Daulaat hai Ishq ,shohraat hai Ishq Husan ke bazaar main bikta hai Ishq

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Daulaat hai Ishq ,shohraat hai Ishq Husan ke bazaar main bikta hai Ishq coming here and know love

14/04/2022
24/12/2021

अपनी मृत्यु..... अपनों की मृत्यु डरावनी लगती है बाकी की मौत का उत्सव मनाता है मांसाहारी मनुष्य...।

मौत के स्वाद का चटखारे लेता मनुष्य.... थोड़ा कड़वा लिखा है पर मन का लिखा है......।

मौत से प्यार नहीं , मौत तो हमारा स्वाद है।

बकरे का,
पाए का,
तीतर का,
मुर्गे का,
हलाल का,
बिना हलाल का,
ताजा बच्चे का,
भुना हुआ,
छोटी मछली,
बड़ी मछली,
हल्की आंच पर सिका हुआ।
न जाने कितने बल्कि अनगिनत स्वाद हैं मौत के।
क्योंकि मौत किसी और की, और स्वाद हमारा....

स्वाद से कारोबार बन गई मौत।
मुर्गी पालन, मछली पालन, बकरी पालन, पोल्ट्री फार्म्स।
नाम "पालन" और मक़सद "हत्या"। स्लाटर हाउस तक खोल दिये। वो भी ऑफिशियल। गली गली में खुले नान वेज रेस्टॉरेंट, मौत का कारोबार नहीं तो और क्या हैं ? मौत से प्यार और उसका कारोबार इसलिए क्योंकि मौत हमारी नही है।

जो हमारी तरह बोल नही सकते,
अभिव्यक्त नही कर सकते, अपनी सुरक्षा स्वयं करने में समर्थ नहीं हैं, उनकी असहायता को हमने अपना बल कैसे मान लिया ?
कैसे मान लिया कि उनमें भावनाएं नहीं होतीं ?
क्या उनकी आहें नहीं निकलतीं ?

डाइनिंग टेबल पर हड्डियां नोचते बाप बच्चों को सीख देते है, बेटा कभी किसी का दिल नही दुखाना ! किसी की आहें मत लेना ! किसी की आंख में तुम्हारी वजह से आंसू नहीं आना चाहिए !

बच्चों में झुठे संस्कार डालते बाप को, अपने हाथ मे वो हडडी दिखाई नही देती, जो इससे पहले एक शरीर थी, जिसके अंदर इससे पहले एक आत्मा थी, उसकी भी एक मां थी ...??
जिसे काटा गया होगा ?
जो कराहा होगा ?
जो तड़पा होगा ?
जिसकी आहें निकली होंगी ?
जिसने बद्दुआ भी दी होगी ?

कैसे मान लिया कि जब जब धरती पर अत्याचार बढ़ेंगे तो
भगवान सिर्फ तुम इंसानों की रक्षा के लिए अवतार लेंगे ?

क्या मूक जानवर उस परमपिता परमेश्वर की संतान नहीं हैं ?
क्या उस ईश्वर को उनकी रक्षा की चिंता नहीं

पक्षी चहचहा रहे हैं।
उन्हें पहली बार इस धरती पर अपना भी कुछ अधिकार सा नज़र आया है। पेड़ पौधे ऐसे लहलहा रहे हैं, जैसे उन्हें नई जिंदगी मिली हो। धरती को भी जैसे सांस लेना आसान हो गया हो।

सृष्टि के निर्माता द्वारा रचित करोङो करोड़ योनियों में से एक कोरोना ने हमें हमारी औकात बता दी। घर में घुस के मारा है और मार रहा है। और उसका हम सब, कुछ नही बिगाड़ सकते। अब घंटियां बजा रहे हो, इबादत कर रहे हो, प्रेयर क

09/11/2021
*मूड फ्रेश*🤔😞🤔😞*गाँव में दो सहेलियाँ 12 वीं की परीक्षा देने जा रही हैं और आपस में बातें कर रही हैं।*👇 *शामली* : गामली, त...
04/10/2021

*मूड फ्रेश*

🤔😞🤔😞
*गाँव में दो सहेलियाँ 12 वीं की परीक्षा देने जा रही हैं और आपस में बातें कर रही हैं।*👇

*शामली* : गामली, तू तो बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं करती है। पास कैसे होगी ?

*गामली* : अरे छोड़ न यार! पास हो गई तो फिर 13, 14, 15 वीं की परीक्षा दो और फिर मिलेगा वही नौकरी वाला पति।

*शामली* : तो ? बढ़िया तो है।

*गामली* : क्या बढ़िया है ? 10 घंटों की नौकरी और तनख़्वाह 25-30 हजार। फिर गुड़गांव, बैंगलोर, मुंबई, पूना जैसे बड़े शहरों में रहने जाओ। वहाँ किराए का घर होगा जिसमें आधी तनख्वाह चली जाएगी। खुदका घर चाहिए तो लोन लेकर 10-15 मंजिल ऊपर घर लो और एक गुफा जैसे बंद घर में रहो। लोन चुकाने में 15-20 साल लगेंगे, न त्यौहारों में छुट्टी न गर्मी में। सदा बीमारी का घर। स्वस्थ रहना हो तो ऑर्गेनिक के नाम पर 3-4 गुना कीमत देकर सामान खरीदो सो अलग। और बाकी तू सारा जोड़, घटा, गुणा, भाग कर ले, तेरी समझ में खुद आ जाएगा।

दूसरी तरफ, अगर मैं परीक्षा में फेल हो गई तो पिता किसी अच्छी खेती वाले किसान से ब्याह कर देंगे। पैसे कम ज्यादा तो होंगे, लेकिन सारे अपने होंगे, कोई टैक्स का लफड़ा नहीं। कम रेट का बिजली-पानी । सारा कुछ ऑर्गेनिक उपजाएँगे, खुद की भैंस का दूध पीएंगे। बीमारी की कोई चिंता ही नहीं और बड़ी बात कि सास, ससुर, पति, बच्चे 24 घंटे साथ रहेंगे।
और सबसे बड़ी बात- *सारी सरकारें हमारे वोटों के चक्कर में हर election से पहले हमारा छक के लिया सारा लोन, माफ कर देंगी,* और उस लोन को चुकायेगा कौन ? *वही नौकरी वाला तुम्हारा पति* (समाज का बैल)।

*शामली* : तूने तो मेरी आंखें ही खोल दीं यार!! सोचती हूं, मैं भी फेल ही हो जाऊँ।

😂🤣🤣🤣
जनहित मे जारी....

31/08/2021

😅😅दो ट्रेनी जजों को पुलिस ने तेज़ गाड़ी चलाने के जुर्म में पकड़ लिया.

चूंकि वे दोनों जज थे इसलिए जब उनका मामला अदालत में पहुंचा तो वरिष्ठ जज ने आदेश दिया कि वे एक दूसरे की सुनवाई खुद करें.

सुनवाई शुरू हुई…..

पहला जज, न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठा और दूसरा कटघरे में खडा हुआ. दूसरे जज ने खामोशी से अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठे जज ने दूसरे जज पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया और दुबारा ऐसी हरकत न करने की चेतावनी दी.

अब दूसरे जज की बारी थी…..

दूसरा जज न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठा और पहला जज कटघरे में खडा हुआ. उसने भी चुपचाप अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठे जज ने 10 हजार रुपये जुर्माना और एक महीने तक गाड़ी न चलाने की सजा सुनाई.

यह सुनते ही कटघरे में खडा जज गुस्से से उबल पड़ा – “ये क्या बात हुई ? मैंने तुम्हें सिर्फ 100 रुपये जुर्माना और बिना कोई सजा दिए छोड़ दिया और तुम मेरे ऊपर 10 हजार का जुर्माना और गाड़ी चलाने पर पाबंदी भी लगा रहे हो ?”

न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठे जज ने शांतिपूर्वक कहा – “आय एम सॉरी माय फ्रेंड लेकिन इस अदालत में आज ही दिन में तेज़ गाड़ी चलाने का ये दूसरा केस है और ये स्थिति वाकई चिंताजनक है….. इस तरह की घटनाएं और न हों इसके लिए आखिर किसी न किसी को तो सख्ती करनी पड़ेगी न ?
😉🤣

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