ट आया और उसमें Preventive officer की अपनी dream post देखकर विनोद की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने सबसे पहला फोन लालचंद सर को किया और कहा"सर 6 साल पहले जिस dream post के लिए आपने मुझे motivate किया था मुझे मिल चुकी है।" सर ने विनोद को बधाई दी। और आगे के जीवन के लिए शुभकामनाएं दी। उसी के एक दिन बाद विनोद की पत्नी का RPSC 2nd ग्रेड English में चयन हो गया। दोनों की सफलता के बाद उनके परिवार की खुशियां दोगुनी हो गई। उनकी पत्नी रमन भी 2017-18 में लालचंद सर की स्टूडेंट रह चुकी थी। इतनी मुश्किलों के बाद आखिरकार विनोद को उसकी मंजिल मिल ही गई। इंसान को अपने सपनों के पीछे जरूर भागना चाहिए और उन्हें पूरा करने में जी जान लगा देनी चाहिए।
"अगर किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात तुम्हें उससे मिलाने में लग जाती है" यह वाक्य विनोद की जिंदगी को पूरी तरह बयान करता है।
इस कहानी में विनोद द्वारा बताए गए तथ्य पूरी तरह वास्तविक है।