Shree Dayashankar Vidya Mandir

Shree Dayashankar Vidya Mandir Higher Secondary School, from Class Nursery.

10/03/2026

भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव सर्वोच्च सम्मान प्राप्त रहा है। यही कारण है कि हमारे यहाँ देवी-देवताओं के नाम भी नारी को पहले स्थान देकर लिए जाते हैं—

लक्ष्मी-नारायण, गौरी-शंकर, सीता-राम, राधे-श्याम।

यह परंपरा केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि नारी और पुरुष जीवन रूपी रथ के दो समान पहिए हैं।

मंदिरों में भी देवी-देवता एक ही सिंहासन पर साथ-साथ विराजमान होते हैं, जो समानता और सम्मान का संदेश देते हैं।

नारी के भीतर भी कुण्डलिनी शक्ति निहित है। उसे आगे बढ़ने से किसी ने नहीं रोका है; उन्नति, प्रगति और नेतृत्व की राह उसके लिए सदैव खुली रही है। वास्तविक शक्ति उसके भीतर ही विद्यमान है। उसे पहचानना और उसका उपयोग करना या न करना— यह उसके अपने संकल्प और विश्वास पर निर्भर करता है।

भारतीय इतिहास और पुराण नारी की अद्भुत शक्ति और आत्मबल के उदाहरणों से भरे पड़े हैं।
माता अनुसूया के सतीत्व के सामने त्रिदेव तक झुक गए।
माता पार्वती के कठोर तप ने स्वयं भगवान शिव को प्रकट होने के लिए विवश कर दिया। माता सीता की धैर्य और आत्मबल की शक्ति इतनी महान थी कि वे लंका में एक वर्ष तक अकेले रहते हुए भी अडिग और दृढ़ रहीं। और जब समय आया, तो रानी लक्ष्मीबाई ने रणभूमि में उतरकर साहस और वीरता की अमर मिसाल कायम कर दी।

इतिहास में ऐसे असंख्य उदाहरण मिलते हैं जहाँ नारी के कौशल, नेतृत्व, साहस और दृढ़ संकल्प ने यह सिद्ध कर दिया कि वह कभी कमजोर नहीं रही। नारी जब अपनी शक्ति को पहचान लेती है, तो वह केवल स्वयं ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त कर देती है।

- श्रीमती चंद्रकांता तिवारी
संचालिका
श्री दयाशंकर विद्या मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल

08/03/2026



अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च) की अनंत हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई।

यद्यपि यह दिवस हमारे देश की परंपरा की उपज नहीं है, क्योंकि भारतीय संस्कृति में नारी को सदा से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त रहा है। हमारे यहाँ माँ, बहन, बेटी, मामी, चाची सभी पूज्य मानी जाती हैं। पत्नी को भी सम्मान और अधिकार प्राप्त है।

भारतीय संस्कृति में विवाह केवल एक सामाजिक रस्म या समझौता नहीं यह एक पवित्र संस्कार, एक यज्ञ और जीवनभर साथ निभाने का दृढ़ संकल्प है।

वैदिक काल से ही हमारे समाज में नारी का अत्यंत आदर रहा है। पुराणों और प्राचीन ग्रंथों में विवाह-विच्छेद की कोई परंपरा नहीं मिलती। समाज में यह विचार भी प्रायः अकल्पनीय था कि विवाह का बंधन टूट भी सकता है। कन्या-पूजन की परंपरा तो है ही, साथ ही जब कोई नई बहू घर आती है तो उसे लक्ष्मी का स्वरूप मानकर उसकी आरती उतारी जाती है।

नारी के बिना घर-परिवार की कल्पना भी अधूरी है। परिवार की कुशलता, स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख-शांति की स्थापना में नारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रातःकाल की पूजा से लेकर रात्रि के विश्राम तक पूरे परिवार की व्यवस्था उसकी स्नेहिल देखरेख में संचालित होती है। अतिथि भी उसके स्नेहपूर्ण आतिथ्य से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

घर के सभी उत्सव, पर्व और संस्कारों की व्यवस्था भी प्रायः महिलाओं के ही हाथों में होती है। सौंदर्य, सहनशीलता, करुणा, सरलता, पवित्रता, कर्मठता और ईमानदारी जैसे अनेक गुण नारी के स्वाभाविक गुण हैं।

भगवान के रूप में इस धरती पर यदि कोई साक्षात दिखाई देता है तो वह माँ ही है—जो सृष्टि की रचनाकार भी है और पालनहार भी। स्नेह, ममता और त्याग के साथ-साथ वह मजबूत, समर्थ और सशक्त भी है। यही कारण है कि वह अपनी संतान, पति और परिवार के लिए अनेक व्रत-उपवास और पूजा-अर्चना करती है। परंतु उसके लिए किसी विशेष व्रत या उपवास की आवश्यकता नहीं, क्योंकि नारी स्वयं में पूर्ण है। सृष्टि की रचना में पुरुष हो या स्त्री—दोनों का मूल आधार वही है। नारी शक्ति का साक्षात रूप है; उसके बिना सृष्टि की कल्पना भी अधूरी है।

हमारा देश लक्ष्मी, दुर्गा, सीता और सावित्री जैसी आदर्श नारी शक्तियों की परंपरा का देश है। यह सती अनुसूया और अहिल्या माता की पवित्र भूमि है, जिनमें अपार शक्ति और धैर्य निहित था।

आज आवश्यकता है कि हम अपनी इस सामर्थ्य को पहचानें, समझें और आने वाली पीढ़ी को ऐसे संस्कार दें जो उन्हें झूठ, दिखावे और बाहरी चकाचौंध से दूर रख सकें। उन्हें ऐसी परवरिश दें जिससे वे जीवन के झंझावातों का सामना करते हुए एक स्वस्थ, दीर्घायु और संतुलित जीवन जी सकें।

आइए, हम सभी मिलकर नारी शक्ति को सम्मान दें और उसके योगदान को नमन करें।

आप सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ये महिला दिवस, माह, वर्ष उसका हर पल - हर क्षण हमारा है - पुनः बधाई, नमस्कार जय हिन्द - जय भारत

श्रीमती चंद्रकांता तिवारी
प्राचार्य एवं निदेशक
श्री दयाशंकर विद्या मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल

📜 संविधान दिवस: श्री दयाशंकर विद्या मंदिर द्वारा गर्व एवं स्वाभिमान के साथ संविधान दिवस का आयोजन 📜दिनांक 26 नवंबर 2024, ...
26/11/2024

📜 संविधान दिवस: श्री दयाशंकर विद्या मंदिर द्वारा गर्व एवं स्वाभिमान के साथ संविधान दिवस का आयोजन 📜

दिनांक 26 नवंबर 2024, हमारे विद्यालय श्री दयाशंकर विद्या मंदिर में संविधान दिवस हर्षोल्लास और अनुशासन के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने मिलकर भारतीय संविधान के प्रति अपनी आस्था और सम्मान प्रकट किया।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:
1️⃣ संविधान की प्रस्तावना का वाचन: प्रार्थना सभा में भारतीय संविधान की प्रस्तावना को भावपूर्ण ढंग से पढ़ा गया, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
2️⃣ सर्वसमावेशी भागीदारी: यह सुनिश्चित किया गया कि हर छात्र-छात्रा इस आयोजन में सक्रिय रूप से शामिल हो।
3️⃣ प्रेरणादायक वातावरण: विद्यार्थियों ने संविधान की प्रस्तावना को पढ़कर और उसके आदर्शों को समझकर राष्ट्रीय एकता व कर्तव्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को आत्मसात किया।

इस आयोजन ने टीम वर्क, समयबद्धता और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि संविधान के आदर्शों और मूल्यों को आत्मसात करने का एक प्रयास था।

हमारा विद्यालय ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता रहेगा एवं विद्यालय का यह प्रयास सभी विद्यार्थियों में संविधान के प्रति सम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक कदम है।

जय हिंद! 🇮🇳

16/08/2023
14/08/2023

विद्यार्थियों से ही किसी भी राष्ट्र का नवनिर्माण हो सकता है, विद्यार्थी जीवन ही आपको स्वतंत्रता का सही अर्थ बताता है एवं राष्ट्र की उन्नति और समृद्धि के लिए स्वतंत्रता ही आधार बनती है, आज विद्यालय के बच्चों ने स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पूर्व स्वतंत्रता दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का पूर्वाभ्यास किया! उनकी मेहनत और उत्साह देखकर हमें उनपर गर्व हो रहा है।
🇮🇳 "

03/07/2023

गुरु पूर्णिमा के पावन मांगलिक पर्व पर आप सभी को अनंत शुभकामनाएं ,

गुरु तत्व से निवेदन है कि हम सभी को शिक्षा / ज्ञान ऐसा मिले कि हम सभी में प्रसन्नता , उत्साह , जिज्ञासा , पुरुषार्थ , सरलता , सहजता , धैर्य का झरना बहता रहे । सहन करने की अपार शक्ति हो उदारता , समत्व , संतुष्टि व समाधान के अपरिमित भंडार हों ,

सम्मान व तन मन की शुद्धि से हम सदैव स्वस्थ और प्रसन्न रहें ।

गुरु तत्व भरपूर हो , अज्ञानता दूर हो सुख , शांति , समृद्धि अविरल सतत प्रवाहित हो सब में समाहित हो ।

पुनः अनंत शुभकामनाओं के साथ :

श्रीमती चंद्रकांता तिवारी
संचालिका श्री दयाशंकर विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिला - जीपीएम , छत्तीसगढ़

गणतंत्र दिवस के अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा मानव श्रृंखला से भारत के विशाल मानचित्र का निर्माण किया गया । ...
26/01/2023

गणतंत्र दिवस के अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा मानव श्रृंखला से भारत के विशाल मानचित्र का निर्माण किया गया । भारत की एकता और अखंडता का संदेश देते हुवे इसमें बच्चों नें बढ़ चढ़कर भागीदारी की एवं देशभक्ति वा बंधुता का संदेश दिया इस दौरान भारत माता की जय के उद्घोष गूंजते रहे । जय हिन्द

20/01/2022


कोरोना संक्रमण के द्वारा दिया गया ये अनिश्चित कालीन अवकाश हमारे जीवन ( आनंद , उत्साह , सफलता ) को एक निश्चित दिशा भी दे सकता है । हमारे अंदर स्थिर चित्त का निर्माण कर सकता है । ठहर कर , रुक कर अपने अंदर व्याप्त शक्तियों को झांकने का और उनके उपयोग का अवसर भी दे सकता है । इस तरह हम आत्म शक्ति के बल पर कठिन समय को सरल व सफल समय में बदल सकते हैं ।

इस समय का उपयोग बर्बाद नहीं आबाद होने के लिए करें । जो अब तक ना कर पाए हों या जिन्हें करने , सोचने का वक्त ना मिल पाया हो जैसे कि ध्यान , योग ( मानसिक व शारीरिक ) आदि । शायद यह समय आपको आपके पूर्ण उत्थान के लिए मिला हो । अपने जीवन की सुख-शांति के लिए कुछ समय अपने इष्ट ( घर में मान्य दिव्य शक्तियों ) के साथ अवश्य बितायें - उनसे बातें करें , समस्या बताएं , समाधान पूछे । कुछ समय अपने घर में उपलब्ध धार्मिक ग्रंथों के साथ भी रहे कुछ पन्ने पढ़ें उनका मनन करें । कुछ समय घर के बड़े बुजुर्गों के साथ बितायें , उनकी सुनें , उन्हें समझें , उनके अनुभव साझा करें । उनकी ताकत ( समाधान ) बनने का प्रयास करें । कुछ समय घर में परिवार के साथ बितायें , बातें करें । कुछ समय इतिहास के उन पन्नों पर झांके जब हमारा देश स्वर्ण काल में था ना अपराध , न समस्याएं , ना नशा , न गरीबी । सब कुछ सरल , समृद्ध , शांत , अनुशासित व मेहनतकश था । पूरा गांव का गांव एक परिवार की तरह रहता था । अवश्य पढ़ें इतिहास के उन क्षणों को , जो केवल समाधान का युग था । कैसी थी उनकी जीवनशैली क्यों इतना उत्तम था वह समय ।

दिन भर की इन गतिविधियों से आप ज्ञानमय होगें और ऊर्जावान भी - आपकी भूख , प्यास , नींद अच्छी हो जाएगी इम्यूनिटी पावर इतनी बढ़ जायेगी की पता ही नहीं चलेगा कब संक्रमण काल बीत गया ।

कोरोना को हराना है - आपको जिताना है ।
अनंत शुभकामनाओं के साथ -
श्रीमती चंद्रकांता तिवारी
संचालिका श्री दयाशंकर विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिला - जीपीएम , छत्तीसगढ़

30/08/2021

गोप, ग्वाल-बालों के साथ गोवंश के रक्षक, मीठी मधुर मुरली से मीठे स्वर का प्रसार करने वाले, सदैव दूसरों के भले के लिए संघर्ष करने वाले ब्रम्हांडनायक श्री कृष्ण की छवि प्रत्येक मां-पिता सदैव अपने बच्चों में देखना चाहते हैं, सभी से निश्छल प्रेम रखने वाले श्री कृष्ण जिन्होंने;
● शिशुपाल के दुर्वचनों को सहते हुए भी उसे पल-पल टोका कि सीमा मत लांघो, वरना जो पहले से तय है वो अनर्थ हो ही जाएगा।
● कौरवों को भी समझने संभलने व बचने के पर्याप्त मौके दिए।
● पांडवों को भी समय समय पर उचित अनुचित समझाते रहे।
● जो भी उन्हें राह में मिला सभी के साथ निष्पक्ष होकर धर्म (स्वधर्म) की ही चर्चा करते रहे।
किंतु जिन्होंने माना और जिन्होंने नहीं माना दोनों का इतिहास हमारे सामने है। ज्ञान देना या ज्ञान लेना दो बड़ी प्रतिकूल व्यवस्थाएं हैं जो हर पल साथ चलती हैं, ज्ञान का झरना प्रकृति में, हमारे आसपास हर पल झरता ही रहता है यद्यपि नियति में सब कुछ पूर्व निर्धारित है। प्रकृति स्वयं सब कुछ करती रहती है किंतु उसने सर्वोच्च पद आसीन जीव- हम मानवों को कुछ ऐसी शक्ति भी दे रखी है जिसके दम पर हम सही-गलत, अच्छा-बुरा समझ कर आगे बढ़ सकते हैं।
प्रकृति की माने या मनवाएं-
*मानने के लिए*- प्रकृतिमय हो जाएं, समभाव के साथ उसकी धारा में बह चलें, जहां जैसे जब।
*किंतु मनवाने के लिए*- यकीनन धर्म की राह पर ही चलना होगा, सत्य का ही दामन थामना होगा। प्रेम, स्नेहरूपी पुष्पों के साथ सतत कर्म करना होगा, यही कृष्ण का पर्याय है।
सभी के उत्थान व विकास के लिए सहनकर शक्ति बढ़ाइए और सतत कर्म (संघर्ष) करते रहिए।

आप सभी को _*श्री कृष्ण जन्माष्टमी*_ की पवित्र मंगलमय शुभकामनाएं💐💐💐

- श्रीमती चन्द्रकांता तिवारी
संचालिका, श्री दयाशंकर विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पेंड्रा-रोड.

*विश्व पर्यावरण दिवस मंगलमय हो*    धरती के चारों तरफ तो प्रकृति प्रदत्त शीतल वायुमंडल है ही जो हम सब के लिए निरंतर प्राण...
04/06/2021

*विश्व पर्यावरण दिवस मंगलमय हो*

धरती के चारों तरफ तो प्रकृति प्रदत्त शीतल वायुमंडल है ही जो हम सब के लिए निरंतर प्राण ऊर्जा की तरह कार्य करता रहता है, जैसे मछली पानी में, वैसे ही हम सब जीव वायुमंडल में।
मानव चूंकि एक विवेकशील प्राणी है अतः अपने भावों से, अपने चारों ओर भी एक वातावरण बनाने में वह सक्षम है और यही उसका अपना बनाया आवरण भी होता है जो तरंगों (भावों की तरंगों) से बनता है और नित नई-नई तरंगों का निर्माण भी करता रहता है और ये वातावरण सदैव उसके साथ-साथ चलता है। उसका प्रभाव उसके अपने ऊपर तथा उसके आसपास के लोगों के ऊपर भी पड़ता है। और यही उसका मूल पर्यावरण है जिससे वो निर्मित है।
सारा खेल केवल हमारे भावों का होता है और संपूर्ण जगत में हमारे भावों को ही नापा-तौला जाता है। और फिर दिया भी जाता है। हमारा भूत, वर्तमान, भविष्य सब उसी से प्रभावित होते हैं।
भावों की शुद्धता से हम शुद्ध, निर्मलता से निर्मल तथा सरलता व सहजता से हम सरल व सहज भी होते हैं। अतः विश्व पर्यावरण दिवस पर हम सब यही संकल्प लें कि हम अपने शुद्ध, पवित्र व निर्मल भावों से अपने व अन्य सभी के जीवन को भी शुद्ध, पवित्र व निर्मल बने रहने दें, ताकि संपूर्ण पर्यावरण विकारों से दूर हो, स्वस्थ व स्वच्छ हो, तथा हम सब की प्रसन्नता में सहायक हो।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आप सभी को अनंत शुभकामनाएं...

श्रीमती चन्द्रकांता तिवारी
संचालिका, श्री दयाशंकर विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पेंड्रा-रोड

24/05/2021

प्रकृति ही पाठशाला है और गुरू भी ।

●प्रकृति की क्रिया का नाम धर्म है उसे सहयोग करके आप धर्म को बढ़ाते हैं।
●प्रकृति के साथ बहते चलिए, रमते चलिए, उसके प्रतिकूल कभी मत जाइए, उसका नुकसान कभी मत करिए, यकीनन आप ईश्वरीय गुणों से समृद्ध होते जाएंगे।
●प्रकृति ही ईश्वर है और आप उसी की देन है। वहीं से आप का प्रारंभ है और वहीं अंत भी।
●आपको प्रकृति को ही उपलब्ध होना है।
●प्रकृति ही आपकी पाठशाला है और गुरु भी। प्रकृति के साथ अनुकूलता की पराकाष्ठा में आप प्रकृति मय हो जाते हैं, धर्ममय हो जाते हैं।
●प्रकृति धैर्य सिखाती है, सहनशीलता बढ़ाती है, हर पल उत्सव मनाती है, नैसर्गिक गुणों को बनाए रखने की प्रेरणा देती है, शांत भाव से चुपचाप अपना कार्य करती रहती है निरंतर।
●प्रकृति है अनमोल खजाना, सुख-शांति, आनंद के स्थायित्व का, पर चाबी उसी को प्राप्त होगी जो उसे पहचानेगा, जानेगा और दोस्ती निभाएगा।
●यकीनन आप प्रकृति के मालिक हैं उसके संरक्षण, संवर्धन के लिए ही आप का प्रादुर्भाव हुआ है, उसी से हैं उसी के लिए हैं उससे बेमानी ना करें।
●इस विशाल प्रकृति रूपी बगिया के हम मात्र एक फूल सरीखे हैं- हमें खिलना है दूसरों के खिलने पर खुश भी होना है और मिलकर सुगंध बिखेरना है।
●किसी एक पेड़ से बगिया नहीं बनती पर बगिया के प्रत्येक पौध की कीमत होती है, खूबसूरती होती है, सुगंध होती है।
●प्रकृति से उत्पन्न होकर इसी में विलीन होना है- कभी घमंड ना करें। प्रकृति के समान विशाल विराट और उदार बनिए।
●प्रकृति से जितनी नजदीकी बनाएंगे उतना प्रकृति मय हो जाएंगे- हम लगातार जिसका स्मरण करते रहते हैं / जिसके पास रहते हैं क्रमशः उसके जैसे ही होते जाते हैं।
●विशाल ब्रह्मांड (प्रकृति) का एक सूक्ष्म अंश आपके अंदर भी व्याप्त है जुड़ कर तो देखिए, ब्रह्मांडीय शक्तियों से आप संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त हो जाएंगे, आप स्वयं शक्तिमान, सामर्थ्यवान, ऊर्जावान हो जाएंगे आपका आपसे परिचय हो जाएगा।
●विशाल वटवृक्ष को ध्यान से देखें तो उसके प्रत्येक फल के प्रत्येक बीज में वो ताकत होती है कि वह भी विशाल वटवृक्ष बन सकता है- चाहिए केवल एकाग्रता, संयम, सहनशीलता, समय और एकात्मता (स्वयं को विलीन कर प्रकृति में घुल जाना) परिणाम विशाल वटवृक्ष।
●सोचिए- उसी का आश्रय, उसी का सहारा और उसी से विरोध- कैसे संभव होगा- प्रकृति को मानिए भी और जानिए भी।
अनंत शुभकामनाओं के साथ...

श्रीमती चन्द्रकांता तिवारी
संचालिका, श्री दयाशंकर विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पेंड्रा-रोड

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In Front Of Rest House, Pendra Road Bilaspur
Gaurela
495117

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Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
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