17/06/2026
॥ मौलिक कविता ॥
वीर प्रताप
हल्दीघाटी की धूल में, जो स्वाभिमान जगा गए,
मातृभूमि की रक्षा कर, इतिहास रचा गए।
अकबर जैसा बादशाह भी, जिससे डरता था,
महाराणा प्रताप वो, जो झुकना न जानते थे।
घास की रोटी खा ली, पर सिर कभी न झुकाया,
वन-वन भटके लेकिन, मेवाड़ बचाया।
चेतक की टापों में, गूँजता था अभिमान,
प्रताप तुम्हारा अमर है, रहेगा युगों-युग महान।
आज भी भारत माँ के, वीरों में तुम हो अग्रणी,
हर कण-कण में तुम्हारी, गाथा है अमर कहानी।
हम तुमको नमन करते, बारम्बार प्रणाम,
प्रताप तुम्हारा शौर्य, है भारत का अभिमान।
— लेखक : सुनील कौरव 'प्रवाह'
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