22/11/2025
कई कोचिंग संस्थान हर साल कक्षा 11 के छात्रों को बिना उनकी वास्तविक तैयारी देखे, सीधे कक्षा 12 की एडवांस्ड बैच में प्रमोट कर देते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि अगर कोई कक्षा 11 का NEET छात्र 300 मार्क्स भी स्कोर नहीं कर पा रहा, या JEE की तैयारी कर रहा छात्र JEE Main में 100 मार्क्स भी स्थिर रूप से नहीं ला पा रहा, तो उसे 12वीं की एडवांस्ड बैच में भेजना उसके भविष्य के साथ समझौता करने जैसा है। ऐसे छात्रों की सबसे पहली ज़रूरत यह होती है कि कक्षा 11 के बचे हुए टॉपिक्स को मजबूती से पूरा किया जाए, न कि उन्हें आगे की तेज़ रफ़्तार वाली बैच में धकेल दिया जाए। लेकिन ज़्यादातर कोचिंग संस्थान केवल एडमिशन और एनरोलमेंट बढ़ाने पर ज़ोर देते हैं। वे प्रमोशन को मार्केटिंग की तरह इस्तेमाल करते हैं, जबकि छात्र की वास्तविक सीख कहीं पीछे छूट जाती है।
माता-पिता को भी यह बात समझनी चाहिए कि अगर उनके बच्चे का कक्षा 11 का प्रदर्शन इतना कमजोर है, तो यह सिर्फ "बैच बदलने" या "और तेज पढ़ने" का मामला नहीं है—यह एक संकेत है कि बच्चे को फंडामेंटल्स, रिवीजन स्ट्रैटेजी और सही दिशा की बेहद ज़रूरत है। कक्षा 11 मजबूत नहीं होगा तो कक्षा 12 और प्रतियोगी परीक्षा दोनों खतरे में पड़ जाती हैं। इसलिए प्रमोशन पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय, माता-पिता को अपने बच्चे के स्कोर की वास्तविकता पर गौर करना चाहिए और समय रहते सही कदम उठाना चाहिए।
अगर आपको समझ नहीं आ रहा कि कक्षा 11 में कमजोर प्रदर्शन होने पर क्या रास्ता अपनाना चाहिए, किन टॉपिक्स को पहले पूरा करना है, कौन सा स्टडी-प्लान अपनाना है, और बच्चे को दोबारा ट्रैक पर कैसे लाना है—तो आप हमें कॉल कर सकते हैं। हम आपको पर्सनल गाइडेंस देंगे कि ऐसे मामलों में क्या सही कदम उठाना चाहिए ताकि बच्चा बिना दबाव के सही दिशा में आगे बढ़ सके और आने वाले साल को सफल बना सके।