Dhruvvaa Language Academy

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05/01/2024

*संस्कृत*: कुछ रोचक तथ्य....

*संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।*

आज हम आपको संस्कृत के बारे में कुछ
ऐसे तथ्य बता रहे हैं,जो किसी भी भारतीय
का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे;;
1. संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी
माना जाता है।

2. संस्कृत उत्तराखंड की आधिकारिक
भाषा है।

3. अरब लोगो की दखलंदाजी से पहले
संस्कृत भारत की राष्ट्रीय भाषा थी।

4. NASA के मुताबिक, संस्कृत धरती
पर बोली जाने वाली सबसे स्पष्ट भाषा है।

5. संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से
ज्यादा शब्द है।
वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102
अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है।

6. संस्कृत किसी भी विषय के लिए एक
अद्भुत खजाना है।
जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से
ज्यादा शब्द है।

7. NASA के पास संस्कृत में ताड़पत्रो
पर लिखी 60,000 पांडुलिपियां है जिन
पर नासा रिसर्च कर रहा है।

8. फ़ोबर्स मैगज़ीन ने जुलाई,1987 में
संस्कृत को Computer Software
के लिए सबसे बेहतर भाषा माना था।

9. किसी और भाषा के मुकाबले संस्कृत
में सबसे कम शब्दो में वाक्य पूरा हो
जाता है।

10. संस्कृत दुनिया की अकेली ऐसी
भाषा है जिसे बोलने में जीभ की सभी
मांसपेशियो का इस्तेमाल होता है।

11. अमेरिकन हिंदु युनिवर्सिटी के अनुसार
संस्कृत में बात करने वाला मनुष्य बीपी,
मधुमेह,कोलेस्ट्रॉल आदि रोग से मुक्त हो
जाएगा।
संस्कृत में बात करने से मानव शरीरका
तंत्रिका तंत्र सदा सक्रिय रहता है जिससे
कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश
(PositiveCharges) के साथ सक्रिय
हो जाता है।

12. संस्कृत स्पीच थेरेपी में भी मददगार
है यह एकाग्रता को बढ़ाती है।

13. कर्नाटक के मुत्तुर गांव के लोग केवल
संस्कृत में ही बात करते है।

14. सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार था,
जो 1970 में शुरू हुआ था।

आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण
उपलब्ध है।

15. जर्मनी में बड़ी संख्या में संस्कृतभाषियो
की मांग है।
जर्मनी की 14 यूनिवर्सिटीज़ में संस्कृत पढ़ाई
जाती है।

16. नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार जब
वो अंतरिक्ष ट्रैवलर्स को मैसेज भेजते थे
तोउनके वाक्य उलट हो जाते थे।
इस वजह से मैसेज का अर्थ ही बदल
जाता था।
उन्होंले कई भाषाओं का प्रयोग किया
लेकिन हर बार यही समस्या आई।

आखिर में उन्होंने संस्कृत में मैसेज
भेजा क्योंकि संस्कृत के वाक्य उल्टे
हो जाने पर भी अपना अर्थ नही
बदलते हैं।
जैसे
अहम् विद्यालयं गच्छामि।
विद्यालयं गच्छामि अहम्।
गच्छामिअहम् विद्यालयं ।
उक्त तीनो के अर्थ में कोई अंतर नहीं है।

17. आपको जानकर हैरानी होगी कि
Computer द्वारा गणित के सवालो को
हल करने वाली विधि यानि Algorithms
संस्कृत में बने है ना कि अंग्रेजी में।

18. नासा के वैज्ञानिको द्वारा बनाए
जा रहे 6th और 7th जेनरेशन Super
Computers संस्कृतभाषा पर आधारित
होंगे जो 2034 तक बनकर तैयार हो जाएंगे।

19. संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता
है और याद करने की शक्ति बढ़ जाती है।
इसलिए London और Ireland के कई
स्कूलो में संस्कृत को Compulsory
Subject बना दिया है।

20. इस समय दुनिया के 17 से ज्यादा
देशो की कम से कम एक University
में तकनीकी शिक्षा के कोर्सेस में संस्कृत
पढ़ाई जाती है।

संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर
आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।
🔔जयतु संस्कृतं 🔔

।। ध्रुवा संस्कृतम ।।
⚜🕉⛳🕉

09/03/2022
13/01/2021

आपके बोलने का आपके स्वास्थ्य से सम्बन्ध क्या हैं ?
संस्कृत बोलने से आप स्वस्थ रह सकते हैं । इसे पढ़िये
काम की बात लगे तो शेयर भी कीजिये।।

🏵️ संस्कॄत का जादू 🏵️

संस्कृत में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं जो
उसे अन्य सभी भाषाओं से उत्कृष्ट और विशिष्ट बनाती हैं।

( ०१ ) अनुस्वार ( अं ) और विसर्ग ( अ: )

संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण और लाभदायक व्यवस्था है, अनुस्वार और विसर्ग।

पुल्लिंग के अधिकांश शब्द विसर्गान्त होते हैं —

यथा- राम: बालक: हरि: भानु: आदि। और

नपुंसक लिंग के अधिकांश शब्द अनुस्वारान्त होते हैं—
यथा- जलं वनं फलं पुष्पं आदि।

अब जरा ध्यान से देखें तो पता चलेगा कि विसर्ग का उच्चारण और कपालभाति प्राणायाम दोनों में श्वास को बाहर फेंका जाता है। अर्थात् जितनी बार विसर्ग का उच्चारण करेंगे उतनी बार कपालभाति प्रणायाम अनायास ही हो जाता है। जो लाभ कपालभाति प्रणायाम से होते हैं, वे केवल संस्कृत के विसर्ग उच्चारण से प्राप्त हो जाते हैं।

उसी प्रकार अनुस्वार का उच्चारण और भ्रामरी प्राणायाम एक ही क्रिया है । भ्रामरी प्राणायाम में श्वास को नासिका के द्वारा छोड़ते हुए भौंरे की तरह गुंजन करना होता है, और अनुस्वार के उच्चारण में भी यही क्रिया होती है। अत: जितनी बार अनुस्वार का उच्चारण होगा , उतनी बार भ्रामरी प्राणायाम स्वत: हो जावेगा।

कपालभाति और भ्रामरी प्राणायामों से क्या लाभ है? यह बताने की आवश्यकता नहीं है; क्योंकि स्वामी रामदेव जी जैसे संतों ने सिद्ध करके सभी को बता दिया है। मैं तो केवल यह बताना चाहता हूँ कि संस्कृत बोलने मात्र से उक्त प्राणायाम अपने आप होते रहते हैं।
जैसे हिन्दी का एक वाक्य लें- '' राम फल खाता है``

इसको संस्कृत में बोला जायेगा- '' राम: फलं खादति"
राम फल खाता है ,यह कहने से काम तो चल जायेगा ,किन्तु राम: फलं खादति कहने से अनुस्वार और विसर्ग रूपी दो प्राणायाम हो रहे हैं। यही संस्कृत भाषा का रहस्य है।

संस्कृत भाषा में एक भी वाक्य ऐसा नहीं होता जिसमें अनुस्वार और विसर्ग न हों। अत: कहा जा सकता है कि संस्कृत बोलना अर्थात् चलते फिरते योग साधना करना।

२- शब्द-रूप :-
संस्कृत की दूसरी विशेषता है शब्द रूप। विश्व की सभी भाषाओं में एक शब्द का एक ही रूप होता है,जबकि संस्कृत में प्रत्येक शब्द के 25 रूप होते हैं। जैसे राम शब्द के निम्नानुसार २५ रूप बनते हैं।
यथा:- रम् (मूल धातु)
राम: रामौ रामा:
रामं रामौ रामान्
रामेण रामाभ्यां रामै:
रामाय रामाभ्यां रामेभ्य:
रामत् रामाभ्यां रामेभ्य:
रामस्य रामयो: रामाणां
रामे रामयो: रामेषु
हे राम! हेरामौ! हे रामा:!

ये २५ रूप सांख्य दर्शन के २५ तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। जिस प्रकार पच्चीस तत्वों के ज्ञान से समस्त सृष्टि का ज्ञान प्राप्त हो जाता है, वैसे ही संस्कृत के पच्चीस रूपों का प्रयोग करने से आत्म साक्षात्कार हो जाता है। और इन २५ तत्वों की शक्तियाँ संस्कृतज्ञ को प्राप्त होने लगती है।
सांख्य दर्शन के २५ तत्व निम्नानुसार हैं।-

आत्मा (पुरुष)
(अंत:करण ४ ) मन बुद्धि चित्त अहंकार
(ज्ञानेन्द्रियाँ ५ ) नासिका जिह्वा नेत्र त्वचा कर्ण
(कर्मेन्द्रियाँ ५) पाद हस्त उपस्थ पायु वाक्
(तन्मात्रायें ५ ) गन्ध रस रूप स्पर्श शब्द
( महाभूत ५ ) पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश

३- द्विवचन :-
संस्कृत भाषा की तीसरी विशेषता है द्विवचन। सभी भाषाओं में एक वचन और बहु वचन होते हैं जबकि संस्कृत में द्विवचन अतिरिक्त होता है। इस द्विवचन पर ध्यान दें तो पायेंगे कि यह द्विवचन बहुत ही उपयोगी और लाभप्रद है।
जैसे :- राम शब्द के द्विवचन में निम्न रूप बनते हैं:- रामौ , रामाभ्यां और रामयो:। इन तीनों शब्दों के उच्चारण करने से योग के क्रमश: मूलबन्ध ,उड्डियान बन्ध और जालन्धर बन्ध लगते हैं, जो योग की बहुत ही महत्वपूर्ण क्रियायें हैं।

४ सन्धि :-
संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है सन्धि। ये संस्कृत में जब दो शब्द पास में आते हैं तो वहाँ सन्धि होने से स्वरूप और उच्चारण बदल जाता है। उस बदले हुए उच्चारण में जिह्वा आदि को कुछ विशेष प्रयत्न करना पड़ता है।ऐंसे सभी प्रयत्न एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति के प्रयोग हैं।
''इति अहं जानामि" इस वाक्य को चार प्रकार से बोला जा सकता है, और हर प्रकार के उच्चारण में वाक् इन्द्रिय को विशेष प्रयत्न करना होता है।

यथा:- १ इत्यहं जानामि।
२ अहमिति जानामि।
३ जानाम्यहमिति ।
४ जानामीत्यहम्।

इन सभी उच्चारणों में विशेष आभ्यंतर प्रयत्न होने से एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति का सीधा प्रयोग अनायास ही हो जाता है। जिसके फल स्वरूप मन बुद्धि सहित समस्त शरीर पूर्ण स्वस्थ एवं नीरोग हो जाता है।
इन समस्त तथ्यों से सिद्ध होता है कि संस्कृत भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान की भाषा ही नहीं ,अपितु मनुष्य के सम्पूर्ण विकास की कुंजी है। यह वह भाषा है, जिसके उच्चारण करने मात्र से व्यक्ति का कल्याण हो सकता है। इसीलिए इसे देवभाषा कहते हैं ।

ध्रुवा अकैडमी

९४०८७०१५७९

*૨૪ ઓગસ્ટ એટલે કવિ નર્મદ નો જન્મ દિવસ અને વિશ્વ ગુજરાતી ભાષા દિવસ*                                                      ...
24/08/2020

*૨૪ ઓગસ્ટ એટલે કવિ નર્મદ નો જન્મ દિવસ અને વિશ્વ ગુજરાતી ભાષા દિવસ* આજે ગુજરાતી ભાષા દિવસ .૨૪ ઓગસ્ટ એટલે કવિ નર્મદ નો જન્મ દિવસ અને વિશ્વ ગુજરાતી ભાષા દિવસ ..નર્મદ અનેક રીતે ગુજરાતી સાહિત્યના પાયાના રચનાકાર હતા.અહી નર્મદનું એક વાક્ય આજના દિવસે યાદ કરીશ. *મને ફાકડું અંગ્રેજી ન આવડવાનો અફસોસ નથી ...પણ મને કડકડાટ ગુજરાતી આવડવાનો ગર્વ છે.* આપણે આપણી ભાષા વિષે કેટલું જાણીએ છીએ ? ગુજરાતી ભાષા બોલનારા લાખો માણસો થઈ ગયા, અને હાલમાં પણ છે અને ભવિષ્યમાં પણ થશે. વિશ્વની સૌથી વધુ માતૃભાષકો ધરાવતી ૩૦ ભાષામાં ગુજરાતી ભાષાનું ૨૩મું સ્થાન છે. ગુજરાતની અસ્મિતાનું બીજું નામ ગુજરાતી ભાષા છે.ભાષાનું સંવર્ધન અને જતનની જવાબદારી કોઈ એક વ્યક્તિ કે સરકારની નહી પરંતુ સમગ્ર સમાજની છે...

માતૃ ભાષા દિવસ ની શુભ કામના 🙏🙏🙏
24/08/2020

માતૃ ભાષા દિવસ ની શુભ કામના 🙏🙏🙏

10/08/2020

*મંદિરના ઓટલે બેસવા વિશે થોડુંક.*

આપણે જ્યારે પણ
મંદિરમાં જઈએ છીએ (?)
તો દર્શન કર્યા પછી
આપણે મંદિરના ઓટલે કેમ બેસીએ છીએ (?)

હકીકત માં ઓટલે બેસીને એક શ્લોક બોલવાનો હોય છે. અને તે શ્લોક કોઈએ આપણા સુધી પોંહચાડયો નથી ..

- પણ આપણી આવનારી પેઢી ને જરૂર શીખવજો.

ત્યાં બેસીને બોલવાનો શ્લોક 😗 🌸

“ *અનાયાસેન મરણમ્* ...
*વિના દૈન્યેન જીવનમ્*
*દેહાન્તે તવ સાન્નિધ્યમ્* ...
*દેહિ મે પરમેશ્વરમ્* !!! ”

મંદિર માં જાઓ ત્યારે ...
- તમારે દર્શન કરવાના હતા, દર્શન ખુલ્લી આંખોથી કરાય, માણસો ત્યાં મન મૂકીને હાથ જોડીને ઉભા રહે.

- જયારે કોઈ આંખ બંધ કરીને હાથ જોડે છે તો તમે અજાણ્યા ને પણ કહો કે -"તમે દર્શન કરવા આવ્યા છે તો આંખ ખુલ્લી રાખોને."
- બરોબર દર્શનને યાદ કરી લો.

* દર્શન થઇ ગયા પછી ...
- જયારે ઓટલે બેસો તો યાદ કરેલ દર્શનને ધ્યાનમાં લાવો.
- ત્યારે આંખ બંધ કરો.
- ધ્યાન કરો જે દર્શન કરેલ છે
-તે દેખાય છે કે નથી દેખાતું ?
- ના દેખાય તો પાછા દર્શન કરવા ચાલ્યા જાઓ.
-પાછું ઓટલે બેસીને આંખ બંધ કરી ધ્યાનમાં બેસી જાવ.

* અને જયારે ધ્યાનમાં એ દર્શન આવે ત્યારે ભગવાન પાસે માંગો કે..

*” હે, ભગવાન..💐👏

" *અનાયાસેન મરણમ્* "
એટલે મને તકલીફ વગરનું મરણ આપજો.

" *વિના દૈન્યેન જીવનમ્* "
એટલે પરવશતા વગરનું જીવન આપજો

- આજે મને કોઈ પડખું ફેરવે ત્યારે હું પડખું ફેરવી શકું.., મને કોઈ લકવો મારી જાય અથવા મને કોઈ ખાવાનું ખવડાવે ત્યારે ખાઈ શકું .. એવું જીવન ના જોઈએ ભગવાન..,

*" દેહાન્તે તવ સાન્નિધ્યમ્ "*
એટલે મરતા હોય ત્યારે તમારું દર્શન થવું જોઈએ
જેમ ભીષ્મ ને થયેલું તેમ.

*"દેહિ મે પરમેશ્વરમ્"*
એટલે હે પરમેશ્વર, આ વસ્તુ મને આપો.
- આ માંગણી નથી
- આ યાચના નથી
- આ પ્રાર્થના છે.
'પ્ર + અર્થના" ,

અર્થના એટલે માંગણી યાચના
- પણ *પ્ર* એટલે પ્રકૃષ્ટ
- આ પ્રકૃષ્ટઅર્થના છે.

- અને આ વાડી, ગાડી, દીકરો, દીકરી, પતિ, પત્ની, ઘર, પૈસા આવું કઈ નથી માગ્યું ..પણ આ શ્રેષ્ઠ માંગણી કરી છે.

એટલા માટે મંદિરમાં જવાનું અગત્યનું

22/05/2020
04/04/2020

Dhruvvaa Sanskrit academy
*Spoken* *Sanskrit* *workshop* for children
Age group (8 to 15)

Participate will learn
Teaching Sanskrit language
through sholkas stories and songs
generating skills in Sanskrit
introducing Sanskrit grammar
special attention towards pronunciation.
Call 9825235267/9408701579

Address

Gandhidham

Telephone

+919408701579

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