17/09/2026
क्या ज़माना आ गया है!
“फीस मांगो तो दुर्व्यवहार, फीस न दो तो मजबूरी!”
विद्यालय/ कोचिंग कोई केवल भवन नहीं, बल्कि शिक्षकों, कर्मचारियों, बिजली-पानी, परिवहन, सुरक्षा और अनेक खर्चों से चलने वाली व्यवस्था है।
अभिभावक फीस देते हैं तो केवल संस्थान का खर्च नहीं उठाते, बल्कि अपने बच्चे की शिक्षा और भविष्य में योगदान करते हैं।
हाँ, फीस मांगने का तरीका हमेशा सम्मानजनक, संवेदनशील और नियमसम्मत होना चाहिए। किसी बच्चे को फीस के कारण अपमानित या मानसिक रूप से परेशान करना उचित नहीं है।
लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि महीनों तक शुल्क लंबित रहने से संस्थान की पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है। जिस तरह हर परिवार अपने मासिक खर्च के लिए आय पर निर्भर है, उसी तरह स्कूल/कोचिंग भी शुल्क पर निर्भर करता है।
अभिभावक और संस्थान एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों की मंज़िल एक ही है—बच्चे का उज्ज्वल भविष्य।
आइए, शिकायत और आरोपों के बजाय संवाद, सहयोग और जिम्मेदारी की संस्कृति बनाएं।
फीस केवल भुगतान नहीं, बच्चे के भविष्य में हमारा साझा निवेश है।
#इंडिया #अररिया